Circle of Learning Logo CIRCLE OF LEARNING Excellence in Education
Class 12 Hindi Vitan Chapter 2

NCERT Solutions for Class 12 Hindi Vitan Chapter 2: जूझ

Class

Subject

Book

Chapter

Session

Questions covered

XII

Hindi

Vitan (NCERT)

2 – जूझ

2026-27

6 of 6

बिंदु

विवरण

लेखक

आनंद यादव (1935–2016), कागल (कोल्हापुर, महाराष्ट्र); मराठी साहित्यकार

स्रोत

आत्मकथात्मक उपन्यास ‘झोंबी’ (साहित्य अकादेमी पुरस्कार) का अंश; अनुवाद — केशव प्रथमवीर

कथानक

किसान पिता (‘दादा’) बेटे को खेती में लगाकर पढ़ाई छुड़ा देते हैं; लेखक और माँ गाँव के प्रतिष्ठित दत्ता जी राव देसाई की सहायता लेते हैं; दादा शर्तों के साथ पाठशाला जाने देते हैं (सुबह खेत, शाम ढोर चराना)

पाठशाला

पाँचवीं में पुनः प्रवेश; पहले उपहास, फिर वसंत पाटील से मित्रता और गणित में सफलता; मराठी अध्यापक न.वा. सौंदलगेकर की कविता-शिक्षण शैली से कविता में रुचि और स्वयं कविता रचने का आत्मविश्वास

संदेश

संघर्ष, लगन और आत्मविश्वास से कठिन परिस्थितियों पर विजय

Q1

‘जूझ’ शीर्षक के औचित्य पर विचार करते हुए यह स्पष्ट करें कि क्या यह शीर्षक कथा नायक की किसी केंद्रीय चारित्रिक विशेषता को उजागर करता है?

Answer

उत्तर

‘जूझ’ का अर्थ है— संघर्ष करना, कठिनाइयों से लड़ना। यह शीर्षक पूरी तरह उचित है और कथा-नायक (लेखक) की केंद्रीय विशेषता— संघर्षशीलता को उजागर करता है—

  1. पिता से संघर्ष: पिता ने उसे पढ़ाई से हटाकर खेती में लगा दिया था। लेखक ने हार नहीं मानी; माँ के साथ मिलकर दत्ता जी राव की मदद ली और पढ़ाई का अवसर पाया।
  2. परिस्थितियों से संघर्ष: उसे सुबह खेत में काम करना, फिर पाठशाला जाना और शाम को ढोर चराना पड़ता था— फिर भी उसने पढ़ाई जारी रखी।
  3. पाठशाला में संघर्ष: एक साल पढ़ाई छूटने के कारण कक्षा में नए, छोटे लड़कों के बीच वह अपमानित और अकेला महसूस करता था; बच्चों ने उसका मज़ाक उड़ाया, पर उसने मेहनत से गणित में अच्छा प्रदर्शन कर सम्मान पाया।
  4. स्वयं से संघर्ष: हीनता और संकोच से लड़कर उसने कविता रचने का आत्मविश्वास पाया।

अतः ‘जूझ’ शीर्षक लेखक के जीवन के संघर्ष और उसकी अदम्य इच्छा-शक्ति का सटीक प्रतीक है।

‘जूझ’ अर्थात संघर्ष — शीर्षक उचित है और लेखक की केंद्रीय विशेषता संघर्षशीलता को उजागर करता है: पिता के विरोध के बावजूद पढ़ाई का अवसर पाना, खेत-ढोर के काम के साथ पढ़ना, कक्षा में उपहास और हीनता से उबरकर गणित में सफलता और कविता रचने का आत्मविश्वास पाना।

Q2

स्वयं कविता रच लेने का आत्मविश्वास लेखक के मन में कैसे पैदा हुआ?

Answer

उत्तर

  1. मराठी अध्यापक न.वा. सौंदलगेकर स्वयं कवि थे और कविता बड़े रस और लय के साथ गाकर पढ़ाते थे; इससे लेखक को कविता से लगाव हो गया।
  2. मास्टर जी अपनी कविताएँ भी कक्षा में सुनाते थे और कवियों के बारे में बताते थे। इससे लेखक को लगा कि कवि भी हमारे जैसे साधारण मनुष्य होते हैं— उसे यह भ्रम दूर हुआ कि कवि कोई अलग, असाधारण लोग होते हैं।
  3. मास्टर जी अपने घर के दरवाज़े पर छाई मालती लता पर लिखी कविता सुनाते थे; लेखक ने वह लता देखी थी। उसे लगा कि अपने आस-पास के दृश्यों पर भी कविता लिखी जा सकती है।
  4. लेखक ढोर चराते हुए, खेत में काम करते हुए कविताएँ गाने लगा; फिर अपने आस-पास की चीज़ों— खेत, फसल, ढोर— पर तुकबंदी करने लगा।
  5. उसने अपनी कविताएँ मास्टर जी को दिखाईं; मास्टर जी ने उसे प्रोत्साहित किया, छंद, लय, अलंकार के बारे में बताया और कविता-संग्रह पढ़ने को दिए।

इस प्रकार अध्यापक की प्रेरणा और प्रोत्साहन से लेखक के मन में स्वयं कविता रच लेने का आत्मविश्वास पैदा हुआ।

मराठी अध्यापक सौंदलगेकर के लय-ताल से कविता गाने, अपनी कविताएँ (जैसे घर की मालती लता पर) सुनाने से लेखक को लगा कि कवि भी साधारण मनुष्य होते हैं और आस-पास की चीज़ों पर भी कविता लिखी जा सकती है; वह खेत और ढोरों पर तुकबंदी करने लगा और मास्टर जी के प्रोत्साहन व मार्गदर्शन से उसका आत्मविश्वास बढ़ा।

Q3

श्री सौंदलगेकर के अध्यापन की उन विशेषताओं को रेखांकित करें जिन्होंने कविताओं के प्रति लेखक के मन में रुचि जगाई।

Answer

उत्तर

  1. वे कविता को सुरीले गले से, लय, छंद और ताल के साथ गाकर पढ़ाते थे; हाव-भाव से उसका अभिनय भी करते थे।
  2. उन्हें मराठी और अंग्रेज़ी की अनेक कविताएँ कंठस्थ थीं; वे पुरानी-नई कविताएँ भी सुनाते थे।
  3. वे स्वयं कवि थे और अपनी कविताएँ भी कक्षा में सुनाते थे, जिससे बच्चों को लगता था कि कवि उनके बीच ही है।
  4. वे कवियों के व्यक्तित्व और उनके संस्मरण सुनाते थे— कवि यशवंत, बा.भ. बोरकर, गिरीश आदि— जिससे कवि मनुष्य के रूप में लगने लगे।
  5. वे कविता के भावों को इतनी तन्मयता से समझाते कि पूरी कक्षा मंत्रमुग्ध हो जाती।
  6. वे विद्यार्थियों को कविता लिखने के लिए प्रोत्साहित करते, उनकी रचनाएँ सुधारते और छंद-अलंकार की जानकारी देते।
  7. वे पढ़ने के लिए कविता-संग्रह भी देते थे।

सौंदलगेकर सुरीले कंठ से लय-ताल के साथ गाकर और अभिनय करते हुए कविता पढ़ाते थे; उन्हें अनेक कविताएँ कंठस्थ थीं; वे स्वयं कवि थे और अपनी कविताएँ सुनाते थे; कवियों के संस्मरण सुनाते थे; भाव तन्मयता से समझाते थे; और विद्यार्थियों को कविता लिखने के लिए प्रोत्साहित कर मार्गदर्शन व कविता-संग्रह देते थे।

Q4

कविता के प्रति लगाव से पहले और उसके बाद अकेलेपन के प्रति लेखक की धारणा में क्या बदलाव आया?

Answer

उत्तर

पहले: कविता से लगाव से पहले लेखक को ढोर चराते समय, खेत में पानी लगाते समय या अकेले काम करते हुए अकेलापन बहुत खलता था। उसे लगता था कि कोई साथ हो, जिससे बातचीत करे, हँसे-खेले; अकेलापन उसे उबाऊ और बोझिल लगता था।

बाद में: कविता से लगाव होने के बाद वह अकेले में कविताएँ ऊँचे स्वर में गाता, उन पर अभिनय करता, नाचता और नई कविताएँ रचता। अब उसे अकेलापन अच्छा लगने लगा; वह चाहता था कि अकेला रहे ताकि खुलकर गा सके और कविता लिख सके। अकेलापन उसके लिए रचनात्मकता और आनंद का अवसर बन गया।

पहले ढोर चराते और खेत में काम करते समय उसे अकेलापन बहुत खलता था, उबाऊ लगता था; कविता से लगाव के बाद वह अकेले में ऊँचे स्वर में कविताएँ गाता, अभिनय करता और नई कविताएँ रचता — अब अकेलापन उसे अच्छा लगने लगा और रचनात्मक आनंद का अवसर बन गया।

Q5

आपके खयाल से पढ़ाई-लिखाई के संबंध में लेखक और दत्ता जी राव का रवैया सही था या लेखक के पिता का? तर्क सहित उत्तर दें।

Answer

उत्तर

मेरे विचार से लेखक और दत्ता जी राव का रवैया सही था।

तर्क: 1. शिक्षा व्यक्ति के सर्वांगीण विकास का आधार है; यह ज्ञान, आत्मविश्वास, सोचने की क्षमता और बेहतर जीवन के अवसर देती है। 2. लेखक ने स्वयं समझा था कि खेती में कुछ नहीं रखा— “खेती से ज़िंदगी भर कुछ हाथ नहीं आएगा”; पढ़-लिखकर ही वह नौकरी पाकर या अन्य तरीके से परिवार की स्थिति सुधार सकता है। 3. दत्ता जी राव ने समझदारी दिखाई— उन्होंने पिता को समझाया कि लड़का पढ़ेगा तो परिवार का भला होगा, और दादा के स्वयं गाँव में घूमते फिरने तथा बेटे से काम कराने पर फटकार लगाई। 4. लेखक ने पढ़ाई और खेती दोनों साथ निभाने की शर्त मानी— यह उसकी ज़िम्मेदारी दिखाता है। 5. आगे चलकर लेखक प्रसिद्ध साहित्यकार बना— यह शिक्षा के महत्व का प्रमाण है।

पिता का रवैया गलत था: वे बेटे को केवल खेती का मज़दूर बनाना चाहते थे, जबकि स्वयं गाँव में घूमते रहते थे; उन्हें शिक्षा का महत्व नहीं पता था। संकीर्ण सोच और स्वार्थ के कारण वे बेटे का भविष्य रोक रहे थे। हालाँकि, गरीब किसान परिवार की आर्थिक मजबूरी को भी समझा जा सकता है।

लेखक और दत्ता जी राव का रवैया सही था — शिक्षा व्यक्तित्व-विकास और बेहतर जीवन का आधार है; लेखक समझता था कि खेती से कुछ हाथ नहीं आएगा; दत्ता जी राव ने पिता को समझाया; लेखक ने पढ़ाई और खेती दोनों निभाई और आगे प्रसिद्ध साहित्यकार बना। पिता की सोच संकीर्ण थी, यद्यपि उनकी आर्थिक मजबूरी समझी जा सकती है।

Q6

दत्ता जी राव से पिता पर दबाव डलवाने के लिए लेखक और उसकी माँ को एक झूठ का सहारा लेना पड़ा। यदि झूठ का सहारा न लेना पड़ता तो आगे का घटनाक्रम क्या होता? अनुमान लगाएँ।

Answer

उत्तर

लेखक और माँ ने दत्ता जी राव से निवेदन किया था कि वे दादा को यह न बताएँ कि वे दोनों उनके पास आए थे; दत्ता जी राव ने दादा को ऐसे बुलाया मानो बात उन्हें स्वयं पता चली हो, और लेखक बाद में बहाने से वहाँ पहुँचा।

यदि झूठ का सहारा न लेना पड़ता (अनुमान): 1. यदि दादा को पता चलता कि बेटे और पत्नी ने उनकी शिकायत दत्ता जी राव से की है, तो वे बहुत क्रोधित होते; उन्हें यह अपना अपमान लगता। 2. वे लेखक और उसकी माँ को डाँटते-पीटते, घर में कलह होती। 3. ज़िद में आकर वे लेखक की पढ़ाई का और कड़ा विरोध करते; शायद उसे पाठशाला जाने ही न देते। 4. दत्ता जी राव के कहने पर ऊपरी तौर पर मान भी जाते, तो भी घर में लेखक को और अधिक काम देकर, ताने देकर उसकी पढ़ाई में बाधाएँ डालते। 5. लेखक की पढ़ाई छूट जाती, वह किसान या मज़दूर बनकर रह जाता और आगे साहित्यकार नहीं बन पाता।

दूसरी संभावना: यदि दादा समझदार होते और सीधे बात करने पर मान जाते, तो झूठ की ज़रूरत ही न पड़ती और परिवार में विश्वास का वातावरण रहता। पर दादा के स्वभाव को देखते हुए पहली संभावना अधिक प्रबल है; इसलिए यह झूठ भलाई के लिए बोला गया ‘सफ़ेद झूठ’ था।

अनुमान: यदि दादा को पता चलता कि पत्नी और बेटे ने उनकी शिकायत की है, तो वे इसे अपमान मानकर क्रोधित होते, घर में कलह होती और ज़िद में पढ़ाई का और कड़ा विरोध करते या ऊपरी सहमति देकर बाधाएँ डालते; लेखक की पढ़ाई छूट सकती थी और वह साहित्यकार न बनता। अतः यह भलाई के लिए बोला गया झूठ था।

विषय-सूची की जाँच

  • ☒ शीर्षक ‘जूझ’ (प्रश्न 1)
  • ☒ कविता रचने का आत्मविश्वास, सौंदलगेकर, अकेलेपन की धारणा (प्रश्न 2–4)
  • ☒ पढ़ाई पर रवैया, झूठ का प्रसंग (प्रश्न 5–6)

Total questions answered: 6 of 6

Frequently Asked Questions

What do these NCERT solutions for Class 12 Hindi Vitan Chapter 2 (जूझ) cover?

All 6 questions from the latest NCERT textbook for this chapter are answered step by step.

Are these solutions based on the new NCERT syllabus?

Yes. The answers follow the current NCERT textbook for Class 12 Hindi Vitan and the latest CBSE syllabus, so the question numbers and wording match the book you use in class.

How should I use these solutions to prepare for exams?

Attempt each question on your own first, then compare your working with the answer here. Note the steps or keywords you missed, and revise the chapter notes before taking a chapter-wise MCQ test to check your understanding.

Are the NCERT solutions for Class 12 Hindi Vitan Chapter 2 (जूझ) free?

Yes. All Circle of Learning NCERT solutions and chapter notes are free to read online, with no sign-up needed.