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Class 12 Hindi Vitan Chapter 3

NCERT Solutions for Class 12 Hindi Vitan Chapter 3: अतीत में दबे पाँव

Class

Subject

Book

Chapter

Session

Questions covered

XII

Hindi

Vitan (NCERT)

3 – अतीत में दबे पाँव

2026-27

8 of 8

बिंदु

विवरण

लेखक

ओम थानवी (जन्म 1957, फलोदी, राजस्थान); पत्रकार, ‘जनसत्ता’ के संपादक

विधा

यात्रा-वृत्तांत / रिपोर्ताज

विषय

पाकिस्तान के सिंध प्रांत में स्थित सिंधु घाटी सभ्यता के सबसे बड़े नगर मुअनजो-दड़ो (‘मुर्दों का टीला’) की यात्रा

प्रमुख तथ्य

नियोजित नगर; 33 फुट चौड़ी मुख्य सड़क; ढकी नालियाँ; महाकुंड; लगभग सात सौ कुएँ; एक ही आकार की पक्की ईंटें; बौद्ध स्तूप (बाद में बना); अजायबघर में औज़ार हैं पर हथियार नहीं; ‘याजक-नरेश’ की मूर्ति

निष्कर्ष

‘लो-प्रोफ़ाइल’ सभ्यता — “लघुता में भी महत्ता अनुभव करने वाली संस्कृति”; सौंदर्य-बोध “राज-पोषित या धर्म-पोषित न होकर समाज-पोषित”

Q1

सिंधु-सभ्यता साधन-संपन्न थी, पर उसमें भव्यता का आडंबर नहीं था। कैसे?

Answer

उत्तर

साधन-संपन्नता: 1. मुअनजो-दड़ो सिंधु सभ्यता का सबसे बड़ा और साधनों-व्यवस्थाओं की दृष्टि से सबसे समृद्ध नगर था। 2. सुनियोजित नगर, चौड़ी सड़कें, ढकी हुई नालियाँ, पक्की ईंटों के मकान, महाकुंड, लगभग सात सौ कुएँ, अन्न-भंडार। 3. खेती (गेहूँ, जौ, कपास), सूती कपड़ा, रंगाई का कारख़ाना, ताँबे-काँसे की वस्तुएँ, आभूषण, मुहरें; सुमेर (मेसोपोटामिया) से व्यापार।

भव्यता का आडंबर नहीं: 1. वहाँ मिस्र के पिरामिडों या भव्य राजमहलों, विशाल मंदिरों, राजाओं की समाधियों जैसी कोई आडंबरपूर्ण संरचना नहीं मिली। 2. घर साधारण, एक जैसे और उपयोगी थे; ‘मुखिया’ का घर भी अत्यधिक भव्य नहीं। 3. मूर्तियाँ और कलाकृतियाँ छोटे आकार की हैं— “आकार की भव्यता की जगह उसमें कला की भव्यता दिखाई देती है।” 4. यह ‘लो-प्रोफ़ाइल’ सभ्यता थी— “लघुता में भी महत्ता अनुभव करने वाली संस्कृति”।

सिंधु सभ्यता नियोजित नगर, चौड़ी सड़कें, ढकी नालियाँ, महाकुंड, सैकड़ों कुएँ, खेती, सूती वस्त्र, धातु-कला और विदेश-व्यापार से साधन-संपन्न थी; पर उसमें पिरामिड, भव्य राजमहल, विशाल मंदिर या समाधियाँ नहीं थीं, घर साधारण-उपयोगी थे और कलाकृतियाँ छोटी — आकार की नहीं, कला की भव्यता थी; यह “लघुता में भी महत्ता” अनुभव करने वाली संस्कृति थी।

Q2

‘सिंधु-सभ्यता की खूबी उसका सौंदर्य-बोध है जो राज-पोषित या धर्म-पोषित न होकर समाज-पोषित था।’ ऐसा क्यों कहा गया?

Answer

उत्तर

  1. अन्य प्राचीन सभ्यताओं (मिस्र, मेसोपोटामिया) में कला राजाओं और धर्म-स्थलों के संरक्षण में पनपी— महल, पिरामिड, मंदिर, राजाओं की विशाल मूर्तियाँ।
  2. सिंधु सभ्यता में ऐसे भव्य राजमहल या मंदिर नहीं मिले; किसी राजा या पुरोहित के महिमामंडन के प्रमाण भी नहीं।
  3. वहाँ की कला सामान्य जन-जीवन से जुड़ी थी— धातु और पत्थर की मूर्तियाँ, मृद्-भांड, उन पर बने चित्र, मुहरें और उन पर उत्कीर्ण पशु-आकृतियाँ, खिलौने, केश-विन्यास, आभूषण, सुघड़ लिपि।
  4. नगर-नियोजन, एक-सी ईंटें, सड़कें, नालियाँ— ये सब पूरे समाज के हित में और सामूहिक रुचि से बने थे।
  5. कला उपयोगिता और सौंदर्य दोनों का मेल थी, जो आम लोगों के जीवन का हिस्सा थी।

अतः सिंधु सभ्यता की कला किसी सत्ता या धर्म के लिए नहीं, बल्कि समाज की सामूहिक रुचि और ज़रूरतों से विकसित हुई— इसलिए उसे समाज-पोषित कहा गया।

क्योंकि वहाँ अन्य सभ्यताओं की तरह राजाओं या धर्म के महिमामंडन वाले भव्य महल-मंदिर-मूर्तियाँ नहीं मिलीं; कला सामान्य जन-जीवन से जुड़ी थी — मृद्-भांड, मुहरें, खिलौने, आभूषण, केश-विन्यास, नगर-नियोजन — जो समाज की सामूहिक रुचि और उपयोगिता से विकसित हुई।

Q3

पुरातत्व के किन चिह्नों के आधार पर आप यह कह सकते हैं कि—“सिंधु-सभ्यता ताकत से शासित होने की अपेक्षा समझ से अनुशासित सभ्यता थी।”

Answer

उत्तर

  1. हथियारों का अभाव: अजायबघर में औज़ार तो हैं, पर हथियार कोई नहीं; हड़प्पा से हरियाणा तक समूची सिंधु सभ्यता में हथियार उस तरह नहीं मिले जैसे किसी राजतंत्र में होते हैं।
  2. भव्य राजमहल या शाही समाधियाँ नहीं: किसी निरंकुश राजा या सैन्य-शक्ति के प्रमाण नहीं।
  3. सुनियोजित नगर: सड़कों का समकोण पर काटना, ढकी नालियाँ, कूड़ेदान, एक-सी ईंटें, घरों की एक-सी वास्तु-शैली, द्वार मुख्य सड़क पर न खुलना— यह व्यवस्था लोगों की स्वेच्छा और समझ से पालन किए जाने वाले नियमों को दर्शाती है।
  4. सामूहिक सुविधाएँ: महाकुंड, अन्न-भंडार, कुएँ— पूरे समाज के हित की व्यवस्था।
  5. माप-तौल के पत्थर: व्यापार में ईमानदारी और व्यवस्था।
  6. समान जीवन-स्तर: बहुत बड़े और बहुत छोटे घरों में अत्यधिक अंतर नहीं।

इन चिह्नों से लगता है कि समाज डर या ताकत से नहीं, बल्कि आपसी समझ, अनुशासन और सामाजिक सहमति से संचालित था।

हथियारों का अभाव (केवल औज़ार), भव्य राजमहल-शाही समाधियों का अभाव, सुनियोजित नगर (समकोण सड़कें, ढकी नालियाँ, एक-सी ईंटें और वास्तु-शैली), सामूहिक सुविधाएँ (महाकुंड, अन्न-भंडार, कुएँ), माप-तौल के पत्थर और समान जीवन-स्तर — ये दर्शाते हैं कि समाज ताकत से नहीं, सामूहिक समझ और अनुशासन से चलता था।

Q4

‘यह सच है कि यहाँ किसी आँगन की टूटी-फूटी सीढ़ियाँ अब आप को कहीं नहीं ले जातीं; वे आकाश की तरफ़ अधूरी रह जाती हैं। लेकिन उन अधूरे पायदानों पर खड़े होकर अनुभव किया जा सकता है कि आप दुनिया की छत पर हैं, वहाँ से आप इतिहास को नहीं उस के पार झाँक रहे हैं।’ इस कथन के पीछे लेखक का क्या आशय है?

Answer

उत्तर

  1. मुअनजो-दड़ो के घरों की सीढ़ियाँ अब टूटी-फूटी हैं; ऊपर की मंज़िलें नष्ट हो चुकी हैं, इसलिए वे कहीं नहीं ले जातीं, आकाश की ओर अधूरी रह जाती हैं।
  2. परंतु उन पर खड़े होकर व्यक्ति को अनुभव होता है कि वह विश्व की सबसे प्राचीन और विकसित सभ्यताओं में से एक के शिखर पर खड़ा है— “दुनिया की छत” पर।
  3. वहाँ से वह केवल लिखित इतिहास को नहीं, बल्कि इतिहास के पार— उस समय की जीवंत संस्कृति, लोगों के रहन-सहन, उनकी भावनाओं और सपनों— की कल्पना कर सकता है।
  4. चूँकि सिंधु लिपि अभी तक पढ़ी नहीं गई, इसलिए यहाँ का इतिहास अधूरा है; ये अधूरी सीढ़ियाँ उसी अधूरे ज्ञान का प्रतीक हैं, जो कल्पना को उड़ान देती हैं।

आशय यह है कि ये खंडहर हमें अतीत से जोड़ते हैं और हमें मानव सभ्यता की ऊँचाइयों तथा उसके रहस्यों का अनुभव कराते हैं।

टूटी सीढ़ियाँ अब कहीं नहीं ले जातीं, पर उन पर खड़े होकर लगता है कि हम विश्व की सबसे विकसित प्राचीन सभ्यता के शिखर (“दुनिया की छत”) पर हैं; वहाँ से हम केवल लिखित इतिहास नहीं, बल्कि उसके पार — उस समय के लोगों के जीवंत जीवन, संस्कृति और सपनों — की कल्पना कर सकते हैं; अधूरी सीढ़ियाँ अधूरे (अनपढ़ी लिपि वाले) इतिहास का भी प्रतीक हैं।

Q5

टूटे-फूटे खंडहर, सभ्यता और संस्कृति के इतिहास के साथ-साथ धड़कती ज़िंदगियों के अनछुए समयों का भी दस्तावेज़ होते हैं— इस कथन का भाव स्पष्ट कीजिए।

Answer

उत्तर

  1. खंडहर केवल ईंट-पत्थर के ढेर नहीं, वे किसी सभ्यता के इतिहास, वास्तुकला, तकनीक, कला और संस्कृति के प्रमाण होते हैं।
  2. पर उनसे भी अधिक, वे उन साधारण लोगों के दैनिक जीवन के गवाह होते हैं, जो कभी वहाँ रहते, हँसते, काम करते, खेलते थे— जिनका नाम इतिहास की किताबों में दर्ज नहीं।
  3. मुअनजो-दड़ो में घरों, रसोई, कुओं, सड़कों, नालियों, खिलौनों, बर्तनों, चौपड़ की गोटियों, कंघी, आईने, कंगनों को देखकर लगता है कि लोग अभी-अभी यहाँ से गए हैं; लेखक कहता है कि सुनसान सड़क पर कान लगाकर बैलगाड़ी की “रुन-झुन” सुनी जा सकती है।
  4. इन अवशेषों से उन लोगों की रुचियों, विश्वासों, भावनाओं और जीवन-शैली के अनछुए क्षणों का अनुभव होता है।

इस प्रकार खंडहर जीवंत अतीत की धड़कन को सहेजे रहते हैं।

खंडहर किसी सभ्यता के इतिहास, कला और तकनीक के प्रमाण तो हैं ही, वे उन साधारण लोगों के दैनिक जीवन के भी गवाह हैं जिनका नाम इतिहास में नहीं — घर, रसोई, कुएँ, खिलौने, बर्तन, गोटियाँ, कंगन देखकर लगता है कि लोग अभी-अभी गए हैं; उनसे उस जीवंत जीवन के अनछुए क्षणों का अनुभव होता है।

Q6

इस पाठ में एक ऐसे स्थान का वर्णन है जिसे बहुत कम लोगों ने देखा होगा, परंतु इससे आपके मन में उस नगर की एक तसवीर बनती है। किसी ऐसे ऐतिहासिक स्थल, जिसको आपने नज़दीक से देखा हो, का वर्णन अपने शब्दों में कीजिए।

Answer

उत्तर

(नमूना वर्णन — कुतुब मीनार, दिल्ली)

पिछली सर्दियों में मैं परिवार के साथ दिल्ली के महरौली स्थित कुतुब मीनार देखने गया। दूर से ही लाल बलुआ पत्थर की लगभग 73 मीटर ऊँची मीनार आकाश को छूती दिखाई दी। इसका निर्माण कुतुबुद्दीन ऐबक ने शुरू कराया था और इल्तुतमिश ने पूरा कराया। मीनार की पाँच मंज़िलें हैं; हर मंज़िल पर बालकनी है और दीवारों पर क़ुरान की आयतें व सुंदर बेल-बूटे उकेरे गए हैं। नीचे की मंज़िलें लाल पत्थर की और ऊपरी मंज़िलें संगमरमर से सजी हैं।

परिसर में ही लौह स्तंभ है, जो लगभग 1600 वर्षों से खुले में खड़ा है, फिर भी उस पर जंग नहीं लगा— यह प्राचीन भारतीय धातु-विज्ञान का चमत्कार है। पास में कुव्वत-उल-इस्लाम मस्जिद के खंडहर, अलाई दरवाज़ा और अधूरी अलाई मीनार हैं। टूटे खंभों पर हिंदू-जैन मंदिरों की नक्काशी दिखती है।

घूमते हुए लगा कि इन पत्थरों में सदियों का इतिहास, अनेक शासकों की महत्वाकांक्षाएँ और उन कारीगरों की मेहनत छिपी है जिनके नाम कोई नहीं जानता। शाम की रोशनी में मीनार सुनहरी लग रही थी— अतीत का एक जीवंत दस्तावेज़।

किसी देखे हुए ऐतिहासिक स्थल (जैसे कुतुब मीनार) का वर्णन — स्थान, इतिहास (निर्माता, काल), वास्तुकला और विशेषताएँ (मंज़िलें, नक्काशी, लौह स्तंभ, आस-पास के खंडहर), और अपनी अनुभूति कि ये पत्थर सदियों के इतिहास और अनाम कारीगरों की मेहनत के जीवंत दस्तावेज़ हैं।

Q7

नदी, कुएँ, स्नानागार और बेजोड़ निकासी व्यवस्था को देखते हुए लेखक पाठकों से प्रश्न पूछता है कि क्या हम सिंधु घाटी सभ्यता को जल-संस्कृति कह सकते हैं? आपका जवाब लेखक के पक्ष में है या विपक्ष में? तर्क दें।

Answer

उत्तर

मेरा उत्तर लेखक के पक्ष में है— सिंधु घाटी सभ्यता को जल-संस्कृति कहा जा सकता है।

तर्क: 1. नदी के किनारे बसावट: यह सभ्यता सिंधु और उसकी सहायक नदियों के किनारे विकसित हुई; नदी ही खेती, व्यापार और जीवन का आधार थी। 2. कुएँ: इतिहासकारों के अनुसार सिंधु घाटी सभ्यता संसार की पहली ज्ञात संस्कृति है जो कुएँ खोदकर भू-जल तक पहुँची; केवल मुअनजो-दड़ो में लगभग सात सौ कुएँ थे। 3. महाकुंड (स्नानागार): पक्की ईंटों और चूने-चिरोड़ी के गारे से बना, ताकि पानी न रिसे; पानी भरने-निकालने की व्यवस्था; संभवतः धार्मिक अनुष्ठानों के लिए— जल का सांस्कृतिक महत्व। 4. घरों में स्नानघर: लगभग हर घर में स्नानघर और जल-निकासी की व्यवस्था। 5. बेजोड़ निकासी व्यवस्था: ढकी हुई नालियाँ, जो पानी को नगर से बाहर ले जाती थीं— स्वच्छता के प्रति जागरूकता। 6. खेती और व्यापार: सिंचाई और नदी-मार्ग से व्यापार।

इस प्रकार जीवन, धर्म, स्वच्छता, कृषि और व्यापार— सब जल से जुड़े थे, इसलिए इसे जल-संस्कृति कहना उचित है।

पक्ष में: सभ्यता नदी किनारे बसी; यह कुएँ खोदकर भू-जल तक पहुँचने वाली पहली ज्ञात संस्कृति थी (मुअनजो-दड़ो में ~700 कुएँ); पक्की ईंटों का महाकुंड, घर-घर स्नानघर, ढकी नालियों की बेजोड़ निकासी व्यवस्था, सिंचाई और नदी-मार्ग से व्यापार — जीवन, धर्म, स्वच्छता और अर्थव्यवस्था सब जल से जुड़े थे, अतः इसे जल-संस्कृति कहना उचित है।

Q8

सिंधु घाटी सभ्यता का कोई लिखित साक्ष्य नहीं मिला है। सिर्फ़ अवशेषों के आधार पर ही धारणा बनाई है। इस लेख में मुअनजो-दड़ो के बारे में जो धारणा व्यक्त की गई है। क्या आपके मन में इससे कोई भिन्न धारणा या भाव भी पैदा होता है? इन संभावनाओं पर कक्षा में समूह-चर्चा करें।

Answer

उत्तर

लेख की धारणा: सिंधु सभ्यता शांतिप्रिय, समाज-पोषित, आडंबरहीन, ‘लो-प्रोफ़ाइल’, समझ से अनुशासित और कला-सिद्ध थी।

समूह-चर्चा में उभरने वाली भिन्न संभावनाएँ: 1. हथियारों का अभाव ≠ पूर्ण शांति: संभव है हथियार लकड़ी जैसी नष्ट होने वाली सामग्री के रहे हों, या वे अन्य स्थानों पर हों जिनकी खुदाई अभी नहीं हुई। कुछ विद्वान मोटी दीवारों और ऊँचे चबूतरों (दुर्ग-क्षेत्र) को सुरक्षा व्यवस्था मानते हैं। 2. शासन-व्यवस्था: बड़े घर (‘मुखिया का घर’), ‘याजक-नरेश’ की मूर्ति और नगर के ऊँचे भाग (गढ़) में अभिजात वर्ग का निवास किसी प्रकार के शासक या पुरोहित वर्ग की ओर संकेत करता है; समाज पूरी तरह समतावादी नहीं रहा होगा। 3. सामाजिक असमानता: छोटे और बड़े घरों का अंतर, निचले शहर में कामगारों के छोटे घर— वर्ग-भेद की संभावना। 4. धर्म की भूमिका: महाकुंड, पशुपति जैसी मुहर, मातृदेवी की मूर्तियाँ— धार्मिक विश्वासों का महत्वपूर्ण स्थान रहा होगा। 5. पतन के कारण: बाढ़, नदी का मार्ग बदलना, जलवायु परिवर्तन, व्यापार में गिरावट या बाहरी आक्रमण— निश्चित नहीं। 6. लिपि पढ़ी जाने पर हमारी अनेक धारणाएँ बदल सकती हैं।

निष्कर्ष: अवशेषों पर आधारित धारणाएँ अनुमान हैं; लिपि पढ़ी जाने और नई खुदाइयों से ही सत्य स्पष्ट होगा। फिर भी उपलब्ध प्रमाण एक उन्नत, सुव्यवस्थित और कला-प्रेमी सभ्यता की ओर संकेत करते हैं।

लेख इसे शांतिप्रिय, आडंबरहीन, समाज-पोषित सभ्यता मानता है। भिन्न संभावनाएँ: हथियार नष्ट होने वाली सामग्री के रहे हों या अभी न मिले हों; दुर्ग-क्षेत्र, ‘मुखिया का घर’ और ‘याजक-नरेश’ किसी शासक/पुरोहित वर्ग का संकेत; घरों के आकार में अंतर से वर्ग-भेद; धर्म की महत्वपूर्ण भूमिका; पतन के कारण अनिश्चित। निष्कर्ष — ये अनुमान हैं, लिपि पढ़ी जाने पर धारणाएँ बदल सकती हैं।

विषय-सूची की जाँच

  • ☒ आडंबरहीनता, समाज-पोषित सौंदर्य-बोध, समझ से अनुशासन (प्रश्न 1–3)
  • ☒ अधूरी सीढ़ियाँ, खंडहर दस्तावेज़ (प्रश्न 4–5)
  • ☒ ऐतिहासिक स्थल, जल-संस्कृति, भिन्न धारणाएँ (प्रश्न 6–8)

Total questions answered: 8 of 8

Frequently Asked Questions

What do these NCERT solutions for Class 12 Hindi Vitan Chapter 3 (अतीत में दबे पाँव) cover?

All 8 questions from the latest NCERT textbook for this chapter are answered step by step.

Are these solutions based on the new NCERT syllabus?

Yes. The answers follow the current NCERT textbook for Class 12 Hindi Vitan and the latest CBSE syllabus, so the question numbers and wording match the book you use in class.

How should I use these solutions to prepare for exams?

Attempt each question on your own first, then compare your working with the answer here. Note the steps or keywords you missed, and revise the chapter notes before taking a chapter-wise MCQ test to check your understanding.

Are the NCERT solutions for Class 12 Hindi Vitan Chapter 3 (अतीत में दबे पाँव) free?

Yes. All Circle of Learning NCERT solutions and chapter notes are free to read online, with no sign-up needed.