Circle of Learning • नई NCERT पाठ्यपुस्तक "गंगा" (2026-27) • पाठ के सभी प्रश्नों के उत्तर
रचना से संवाद : मेरे उत्तर मेरे तर्क
निर्देश : निम्नलिखित प्रश्नों के सटीक उत्तर चुनिए और यह भी बताइए कि आपको ये उत्तर उपयुक्त क्यों लगते हैं।
कहानी में हीरा और मोती का आपसी संबंध किस गुण को मुख्य रूप से दर्शाता है? (क) प्रतिस्पर्धा और प्रतिद्वंद्विता (ख) एकता और सहयोग (ग) गर्व और दंभ (घ) विद्रोह और क्रोध
उत्तर
(ख) एकता और सहयोग।
तर्क : दोनों बैल साथ नाँद में मुँह डालते, साथ उठते-बैठते और हल-गाड़ी में यह चेष्टा करते कि ज्यादा बोझ उनकी अपनी गरदन पर रहे। साँड़ से भी दोनों ने मिलकर लड़ाई जीती और काँजीहौस में मोती ने बँधे हुए हीरा को छोड़कर भागना स्वीकार नहीं किया।
हीरा-मोती ने नया स्थान स्वीकार क्यों नहीं किया? (क) उन्हें भरपेट भोजन दिया गया। (ख) उन्हें बहुत मोटी रस्सी से बाँधा गया। (ग) मालिक ने बेचा, यह सोचकर उन्हें अपमान लगा। (घ) उन्हें अलग-अलग बाँधा गया।
उत्तर
(ग) मालिक ने बेचा, यह सोचकर उन्हें अपमान लगा।
तर्क : बैलों ने समझा कि झूरी ने उन्हें बेच दिया है। उनके मन में प्रश्न था, "हमने तो तुम्हारी सेवा करने में कोई कसर नहीं उठा रखी… फिर तुमने हमें इस जालिम के हाथ क्यों बेच दिया?" इसी दुख और अपमान के कारण उन्होंने नई जगह नाँद में मुँह तक नहीं डाला।
बैलों ने रस्सी तोड़कर घर लौटने का निर्णय क्यों लिया? (क) कष्टों से बचने के लिए (ख) स्वतंत्रता प्राप्त करने के लिए (ग) अभिमान की रक्षा के लिए (घ) अपनापन पाने के लिए
उत्तर
(घ) अपनापन पाने के लिए।
तर्क : नए स्थान पर "नया घर, नया गाँव, नए आदमी, सब उन्हें बेगानों-से लगते थे।" जिस घर को वे अपना समझते थे, वह छूट गया था। झूरी के प्रेम और अपने थान के अपनेपन की खोज में ही वे रात को पगहे तुड़ाकर घर लौट आए।
गया द्वारा डंडे से मारने पर मोती का आक्रोश किस मानवीय मनोवृत्ति का द्योतक है? (क) स्वाभिमान (ख) अहिंसा (ग) पराधीनता (घ) अन्याय की रक्षा
उत्तर
(क) स्वाभिमान।
तर्क : झूरी उन्हें फूल की छड़ी से भी नहीं छूता था, पर गया ने हीरा की नाक पर डंडे जमाए। अपने साथी और अपने सम्मान पर हुई इस चोट को मोती सह न सका और हल लेकर भाग खड़ा हुआ। यह अन्याय के विरुद्ध जागे स्वाभिमान का प्रमाण है।
कहानी में बैलों की 'मूक-भाषा' का प्रयोग लेखक ने किस लिए किया? (क) कहानी को रोचक बनाने के लिए (ख) मनुष्य जैसी चेतना दिखाने के लिए (ग) संवादों को छोटा रखने के लिए (घ) कथा में हास्य उत्पन्न करने के लिए
उत्तर
(ख) मनुष्य जैसी चेतना दिखाने के लिए।
तर्क : मूक-भाषा के सहारे हीरा और मोती आपस में सलाह करते हैं, धर्म-अधर्म पर विचार करते हैं और भविष्य की योजना बनाते हैं। इससे पता चलता है कि पशुओं में भी सोचने-समझने, प्रेम करने और अन्याय पहचानने की चेतना होती है।
'दो बैलों की कथा' को यदि स्वतंत्रता आंदोलन से जोड़ें, तो हीरा और मोती किसके प्रतीक हो सकते हैं? (क) भारत पर अंग्रेजों के क्रूर और अन्यायपूर्ण शासन के (ख) स्वतंत्रता संग्राम में पशुओं के योगदान के (ग) सत्याग्रह और अहिंसा के आंदोलन के (घ) स्वतंत्रता के लिए भारतीय जनता के संघर्ष के
उत्तर
(घ) स्वतंत्रता के लिए भारतीय जनता के संघर्ष के।
तर्क : हीरा और मोती बार-बार बंधन में डाले जाते हैं, मार खाते हैं, भूखे रहते हैं, फिर भी आजादी के लिए जोर लगाना नहीं छोड़ते। ठीक इसी तरह भारतीय जनता भी अंग्रेजी दमन सहकर बार-बार स्वतंत्रता के लिए संघर्ष करती रही।
रचना से संवाद : मेरी समझ मेरे विचार
"दूसरे दिन गया ने बैलों को हल में जोता, पर इन दोनों ने जैसे पाँव न उठाने की कसम खा ली थी।" जब बैल नए मालिक के यहाँ गए, तो उन्होंने काम करने से इनकार क्यों कर दिया था?
उत्तर
गया के घर बैलों के साथ बहुत बुरा व्यवहार हुआ। उन्हें मोटी रस्सियों से बाँधा गया, मारा गया और खाने को केवल सूखा भूसा दिया गया, जबकि गया अपने बैलों को खली-चूनी खिलाता था। झूरी के घर उन्हें प्रेम और सम्मान मिलता था; यहाँ अपमान और अन्याय मिला। "आहत सम्मान की व्यथा" और भूख के कारण उन्होंने विरोध के रूप में काम करने से इनकार कर दिया। यह उनका मौन असहयोग था।
"गाँव के इतिहास में यह घटना अभूतपूर्व न होने पर भी महत्वपूर्ण थी।" बैल का घर लौट आना कोई साधारण घटना नहीं है। कैसे? (संकेत– वे क्यों लौट आए, उनके और झूरी के मन में कौन-कौन से भाव रहे होंगे, क्या वास्तविक जीवन में भी ऐसा होता है आदि।)
उत्तर
बैलों का लौट आना यह दिखाता है कि पशु भी अपने घर और मालिक से गहरा प्रेम करते हैं। वे दिन-भर के भूखे थे, रस्सियाँ बहुत मजबूत थीं और रास्ता लंबा था, फिर भी अपनापन पाने की चाह ने उनमें "दूनी शक्ति" भर दी। उनकी आँखों में "विद्रोहमय स्नेह" था, यानी बेचे जाने का विरोध भी था और मालिक के प्रति प्रेम भी। झूरी उन्हें देखकर स्नेह से गद्गद हो गया और गले लगा लिया। गाँव के बच्चों ने तालियाँ बजाकर उनका स्वागत किया। वास्तविक जीवन में भी पालतू पशु कई बार दूर ले जाए जाने पर अपने पुराने घर लौट आते हैं। इसलिए यह घटना प्रेम, निष्ठा और स्वतंत्रता की भावना का सुंदर उदाहरण है।
"मोती ने मूक-भाषा में कहा— अब तो नहीं सहा जाता, हीरा!" 'कभी-कभी संघर्ष करना आवश्यक हो जाता है' इस कथन को कहानी के उदाहरणों से सिद्ध कीजिए।
उत्तर
कहानी में कई बार संघर्ष ही बैलों की रक्षा का एकमात्र रास्ता बनता है। (1) गया के अत्याचार से छूटने के लिए उन्हें रस्सियाँ तुड़ाकर भागना पड़ा। (2) साँड़ से भिड़ना "जान से हाथ धोना" था, पर न भिड़ने पर भी जान बचती नहीं दिखती थी; दोनों ने मिलकर लड़ाई की और जीत गए। (3) काँजीहौस में भूख से मरने के बजाय हीरा ने दीवार पर सींग मारे, जिससे नौ-दस प्राणियों की जान बची। (4) अंत में मोती ने दढ़ियल कसाई को सींग दिखाकर भगा दिया। ये उदाहरण बताते हैं कि अन्याय के सामने चुप रहना विनाश है, इसलिए कभी-कभी संघर्ष आवश्यक हो जाता है।
"जब पेट भर गया और दोनों ने आजादी का अनुभव किया…" हीरा एवं मोती 'स्वतंत्रता' और 'अपनापन' दोनों में से किस भावना से अधिक प्रेरित थे? कारण सहित लिखिए।
उत्तर
मेरे विचार से हीरा और मोती 'अपनापन' की भावना से अधिक प्रेरित थे, यद्यपि स्वतंत्रता की चाह भी उनमें प्रबल थी। वे हर बार भागकर किसी खुली जगह नहीं, बल्कि झूरी के घर ही लौटते हैं। अंत में भी परिचित राह देखते ही उनकी "सारी थकान, सारी दुर्बलता गायब हो गई" और वे दौड़कर अपने थान पर जा खड़े हुए। उनके लिए सच्ची आजादी अपने प्रेम करने वाले मालिक के पास रहना ही थी। इसलिए स्वतंत्रता उनका साधन था और अपनापन उनका लक्ष्य।
"बैलों ने जैसे पाँव न उठाने की कसम खा ली थी।" 'अत्याचार सहना भी अन्याय में भागीदारी है'— क्या आप इस कथन से सहमत हैं? अपने उत्तर के कारण भी बताइए।
उत्तर
हाँ, मैं इस कथन से सहमत हूँ। जब कोई अत्याचार को चुपचाप सहता रहता है, तो अत्याचारी का साहस बढ़ता है और उसे लगता है कि वह जो चाहे कर सकता है। कहानी में बैलों ने गया के अन्याय के सामने पाँव न उठाकर शांत विरोध किया। काँजीहौस के गधे डर के कारण भागे नहीं, इसलिए वे बंधन में ही पड़े रहे। इसके विपरीत, हीरा-मोती ने विरोध किया और कई प्राणियों को मुक्त कराया। इसलिए अन्याय का विरोध करना, चाहे शांत ढंग से ही सही, हर व्यक्ति का कर्तव्य है।
"बहुत दिनों साथ रहते-रहते दोनों में भाईचारा हो गया था।" हीरा और मोती अभिन्न मित्र थे। कहानी की किन-किन घटनाओं के आधार पर यह निष्कर्ष निकाला जा सकता है? कम से कम तीन बिंदु लिखिए।
उत्तर
- दोनों साथ नाँद में मुँह डालते और एक मुँह हटा लेता तो दूसरा भी हटा लेता; एक-दूसरे को चाटकर थकान मिटाते थे।
- गया ने जब हीरा की नाक पर डंडे मारे, तो मोती का गुस्सा काबू से बाहर हो गया और वह हल लेकर भागा।
- मटर के खेत में मोती पकड़ा गया तो हीरा मेड़ से निकल जाने के बाद भी लौट आया— "फँसेंगे तो दोनों फँसेंगे।"
- काँजीहौस में मोती ने बँधे हुए हीरा को छोड़कर भागने से इनकार कर दिया और उसके लिए मार भी खाई।
"उसी समय मालकिन ने आकर दोनों के माथे चूम लिए।" कहानी में मालकिन और छोटी लड़की, दोनों के व्यवहार की तुलना कीजिए।
उत्तर
झूरी की पत्नी पहले बैलों को "नमक-हराम" और "कामचोर" कहती है और उन्हें केवल सूखा भूसा देने का आदेश देती है। अंत में, जब बैल कसाई से बचकर लौटते हैं, तो उसका मन बदल जाता है और वह उनके माथे चूम लेती है। इसके विपरीत, भैरो की छोटी लड़की आरंभ से ही बैलों पर दया करती है। वह सौतेली माँ की मार सहती है, इसलिए बैलों का दुख समझती है; उन्हें छिपकर रोटियाँ खिलाती है और अंत में गराँव खोलकर भगा देती है। मालकिन का प्रेम देर से जागता है, जबकि लड़की का प्रेम निःस्वार्थ और साहसी है।
रचना से संवाद : मेरी कल्पना मेरे अनुमान
"उसने उनके माथे सहलाए और बोली– खोले देती हूँ। चुपके से भाग जाओ…" यदि आप वह छोटी लड़की होते, तो बैलों की मदद किस प्रकार करते?
उत्तर
उत्तर (नमूना उत्तर) : यदि मैं वह लड़की होता/होती, तो पहले बैलों को रोज रोटी के साथ थोड़ा पानी और हरा चारा भी देता/देती ताकि वे कमजोर न हों। फिर मैं गाँव के किसी समझदार बड़े व्यक्ति को बताता/बताती कि ये बैल झूरी के हैं और यहाँ इन पर अत्याचार हो रहा है। रात को गराँव खोलने के बाद मैं उन्हें गाँव के बाहर तक का सही रास्ता दिखा देता/देती, ताकि वे भटककर काँजीहौस न पहुँचें।
"दोनों गधे अभी तक ज्यों-के-त्यों खड़े थे।" भय और संकोच इंसान को अवसर मिलने पर भी जकड़े रखता है। क्या आप इस कथन से सहमत हैं? इस वाक्य के संबंध में कहानी और अपने अनुभवों से उदाहरण लेते हुए अपने विचार लिखिए।
उत्तर
उत्तर (नमूना उत्तर) : हाँ, मैं इस कथन से पूरी तरह सहमत हूँ। काँजीहौस की दीवार गिरते ही घोड़ियाँ, बकरियाँ और भैंसें भाग गईं, पर गधे यह सोचकर खड़े रहे, "जो कहीं फिर पकड़ लिए जाएँ!" भय ने उन्हें मिला हुआ अवसर भी गँवाने पर विवश कर दिया; अंत में मोती को उन्हें सींगों से मारकर बाहर निकालना पड़ा। मेरे अपने अनुभव में भी ऐसा हुआ है। कक्षा में भाषण प्रतियोगिता के लिए नाम माँगे गए, मुझे विषय अच्छा आता था, पर गलती होने के डर से मैंने नाम नहीं दिया। बाद में पछतावा हुआ। तब से मैंने सीखा कि डर से बड़ा नुकसान अवसर खो देना है।
रचना से संवाद : मेरे अनुभव मेरे विचार
"दोस्तों में घनिष्ठता होते ही धौल-धप्पा होने लगता है। इसके बिना दोस्ती कुछ फुसफुसी, कुछ हल्की-सी रहती है, जिस पर ज्यादा विश्वास नहीं किया जा सकता।" क्या आप इस बात से सहमत हैं? आपको ऐसा क्यों लगता है? अपने अनुभवों के आधार पर बताइए।
उत्तर
उत्तर (नमूना उत्तर) : हाँ, मैं इससे सहमत हूँ। जब दोस्ती गहरी हो जाती है, तब हम औपचारिकता छोड़ देते हैं और हँसी-मजाक, हल्की-फुल्की धौल-धप्पा या छेड़छाड़ करने लगते हैं, क्योंकि हमें भरोसा होता है कि मित्र बुरा नहीं मानेगा। मेरे सबसे अच्छे मित्र और मैं खेलते समय एक-दूसरे को धकेलते-छेड़ते हैं, पर मुसीबत में सबसे पहले वही साथ देता है। हाँ, यह ध्यान रखना चाहिए कि मजाक किसी को चोट या अपमान न पहुँचाए।
"हीरा ने तिरस्कार किया– गिरे हुए बैरी पर सींग न चलाना चाहिए।" "यह सब ढोंग है। बैरी को ऐसा मारना चाहिए कि फिर न उठे।" आपका इस संबंध में क्या विचार है? आप किसके साथ हैं— हीरा के या मोती के या दोनों के? क्यों?
उत्तर
उत्तर (नमूना उत्तर) : मैं हीरा के साथ हूँ। जो शत्रु हार चुका है और भाग रहा है, उस पर वार करना वीरता नहीं, क्रूरता है। हमारी संस्कृति भी शरण में आए या गिरे हुए शत्रु पर दया करना सिखाती है। मोती का गुस्सा समझ में आता है, क्योंकि साँड़ ने उनकी जान लेनी चाही थी, पर बदले की भावना हमें भी अत्याचारी बना देती है। फिर भी मोती की यह बात ठीक है कि अन्याय का दृढ़ता से सामना करना चाहिए; इसलिए साहस मोती जैसा और संयम हीरा जैसा होना चाहिए।
"हम और तुम इतने दिनों एक साथ रहे। आज तुम विपत्ति में पड़ गए तो मैं तुम्हें छोड़कर अलग हो जाऊँ?" क्या कभी आपने किसी विपत्ति या चुनौती का सामना अपने किसी मित्र या परिजन के साथ मिलकर किया है? उस घटना के विषय में बताइए।
उत्तर
उत्तर (नमूना उत्तर) : पिछले वर्ष वार्षिक परीक्षा से कुछ दिन पहले मेरे मित्र के पिताजी अस्पताल में भर्ती हो गए। वह बहुत घबरा गया था और पढ़ाई नहीं कर पा रहा था। मैंने उसके साथ बैठकर रोज के नोट्स बनाए, कठिन प्रश्न समझाए और अपनी माँ के साथ उसके घर खाना भी पहुँचाया। धीरे-धीरे उसके पिताजी ठीक हो गए और हम दोनों ने अच्छे अंक प्राप्त किए। उस दिन मुझे समझ आया कि सच्ची मित्रता विपत्ति में ही परखी जाती है, जैसे मोती ने हीरा का साथ नहीं छोड़ा।
विधा से संवाद : कहानी की पड़ताल
आप कहानी लेखन की इस प्रक्रिया को ध्यान में रखते हुए एक कहानी का शीर्षक चुनिए और दिए गए मुख्य बिंदुओं को पूरा कीजिए— शीर्षक और लेखक, विषय, क्रिया/कार्य, परिवेश/देश-काल और मुख्य विचार, चरित्र/पात्र, परिणाम।
उत्तर
उत्तर (नमूना उत्तर) : 'दो बैलों की कथा' के आधार पर—
बिंदु | विवरण |
शीर्षक और लेखक | दो बैलों की कथा – प्रेमचंद |
विषय | पशुओं की मित्रता, स्वाभिमान, अपने घर के प्रति प्रेम और स्वतंत्रता के लिए संघर्ष |
क्रिया/कार्य | बैलों का गया के घर भेजा जाना, भागकर लौटना, फिर ले जाया जाना, लड़की की सहायता से भागना, साँड़ से लड़ाई, काँजीहौस में बंद होना, दीवार तोड़ना, नीलाम होना और अंत में घर लौट आना |
परिवेश/देश-काल और मुख्य विचार | अंग्रेजी शासनकाल का उत्तर भारत का ग्रामीण परिवेश; स्वतंत्रता सहज नहीं मिलती, उसके लिए बार-बार संघर्ष करना पड़ता है |
चरित्र/पात्र | हीरा, मोती, झूरी, झूरी की पत्नी, गया, भैरो की छोटी लड़की, साँड़, काँजीहौस का चौकीदार, दढ़ियल (कसाई) |
परिणाम | बैल कसाई से बचकर अपने घर लौट आते हैं, झूरी और मालकिन उनका प्रेम से स्वागत करते हैं; संघर्ष और एकता की जीत होती है |
विधा से संवाद : कहानी का सौंदर्य
नीचे इस कहानी में आए कुछ विशेष बिंदुओं को उदाहरण के साथ दिया गया है। आप भी एक-एक उदाहरण खोजकर तालिका में लिखिए।
उत्तर
विशेषता | विशेषता का अर्थ | उदाहरण 1 | उदाहरण 2 (उत्तर) |
चित्रात्मक भाषा | शब्दों के माध्यम से पाठक के मन में स्पष्ट और जीवंत चित्र बनाना | घुटने तक पाँव कीचड़ से भरे हैं। | सहसा घर का द्वार खुला और वही लड़की निकली। (पुस्तक में दिया गया) अन्य उदाहरण : "दोनों उन्मत्त होकर बछड़ों की भाँति कुलेलें करते हुए घर की ओर दौड़े।" |
संवादात्मकता | कथ्य को आगे बढ़ाने और पात्रों के विचार-भाव व्यक्त करने के लिए बातचीत का प्रयोग | मर जाऊँगा, पर उसके काम तो न आऊँगा। | "भाग क्यों न चलें?" "भागना कायरता है।" |
विरोधाभास | एक ही प्रसंग में दो विपरीत बातें एक साथ होना | झूरी बैलों को देखकर स्नेह से गद्गद हो गया। झूरी की स्त्री ने बैलों को द्वार पर देखा, तो जल उठी। | दोनों की आँखों में विद्रोहमय स्नेह झलक रहा है। |
व्यंग्य | मजाक या कटाक्ष के माध्यम से किसी दोष, अन्याय या पाखंड को प्रकट करना | अगर वे भी ईंट का जवाब पत्थर से देना सीख जाते तो शायद सभ्य कहलाने लगते। | सद्गुणों का इतना अनादर कहीं नहीं देखा। कदाचित सीधापन संसार के लिए उपयुक्त नहीं है। |
संघर्ष | दो विरोधी शक्तियों, विचारों या परिस्थितियों का टकराना | उससे भिड़ना जान से हाथ धोना है; लेकिन न भिड़ने पर भी जान बचती नहीं नजर आती। | फिर तो वह दीवार में सींग लगाकर इस तरह जोर करने लगा, मानो किसी प्रतिद्वंद्वी से लड़ रहा है। |
अतिशयोक्ति | किसी बात का इतना बढ़ाकर वर्णन कि वह असंभव लगे | झूरी इन्हें फूल की छड़ी से भी न छूता था। उसकी टिटकार पर दोनों उड़ने लगते थे। | साँड़ पूरा हाथी है। |
संदेह/उलझन | जब पात्र किसी निर्णय पर नहीं पहुँच पाता | समझ ही में न आता था, यह कैसा स्वामी है? | दोनों गधे अभी तक खड़े सोच रहे थे कि भागें या न भागें। |
विधा से संवाद : कहानी की रचना
प्रायः कहानी के प्रारंभ में ही कहानी के मुख्य चरित्र, कहानी का समय, कहानी की भाषा, घटनाओं आदि के कुछ संकेत मिलने लगते हैं। प्रेमचंद की इस कहानी में भी ऐसे संकेत हैं। आप कहानी के ऐसे संकेत/बिंदुओं को ढूँढ़कर लिखिए।
उत्तर
- मुख्य चरित्र : आरंभ में गधे और बैल के सीधेपन की चर्चा है और फिर "झूरी के दोनों बैलों के नाम थे हीरा और मोती" से स्पष्ट हो जाता है कि कहानी के नायक दो बैल हैं।
- समय : "भारतवासियों की अफ्रीका में क्या दुर्दशा हो रही है?" और "जापान की मिसाल" जैसे उल्लेख बताते हैं कि कहानी पराधीन भारत के समय की है।
- घटनाओं का संकेत : "बैल कभी-कभी मारता भी है… और भी कई रीतियों से अपना असंतोष प्रकट कर देता है"— इससे संकेत मिलता है कि आगे बैल अन्याय का विरोध करेंगे।
- मित्रता का संकेत : दोनों में भाईचारा, मूक-भाषा में विचार-विनिमय और साथ खाना-बैठना आगे की घटनाओं में उनकी एकता की नींव है।
- भाषा : "परले दरजे का बेवकूफ", "बछिया के ताऊ", "ईंट का जवाब पत्थर से देना" जैसे प्रयोग बताते हैं कि भाषा सरल, मुहावरेदार और व्यंग्यपूर्ण होगी।
विषयों से संवाद : कहानी का समय और समाज
इस कहानी में से कुछ वाक्य चुनकर नीचे दिए गए हैं। इन वाक्यों का मिलान स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़े उपयुक्त वाक्यों के साथ कीजिए।
उत्तर
कहानी में से वाक्य | स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़ाव (सही मिलान) |
1. जोर तो मारता ही जाऊँगा, चाहे कितने ही बंधन पड़ते जाएँ। | स्वतंत्रता सेनानी बार-बार जेल गए, फाँसी पर चढ़े, पर संघर्ष छोड़ने को तैयार नहीं हुए। |
2. मर जाऊँगा, पर उसके काम तो न आऊँगा। | स्वतंत्रता के लिए प्राण देना स्वीकार्य था, पर अंग्रेजों की सेवा में लगना अस्वीकार्य। |
3. हमारी जान को कोई जान ही नहीं समझता। | दासता के काल में भारतीयों के प्राण, सम्मान और अधिकारों की कोई महत्ता नहीं थी। |
4. दोनों मित्रों की आँखों में, रोम-रोम में विद्रोह भरा हुआ था। | भारतीय जनता के मन में ब्रिटिश शासन के प्रति विद्रोह धीरे-धीरे गहराता गया। |
5. इतना तो हो ही गया कि नौ-दस प्राणियों की जान बच गई। वे सब तो आशीर्वाद देंगे। | भगत सिंह और चंद्रशेखर आजाद जैसे क्रांतिकारियों ने बलिदान दिया, जिससे लाखों भारतीयों में आजादी की प्रेरणा जगी। |
6. साँड़ पूरा हाथी है… पर दोनों मित्र जान हथेलियों पर लेकर लपके। | ब्रिटिश साम्राज्य बहुत शक्तिशाली था, फिर भी स्वतंत्रता सेनानियों ने साहसपूर्वक उसका सामना किया। |
विषयों से संवाद : पशुओं के लिए कानून
संवाद : "मैं तो समझता हूँ, चुराए लिए आते हो। चुपके से चले जाओ। मेरे बैल हैं। मैं बेचूँगा, तो बिकेंगे। किसी को मेरे बैल नीलाम करने का क्या अख़्तियार है?" "जाकर थाने में रपट कर दूँगा।" "मेरे बैल हैं। इसका सबूत यह है कि मेरे द्वार पर खड़े हैं।"
बैलों का काँजीहाउस में बंद होना न्याय और अन्याय दोनों को दर्शाता है। कैसे?
उत्तर
न्याय इसलिए कि बैल दूसरे के मटर के खेत में घुसकर फसल खा रहे थे; फसल की रक्षा के लिए आवारा पशुओं को काँजीहौस में बंद करना नियम के अनुसार ठीक था। अन्याय इसलिए कि वहाँ पशुओं को सारा दिन "एक तिनका भी" खाने को नहीं दिया गया, वे मुरदों की तरह पड़े रहते थे, उन्हें डंडे मारे गए और अंत में असली मालिक को बताए बिना उन्हें कसाई के हाथ नीलाम कर दिया गया। अर्थात नियम तो था, पर उसका पालन क्रूरता से किया गया।
यदि आपको अवसर मिले तो आप बैलों की ओर से कौन-कौन से कानूनी अधिकार माँगेंगे?
उत्तर
उत्तर (नमूना उत्तर) : मैं बैलों की ओर से ये अधिकार माँगूँगा— (1) पर्याप्त भोजन और पानी पाने का अधिकार, विशेषकर काँजीहौस जैसी जगहों पर। (2) मारपीट, अधिक बोझ और क्रूरता से सुरक्षा का अधिकार। (3) बीमार या घायल होने पर पशु-चिकित्सा पाने का अधिकार। (4) पकड़े गए पशु के असली मालिक को सूचना दिए बिना नीलामी न करने का नियम। (5) बूढ़े या कमजोर पशुओं को कसाई को बेचने के बजाय गोशाला या आश्रय-स्थल में रखने की व्यवस्था।
मान लीजिए कि हीरा-मोती अपने साथ हुए अन्याय की शिकायत करना चाहते हैं। उनकी ओर से उनकी शिकायत थानाध्यक्ष को करते हुए एक पत्र लिखिए। (संकेत– "थानाध्यक्ष महोदय, हमारा नाम… है। हमारे साथ अन्याय हुआ है…।")
उत्तर
उत्तर (नमूना उत्तर)
सेवा में,
थानाध्यक्ष महोदय,
पुलिस थाना, (क्षेत्र का नाम)
विषय : काँजीहौस में हुए अत्याचार और अवैध नीलामी की शिकायत
महोदय,
हमारा नाम हीरा और मोती है। हम झूरी किसान के बैल हैं। रास्ता भटकने पर हमें एक खेत से पकड़कर काँजीहौस में बंद कर दिया गया। वहाँ हमें और अन्य पशुओं को कई दिनों तक चारे का एक तिनका भी नहीं दिया गया, केवल पानी दिखाया जाता था। चौकीदार ने हमें डंडों से पीटा और मोटी रस्सियों से बाँध दिया। हमारे मालिक को सूचना दिए बिना हमें एक कसाई के हाथ नीलाम कर दिया गया। आपसे प्रार्थना है कि इस अन्याय की जाँच की जाए और दोषियों पर कार्रवाई की जाए, ताकि दूसरे पशुओं के साथ ऐसा न हो।
प्रार्थी
हीरा और मोती
(झूरी के बैल), गाँव का नाम
दिनांक : ……
विषयों से संवाद : हमारी धरोहर और संस्कृति
"वह अपना धर्म छोड़ दे लेकिन हम अपना धर्म क्यों छोड़ें!" कहानी के अनुसार हीरा और मोती सदैव ध्यान रखते थे कि कौन-से कार्य करने योग्य हैं और कौन-से नहीं। वे कौन-कौन से कार्य कभी नहीं करते थे?
उत्तर
हीरा और मोती (विशेषकर हीरा) कुछ मर्यादाओं का सदा पालन करते थे— (1) वे स्त्री पर सींग नहीं चलाते थे: "औरत जात पर सींग चलाना मना है।" (2) गिरे हुए शत्रु पर वार नहीं करते थे। (3) अपने उपकारी का अहित नहीं करते थे; लड़की अनाथ न हो जाए, इसलिए गया को नहीं मारा और भागते समय भी उसकी चिंता की। (4) उन्होंने कभी दाने-चारे की शिकायत नहीं की और मालिक की सेवा में कोई कसर नहीं छोड़ी। (5) मुसीबत में साथी को अकेला छोड़कर नहीं भागे।
"गिरे हुए बैरी पर सींग न चलाना चाहिए।" "लेकिन औरत जात पर सींग चलाना मना है, यह भूले जाते हो।" हीरा के ये कथन किन भारतीय मूल्यों की ओर संकेत करते हैं?
उत्तर
हीरा के ये कथन भारतीय संस्कृति के उदात्त मूल्यों की ओर संकेत करते हैं— स्त्रियों का सम्मान और उनकी रक्षा, युद्ध में भी मर्यादा और धर्म का पालन, पराजित या असहाय पर दया, क्षमा और करुणा। हमारे यहाँ माना गया है कि सच्चा वीर वही है जो शक्ति होने पर भी संयम रखे और निर्बल पर हाथ न उठाए।
"दूसरे दिन गया ने बैलों को हल में जोता" (क) खेतों में जुताई के लिए बैल और हल कृषि के पारंपरिक उपकरण हैं। कृषि के अन्य पारंपरिक और आधुनिक उपकरणों तथा उनके उपयोग के विषय में पता लगाइए और लिखिए। (ख) भारत में बैल केवल पशु नहीं बल्कि कृषि संस्कृति का अभिन्न अंग हैं। लिखिए कि भारतीय गाँवों एवं शहरों में भी बैल किस-किस काम में सहायक होते हैं?
उत्तर
(क)
पारंपरिक उपकरण | उपयोग | आधुनिक उपकरण | उपयोग |
हल | खेत की जुताई | ट्रैक्टर | जुताई, ढुलाई और कई यंत्र चलाना |
पाटा/हेंगा | जुते खेत की मिट्टी समतल करना | रोटावेटर/कल्टीवेटर | मिट्टी को भुरभुरा और समतल करना |
खुरपी | निराई-गुड़ाई | पावर वीडर | खरपतवार हटाना |
हँसिया | फसल काटना | कंबाइन हार्वेस्टर | कटाई और दाने अलग करना एक साथ |
रहट/पुर (चरसा) | कुएँ से सिंचाई के लिए पानी निकालना | पंप सेट, स्प्रिंकलर, ड्रिप सिंचाई | कम पानी में सिंचाई |
सूप | अनाज से भूसा अलग करना | थ्रेशर | अनाज की मड़ाई |
(ख) बैल गाँवों में खेत जोतने, बैलगाड़ी से अनाज, खाद और लोगों को ढोने, कोल्हू से तेल और गन्ने का रस निकालने, रहट या पुर से सिंचाई करने तथा दँवाई (अनाज की मड़ाई) में सहायक होते हैं। छोटे शहरों और कस्बों में बैलगाड़ियों से भारी सामान ढोया जाता है। पोला, मट्टू पोंगल जैसे त्योहारों में बैलों की पूजा होती है, और उनका गोबर खाद व ईंधन के काम आता है।
विषयों से संवाद : अलग-अलग और साथ-साथ
कहानी के आधार पर हीरा और मोती की विशेषताएँ लिखिए। (संकेत– धैर्यवान, गुस्सैल, मेहनती, शांत, सहनशील आदि)
उत्तर
हीरा— शांत, धैर्यवान और सहनशील है; सोच-समझकर निर्णय लेता है। वह नैतिक मूल्यों का पालन करता है (स्त्री और गिरे हुए शत्रु पर वार नहीं), दूरदर्शी है (लड़की पर आफत की चिंता) और कठिन समय में हिम्मत नहीं हारता (काँजीहौस की दीवार तोड़ना)।
मोती— साहसी, उग्र और गुस्सैल है; अन्याय देखते ही भड़क उठता है। वह भावुक और सच्चा मित्र है, हीरा को अकेला छोड़कर नहीं भागता। वह कभी-कभी जल्दबाज भी है (मटर के खेत में घुस जाना), पर दया भी रखता है (गधों को बाहर निकालना)। दोनों ही मेहनती और स्वामिभक्त हैं।
हीरा और मोती की विशेषताएँ कुछ-कुछ समान और कुछ-कुछ अलग हैं, किंतु उनकी भिन्न विशेषताएँ एक-दूसरे को पूरा करती हैं। कैसे?
उत्तर
दोनों मेहनती, स्वामिभक्त और स्वाभिमानी हैं, पर स्वभाव में अलग हैं। मोती का जोश कई बार उन्हें संकट से निकालता है, जैसे साँड़ के पेट में सींग भोंकना या दढ़ियल को भगाना; वहीं हीरा का धैर्य मोती को गलत काम करने से रोकता है, जैसे गाड़ी को खाई में गिरने से बचाना या गया पर हमला न करने देना। काँजीहौस में हीरा ने दीवार तोड़ने की पहल की तो मोती ने भी पूरी ताकत लगा दी। इस प्रकार एक का साहस और दूसरे का विवेक मिलकर उन्हें पूर्ण बनाते हैं।
आपकी कक्षा में भी कुछ-कुछ समान और कुछ-कुछ भिन्न विशेषताओं वाले सहपाठी हैं। सबकी आवश्यकताएँ भी थोड़ी समान और थोड़ी भिन्न हैं। बताइए कि आप भिन्न विशेषताओं वाले सहपाठी से अपने लिए कैसा व्यवहार चाहते हैं? उनसे पता कीजिए कि वे आपसे अपने लिए कैसा व्यवहार चाहते हैं?
उत्तर
उत्तर (नमूना उत्तर) : मैं चाहता/चाहती हूँ कि मेरे सहपाठी मेरी धीमी लिखने की आदत का मजाक न उड़ाएँ और जरूरत पड़ने पर अपने नोट्स साझा करें। मेरे मित्र, जो गणित में तेज पर बोलने में संकोची है, ने बताया कि वह चाहता है कि समूह-चर्चा में उसे भी बोलने का अवसर दिया जाए और बीच में न टोका जाए। एक अन्य सहपाठी, जिसे देखने में कठिनाई है, चाहती है कि उसे आगे की सीट और बड़े अक्षरों में लिखी सामग्री मिले। हमने तय किया कि हम पढ़ाई में एक-दूसरे की कमजोरी में मदद करेंगे, खेल में सबको शामिल करेंगे और किसी की कमी पर हँसेंगे नहीं।
"दोनों आमने-सामने या आस-पास बैठे हुए एक-दूसरे से मूक-भाषा में विचार-विनिमय करते थे।" कहानी में अनेक स्थानों पर 'मूक-भाषा' का उल्लेख किया गया है। आपके विचार से हीरा और मोती किस प्रकार आपस में बातें किया करते होंगे? अनुमान और कल्पना से बताइए।
उत्तर
उत्तर (नमूना उत्तर) : हीरा और मोती आँखों के इशारों, कनखियों से देखने, सिर हिलाने, कान खड़े करने, पूँछ हिलाने, एक-दूसरे को चाटने-सूँघने और सींग मिलाने से बातें करते होंगे। धीमी या तेज साँस, हुंकार और रँभाने की अलग-अलग आवाजों से वे खुशी, गुस्सा या डर प्रकट करते होंगे। कहानी में भी लिखा है कि उन्होंने "एक-दूसरे को कनखियों से देखा और लेट गए"— यह उनकी सलाह का संकेत था।
आप भी अनेक अवसरों पर बिना शब्दों का उच्चारण किए संवाद करते हैं। कब-कब? कहाँ-कहाँ? कुछ उदाहरण लिखिए।
उत्तर
उत्तर (नमूना उत्तर) : (1) कक्षा में शिक्षक के पढ़ाते समय मित्र को आँखों के इशारे से कुछ बताना। (2) पुस्तकालय में होंठों पर उँगली रखकर चुप रहने का संकेत देना। (3) खेल के मैदान में हाथ के इशारे से गेंद माँगना। (4) अतिथि के आने पर हाथ जोड़कर नमस्ते करना या सिर हिलाकर हाँ-ना कहना। (5) सड़क पार करते समय हाथ दिखाकर वाहन रुकवाना। (6) जीतने पर ताली बजाकर या अंगूठा दिखाकर शाबाशी देना।
विषयों से संवाद : भारतीय सांकेतिक भाषा
इस अंश में भारतीय सांकेतिक भाषा सीखने के लिए इंटरनेट कड़ियाँ (https://www.youtube.com/@ISLRTC, https://islrtc.nic.in/) दी गई हैं। इसमें कोई प्रश्न नहीं है; विद्यार्थी इन कड़ियों से नमस्ते, धन्यवाद, पानी, घर जैसे सरल संकेत सीखकर कक्षा में प्रस्तुत कर सकते हैं।
विषयों से संवाद : मार्ग खोजेंगे कैसे?
हीरा-मोती अपने घर के मार्ग से भटक गए थे। क्या कभी आपके साथ ऐसा हुआ है कि आप रास्ता भूल गए या भटक गए? तब आपने अपने मार्ग का पता कैसे लगाया था?
उत्तर
उत्तर (नमूना उत्तर) : हाँ, एक बार मेले में मैं अपने परिवार से बिछड़ गया/गई और रास्ता भूल गया/गई। पहले मैं घबरा गया/गई, फिर मैंने शांत रहकर मेले के सूचना-केंद्र पर तैनात पुलिसकर्मी को अपना नाम, पिताजी का नाम और मोबाइल नंबर बताया। उन्होंने माइक से घोषणा करवाई और कुछ ही देर में मेरे पिताजी वहाँ पहुँच गए। उस दिन से मुझे अपने घर का पता और फोन नंबर अच्छी तरह याद है।
यदि कोई व्यक्ति भटक जाए तो उसे क्या करना चाहिए कि वह सुरक्षित रूप से अपने गंतव्य तक पहुँच जाए। कक्षा में चर्चा कीजिए और लिखिए। (संकेत– ऑनलाइन मानचित्र, पुलिस, स्कूल, सरकारी भवन, विद्यार्थी, सड़क पर लगे सूचना-पट, दुकानों के बोर्डों पर लिखे पते, डाकघर आदि।)
उत्तर
भटकने पर सबसे पहले घबराना नहीं चाहिए और किसी सुरक्षित, भीड़-भाड़ वाले स्थान पर रुकना चाहिए। यदि मोबाइल हो तो ऑनलाइन मानचित्र से अपनी स्थिति देखें या परिवार को फोन करें। सड़क पर लगे सूचना-पट, मील के पत्थर और दुकानों के बोर्डों पर लिखे पते से जगह का नाम पता करें। मदद के लिए पुलिसकर्मी, डाकघर, विद्यालय या किसी सरकारी भवन के कर्मचारियों से पूछें। अनजान व्यक्ति के साथ अकेले कहीं न जाएँ। अपने घर का पूरा पता और एक-दो फोन नंबर हमेशा याद रखें।
आपके विद्यालय में आपदा की स्थिति में निकासी का मार्ग दर्शाने वाला मानचित्र अवश्य होगा। उसे ध्यानपूर्वक देखिए और पता लगाइए कि आपदा की स्थिति में आपकी कक्षा के सबसे निकट और सुरक्षित कौन-सा मार्ग है।
उत्तर
उत्तर (नमूना उत्तर) : हमारे विद्यालय के निकासी मानचित्र के अनुसार हमारी कक्षा पहली मंजिल पर है। आपदा की स्थिति में हमें कक्षा से निकलकर दाईं ओर की सीढ़ियों से नीचे उतरना है और मुख्य भवन के पीछे बने खेल के मैदान के 'सुरक्षित एकत्रण स्थल' पर पहुँचना है। लिफ्ट का प्रयोग नहीं करना है और कतार में, बिना धक्का-मुक्की के चलना है। (विद्यार्थी अपने विद्यालय के मानचित्र के अनुसार लिखें।)
सृजन
हीरा और मोती की दैनंदिनी— कहानी में हीरा और मोती आपस में मनुष्यों की तरह बातें करते दिखते हैं। कल्पना कीजिए कि वे लिख-पढ़ भी सकते हैं। हीरा या मोती की नजर से उस दिन की डायरी लिखिए जब उन्हें काँजीहाउस ले जाया गया। ("आज का दिन…" से आरंभ करें; भावनाएँ लिखें; अंत में आशा या संकल्प लिखें।)
उत्तर
उत्तर (नमूना उत्तर)
हीरा की डायरी
आज का दिन मेरे जीवन का सबसे कठिन दिन रहा। सुबह-सुबह हमें काँजीहौस में बंद कर दिया गया। कल मोती ने मेरी बात न मानी और मटर के खेत में घुस गया; मैं निकल सकता था, पर अपने भाई को अकेला कैसे छोड़ता? यहाँ सारा दिन चारे का एक तिनका भी नहीं मिला। भूख से पेट जल रहा है। चारों ओर भैंसें, बकरियाँ, घोड़े और गधे मुरदों की तरह पड़े हैं। हमने दीवार की नमकीन मिट्टी चाटकर मन बहलाया। मोती की हिम्मत टूट रही है, पर मैंने ठान लिया है कि यहाँ भूख से नहीं मरूँगा। इस कच्ची दीवार को तोड़कर ही रहूँगा। मुझे विश्वास है कि एक दिन हम झूरी के पास जरूर लौटेंगे।
आज के समाचार— मान लीजिए आप एक स्थानीय समाचार पत्र के संवाददाता हैं। अपने समाचार पत्र के लिए बैलों के काँजीहाउस से भागने का समाचार लिखिए। (शीर्षक दें; घटना का विवरण— कहाँ, कब, क्या हुआ; परिणाम और लोगों की प्रतिक्रिया।)
उत्तर
उत्तर (नमूना उत्तर)
दो बहादुर बैलों ने तोड़ी बेड़ियाँ, नौ-दस पशुओं को कराया आजाद
हमारे संवाददाता, (गाँव/कस्बे का नाम)। बीती रात कस्बे के काँजीहौस में एक अनोखी घटना घटी। मटर का खेत चरने के आरोप में बंद किए गए दो बैलों, हीरा और मोती, ने सींगों से बाड़े की कच्ची दीवार गिरा दी। लगभग दो घंटे की जोर-आजमाई के बाद आधी दीवार गिरते ही वहाँ भूखी-प्यासी पड़ी तीन घोड़ियाँ, बकरियाँ और भैंसें भाग निकलीं। बताया जाता है कि मोती ने डरे हुए दो गधों को भी सींगों से धकेलकर बाहर निकाला, जबकि रस्सी से बँधे होने के कारण हीरा नहीं भाग सका और मोती भी उसका साथ छोड़कर नहीं गया। सुबह कर्मचारियों में खलबली मच गई। गाँव वालों का कहना है कि काँजीहौस में पशुओं को चारा नहीं दिया जा रहा था। लोग इन बैलों की बहादुरी और मित्रता की प्रशंसा कर रहे हैं तथा प्रशासन से पशुओं की देखभाल की माँग कर रहे हैं।
कहानी का नया अंत— यदि बैल वापस न लौटते तो कहानी का अंत कैसे होता? कहानी का नया अंत लिखिए। (बैलों की नई जगह; झूरी की स्थिति।)
उत्तर
उत्तर (नमूना उत्तर) : दढ़ियल के साथ चलते हुए हीरा और मोती थककर एक गाँव के बाहर गिर पड़े। दढ़ियल ने उन्हें मरा समझकर वहीं छोड़ दिया। उसी गाँव के एक बूढ़े किसान रामदीन ने उन्हें देखा। उसने उन्हें पानी पिलाया, हरी घास खिलाई और अपने घर ले गया। कुछ ही दिनों में दोनों फिर से स्वस्थ हो गए और रामदीन के खेत जोतने लगे। रामदीन उन्हें बेटों की तरह प्यार करता था। उधर झूरी रोज द्वार पर बैठकर राह देखता, उसकी पत्नी को भी अपने कठोर व्यवहार पर पछतावा होता। एक दिन मेले में झूरी ने उन्हें पहचान लिया, पर उन्हें सुखी देखकर संतोष की साँस ली। हीरा और मोती अब एक बूढ़े किसान के घर शांति से रह रहे हैं।
चित्रकथा लेखन— 'दो बैलों की कथा' की एक घटना को चित्रकथा के रूप में दिया गया है। इन घटनाओं को पहचानिए। प्रत्येक घटना के लिए उपयुक्त संवाद और घटनाक्रम बताने वाले वाक्य लिखिए। (दृश्य का क्रम— बंद करना, भागने की योजना, दीवार तोड़ना, आजादी।)
उत्तर
यह घटना काँजीहौस से पशुओं के भागने की है।
चित्र | घटनाक्रम | संवाद (नमूना) |
चित्र 1 | हीरा और मोती काँजीहौस में बंद हैं; पास में भैंसें, बकरियाँ और गधे भूख से अधमरे पड़े हैं। | मोती : "मुझे तो मालूम होता है, प्राण निकल रहे हैं।" |
चित्र 2 | दोनों बैल दीवार की ओर देखकर भागने की योजना बनाते हैं। | हीरा : "इतनी जल्द हिम्मत न हारो भाई! आओ, दीवार तोड़ डालें।" |
चित्र 3 | हीरा और मोती सींगों से कच्ची दीवार पर चोट करते हैं और दीवार गिरने लगती है। | मोती : "अच्छा, तो ला, फिर मैं भी जोर लगाता हूँ।" |
चित्र 4 | दीवार टूटते ही बकरियाँ, घोड़ियाँ और अन्य पशु बाहर भाग निकलते हैं। | पशु : "अब हम आजाद हैं!" |
भाषा से संवाद : व्याकरण की बात — मेरे शब्द
कहानी में से पाँच ऐसे शब्द चुनकर लिखिए जो आपके लिए बिल्कुल नए हैं। अब उन शब्दों के अर्थ अपने अनुमान से लिखिए। इसके बाद उनके अर्थ शब्दकोश में से देखकर लिखिए।
उत्तर
उत्तर (नमूना उत्तर)
नया शब्द | मेरा अनुमानित अर्थ | शब्दकोश से अर्थ |
निरापद | बिना परेशानी वाला | आपत्ति से रहित, जिससे किसी को हानि न हो |
पगहा | गले का पट्टा | पशुओं को बाँधने की रस्सी |
गराँव | घंटी | बैलों के गले में बाँधी जाने वाली रस्सी, फंदा |
काँजीहौस | पशुओं का अस्पताल | आवारा या पराई फसल चरते पकड़े गए पशुओं को बंद करने का बाड़ा (मवेशीखाना) |
मसलहत | मजबूरी | हित की बात, समझदारी भरी नीति |
भाषा से संवाद : भाषा गढ़ते मुहावरे
कहानी में से चुनकर कुछ वाक्य नीचे दिए गए हैं। इन वाक्यों में मुहावरों को पहचानकर रेखांकित कीजिए। इन मुहावरों का प्रयोग करते हुए नए वाक्य बनाकर लिखिए।
उत्तर
कहानी का वाक्य | मुहावरा (अर्थ) | नया वाक्य |
1. झूरी के साले गया को घर तक गोईं ले जाने में दाँतों पसीना आ गया। | दाँतों पसीना आना (बहुत अधिक परिश्रम करना पड़ना) | पहाड़ की खड़ी चढ़ाई चढ़ने में पर्यटकों को दाँतों पसीना आ गया। |
2. उसका चेहरा देखकर अंतर्ज्ञान से दोनों मित्रों के दिल काँप उठे। | दिल काँप उठना (बहुत डर जाना) | भूकंप के झटके महसूस होते ही सबके दिल काँप उठे। |
3. झूरी की स्त्री ने बैलों को द्वार पर देखा, तो जल उठी। | जल उठना (क्रोध या ईर्ष्या से भर जाना) | भाई को नई साइकिल मिलते देख रोहन जल उठा। |
4. मोती दिल में ऐंठकर रह गया। | दिल में ऐंठकर रह जाना (मन मसोसकर, गुस्सा दबाकर रह जाना) | बड़ों के सामने कुछ न कह पाने पर वह दिल में ऐंठकर रह गया। |
5. आएगा तो दूर ही से खबर लूँगा। देखूँ कैसे ले जाता है। | खबर लेना (सबक सिखाना, दंड देना) | शिक्षक ने कहा कि कल गृहकार्य न लाने वालों की अच्छी खबर ली जाएगी। |
6. जी तोड़कर काम करते हैं, किसी से लड़ाई-झगड़ा नहीं करते, चार बातें सुनकर गम खा जाते हैं। | जी तोड़कर काम करना (पूरी लगन और परिश्रम से काम करना); गम खाना (अपमान या दुख चुपचाप सह लेना) | किसान जी तोड़कर काम करते हैं, तब फसल तैयार होती है। समझदार लोग छोटी-छोटी बातों पर गम खा जाते हैं। |
7. अगर वे भी ईंट का जवाब पत्थर से देना सीख जाते, तो शायद सभ्य कहलाने लगते। | ईंट का जवाब पत्थर से देना (कड़ा और करारा उत्तर देना) | सीमा पर हमारे सैनिकों ने शत्रु के हमले का ईंट का जवाब पत्थर से दिया। |
8. तो फिर वहीं मरो। बंदा तो नौ-दो ग्यारह होता है। | नौ-दो ग्यारह होना (भाग जाना) | पुलिस की गाड़ी देखते ही चोर नौ-दो ग्यारह हो गया। |
गतिविधियाँ
कविता (गीत) और अभिनंदन-पत्र— "बाल-सभा ने निश्चय किया, दोनों पशुवीरों को अभिनंदन-पत्र देना चाहिए।" (क) मान लीजिए कि बाल-सभा ने हीरा और मोती की प्रशंसा में एक गीत लिखा और गाया। अपनी कल्पना से वह गीत लिखिए। (ख) हीरा और मोती के लिए अभिनंदन-पत्र लिखिए।
उत्तर
उत्तर (नमूना उत्तर)
(क) गीत
हीरा-मोती, जोड़ी न्यारी, सारे गाँव की आँख के तारे,
रस्सी तोड़ी, राह न भूले, लौट के आए द्वार हमारे।
भूखे रहकर भी न झुके तुम, सहा न तुमने अत्याचार,
मिलकर जीते साँड़ से भी, एकता ही सबसे बड़ा हथियार।
हीरा-मोती, जोड़ी न्यारी, तुम पर गाँव करे अभिमान,
सच्चे मित्र, सच्चे सेवक, तुमको बाल-सभा का सलाम।
(ख) अभिनंदन-पत्र
परम साहसी पशुवीर हीरा और मोती,
हम गाँव की बाल-सभा के सभी सदस्य आपका हार्दिक अभिनंदन करते हैं। आपने अपने स्वामी झूरी के प्रति जो प्रेम और निष्ठा दिखाई है, वह अद्भुत है। मजबूत पगहे तोड़कर, अनजान रास्तों को पार कर आप अपने घर लौट आए। आपने सिखाया कि सच्चा प्रेम और स्वाभिमान किसी बंधन में नहीं रहता। आपकी आपसी मित्रता हम सबके लिए आदर्श है। हम आपके स्वस्थ और सुखी जीवन की कामना करते हैं तथा यह रोटी, गुड़ और चोकर प्रेम-भेंट के रूप में आपको अर्पित करते हैं।
आपके प्रशंसक
बाल-सभा, (गाँव का नाम)
बाल सभा में भाषण— मान लीजिए कि आपको बाल-सभा ने हीरा-मोती के लौटने के बाद भाषण देने के लिए बुलाया है। भाषण का विषय है— 'पशुओं के अधिकार'। अपना भाषण लिखिए और कक्षा में प्रस्तुत कीजिए।
उत्तर
उत्तर (नमूना उत्तर) : आदरणीय बड़ों और प्रिय साथियो! आज हम हीरा और मोती के लौटने की खुशी मना रहे हैं। पर क्या हमने सोचा है कि उन्हें इतने कष्ट क्यों सहने पड़े? क्योंकि हम पशुओं को केवल काम की वस्तु समझते हैं। पशु भी सुख-दुख, भूख-प्यास और अपमान महसूस करते हैं। उन्हें भरपेट भोजन, साफ पानी, आराम और इलाज पाने का अधिकार है। उन्हें मारना, उन पर क्षमता से अधिक बोझ लादना या भूखा रखना अपराध है। हमारे देश में पशु क्रूरता निवारण अधिनियम, 1960 भी यही कहता है। आइए, हम संकल्प लें कि अपने आस-पास के हर पशु के प्रति दया का व्यवहार करेंगे। धन्यवाद!
शीर्षक— इस कहानी के पाँच भाग हैं। कहानी के प्रत्येक भाग को अपने मन से उपयुक्त शीर्षक दीजिए।
उत्तर
उत्तर (नमूना उत्तर)
भाग | मुख्य घटना | शीर्षक |
भाग 1 | हीरा-मोती का परिचय, गया के घर भेजा जाना और रस्सी तुड़ाकर लौटना, मालकिन का क्रोध | घर की पुकार |
भाग 2 | गया के घर अत्याचार, छोटी लड़की का प्रेम और उसकी सहायता से भागना | अत्याचार और एक नन्हा सहारा |
भाग 3 | मटर का खेत, साँड़ से लड़ाई और काँजीहौस पहुँचना | एकता की जीत |
भाग 4 | काँजीहौस में भूख, दीवार तोड़ना और पशुओं को मुक्त कराना | बंधन में भी संघर्ष |
भाग 5 | नीलामी, कसाई के साथ जाना और अपने घर लौट आना | आजादी की वापसी |
गतिविधियाँ : मेरी पहेली
अपने समूह के साथ मिलकर ऐसी पहेलियाँ बनाइए जिनके उत्तर निम्नलिखित हों— हीरा, झूरी, मोती, गया, बैल, मटर, रस्सी, रोटी।
उत्तर
उत्तर (नमूना उत्तर)
पहेली | उत्तर |
शांत स्वभाव, धीरज भारी, गिरे शत्रु पर दया हमारी; रत्न का नाम, बैल हूँ मैं, बोलो कौन हूँ मैं? | हीरा |
किसान हूँ मैं, बैलों का प्यारा, फूल की छड़ी से भी न मारा; साले को सौंपे, फिर गले लगाए, बोलो मेरा नाम बताए। | झूरी |
सीप में पलता, माला में सजता, कहानी में गुस्सैल बैल बनता। | मोती |
झूरी का साला, निर्दयी भारी; जाने का अर्थ भी देता नाम हमारी। | गया |
दो सींग, चार पाँव, हल खींचूँ मैं सारे गाँव; किसान का साथी कहलाऊँ, बोलो क्या कहलाऊँ? | बैल |
हरी फली में गोल-गोल दाने, बैल चरें तो पकड़े जाने। | मटर |
लंबी-पतली, बल खाती, पशुओं को खूँटे से बाँध पाती। | रस्सी |
गोल-गोल, तवे पर फूले, लड़की लाई, बैल न भूले। | रोटी |
गतिविधियाँ : भाषा संगम
"कभी-कभी अड़ियल बैल भी देखने में आता है।"
इनके अतिरिक्त यदि आप 'बैल' शब्द को किसी और भाषा में भी जानते हैं तो उस भाषा में भी लिखिए।
उत्तर
अंग्रेजी में 'बैल' को 'ox' या 'bullock' कहते हैं। संस्कृत में 'वृषभ' के अतिरिक्त 'बलीवर्द' और 'अनडुह्' शब्द भी हैं। भोजपुरी और अवधी में भी 'बैल' या 'बरधा' बोला जाता है।
उत्तर
उपर्युक्त वाक्य को अपनी मातृभाषा में भी लिखिए।
उत्तर (नमूना उत्तर) : अंग्रेजी : "Sometimes a stubborn ox is also seen."
भोजपुरी : "कबो-कबो अड़ियल बैल भी देखे में आवेला।"
(विद्यार्थी अपनी मातृभाषा में लिखें।)
अतिरिक्त महत्वपूर्ण प्रश्न
बहुविकल्पीय प्रश्न
हीरा और मोती किस जाति के बैल थे?
उत्तर
(क) नागौरी (ख) पछाईं (ग) गिर (घ) साहीवाल
उत्तर : (ख) पछाईं
गया के घर बैलों को छिपकर रोटियाँ कौन खिलाता था?
उत्तर
(क) झूरी की पत्नी (ख) मजूर (ग) भैरो की छोटी लड़की (घ) गया का बेटा
उत्तर : (ग) भैरो की छोटी लड़की
"गिरे हुए बैरी पर सींग न चलाना चाहिए"— यह किसने कहा?
उत्तर
(क) मोती (ख) हीरा (ग) झूरी (घ) गया
उत्तर : (ख) हीरा
काँजीहौस की दीवार टूटने पर भी कौन-से पशु नहीं भागे?
उत्तर
(क) भैंसें (ख) बकरियाँ (ग) घोड़ियाँ (घ) गधे
उत्तर : (घ) गधे
प्रेमचंद का मूल नाम क्या था?
उत्तर
(क) धनपत राय (ख) नवाब राय (ग) अजायब राय (घ) प्रेम राय
उत्तर : (क) धनपत राय
लघु उत्तरीय प्रश्न
लेखक ने गधे को बुद्धिहीन कहे जाने पर क्या विचार प्रकट किया है?
उत्तर
लेखक के अनुसार गधा सचमुच मूर्ख है या उसके सीधेपन और सहनशीलता ने उसे यह पदवी दी है, यह निश्चित नहीं कहा जा सकता। उसमें ऋषियों-मुनियों के सभी गुण हैं, फिर भी मनुष्य उसे बेवकूफ कहता है। लेखक व्यंग्य करते हैं कि सीधापन संसार के लिए उपयुक्त नहीं है।
झूरी की पत्नी ने बैलों को 'नमक-हराम' क्यों कहा?
उत्तर
बैल गया के यहाँ से एक ही दिन में भागकर लौट आए थे। झूरी की पत्नी ने समझा कि वे कामचोर हैं और नए मालिक के यहाँ एक दिन भी काम न करके भाग आए, इसलिए उसने उन्हें 'नमक-हराम' कहा और उन्हें सूखा भूसा देने का आदेश दिया।
साँड़ को दोनों बैलों ने किस उपाय से हराया?
उत्तर
हीरा ने सुझाया कि दोनों एक साथ चोट करें— एक आगे से और दूसरा पीछे या बगल से। जब साँड़ एक पर झपटता, तो दूसरा उसके पेट में सींग भोंक देता। संगठित शत्रुओं से लड़ने का अनुभव न होने के कारण साँड़ घायल होकर भाग गया।
काँजीहौस में दीवार तोड़ने के पीछे हीरा का क्या उद्देश्य था?
उत्तर
हीरा केवल अपनी मुक्ति नहीं चाहता था। उसने कहा, "दीवार खुद जाती तो कितनी जानें बच जातीं। इतने भाई यहाँ बंद हैं।" उसका उद्देश्य भूख से मर रहे सभी पशुओं को आजाद कराना था, चाहे इसके लिए उसे स्वयं बंधन और मार सहनी पड़े।
दीर्घ उत्तरीय प्रश्न
'दो बैलों की कथा' के माध्यम से प्रेमचंद ने स्वतंत्रता आंदोलन की किन भावनाओं को व्यक्त किया है?
उत्तर
यह कहानी परोक्ष रूप से पराधीन भारत की कथा है। हीरा और मोती भारतीय जनता के प्रतीक हैं, जो सीधे और परिश्रमी होने के कारण शोषण सहते हैं। गया और काँजीहौस का क्रूर व्यवहार अंग्रेजी दमन जैसा है। बैलों का बार-बार बंधन तोड़ना, "जोर तो मारता ही जाऊँगा, चाहे कितने ही बंधन पड़ते जाएँ" कहना, और "मर जाऊँगा, पर उसके काम तो न आऊँगा" का संकल्प स्वतंत्रता सेनानियों की भावना है। लेखक बताते हैं कि आजादी सहज नहीं मिलती, उसके लिए एकता, साहस और बार-बार संघर्ष चाहिए। आरंभ में भारतीयों की अफ्रीका में दुर्दशा का उल्लेख भी यही संकेत देता है।
"हीरा और मोती की मित्रता आदर्श मित्रता है।" कहानी के आधार पर इस कथन की विवेचना कीजिए।
उत्तर
हीरा और मोती साथ खाते, साथ बैठते और एक-दूसरे को चाटकर प्रेम जताते थे। काम में भी हर एक चाहता था कि अधिक बोझ उसकी गरदन पर रहे। संकट में दोनों ने कभी एक-दूसरे का साथ नहीं छोड़ा— मोती खेत में फँसा तो हीरा लौट आया; हीरा काँजीहौस में बँधा रहा तो मोती भागा नहीं और बोला, "तुम मुझे इतना स्वार्थी समझते हो?" दोनों के स्वभाव भिन्न थे, पर वे एक-दूसरे की कमी पूरी करते थे; मोती का साहस और हीरा का विवेक मिलकर हर कठिनाई पर भारी पड़ा। त्याग, विश्वास और साथ निभाने की यह भावना उनकी मित्रता को आदर्श बनाती है।