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Class 12 Hindi Aroh Chapter 1

NCERT Solutions for Class 12 Hindi Aroh Chapter 1: आत्मपरिचय, एक गीत

Class

Subject

Book

Chapter

Session

Questions covered

XII

Hindi

Aroh (NCERT)

1 – आत्मपरिचय, एक गीत

2026-27

8 of 8

बिंदु

विवरण

कवि

हरिवंश राय बच्चन (1907–2003), इलाहाबाद; हालावाद के प्रवर्तक

प्रमुख रचनाएँ

मधुशाला, मधुबाला, मधुकलश, निशा निमंत्रण, एकांत संगीत; आत्मकथा — क्या भूलूँ क्या याद करूँ, नीड़ का निर्माण फिर, बसेरे से दूर, दशद्वार से सोपान तक

आत्मपरिचय

कवि का दुनिया से संबंध ‘प्रीति-कलह’ का है; उसका जीवन विरुद्धों का सामंजस्य है — “उन्मादों में अवसाद”, “निज रोदन में राग”, “शीतल वाणी में आग”

एक गीत

‘निशा निमंत्रण’ से; “दिन जल्दी-जल्दी ढलता है!” — समय के बीतने का एहसास; प्रिय से मिलने की आशा गति देती है, उसका अभाव शिथिलता

भाषा-शैली

सरल, सहज खड़ी बोली; गेयता; तत्सम-उर्दू शब्दों का मेल

अभ्यास – कविता के साथ

Q1

कविता एक ओर जग-जीवन का भार लिए घूमने की बात करती है और दूसरी ओर मैं कभी न जग का ध्यान किया करता हूँ— विपरीत से लगते इन कथनों का क्या आशय है?

Answer

उत्तर

ये कथन विरोधी लगते हैं, पर इनमें कवि के जीवन का सत्य छिपा है।

  1. “मैं जग-जीवन का भार लिए फिरता हूँ” — कवि एक सामाजिक प्राणी है। वह संसार में रहता है, उसके दायित्वों, सुख-दुखों और कष्टों को झेलता है। संसार से पूरी तरह कटकर रहना संभव नहीं।
  2. “मैं कभी न जग का ध्यान किया करता हूँ” — कवि संसार की परवाह नहीं करता कि लोग उसके बारे में क्या कहते हैं। दुनिया उन्हें पूछती है “जो जग की गाते”, पर कवि “अपने मन का गान” करता है। वह दुनिया की प्रशंसा-निंदा या उसके बनाए मानदंडों के अनुसार नहीं चलता।

आशय यह है कि कवि संसार में रहते हुए भी उसके दबावों और स्वार्थों से निर्लिप्त है। उसका दुनिया से संबंध ‘प्रीति-कलह’ का है।

कवि संसार में रहकर उसके दायित्व और कष्ट तो उठाता है (जग-जीवन का भार), पर दुनिया की राय, प्रशंसा-निंदा या स्वार्थी मानदंडों की परवाह नहीं करता; वह अपने मन के अनुसार जीता है।

Q2

जहाँ पर दाना रहते हैं, वहीं नादान भी होते हैं— कवि ने ऐसा क्यों कहा होगा?

Answer

उत्तर

कवि कहता है— “कर यत्न मिटे सब, सत्य किसी ने जाना? / नादान वहीं है, हाय, जहाँ पर दाना!”

  1. दाना का अर्थ है बुद्धिमान/ज्ञानी और नादान का अर्थ है मूर्ख/अज्ञानी।
  2. संसार में अनेक लोग सत्य को जानने का प्रयत्न करते-करते मिट गए, पर कोई भी पूर्ण सत्य नहीं जान सका। अतः जो स्वयं को ज्ञानी समझते हैं, वे भी वास्तव में अज्ञानी ही हैं।
  3. जहाँ ज्ञान का अहंकार है, वहीं अज्ञान भी है; दोनों साथ-साथ रहते हैं।
  4. ‘दाना’ का एक अर्थ अन्न/सांसारिक भोग भी लिया जाता है— जहाँ भोग-विलास की वस्तुएँ हैं, मनुष्य वहीं मूर्खतापूर्वक फँस जाता है।

इसलिए कवि कहता है कि वह “सीखा ज्ञान भुलाना” सीख रहा है।

क्योंकि सत्य को कोई पूरी तरह नहीं जान सका; स्वयं को ज्ञानी (दाना) मानने वाले भी वास्तव में अज्ञानी (नादान) ही हैं। ज्ञान के अहंकार के साथ अज्ञान भी रहता है।

Q3

मैं और, और जग और कहाँ का नाता— पंक्ति में और शब्द की विशेषता बताइए।

Answer

उत्तर

इस पंक्ति में ‘और’ शब्द तीन बार आया है, पर अर्थ अलग-अलग हैं— यह यमक अलंकार है।

  1. पहला ‘और’ (मैं और) — ‘अन्य/भिन्न’ अर्थ में; मैं कुछ और (अलग) प्रकार का हूँ।
  2. दूसरा ‘और’ — समुच्चयबोधक अव्यय, दो शब्दों को जोड़ने वाला (तथा)।
  3. तीसरा ‘और’ (जग और) — ‘अन्य/भिन्न’; संसार कुछ और प्रकार का है।

अर्थ: मैं अलग हूँ और संसार अलग है, तो हमारा क्या नाता! इससे कवि और संसार के बीच की भिन्नता प्रकट होती है।

‘और’ तीन बार भिन्न अर्थों में प्रयुक्त है (यमक अलंकार): पहला और तीसरा ‘और’ = भिन्न/अन्य, दूसरा ‘और’ = तथा (योजक)। भाव — मैं अलग, संसार अलग, फिर कैसा नाता।

Q4

शीतल वाणी में आग— के होने का क्या अभिप्राय है?

Answer

उत्तर

यहाँ विरोधाभास अलंकार है। कवि की वाणी मधुर, विनम्र और शीतल है, पर उसमें विद्रोह, आक्रोश और जोश की आग छिपी है। कवि संसार की विषमताओं, झूठे मानदंडों और अन्याय के प्रति असंतोष को कठोर शब्दों में नहीं, बल्कि शांत और मधुर वाणी में व्यक्त करता है। उसके हृदय में प्रेम की पीड़ा और व्यवस्था के प्रति विद्रोह की आग है, जो उसकी कविता के मधुर स्वर में प्रकट होती है।

कवि की वाणी शांत और मधुर है, पर उसमें संसार की विषमताओं के प्रति विद्रोह, आक्रोश और प्रेम की तीव्र भावना (आग) भरी है — विरोधाभास अलंकार।

Q5

बच्चे किस बात की आशा में नीड़ों से झाँक रहे होंगे?

Answer

उत्तर

शाम होने पर चिड़ियों के बच्चे इस आशा में अपने घोंसलों से झाँक रहे होंगे कि उनके माता-पिता भोजन (दाना) लेकर लौट आएँगे और उन्हें स्नेह व सुरक्षा देंगे। बच्चों की यही प्रत्याशा चिड़ियों के परों में चंचलता भर देती है और वे तेज़ी से घर की ओर उड़ती हैं।

इस आशा में कि उनके माता-पिता दाना-भोजन लेकर लौटेंगे और उन्हें प्यार-दुलार देंगे।

Q6

दिन जल्दी-जल्दी ढलता है—की आवृत्ति से कविता की किस विशेषता का पता चलता है?

Answer

उत्तर

  1. समय की गतिशीलता: समय तेज़ी से बीत रहा है, वह किसी की प्रतीक्षा नहीं करता। जीवन भी इसी प्रकार ढल रहा है।
  2. गेयता और लय: यह पंक्ति टेक (स्थायी) की तरह बार-बार आती है, जिससे गीत में संगीतात्मकता और प्रभाव बढ़ता है।
  3. भाव की तीव्रता: पथिक और चिड़ियों में लक्ष्य तक जल्दी पहुँचने की उत्सुकता तथा कवि में अकेलेपन की निराशा— दोनों को यह आवृत्ति गहरा बनाती है।
  4. यह मनुष्य को सचेत करती है कि सीमित समय में लक्ष्य-प्राप्ति के लिए प्रयास करना चाहिए।

इससे पता चलता है कि समय तेज़ी से बीत रहा है (जीवन की क्षणभंगुरता); यह टेक गीत को लय और गेयता देती है तथा लक्ष्य तक पहुँचने की व्यग्रता और कवि की निराशा के भाव को तीव्र बनाती है।

अभ्यास – कविता के आसपास

Q7

संसार में कष्टों को सहते हुए भी खुशी और मस्ती का माहौल कैसे पैदा किया जा सकता है?

Answer

उत्तर

  1. सकारात्मक दृष्टिकोण: कष्टों को जीवन का स्वाभाविक अंग मानकर स्वीकार करें; कवि की तरह “सुख-दुख दोनों में मग्न” रहें।
  2. प्रेम और स्नेह बाँटना: कवि “जग-जीवन का भार” लिए हुए भी “जीवन में प्यार” लिए फिरता है। दूसरों से प्रेम और सहयोग से दुख कम होता है।
  3. अपनी रुचियों में मन लगाना: संगीत, कला, साहित्य, खेल आदि।
  4. परिवार और मित्रों के साथ समय बिताना, सुख-दुख बाँटना।
  5. दूसरों की सहायता करना, जिससे आत्मसंतोष मिलता है।
  6. हास्य और उत्सव: त्योहार, मेल-जोल, हँसी-मज़ाक।
  7. कर्मठता और आशा: लक्ष्य के लिए प्रयास करते रहना।

सकारात्मक सोच अपनाकर, सुख-दुख को समान भाव से स्वीकारकर, प्रेम और सहयोग बाँटकर, अपनी रुचियों, मित्रों-परिवार, उत्सवों और दूसरों की सहायता में आनंद खोजकर कष्टों के बीच भी खुशी और मस्ती का माहौल बनाया जा सकता है।

अभ्यास – आपसदारी

Q8

जयशंकर प्रसाद की आत्मकथ्य कविता की कुछ पंक्तियाँ दी जा रही हैं। क्या पाठ में दी गई आत्मपरिचय कविता से इस कविता का आपको कोई संबंध दिखाई देता है? चर्चा करें।

Answer

उत्तर

हाँ, दोनों कविताओं में संबंध है।

समानताएँ: 1. दोनों कविताएँ आत्मपरक हैं— कवि अपने जीवन और मन के बारे में बात करते हैं। 2. दोनों में वेदना और दुख का भाव है— बच्चन “किसी की याद” और “उन्मादों में अवसाद” लिए फिरते हैं; प्रसाद की “थकी सोई है मेरी मौन व्यथा”। 3. दोनों कवि संसार से कुछ दूरी रखते हैं— बच्चन “मैं और, और जग और” कहते हैं; प्रसाद अपनी आत्मकथा सुनाने से इनकार करते हैं— “सुनकर क्या तुम भला करोगे मेरी भोली आत्म-कथा?” 4. दोनों में स्मृति का महत्व है— बच्चन की “किसी की याद”, प्रसाद की “उसकी स्मृति पाथेय बनी है”।

अंतर: 1. बच्चन अपने मन को खुलकर व्यक्त करते हैं, अपना परिचय देते हैं; प्रसाद अपनी कथा कहने में संकोच करते हैं— “क्या यह अच्छा नहीं कि औरों की सुनता मैं मौन रहूँ?” 2. बच्चन में मस्ती और दीवानगी है (“मैं मस्ती का संदेश लिए फिरता हूँ”); प्रसाद में विनम्रता और मौन। 3. बच्चन की भाषा सरल है; प्रसाद की भाषा तत्सम-प्रधान और छायावादी है।

हाँ। दोनों आत्मपरक कविताएँ हैं, जिनमें कवि की निजी वेदना, स्मृति और संसार से दूरी का भाव है। अंतर यह है कि बच्चन मस्ती और खुलेपन से अपना परिचय देते हैं, जबकि प्रसाद विनम्रता और संकोच से अपनी आत्मकथा कहने से बचते हैं।

विषय-सूची की जाँच

  • ☒ विरोधी कथनों का आशय, दाना-नादान, ‘और’ का प्रयोग (प्रश्न 1–3)
  • ☒ शीतल वाणी में आग; गीत के प्रश्न (प्रश्न 4–6)
  • ☒ कष्टों में खुशी (प्रश्न 7)
  • ☒ आत्मकथ्य से तुलना (प्रश्न 8)

Total questions answered: 8 of 8

Frequently Asked Questions

What do these NCERT solutions for Class 12 Hindi Aroh Chapter 1 (आत्मपरिचय, एक गीत) cover?

All 8 questions from the latest NCERT textbook for this chapter are answered step by step, organised as अभ्यास – कविता के साथ, अभ्यास – कविता के आसपास and अभ्यास – आपसदारी.

Are these solutions based on the new NCERT syllabus?

Yes. The answers follow the current NCERT textbook for Class 12 Hindi Aroh and the latest CBSE syllabus, so the question numbers and wording match the book you use in class.

How should I use these solutions to prepare for exams?

Attempt each question on your own first, then compare your working with the answer here. Note the steps or keywords you missed, and revise the chapter notes before taking a chapter-wise MCQ test to check your understanding.

Are the NCERT solutions for Class 12 Hindi Aroh Chapter 1 (आत्मपरिचय, एक गीत) free?

Yes. All Circle of Learning NCERT solutions and chapter notes are free to read online, with no sign-up needed.