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Class 10 Hindi Sparsh Chapter 13

NCERT Solutions for Class 10 Hindi Sparsh Chapter 13: पतझर में टूटी पत्तियाँ (रवींद्र केलेकर)

रवींद्र केलेकर के पाठ 'पतझर में टूटी पत्तियाँ' में दो प्रेरक प्रसंग हैं। 'गिन्नी का सोना' में शुद्ध सोने और ताँबा मिले गिन्नी के सोने के उदाहरण से आदर्शवादिता और व्यावहारिकता का अंतर समझाया गया है, और गांधीजी को आदर्शों पर चलने वाला व्यावहारिक व्यक्ति बताया गया है। 'झेन की देन' में जापान की 'टी-सेरेमनी' (चा-नो-यू) के माध्यम से भाग-दौड़ और तनाव भरे जीवन में वर्तमान क्षण में जीने का महत्व बताया गया है।

NCERT पाठ्यपुस्तक प्रश्न-उत्तर: मौखिक

प्रश्न 1. शुद्ध सोना और गिन्नी का सोना अलग क्यों होता है?

उत्तर : शुद्ध सोने में कोई मिलावट नहीं होती (24 कैरेट), जबकि गिन्नी के सोने में थोड़ा-सा ताँबा मिलाया जाता है (22 कैरेट)। ताँबा मिलाने से गिन्नी का सोना अधिक चमकीला और शुद्ध सोने से अधिक मज़बूत हो जाता है, इसलिए दोनों अलग होते हैं।

प्रश्न 2. प्रैक्टिकल आइडियालिस्ट किसे कहते हैं?

उत्तर : जो लोग अपने शुद्ध आदर्शों में व्यावहारिकता का थोड़ा-सा ताँबा मिलाकर उन्हें चलाकर दिखाते हैं, उन्हें 'प्रैक्टिकल आइडियालिस्ट' (व्यावहारिक आदर्शवादी) कहा जाता है।

प्रश्न 3. पाठ के संदर्भ में शुद्ध आदर्श क्या है?

उत्तर : पाठ के संदर्भ में शुद्ध आदर्श वे सिद्धांत और मूल्य हैं जिनमें व्यावहारिकता या स्वार्थ (लाभ-हानि के हिसाब) की कोई मिलावट न हो। लेखक ने इन्हें शुद्ध सोने के समान बताया है।

प्रश्न 4

लेखक ने जापानियों के दिमाग में 'स्पीड' का इंजन लगने की बात क्यों कही है?

उत्तर

जापानी लोग अमेरिका से प्रतिस्पर्धा करने लगे और एक महीने का काम एक दिन में पूरा करने की कोशिश करने लगे। उनके जीवन की रफ़्तार इतनी बढ़ गई कि मानो दिमाग में 'स्पीड' का इंजन लग गया हो, जिससे दिमाग हज़ार गुना तेज़ दौड़ने लगता है और अंत में तनाव से इंजन टूट जाता है।

प्रश्न 5. जापानी में चाय पीने की विधि को क्या कहते हैं?

उत्तर : जापानी में चाय पीने की विधि ('टी-सेरेमनी') को 'चा-नो-यू' कहते हैं।

प्रश्न 6

जापान में जहाँ चाय पिलाई जाती है, उस स्थान की क्या विशेषता है?

उत्तर

वह स्थान एक छः मंज़िली इमारत की छत पर बनी सुंदर पर्णकुटी थी, जिसकी दीवारें दफ़्ती की और ज़मीन तातामी (चटाई) की थी। बाहर पानी भरा एक बेढब-सा मिट्टी का बरतन था। वहाँ का वातावरण इतना शांत था कि चायदानी के पानी का खदबदाना भी सुनाई देता था, और वहाँ तीन से अधिक लोगों को प्रवेश नहीं दिया जाता था।

लिखित (क): निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर (25-30 शब्दों में) लिखिए

प्रश्न 1

शुद्ध आदर्श की तुलना सोने से और व्यावहारिकता की तुलना ताँबे से क्यों की गई है?

उत्तर

शुद्ध सोने की तरह शुद्ध आदर्श भी खरे, बहुमूल्य और मिलावट रहित होते हैं। ताँबा सस्ता धातु है, पर सोने में मिलाने से उसे मज़बूती और चमक देता है; इसी प्रकार व्यावहारिकता आदर्शों को चलाने योग्य बनाती है, पर उनकी शुद्धता (मूल्य) कम कर देती है। इसलिए आदर्श की तुलना सोने से और व्यावहारिकता की ताँबे से की गई है।

प्रश्न 2

चाजीन ने कौन-सी क्रियाएँ गरिमापूर्ण ढंग से पूरी कीं?

उत्तर

चाजीन ने लेखक और उसके मित्रों को देखकर खड़े होकर कमर झुकाकर प्रणाम किया, 'दो...झो...' (आइए, तशरीफ़ लाइए) कहकर स्वागत किया, बैठने की जगह दिखाई, अँगीठी सुलगाई, उस पर चायदानी रखी, बगल के कमरे से बरतन लाकर तौलिए से साफ़ किए, और चाय तैयार कर प्यालों में भरकर सामने रखी। ये सभी क्रियाएँ उसने अत्यंत गरिमापूर्ण ढंग से कीं।

प्रश्न 3

'टी-सेरेमनी' में कितने आदमियों को प्रवेश दिया जाता था और क्यों?

उत्तर

'टी-सेरेमनी' में तीन से अधिक आदमियों को प्रवेश नहीं दिया जाता था, क्योंकि इस विधि में शांति मुख्य बात होती है। अधिक लोग होने से बातचीत और शोर होता, जिससे वहाँ की शांति भंग हो जाती।

प्रश्न 4

चाय पीने के बाद लेखक ने स्वयं में क्या परिवर्तन महसूस किया?

उत्तर

पहले दस-पंद्रह मिनट लेखक उलझन में रहा, फिर उसके दिमाग की रफ़्तार धीरे-धीरे धीमी पड़ी और थोड़ी देर में बिलकुल बंद हो गई। उसे लगा मानो वह अनंतकाल में जी रहा है, यहाँ तक कि सन्नाटा भी सुनाई देने लगा। उसके दिमाग से भूत और भविष्य दोनों काल उड़ गए, केवल वर्तमान क्षण सामने था। उसे उस दिन मालूम हुआ कि जीना किसे कहते हैं।

लिखित (ख): निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर (50-60 शब्दों में) लिखिए

प्रश्न 1

गांधीजी में नेतृत्व की अद्भुत क्षमता थी; उदाहरण सहित इस बात की पुष्टि कीजिए।

उत्तर

गांधीजी व्यावहारिकता को पहचानते थे और उसकी कीमत जानते थे, इसीलिए वे अपने विलक्षण आदर्श चला सके और सारा देश उनके पीछे चल पड़ा। उन्होंने कभी आदर्शों को व्यावहारिकता के स्तर पर नहीं उतरने दिया, बल्कि व्यावहारिकता को आदर्शों के स्तर पर चढ़ाया। सत्य और अहिंसा जैसे आदर्शों के बल पर उन्होंने असहयोग आंदोलन, नमक सत्याग्रह (दांडी यात्रा) और भारत छोड़ो आंदोलन में करोड़ों भारतीयों को एकजुट किया। यह उनकी अद्भुत नेतृत्व-क्षमता का प्रमाण है।

प्रश्न 2

आपके विचार से कौन-से ऐसे मूल्य हैं जो शाश्वत हैं? वर्तमान समय में इन मूल्यों की प्रासंगिकता स्पष्ट कीजिए।

उत्तर

सत्य, अहिंसा, ईमानदारी, परोपकार, करुणा, त्याग, सहनशीलता और दूसरों का सम्मान — ये शाश्वत मूल्य हैं, जो हर युग में एक-से बने रहते हैं। आज के स्वार्थ, प्रतिस्पर्धा, भ्रष्टाचार और हिंसा से भरे समय में ये मूल्य और भी प्रासंगिक हैं। इन्हीं से समाज में विश्वास, शांति और भाईचारा बना रह सकता है। पाठ के अनुसार भी समाज के पास जो शाश्वत मूल्य हैं, वे आदर्शवादी लोगों की ही देन हैं।

प्रश्न 3

अपने जीवन की किसी ऐसी घटना का उल्लेख कीजिए जब — (1) शुद्ध आदर्श से आपको हानि-लाभ हुआ हो। (2) शुद्ध आदर्श में व्यावहारिकता का पुट देने से लाभ हुआ हो।

उत्तर

(1) एक बार परीक्षा में मेरे मित्र ने नकल कराने को कहा। मैंने ईमानदारी का आदर्श नहीं छोड़ा और मना कर दिया। इससे मित्र नाराज़ हो गया (हानि), पर शिक्षक ने मेरी ईमानदारी की प्रशंसा की और मेरा आत्मसम्मान बढ़ा (लाभ)।

(2) मेरे एक सहपाठी ने गलती से कक्षा का गमला तोड़ दिया। सच बताना ज़रूरी था, पर मैंने उसे अकेले में समझाकर स्वयं शिक्षक से सच बोलने को प्रेरित किया। इस प्रकार सत्य का आदर्श भी बना रहा और मित्र का अपमान भी नहीं हुआ। (विद्यार्थी अपने अनुभव से उदाहरण लिख सकते हैं।)

प्रश्न 4

'शुद्ध सोने में ताँबे की मिलावट या ताँबे में सोना', गांधीजी के आदर्श और व्यवहार के संदर्भ में यह बात किस तरह झलकती है? स्पष्ट कीजिए।

उत्तर

'सोने में ताँबा मिलाना' का अर्थ है आदर्शों में व्यावहारिकता मिलाकर उन्हें नीचे लाना, जिससे धीरे-धीरे आदर्श पीछे हट जाते हैं और व्यावहारिक सूझबूझ आगे आ जाती है। 'ताँबे में सोना मिलाना' का अर्थ है व्यवहार को आदर्शों के स्तर तक ऊपर उठाना। गांधीजी ने दूसरा मार्ग अपनाया — वे आदर्शों को व्यावहारिकता के स्तर पर नहीं उतरने देते थे, बल्कि व्यावहारिकता को आदर्शों के स्तर पर चढ़ाते थे। वे ताँबे में सोना मिलाकर उसकी कीमत बढ़ाते थे, इसलिए उनके जीवन में सोना (आदर्श) ही हमेशा आगे रहा।

प्रश्न 5

'गिरगिट' कहानी में आपने समाज में व्याप्त अवसरानुसार अपने व्यवहार को पल-पल में बदल डालने की एक बानगी देखी। इस पाठ के अंश 'गिन्नी का सोना' के संदर्भ में स्पष्ट कीजिए कि 'आदर्शवादिता' और 'व्यावहारिकता' इनमें से जीवन में किसका महत्त्व है?

उत्तर

'गिरगिट' कहानी का इंस्पेक्टर अवसर देखकर पल-पल अपना व्यवहार बदल लेता है — यह आदर्शहीन व्यावहारिकता है। 'गिन्नी का सोना' के अनुसार व्यवहारवादी लोग लाभ-हानि का हिसाब लगाकर चलते हैं; वे सफल होते और आगे भी बढ़ते हैं, पर स्वयं ऊपर नहीं उठते और समाज को गिराते हैं। खुद ऊपर उठना और दूसरों को साथ लेकर ऊपर उठाना आदर्शवादी लोगों ने ही किया है, और समाज के शाश्वत मूल्य उन्हीं की देन हैं। अतः जीवन में आदर्शवादिता का महत्त्व अधिक है; व्यावहारिकता उतनी ही उचित है जितनी आदर्शों को व्यवहार में लाने के लिए आवश्यक हो, जैसा गांधीजी ने किया।

प्रश्न 6

लेखक के मित्र ने मानसिक रोग के क्या-क्या कारण बताए? आप इन कारणों से कहाँ तक सहमत हैं?

उत्तर

लेखक के मित्र के अनुसार जापान में अस्सी फ़ीसदी लोग मनोरुग्ण हैं। इसके कारण हैं — जीवन की रफ़्तार बहुत बढ़ जाना (कोई चलता नहीं, दौड़ता है; कोई बोलता नहीं, बकता है), अकेले में भी लगातार बड़बड़ाते रहना, अमेरिका से प्रतिस्पर्धा करना और महीने भर का काम एक दिन में पूरा करने की कोशिश करना। इससे दिमाग पर तनाव बढ़ता है और अंत में 'इंजन' टूट जाता है। मैं इन कारणों से पूरी तरह सहमत हूँ; आज भारत में भी होड़, भागदौड़ और तनाव के कारण मानसिक रोग बढ़ रहे हैं।

प्रश्न 7

लेखक के अनुसार सत्य केवल वर्तमान है, उसी में जीना चाहिए। लेखक ने ऐसा क्यों कहा होगा? स्पष्ट कीजिए।

उत्तर

लेखक के अनुसार हम प्रायः या तो बीते दिनों की खट्टी-मीठी यादों में उलझे रहते हैं या भविष्य के रंगीन सपने देखते रहते हैं। भूतकाल चला गया और भविष्यकाल अभी आया नहीं, इसलिए दोनों मिथ्या हैं। हमारे सामने जो वर्तमान क्षण है, वही सत्य है। वर्तमान में पूरी तरह जीने से मन शांत होता है, तनाव दूर होता है और जीवन का सच्चा आनंद मिलता है। टी-सेरेमनी के अनुभव से लेखक ने यही जाना, इसलिए उसने वर्तमान में जीने को कहा।

लिखित (ग): निम्नलिखित के आशय स्पष्ट कीजिए

प्रश्न 1

समाज के पास अगर शाश्वत मूल्यों जैसा कुछ है तो वह आदर्शवादी लोगों का ही दिया हुआ है।

उत्तर

आशय यह है कि सत्य, अहिंसा, त्याग, परोपकार जैसे सदा बने रहने वाले मूल्य व्यवहारवादी लोगों ने नहीं, बल्कि आदर्शवादी लोगों ने समाज को दिए हैं। व्यवहारवादी लोग केवल लाभ-हानि देखते हैं और समाज को गिराते हैं, जबकि आदर्शवादी स्वयं ऊपर उठकर दूसरों को भी ऊपर उठाते हैं।

प्रश्न 2

जब व्यावहारिकता का बखान होने लगता है तब 'प्रैक्टिकल आइडियालिस्टों' के जीवन से आदर्श धीरे-धीरे पीछे हटने लगते हैं और उनकी व्यावहारिक सूझबूझ ही आगे आने लगती है।

उत्तर

जब लोग आदर्शों के स्थान पर व्यावहारिकता की प्रशंसा करने लगते हैं, तब व्यावहारिक आदर्शवादी लोग अपने आदर्शों से समझौता करने लगते हैं। धीरे-धीरे उनके जीवन से आदर्श गायब हो जाते हैं और केवल लाभ-हानि वाली व्यावहारिक चतुराई शेष रह जाती है — जैसे सोना पीछे रह जाए और ताँबा आगे आ जाए।

प्रश्न 3

हमारे जीवन की रफ़्तार बढ़ गई है। यहाँ कोई चलता नहीं बल्कि दौड़ता है। कोई बोलता नहीं, बकता है। हम जब अकेले पड़ते हैं तब अपने आपसे लगातार बड़बड़ाते रहते हैं।

उत्तर

लेखक का जापानी मित्र बताता है कि आधुनिक जीवन की भागदौड़ और होड़ इतनी बढ़ गई है कि लोग हर काम जल्दबाज़ी में करते हैं। उन्हें ठहरकर बात करने का समय नहीं, वे बेवजह और अधिक बोलते हैं। अकेले में भी उनका दिमाग शांत नहीं रहता और वे खुद से बड़बड़ाते रहते हैं। यह मानसिक तनाव की स्थिति है, जिससे मानसिक रोग बढ़ते हैं।

प्रश्न 4

सभी क्रियाएँ इतनी गरिमापूर्ण ढंग से कीं कि उसकी हर भंगिमा से लगता था मानो जयजयवंती के सुर गूँज रहे हों।

उत्तर

चाजीन ने स्वागत करने, अँगीठी सुलगाने, बरतन साफ़ करने और चाय बनाने की सभी क्रियाएँ इतनी शांति, लय और गरिमा से कीं कि उसकी हर मुद्रा संगीत जैसी मधुर लग रही थी — मानो जयजयवंती राग के मधुर सुर गूँज रहे हों।

भाषा अध्ययन

प्रश्न 1

नीचे दिए गए शब्दों का वाक्य में प्रयोग कीजिए — व्यावहारिकता, आदर्श, सूझबूझ, विलक्षण, शाश्वत

उत्तर

व्यावहारिकता — जीवन में आदर्शों के साथ थोड़ी व्यावहारिकता भी आवश्यक है।

आदर्श — गांधीजी ने सत्य और अहिंसा के आदर्श को जीवन भर निभाया।

सूझबूझ — कप्तान की सूझबूझ से टीम मैच जीत गई।

विलक्षण — रवींद्रनाथ ठाकुर विलक्षण प्रतिभा के धनी थे।

शाश्वत — सत्य एक शाश्वत मूल्य है।

प्रश्न 2. नीचे दिए गए द्वंद्व समास का विग्रह कीजिए

उत्तर :

(क) माता-पिता = माता और पिता

(ख) पाप-पुण्य = पाप और पुण्य

(ग) सुख-दुख = सुख और दुख

(घ) रात-दिन = रात और दिन

(ङ) अन्न-जल = अन्न और जल

(च) घर-बाहर = घर और बाहर

(छ) देश-विदेश = देश और विदेश

प्रश्न 3. नीचे दिए गए विशेषण शब्दों से भाववाचक संज्ञा बनाइए

उत्तर :

(क) सफल = सफलता

(ख) विलक्षण = विलक्षणता

(ग) व्यावहारिक = व्यावहारिकता

(घ) सजग = सजगता

(ङ) आदर्शवादी = आदर्शवादिता

(च) शुद्ध = शुद्धता

प्रश्न 4

नीचे दिए गए शब्दों के भिन्न-भिन्न अर्थ स्पष्ट करने के लिए उनका वाक्यों में प्रयोग कीजिए — उत्तर, कर, अंक, नग

उत्तर

उत्तर (जवाब) — मैंने सभी प्रश्नों के उत्तर लिखे। उत्तर (दिशा) — हिमालय भारत के उत्तर में है।

कर (हाथ) — उसने कर जोड़कर प्रणाम किया। कर (टैक्स) — हमें समय पर आयकर देना चाहिए।

अंक (नंबर) — मुझे गणित में अच्छे अंक मिले। अंक (गोद) — माँ ने बच्चे को अंक में भर लिया।

नग (रत्न) — अँगूठी में हीरे का नग जड़ा है। नग (पर्वत) — हिमालय एक ऊँचा नग है।

प्रश्न 5. नीचे दिए गए वाक्यों को संयुक्त वाक्य में बदलकर लिखिए

(क) 1. अँगीठी सुलगायी। 2. उस पर चायदानी रखी।

(ख) 1. चाय तैयार हुई। 2. उसने वह प्यालों में भरी।

(ग) 1. बगल के कमरे से जाकर कुछ बरतन ले आया। 2. तौलिये से बरतन साफ़ किए।

उत्तर :

(क) अँगीठी सुलगायी और उस पर चायदानी रखी।

(ख) चाय तैयार हुई और उसने वह प्यालों में भरी।

(ग) वह बगल के कमरे से जाकर कुछ बरतन ले आया और तौलिये से बरतन साफ़ किए।

प्रश्न 6. नीचे दिए गए वाक्यों से मिश्र वाक्य बनाइए

(क) 1. चाय पीने की यह एक विधि है। 2. जापानी में उसे चा-नो-यू कहते हैं।

(ख) 1. बाहर बेढब-सा एक मिट्टी का बरतन था। 2. उसमें पानी भरा हुआ था।

(ग) 1. चाय तैयार हुई। 2. उसने वह प्यालों में भरी। 3. फिर वे प्याले हमारे सामने रख दिए।

उत्तर :

(क) यह चाय पीने की एक विधि है, जिसे जापानी में चा-नो-यू कहते हैं।

(ख) बाहर बेढब-सा एक मिट्टी का बरतन था, जिसमें पानी भरा हुआ था।

(ग) जब चाय तैयार हुई तब उसने वह प्यालों में भरी और फिर वे प्याले हमारे सामने रख दिए।

महत्वपूर्ण अतिरिक्त प्रश्न-उत्तर

प्रश्न 1. रवींद्र केलेकर का संक्षिप्त परिचय दीजिए।

उत्तर : रवींद्र केलेकर (1925-2010) का जन्म 7 मार्च 1925 को कोंकण क्षेत्र में हुआ। वे छात्र जीवन से ही गोवा मुक्ति आंदोलन में शामिल हो गए थे। वे गांधीवादी चिंतक के रूप में विख्यात हैं और कोंकणी तथा मराठी के शीर्षस्थ लेखक और पत्रकार थे। कोंकणी में उनकी पच्चीस, मराठी में तीन और हिंदी तथा गुजराती में भी कुछेक पुस्तकें प्रकाशित हैं। उन्होंने काका कालेलकर की अनेक पुस्तकों का संपादन और अनुवाद भी किया। उन्हें गोवा कला अकादमी के साहित्य पुरस्कार सहित कई पुरस्कार मिले। प्रमुख कृतियाँ — कोंकणी में उजवाढाचे सूर, समिधा, सांगली, ओथांबे; मराठी में कोंकणीचें राजकरण, जापान जसा दिसला; और हिंदी में पतझर में टूटी पत्तियाँ।

प्रश्न 2. 'झेन की देन' प्रसंग से हमें क्या संदेश मिलता है?

उत्तर : 'झेन की देन' प्रसंग बौद्ध दर्शन की ध्यान-पद्धति की याद दिलाता है, जिसके कारण जापानी लोग अपनी व्यस्ततम दिनचर्या के बीच भी कुछ चैन भरे पल पा जाते हैं। टी-सेरेमनी की शांति में लेखक के दिमाग की रफ़्तार थम गई और वह केवल वर्तमान क्षण में जीने लगा। इससे संदेश मिलता है कि भागदौड़ और तनाव भरे जीवन में शांत होकर वर्तमान में जीना ही सच्चा जीना है।

प्रश्न 3. 'टी-सेरेमनी' में चाय किस प्रकार पी गई?

उत्तर : टी-सेरेमनी में केवल तीन मित्र थे। प्याले में दो घूँट से अधिक चाय नहीं थी। वे ओठों से प्याला लगाकर एक-एक बूँद चाय पीते रहे और करीब डेढ़ घंटे तक चुसकियों का यह सिलसिला चलता रहा। पूरे समय वातावरण अत्यंत शांत रहा।

प्रश्न 4. रिक्त स्थान भरिए

(i) 'टी-सेरेमनी' को जापानी में __________ कहते हैं। — चा-नो-यू

(ii) रवींद्र केलेकर __________ चिंतक के रूप में विख्यात हैं। — गांधीवादी

(iii) लेखक ने शुद्ध आदर्श की तुलना __________ से और व्यावहारिकता की तुलना __________ से की है। — सोने, ताँबे

(iv) रवींद्र केलेकर __________ और मराठी के शीर्षस्थ लेखक थे। — कोंकणी

Frequently Asked Questions

What is Class 10 Hindi Sparsh Chapter 13 (पतझर में टूटी पत्तियाँ (रवींद्र केलेकर)) about?

रवींद्र केलेकर के पाठ 'पतझर में टूटी पत्तियाँ' में दो प्रेरक प्रसंग हैं। 'गिन्नी का सोना' में शुद्ध सोने और ताँबा मिले गिन्नी के सोने के उदाहरण से आदर्शवादिता और व्यावहारिकता का अंतर समझाया गया है, और गांधीजी को आदर्शों पर चलने वाला व्यावहारिक व्यक्ति बताया गया है। 'झेन की देन' में जापान की 'टी-सेरेमनी' (चा-नो-यू) के माध्यम से भाग-दौड़ और तनाव भरे जीवन में वर्तमान क्षण में जीने का महत्व बताया गया है।

What do these NCERT solutions for Class 10 Hindi Sparsh Chapter 13 (पतझर में टूटी पत्तियाँ (रवींद्र केलेकर)) cover?

All 19 questions from the latest NCERT textbook for this chapter are answered step by step, organised as NCERT पाठ्यपुस्तक प्रश्न-उत्तर: मौखिक, प्रश्न 1. शुद्ध सोना और गिन्नी का सोना अलग क्यों होता है?, प्रश्न 2. प्रैक्टिकल आइडियालिस्ट किसे कहते हैं?, प्रश्न 3. पाठ के संदर्भ में शुद्ध आदर्श क्या है?, प्रश्न 5. जापानी में चाय पीने की विधि को क्या कहते हैं?, लिखित (क): निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर (25-30 शब्दों में) लिखिए, लिखित (ख): निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर (50-60 शब्दों में) लिखिए and प्रश्न 2. नीचे दिए गए द्वंद्व समास का विग्रह कीजिए.

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How should I use these solutions to prepare for exams?

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