Class | Subject | Book | Chapter | Session | Questions covered |
|---|---|---|---|---|---|
XI | Hindi | Antra (NCERT) | 1 – ईदगाह | 2026-27 | 12 of 12 |
बिंदु | विवरण |
|---|---|
लेखक | प्रेमचंद (मूल नाम धनपतराय; जन्म 1880, लमही, वाराणसी) |
विधा | कहानी (आदर्शोन्मुख यथार्थवाद) |
पात्र | हामिद, उसकी दादी अमीना, मोहसिन, महमूद, नूरे, सम्मी, चौधरी कायम अली |
कथानक | ईद के मेले में चार-पाँच साल का अनाथ हामिद मिठाई-खिलौनों की जगह दादी के लिए चिमटा खरीदता है ताकि रोटी सेंकते समय उसके हाथ न जलें |
संदेश | त्याग, ममता, समझदारी, ग़रीबी में भी आत्मसम्मान; धर्म जोड़ता है |
‘ईदगाह’ कहानी के उन प्रसंगों का उल्लेख कीजिए जिनसे ईद के अवसर पर ग्रामीण परिवेश का उल्लास प्रकट होता है।
Answer
उत्तर
कहानी में ईद की खुशी के ये प्रसंग उभरते हैं:
- ईद की सुबह: तीस रोज़ों के बाद ईद आई है। खेतों में हरियाली है, आसमान साफ़ और ठंडी हवा चल रही है; सूरज भी जैसे ईद की बधाई दे रहा है।
- गाँव में हलचल: लोग जल्दी से तैयार होकर ईदगाह चलने की जल्दी में हैं। किसी की जेब में पैसे नहीं, तो भी उत्साह कम नहीं। सभी नए कपड़े पहनकर घर से निकलते हैं।
- बच्चों का उत्साह: हामिद, महमूद, मोहसिन, नूरे और सम्मी आपस में बातें करते, हिसाब लगाते चलते हैं। उन्हें कोई फ़िक्र नहीं, केवल ईदगाह और मेले की लगन है।
- रास्ते के दृश्य: शहर के पास आते-आते बड़ी-बड़ी इमारतें, कचहरी, पुलिस लाइन, कॉलेज और बाग़ दिखाई देते हैं।
- ईदगाह में नमाज़: हज़ारों लोग साथ-साथ कतार में नमाज़ पढ़ते हैं, और फिर एक-दूसरे से गले मिलते हैं।
- मेले का आनंद: मिठाइयों, खिलौनों, झूलों और चरखी की दुकानें हैं, जहाँ बच्चे खुशी से खरीदारी और खेल का आनंद लेते हैं।
सुबह का सुहावना मौसम, बच्चों का उत्साह, नमाज़ और गले मिलना, तथा मेले की रौनक ईद के उल्लास को प्रकट करते हैं।
‘उसके अंदर प्रकाश है, बाहर आशा। विपत्ति अपना सारा दलबल लेकर आए, हामिद की आनंद भरी चितवन उसका विध्वंस कर देगी।’ — इस कथन से लेखक का क्या आशय है?
Answer
उत्तर
लेखक का आशय यह है कि हामिद का भीतर प्रकाश (ज्ञान, विश्वास, संतोष) से भरा है और बाहर आशा है। इसलिए गरीबी, अनाथ होने और अभावों की सारी विपत्तियाँ भी उसकी निश्छल, आनंद भरी दृष्टि के आगे हार जाएँगी।
- हामिद के माता-पिता नहीं हैं, वह दादी के साथ अभाव में रहता है, फिर भी वह निराश नहीं है।
- उसे अपने मन में भरोसा है कि अल्लाह और अब्बा-अम्मी की आशीष उसके साथ है।
- यही आत्मविश्वास और मासूम आशावाद उसे दुख के सामने निडर बनाता है।
हामिद के भीतर आत्मविश्वास और बाहर आशा है, इसलिए अभाव और विपत्ति भी उसकी प्रसन्नता को नष्ट नहीं कर सकती।
‘उन्हें क्या खबर कि चौधरी आज आँखें बदल लें, तो यह सारी ईद मुहर्रम हो जाए।’ — इस कथन का आशय स्पष्ट कीजिए।
Answer
उत्तर
प्रसंग: यह वाक्य उन गरीब किसानों के बच्चों के बारे में है जो ईद की खुशी में मग्न हैं।
आशय
- गाँव के अधिकतर लोग चौधरी कायम अली जैसे संपन्न व्यक्ति के कर्ज़ और कृपा पर निर्भर हैं।
- बच्चे खुश हैं, उन्हें अपने माता-पिता की आर्थिक मजबूरी का पता नहीं।
- यदि चौधरी नाराज़ होकर ‘आँखें बदल लें’ (मदद बंद कर दें, कर्ज़ वसूलने लगें या मुकदमा करा दें), तो यह सारी खुशी मुहर्रम (शोक) में बदल जाएगी।
इस कथन से किसानों की आर्थिक निर्भरता और समाज में गरीबों की लाचारी पर व्यंग्य है।
गरीब ग्रामीण चौधरी की कृपा पर निर्भर हैं; उनके नाराज़ होते ही ईद का आनंद मातम में बदल सकता है।
‘मानो भ्रातृत्व का एक सूत्र इन समस्त आत्माओं को एक लड़ी में पिरोए हुए है।’ इस कथन के संदर्भ में स्पष्ट कीजिए कि ‘धर्म तोड़ता नहीं जोड़ता है।’
Answer
उत्तर
ईदगाह में हज़ारों लोग पंक्तिबद्ध खड़े होकर एक साथ झुकते, सजदा करते और उठते हैं। वहाँ न कोई ऊँच-नीच है, न अमीर-गरीब; सब बराबर हैं।
- इस दृश्य में लगता है मानो एक ही भाईचारे का धागा सब आत्माओं को माला की तरह जोड़े है।
- नमाज़ के बाद सब गले मिलते हैं। इससे साफ़ है कि धर्म लोगों को एक करता है, बाँटता नहीं।
- धर्म का सच्चा रूप प्रेम, समानता और सहयोग है। भेदभाव और झगड़े धर्म के नाम पर स्वार्थी लोग पैदा करते हैं।
ईदगाह की सामूहिक नमाज़ भाईचारे और समानता का प्रतीक है; इससे सिद्ध होता है कि धर्म जोड़ता है, तोड़ता नहीं।
निम्नलिखित गद्यांशों की सप्रसंग व्याख्या कीजिए —
(क) कई बार यही क्रिया होती है…… आत्माओं को एक लड़ी में पिरोए हुए है।
(ख) बुढ़िया का क्रोध …… स्वाद से भरा हुआ।
Answer
उत्तर
(क)
प्रसंग: यह गद्यांश प्रेमचंद की कहानी ‘ईदगाह’ से है। इसमें ईदगाह पर सामूहिक नमाज़ का दृश्य है।
व्याख्या: हज़ारों लोग एक साथ कतारों में खड़े होते हैं, एक साथ झुकते हैं, सजदे में गिरते हैं, फिर उठते हैं और बार-बार यही क्रिया दोहराते हैं। यह दृश्य ऐसा लगता है जैसे लाल बत्तियों की पंक्तियाँ एक के बाद एक जल-बुझ रही हों। सब लोग अनुशासन और एकता में बँधे हैं, और लगता है कि भाईचारे का एक सूत्र इन सब आत्माओं को एक माला में पिरोए हुए है।
विशेष: (1) चित्रात्मक वर्णन; (2) समानता और एकता का भाव; (3) उपमा और रूपक का प्रयोग।
(ख)
प्रसंग: जब हामिद मेले से मिठाई-खिलौनों की जगह चिमटा लेकर आता है तो अमीना पहले उस पर नाराज़ होती है।
व्याख्या: जब हामिद बताता है कि उसने चिमटा इसलिए खरीदा कि रोटियाँ सेंकते समय दादी के हाथ जल जाते थे, तब अमीना का क्रोध तुरंत स्नेह में बदल जाता है। यह स्नेह मुखर नहीं था, जो अपनी पूरी कसक शब्दों में उँड़ेल देता है, बल्कि मूक, ठोस, और रस तथा स्वाद से भरा हुआ था। वह रो पड़ी और हामिद को दुआएँ देने लगी।
विशेष: (1) ममता का भावपूर्ण चित्रण; (2) क्रोध से स्नेह में परिवर्तन; (3) भाषा सरल और मार्मिक।
(क) नमाज़ के दृश्य में एकता और भाईचारे का चित्रण; (ख) हामिद के त्याग को जानकर अमीना का क्रोध मूक स्नेह में बदल गया।
हामिद ने चिमटे की उपयोगिता को सिद्ध करते हुए क्या-क्या तर्क दिए?
Answer
उत्तर
जब दूसरे बच्चे अपने खिलौनों को श्रेष्ठ बताने लगे, तब हामिद ने चिमटे के पक्ष में ये तर्क दिए:
- मज़बूती: मिट्टी के खिलौने ज़रा-सी चोट में टूट जाते हैं, पर चिमटा लोहे का है। उसने उसे ‘रुस्तमे हिंद’ कहा।
- वीरता: चिमटा कंधे पर बंदूक की तरह रखा जा सकता है, और फ़कीर की तरह हाथ में लेकर शेर तक को भगाया जा सकता है।
- उपयोगिता: यह रोज़ के काम आता है। दादी जब तवे से रोटी उतारती है तो हाथ जलते हैं, चिमटे से नहीं जलेंगे।
- खिलौनों को हराना: सिपाही, भिश्ती और वकील जैसे खिलौने चिमटे के एक वार से गिर जाएँगे। उसके मुकाबले के सामने कोई नहीं टिक सकता।
- उसने तर्क देकर साथियों को चुप करा दिया और वे भी उसके तर्क के कायल हो गए।
हामिद के तर्क थे: चिमटा मज़बूत, उपयोगी, वीरतापूर्ण है और खिलौनों को हरा सकता है, जबकि मिट्टी के खिलौने नाज़ुक हैं।
गाँव से शहर जानेवाले रास्ते के मध्य पड़नेवाले स्थलों का ऐसा वर्णन लेखक ने किया है मानो आँखों के सामने चित्र उपस्थित हो रहा हो। अपने घर और विद्यालय के मध्य पड़नेवाले स्थानों का अपने शब्दों में वर्णन कीजिए।
Answer
उत्तर
(नमूना वर्णन, अपने रास्ते के आधार पर लिखें)
मेरे घर से विद्यालय का रास्ता लगभग दो किलोमीटर लंबा है। घर से निकलते ही सबसे पहले हमारी गली आती है, जहाँ सुबह दूध वाले और अख़बार वाले दिखते हैं। गली के मोड़ पर एक पुराना शिव मंदिर है जिसकी घंटियाँ सुबह-सुबह बजती रहती हैं। उसके आगे बड़ा-सा खेल का मैदान है जहाँ बच्चे क्रिकेट खेलते हैं। फिर मुख्य सड़क पर चौराहा है, जहाँ सब्ज़ी मंडी लगती है और ठेलों की भीड़ रहती है। चौराहे के पास डाकघर और बैंक हैं। यहाँ से सड़क पार करके एक छोटा-सा पुल और उसके बाद हरा-भरा पार्क आता है। पार्क के पास ही मेरा विद्यालय है, जिसका बड़ा फाटक और झंडा दूर से ही दिखाई देता है।
घर से विद्यालय तक के स्थलों का क्रमवार, चित्रात्मक वर्णन (गली, मंदिर, मैदान, चौराहा, पुल, पार्क)।
‘बच्चे हामिद ने बूढ़े हामिद का पार्ट खेला था। बुढ़िया अमीना बालिका अमीना बन गई।’ इस कथन में ‘बूढ़े हामिद’ और ‘बालिका अमीना’ से लेखक का क्या आशय है? स्पष्ट कीजिए।
Answer
उत्तर
- ‘बूढ़ा हामिद’: हामिद है तो छोटा बच्चा, पर उसने चिमटा खरीदकर बुज़ुर्गों जैसी समझदारी, ज़िम्मेदारी और त्याग दिखाया। उसने अपनी इच्छाओं को दबाकर दादी का दुख समझा, और जैसे एक अभिभावक की तरह उसका ध्यान रखा।
- ‘बालिका अमीना’: अमीना बूढ़ी दादी है, पर हामिद की इस भावना को देखकर वह भावुक होकर बच्ची की तरह रोने लगी और उसे दुआएँ देने लगी।
इस प्रकार दोनों की भूमिकाएँ उलट गईं। बच्चा बड़े की तरह और बड़ी, बच्चे की तरह व्यवहार करने लगी।
हामिद ने बड़ों जैसी समझदारी दिखाई और अमीना भावुक होकर बच्ची की तरह रो पड़ी; दोनों की भूमिकाएँ बदल गईं।
‘दामन फैलाकर हामिद को दुआएँ देती जाती थी और आँसू की बड़ी-बड़ी बूँदें गिराती जाती थी। हामिद इसका रहस्य क्या समझता!’ — लेखक के अनुसार हामिद अमीना की दुआओं और आँसुओं के रहस्य को क्यों नहीं समझ पाया? कहानी के आधार पर स्पष्ट कीजिए।
Answer
उत्तर
- हामिद बालक है। उसके लिए चिमटा केवल दादी के हाथ जलने से बचाने का साधन था।
- उसे अपने त्याग की महानता का पता नहीं। उसने सहज भाव से खिलौने-मिठाई छोड़ दी थी।
- अमीना के आँसू ख़ुशी, गर्व, ममता और भावुकता के थे, जिन्हें समझने के लिए अनुभव और परिपक्वता चाहिए। हामिद इतना बड़ा नहीं था कि वह भावनाओं की गहराई को समझ सके।
- वह सोच रहा था कि दादी गुस्सा हैं, पर वह रो क्यों रही है, इसका उसके पास उत्तर नहीं था।
हामिद बच्चा था और अपने त्याग तथा दादी की ममता की गहराई को समझने की परिपक्वता उसमें नहीं थी।
हामिद की जगह आप होते तो क्या करते?
Answer
उत्तर
(व्यक्तिगत उत्तर; एक संभावित उत्तर)
यदि मैं हामिद की जगह होता, तो मैं भी अपनी दादी की तकलीफ़ को ध्यान में रखकर उनके काम की कोई चीज़ खरीदता। मैं शायद चिमटा ही लेता, पर मैं अपने दोस्तों से झगड़ा करने की जगह उन्हें प्यार से समझाता। साथ ही, मैं थोड़ी-सी रकम से खुद भी कुछ मीठा या छोटा खिलौना ले लेता, ताकि मेरी खुशी भी बनी रहे, पर पहले दादी की ज़रूरत को पूरा करता। मैं घर पहुँचकर दादी को पूरी बात बता देता ताकि वे नाराज़ न हों।
मैं भी दादी की ज़रूरत को प्राथमिकता देता और अपनी इच्छा भी संतुलित रखता।
योग्यता-विस्तार
प्रेमचंद की कहानियों का संग्रह ‘मानसरोवर’ नाम से आठ भागों में प्रकाशित है। अपने पुस्तकालय से लेकर उसे पढ़िए।
Answer
उत्तर
यह एक पठन-कार्य है। ‘मानसरोवर’ के आठ भागों में प्रेमचंद की तीन सौ से अधिक कहानियाँ संकलित हैं। विद्यार्थी इन कहानियों से शुरुआत कर सकते हैं: पंच परमेश्वर, बड़े घर की बेटी, दो बैलों की कथा, पूस की रात, नमक का दारोगा, कफ़न, ठाकुर का कुआँ। पढ़ने के बाद प्रत्येक कहानी की मुख्य घटना, पात्र और संदेश अपनी कॉपी में लिख लें।
पठन-गतिविधि: ‘मानसरोवर’ से कुछ कहानियाँ पढ़कर उनका सार लिखें।
इस कहानी में लोक प्रचलित मुहावरों की भरमार है, जैसे — नानी मरना, छक्के छूटना आदि। इसमें आए मुहावरों की एक सूची तैयार कीजिए।
Answer
उत्तर
मुहावरा | अर्थ |
|---|---|
नानी मरना | बहुत कठिनाई या डर महसूस होना |
छक्के छूटना | बुरी तरह परेशान या पस्त हो जाना |
आँखें बदलना | नाराज़ होकर व्यवहार बदल लेना (कहानी में प्रयुक्त) |
ईद का मुहर्रम हो जाना | खुशी का शोक में बदल जाना |
रुस्तमे हिंद | बहुत बलवान व्यक्ति या वस्तु |
कलेजा ठंडा होना | संतोष या शांति मिलना |
दाँतों तले उँगली दबाना | आश्चर्य में पड़ जाना |
सिर पर सवार होना | हर समय परेशान करना |
(पाठ पढ़कर सूची में और मुहावरे जोड़ें; ऊपर दिए कुछ मुहावरे पाठ-संदर्भ से हैं और शेष लोक-प्रचलित मुहावरों के नमूने हैं।)
मुहावरों की सूची और उनके अर्थ ऊपर दी गई तालिका में हैं।
विषय-सूची की जाँच
- ☒ ग्रामीण परिवेश और ईद का उल्लास (प्रश्न 1)
- ☒ हामिद का चरित्र और आशावाद (प्रश्न 2, 6, 9, 10)
- ☒ सामाजिक यथार्थ और भाईचारा (प्रश्न 3, 4, 5)
- ☒ भूमिकाओं का उलटना (प्रश्न 8)
- ☒ अभिव्यक्ति और विस्तार (प्रश्न 7, 11, 12)