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Class 10 Hindi Sparsh Chapter 8

NCERT Solutions for Class 10 Hindi Sparsh Chapter 8: बड़े भाई साहब (प्रेमचंद)

प्रेमचंद की कहानी 'बड़े भाई साहब' दो भाइयों की कहानी है, जिनमें बड़े भाई पढ़ाई में दिन-रात रटते रहने पर भी बार-बार फ़ेल होते हैं, जबकि खेल-कूद में मस्त रहने वाला छोटा भाई हर बार अव्वल आता है। बड़े भाई साहब बड़प्पन के नाते छोटे भाई को हमेशा उपदेश और डाँट देते रहते हैं। कहानी के अंत में वे समझाते हैं कि किताबी ज्ञान से बड़ा जीवन का अनुभव होता है, और इसी से छोटा भाई उनके त्याग और स्नेह को समझ पाता है।

NCERT पाठ्यपुस्तक प्रश्न-उत्तर: मौखिक

प्रश्न 1. कथा नायक की रुचि किन कार्यों में थी?

उत्तर : कथा नायक (छोटे भाई) की रुचि खेल-कूद में थी। वह मैदान में कंकरियाँ उछालता, कागज़ की तितलियाँ उड़ाता, चारदीवारी पर चढ़कर कूदता, फाटक पर सवार होकर उसे आगे-पीछे चलाता, फुटबॉल, कबड्डी, वॉलीबॉल और गुल्ली-डंडा खेलता था। बाद में उसे कनकौए (पतंग) उड़ाने का शौक हो गया।

प्रश्न 2

बड़े भाई साहब छोटे भाई से हर समय पहला सवाल क्या पूछते थे?

उत्तर

बड़े भाई साहब छोटे भाई से हर समय पहला सवाल यही पूछते थे — "कहाँ थे?" इसके बाद वे उसे डाँटने और उपदेश देने लगते थे।

प्रश्न 3

दूसरी बार पास होने पर छोटे भाई के व्यवहार में क्या परिवर्तन आया?

उत्तर

दूसरी बार पास होने पर छोटा भाई अपनी तकदीर को बलवान मानने लगा और सोचने लगा कि वह पढ़े या न पढ़े, पास हो ही जाएगा। उसने भाई साहब की नरमी (सहिष्णुता) का अनुचित लाभ उठाया, थोड़ा-बहुत पढ़ना भी बंद कर दिया और सारा समय पतंगबाज़ी में बिताने लगा। फिर भी वह भाई साहब का अदब करता था और उनकी नज़र बचाकर कनकौए उड़ाता था।

प्रश्न 4

बड़े भाई साहब छोटे भाई से उम्र में कितने बड़े थे और वे कौन-सी कक्षा में पढ़ते थे?

उत्तर

बड़े भाई साहब छोटे भाई से उम्र में पाँच साल बड़े थे (छोटा भाई नौ साल का था और वे चौदह साल के)। कहानी के आरंभ में वे नौवीं कक्षा (जमात) में पढ़ते थे, जबकि छोटा भाई पाँचवीं में था।

प्रश्न 5

बड़े भाई साहब दिमाग को आराम देने के लिए क्या करते थे?

उत्तर

दिमाग को आराम देने के लिए बड़े भाई साहब कॉपी पर और किताब के हाशियों पर चिड़ियों, कुत्तों, बिल्लियों की तसवीरें बनाते थे। कभी एक ही नाम, शब्द या वाक्य दस-बीस बार लिख डालते, कभी एक शेर को बार-बार सुंदर अक्षरों में नकल करते और कभी ऐसी शब्द-रचना करते जिसमें न कोई अर्थ होता, न कोई सामंजस्य।

लिखित (क): निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर (25-30 शब्दों में) लिखिए

प्रश्न 1

छोटे भाई ने अपनी पढ़ाई का टाइम-टेबिल बनाते समय क्या-क्या सोचा और फिर उसका पालन क्यों नहीं कर पाया?

उत्तर

भाई साहब की डाँट सुनकर छोटे भाई ने सोचा कि अब वह खूब जी लगाकर पढ़ेगा। उसने ऐसा टाइम-टेबिल बनाया जिसमें सुबह छः बजे से रात ग्यारह बजे तक अंग्रेज़ी, हिसाब, इतिहास, भूगोल, ग्रामर, अनुवाद, हिंदी आदि की पढ़ाई थी और खेल-कूद के लिए कोई समय नहीं था। परंतु पहले ही दिन से उसकी अवहेलना शुरू हो जाती थी, क्योंकि मैदान की हरियाली, हवा के झोंके और फुटबॉल, कबड्डी, वॉलीबॉल का आकर्षण उसे बरबस खींच ले जाता था।

प्रश्न 2

एक दिन जब गुल्ली-डंडा खेलने के बाद छोटा भाई बड़े भाई साहब के सामने पहुँचा तो उनकी क्या प्रतिक्रिया हुई?

उत्तर

छोटा भाई सुबह का सारा समय गुल्ली-डंडे में बिताकर भोजन के समय लौटा तो भाई साहब मानो तलवार खींचकर उस पर टूट पड़े। उन्होंने कहा कि एक बार पास होकर और दरजे में अव्वल आकर तुम्हें घमंड हो गया है। उन्होंने रावण, शैतान और शाहेरूम के उदाहरण देकर समझाया कि घमंड का अंत बुरा होता है, उसका पास होना "अंधे के हाथ बटेर लगने" जैसा है, और ऊँचे दरजे की कठिन पढ़ाई (अलजबरा, जामेट्री, इंग्लिस्तान का इतिहास) का भय दिखाया।

प्रश्न 3

बड़े भाई साहब को अपने मन की इच्छाएँ क्यों दबानी पड़ती थीं?

उत्तर

बड़े भाई साहब का भी खेलने और कनकौए उड़ाने को जी ललचाता था, परंतु वे बड़े थे और छोटे भाई के सामने आदर्श प्रस्तुत करना अपना कर्तव्य मानते थे। उनका कहना था कि यदि वे स्वयं बेराह चलेंगे तो छोटे भाई की रक्षा कैसे करेंगे। इसी कर्तव्य-भावना के कारण उन्हें अपनी इच्छाएँ दबानी पड़ती थीं।

प्रश्न 4

बड़े भाई साहब छोटे भाई को क्या सलाह देते थे और क्यों?

उत्तर

बड़े भाई साहब छोटे भाई को सलाह देते थे कि वह खेल-कूद में समय न गँवाए, मन लगाकर पढ़े, अंग्रेज़ी जैसे कठिन विषयों पर दिन-रात मेहनत करे और पास होने पर घमंड न करे। वे ऐसा इसलिए करते थे क्योंकि वे उसके हितैषी थे, उसकी देखरेख को अपना जन्मसिद्ध अधिकार और कर्तव्य मानते थे और चाहते थे कि वह पिता (दादा) की गाढ़ी कमाई बरबाद न करे तथा जीवन में सफल हो।

प्रश्न 5

छोटे भाई ने बड़े भाई साहब के नरम व्यवहार का क्या फ़ायदा उठाया?

उत्तर

जब बड़े भाई साहब नरम पड़ गए और डाँटने का अवसर पाकर भी धीरज से काम लेने लगे, तो छोटे भाई की स्वच्छंदता बढ़ गई। उसने उनकी सहिष्णुता का अनुचित लाभ उठाया — डर से जो थोड़ा-बहुत पढ़ता था, वह भी बंद कर दिया और सारा समय पतंगबाज़ी, माँझा देने, कन्ने बाँधने और पतंग टूर्नामेंट की तैयारी में लगाने लगा।

लिखित (ख): निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर (50-60 शब्दों में) लिखिए

प्रश्न 1

बड़े भाई की डाँट-फटकार अगर न मिलती, तो क्या छोटा भाई कक्षा में अव्वल आता? अपने विचार प्रकट कीजिए।

उत्तर

मेरे विचार से बड़े भाई की डाँट-फटकार न मिलती तो छोटा भाई शायद कक्षा में अव्वल न आता। वह स्वभाव से खिलंदड़ा था और पढ़ाई में उसका मन नहीं लगता था। भाई साहब के डर से ही वह थोड़ा-बहुत पढ़ लेता था और रोज़ का टास्क पूरा करता था। स्वयं छोटा भाई भी मानता है कि यह शायद उनके उपदेशों का ही असर है कि वह दनादन पास होता गया। बिना अंकुश के वह पूरा समय खेल में गँवा देता।

प्रश्न 2

इस पाठ में लेखक ने समूची शिक्षा के किन तौर-तरीकों पर व्यंग्य किया है? क्या आप उनके विचार से सहमत हैं?

उत्तर

लेखक ने उस शिक्षा-प्रणाली पर व्यंग्य किया है जो रटंत विद्या पर आधारित है और जिसमें समझ के स्थान पर अक्षरशः याद करने को महत्त्व दिया जाता है। इतिहास में बादशाहों के नाम रटना, हेनरी सातवें की जगह आठवाँ लिखने पर पूरे नंबर कट जाना, जामेट्री में अ ब ज की जगह अ ज ब लिखने पर अंक कटना, और "संक्षेप में" चार पन्नों का निबंध लिखवाना — ये सब इसके उदाहरण हैं। परीक्षक वही देखते हैं जो पुस्तक में लिखा है। मैं लेखक से सहमत हूँ, क्योंकि शिक्षा का उद्देश्य बुद्धि का विकास और समझ पैदा करना होना चाहिए, केवल रटना नहीं।

प्रश्न 3. बड़े भाई साहब के अनुसार जीवन की समझ कैसे आती है?

उत्तर : बड़े भाई साहब के अनुसार जीवन की समझ किताबें पढ़ने से नहीं, बल्कि दुनिया देखने और अनुभव से आती है। वे उदाहरण देते हैं कि अम्माँ ने कोई दरजा पास नहीं किया और दादा भी पाँचवीं-छठी जमात से आगे नहीं गए, फिर भी उन्हें दुनिया का अनुभव अधिक है। दादा ने कम खर्च में इज़्ज़त से नौ लोगों के कुटुंब का पालन किया, जबकि ऑक्सफ़ोर्ड से एम.ए. हेडमास्टर साहब का घर उनकी बूढ़ी माँ के प्रबंध से ही ठीक चला।

प्रश्न 4

छोटे भाई के मन में बड़े भाई साहब के प्रति श्रद्धा क्यों उत्पन्न हुई?

उत्तर

जब बड़े भाई साहब ने कनकौआ लूटने दौड़ते छोटे भाई को पकड़कर समझाया कि पाँच साल का अंतर कोई नहीं मिटा सकता, जीवन का अनुभव किताबी ज्ञान से बड़ा है, और यह भी स्वीकार किया कि उनका भी खेलने को जी ललचाता है पर वे छोटे भाई की रक्षा के लिए अपनी इच्छाएँ दबाते हैं, तब छोटे भाई को अपनी लघुता का अनुभव हुआ। भाई साहब के इस त्याग, स्नेह और कर्तव्य-भावना को समझकर उसके मन में उनके प्रति श्रद्धा उत्पन्न हुई।

प्रश्न 5. बड़े भाई की स्वभावगत विशेषताएँ बताइए?

उत्तर : बड़े भाई साहब की स्वभावगत विशेषताएँ हैं —

(i) अध्ययनशील: वे हरदम किताब खोले बैठे रहते थे और कठिन परिश्रम करते थे।

(ii) कर्तव्यनिष्ठ और हितैषी: वे छोटे भाई की देखरेख अपना कर्तव्य मानते थे और उसका भला चाहते थे।

(iii) उपदेश देने में निपुण: वे सूक्ति-बाण चलाकर और उदाहरण देकर प्रभावशाली उपदेश देते थे।

(iv) संयमी और त्यागी: छोटे भाई के सामने आदर्श रखने के लिए अपनी खेलने की इच्छाएँ दबाते थे।

(v) अनुभव को महत्त्व देने वाले: वे किताबी ज्ञान से अधिक जीवन के अनुभव को महत्त्व देते थे।

प्रश्न 6

बड़े भाई साहब ने ज़िंदगी के अनुभव और किताबी ज्ञान में से किसे और क्यों महत्त्वपूर्ण कहा है?

उत्तर

बड़े भाई साहब ने ज़िंदगी के अनुभव को किताबी ज्ञान से अधिक महत्त्वपूर्ण कहा है। उनके अनुसार समझ किताबें पढ़ने से नहीं, दुनिया देखने से आती है। कम पढ़े-लिखे अम्माँ-दादा को दुनिया का तजुरबा अधिक है — बीमारी में दादा घबराने के बजाय मर्ज़ पहचानकर इलाज करेंगे और कम पैसों में घर का खर्च चला लेंगे, जबकि पढ़े-लिखे लड़के महीने का खर्च बीस-बाईस तारीख तक उड़ा देते हैं। हेडमास्टर साहब की डिग्री भी घर-गृहस्थी चलाने में बेकार साबित हुई।

प्रश्न 7. बताइए पाठ के किन अंशों से पता चलता है कि

(क) छोटा भाई अपने भाई साहब का आदर करता है।

उत्तर : भाई साहब की डाँट सुनकर वह मौन रहता था और कभी पलटकर जवाब नहीं देता था। पास होने पर भी "जबान से यह हेकड़ी जताने का साहस" न होना, और यह कहना कि "मैं भाई साहब का अदब करता था और उनकी नज़र बचाकर कनकौए उड़ाता था" — इन अंशों से उसका आदर प्रकट होता है।

(ख) भाई साहब को ज़िंदगी का अच्छा अनुभव है।

उत्तर : भाई साहब का यह कहना कि "समझ किताबें पढ़ने से नहीं आती, दुनिया देखने से आती है", दादा द्वारा कम खर्च में नौ लोगों के परिवार का पालन, बीमारी में दादा का धैर्य से इलाज करना और हेडमास्टर साहब की माँ द्वारा घर का प्रबंध — इन उदाहरणों से उनका अनुभव झलकता है।

(ग) भाई साहब के भीतर भी एक बच्चा है।

उत्तर : भाई साहब कहते हैं — "मैं कनकौए उड़ाने को मना नहीं करता। मेरा भी जी ललचाता है।" और उसी समय एक कटा कनकौआ ऊपर से गुज़रा तो वे उछलकर उसकी डोर पकड़कर बेतहाशा होस्टल की ओर दौड़ पड़े। इससे पता चलता है कि उनके भीतर भी एक बच्चा है।

(घ) भाई साहब छोटे भाई का भला चाहते हैं।

उत्तर : भाई साहब कहते हैं — "खुद बेराह चलूँ, तो तुम्हारी रक्षा कैसे करूँ? यह कर्तव्य भी तो मेरे सिर है।" तथा "मेरे देखते तुम बेराह न चलने पाओगे।" छोटा भाई भी मानता है कि "आखिर वह मुझे मेरे हित के विचार से ही तो डाँटते हैं।"

लिखित (ग): निम्नलिखित के आशय स्पष्ट कीजिए

प्रश्न 1

इम्तिहान पास कर लेना कोई चीज़ नहीं, असल चीज़ है बुद्धि का विकास।

उत्तर

आशय यह है कि केवल परीक्षा पास कर लेना शिक्षा का लक्ष्य नहीं है। जो कुछ पढ़ा जाए उसका अभिप्राय समझना और उससे बुद्धि का विकास होना ही असली शिक्षा है। बड़े भाई साहब यह बात छोटे भाई से कहते हैं कि उसने रावण के चरित्र से कोई उपदेश नहीं लिया तो इतिहास पढ़ना व्यर्थ है।

प्रश्न 2

फिर भी जैसे मौत और विपत्ति के बीच भी आदमी मोह और माया के बंधन में जकड़ा रहता है, मैं फटकार और घुड़कियाँ खाकर भी खेल-कूद का तिरस्कार न कर सकता था।

उत्तर

जिस प्रकार मृत्यु और संकट सामने देखकर भी मनुष्य मोह-माया को नहीं छोड़ पाता, उसी प्रकार छोटा भाई बड़े भाई की डाँट-फटकार और धमकियाँ सुनकर भी खेल-कूद का मोह नहीं छोड़ पाता था। खेल के प्रति उसका आकर्षण अत्यंत प्रबल था।

प्रश्न 3. बुनियाद ही पुख्ता न हो, तो मकान कैसे पायेदार बने?

उत्तर : जैसे नींव मज़बूत न हो तो मकान टिकाऊ नहीं बनता, वैसे ही शिक्षा की आरंभिक नींव मज़बूत न हो तो आगे का ज्ञान स्थायी नहीं होता। लेखक व्यंग्य करता है कि बड़े भाई साहब इसी बहाने एक साल का काम दो-तीन साल में करते थे, यानी बार-बार फ़ेल होने को वे बुनियाद मज़बूत करना कहते थे।

प्रश्न 4

आँखें आसमान की ओर थीं और मन उस आकाशगामी पथिक की ओर, जो मंद गति से झूमता पतन की ओर चला आ रहा था, मानो कोई आत्मा स्वर्ग से निकलकर विरक्त मन से नए संस्कार ग्रहण करने जा रही हो।

उत्तर

छोटा भाई कटी हुई पतंग लूटने दौड़ रहा था। उसकी आँखें आकाश की ओर और मन उस पतंग (आकाशगामी पथिक) पर लगा था, जो धीरे-धीरे झूमती हुई नीचे गिर रही थी। लेखक ने पतंग की तुलना उस आत्मा से की है जो स्वर्ग से निकलकर विरक्त भाव से नया जन्म (नए संस्कार) लेने धरती की ओर आ रही हो।

भाषा अध्ययन

प्रश्न 1

निम्नलिखित शब्दों के दो-दो पर्यायवाची शब्द लिखिए — नसीहत, रोष, आज़ादी, राजा, ताज्जुब

उत्तर

नसीहत — सीख, उपदेश

रोष — क्रोध, गुस्सा

आज़ादी — स्वतंत्रता, स्वाधीनता

राजा — नृप, भूपति

ताज्जुब — आश्चर्य, अचंभा

प्रश्न 2

प्रेमचंद की भाषा बहुत पैनी और मुहावरेदार है। निम्नलिखित मुहावरों का वाक्यों में प्रयोग कीजिए — सिर पर नंगी तलवार लटकना, आड़े हाथों लेना, अंधे के हाथ बटेर लगना, लोहे के चने चबाना, दाँतों पसीना आना, ऐरा-गैरा नत्थू खैरा।

उत्तर

सिर पर नंगी तलवार लटकना — परीक्षा पास आते ही विद्यार्थियों को सिर पर नंगी तलवार लटकती मालूम होती है।

आड़े हाथों लेना — देर से आने पर पिताजी ने बेटे को आड़े हाथों लिया।

अंधे के हाथ बटेर लगना — बिना पढ़े लॉटरी में इनाम मिल जाना तो अंधे के हाथ बटेर लगने जैसा है।

लोहे के चने चबाना — सेना में भर्ती होना लोहे के चने चबाने जैसा है।

दाँतों पसीना आना — पहाड़ की खड़ी चढ़ाई चढ़ने में दाँतों पसीना आ गया।

ऐरा-गैरा नत्थू खैरा — इस प्रतियोगिता में हर ऐरा-गैरा नत्थू खैरा भाग नहीं ले सकता।

प्रश्न 3

निम्नलिखित तत्सम, तद्भव, देशज, आगत शब्दों को छाँटकर लिखिए — तालीम, जल्दबाज़ी, पुख्ता, हाशिया, चेष्टा, जमात, हर्फ़, सूक्तिबाण, जानलेवा, आँखफोड़, घुड़कियाँ, आधिपत्य, पन्ना, मेला-तमाशा, मसलन, स्पेशल, स्कीम, फटकार, प्रातःकाल, विद्वान, निपुण, भाई साहब, अवहेलना, टाइम-टेबिल

उत्तर

तत्सम — चेष्टा, सूक्तिबाण, आधिपत्य, प्रातःकाल, विद्वान, निपुण, अवहेलना

तद्भव — पन्ना, भाई साहब (भाई), फटकार

देशज — जानलेवा, आँखफोड़, घुड़कियाँ, मेला-तमाशा

आगत (अंग्रेज़ी) — स्पेशल, स्कीम, टाइम-टेबिल

आगत (उर्दू / अरबी-फ़ारसी) — तालीम, जल्दबाज़ी, पुख्ता, हाशिया, जमात, हर्फ़, मसलन

प्रश्न 4

नीचे दिए वाक्यों में कौन-सी क्रिया है — सकर्मक या अकर्मक? लिखिए।

उत्तर

(क) उन्होंने वहीं हाथ पकड़ लिया। — सकर्मक

(ख) फिर चोरों-सा जीवन कटने लगा। — अकर्मक

(ग) शैतान का हाल भी पढ़ा ही होगा। — सकर्मक

(घ) मैं यह लताड़ सुनकर आँसू बहाने लगता। — सकर्मक

(ङ) समय की पाबंदी पर एक निबंध लिखो। — सकर्मक

(च) मैं पीछे-पीछे दौड़ रहा था। — अकर्मक

प्रश्न 5

'इक' प्रत्यय लगाकर शब्द बनाइए — विचार, इतिहास, संसार, दिन, नीति, प्रयोग, अधिकार

उत्तर

विचार — वैचारिक, इतिहास — ऐतिहासिक, संसार — सांसारिक, दिन — दैनिक, नीति — नैतिक, प्रयोग — प्रायोगिक, अधिकार — आधिकारिक

महत्वपूर्ण अतिरिक्त प्रश्न-उत्तर

प्रश्न 1. प्रेमचंद का संक्षिप्त परिचय दीजिए।

उत्तर : प्रेमचंद (1880-1936) का जन्म 31 जुलाई 1880 को बनारस के निकट लमही गाँव में हुआ। उनका मूल नाम धनपत राय था; उन्होंने उर्दू में नवाब राय और हिंदी में प्रेमचंद नाम से लिखा। उनका पहला उर्दू कहानी संग्रह 'सोज़ेवतन' अंग्रेज़ सरकार ने ज़ब्त कर लिया था। उन्होंने 'हंस' और 'माधुरी' पत्रिकाओं का संपादन किया। उन्हें कथा सम्राट और उपन्यास सम्राट कहा जाता है। उनकी सभी कहानियाँ 'मानसरोवर' के आठ खंडों में संकलित हैं। प्रमुख उपन्यास — गोदान, गबन, प्रेमाश्रम, सेवासदन, निर्मला, कर्मभूमि, रंगभूमि, कायाकल्प, प्रतिज्ञा और मंगलसूत्र (अपूर्ण)। 8 अक्तूबर 1936 को उनका देहावसान हुआ।

प्रश्न 2. इस कहानी का केंद्रीय भाव क्या है?

उत्तर : कहानी का केंद्रीय भाव यह है कि केवल रटकर परीक्षा पास करना शिक्षा नहीं है; असली शिक्षा बुद्धि का विकास और जीवन की समझ है, जो अनुभव से आती है। कहानी रटंत शिक्षा-प्रणाली पर व्यंग्य करती है और दिखाती है कि बड़ा होने के नाते आदर्श बनाए रखने के दबाव में बड़े भाई साहब का बचपन दब जाता है। अंत में छोटे भाई को उनके अनुभव, त्याग और स्नेह का महत्त्व समझ आता है।

प्रश्न 3

बड़े भाई साहब और छोटे भाई के चरित्र की तुलना कीजिए।

उत्तर

बड़े भाई साहब गंभीर, अध्ययनशील, कर्तव्यनिष्ठ और उपदेश देने में निपुण हैं। वे रटकर कठोर परिश्रम करते हैं, फिर भी बार-बार फ़ेल होते हैं। छोटा भाई चंचल, खेल-प्रेमी और कुशाग्र बुद्धि वाला है; वह कम पढ़कर भी हर साल पास होता है और दरजे में अव्वल आता है। फिर भी वह बड़े भाई का आदर करता है। बड़े भाई के पास जीवन का अनुभव और बड़प्पन है, छोटे भाई के पास सहज प्रतिभा।

प्रश्न 4

कहानी के अंत में बड़े भाई साहब ने क्या कहा और उसका क्या प्रभाव पड़ा?

उत्तर

कहानी के अंत में छोटा भाई होस्टल से दूर एक कटा कनकौआ लूटने बेतहाशा दौड़ रहा था, तभी बाज़ार से लौटते भाई साहब ने उसका हाथ पकड़ लिया। उन्होंने कहा कि आठवीं जमात में आकर बाज़ारी लौंडों के साथ कनकौए के लिए दौड़ना शर्म की बात है; वे उससे पाँच साल बड़े हैं और यह अंतर कोई नहीं मिटा सकता; समझ किताबों से नहीं, दुनिया देखने से आती है। उन्होंने यह भी माना कि उनका भी कनकौए उड़ाने को जी ललचाता है, पर छोटे भाई की रक्षा का कर्तव्य उनके सिर है। इससे छोटा भाई नत-मस्तक हो गया, उसे अपनी लघुता का अनुभव हुआ और भाई साहब के प्रति मन में श्रद्धा उत्पन्न हुई। उसी समय एक कटा कनकौआ ऊपर से गुज़रा तो भाई साहब ने उछलकर उसकी डोर पकड़ ली और होस्टल की ओर दौड़े, छोटा भाई पीछे-पीछे दौड़ रहा था।

प्रश्न 5. रिक्त स्थान भरिए

(i) प्रेमचंद को __________ कहा जाता है। — उपन्यास सम्राट (कथा सम्राट)

(ii) बड़े भाई साहब छोटे भाई से __________ वर्ष बड़े थे। — पाँच

(iii) प्रेमचंद की सभी कहानियाँ __________ के आठ खंडों में संकलित हैं। — मानसरोवर

(iv) कहानी के अंत में छोटा भाई एक कटा हुआ __________ लूटने दौड़ रहा था। — कनकौआ (पतंग)

Frequently Asked Questions

What is Class 10 Hindi Sparsh Chapter 8 (बड़े भाई साहब (प्रेमचंद)) about?

प्रेमचंद की कहानी 'बड़े भाई साहब' दो भाइयों की कहानी है, जिनमें बड़े भाई पढ़ाई में दिन-रात रटते रहने पर भी बार-बार फ़ेल होते हैं, जबकि खेल-कूद में मस्त रहने वाला छोटा भाई हर बार अव्वल आता है। बड़े भाई साहब बड़प्पन के नाते छोटे भाई को हमेशा उपदेश और डाँट देते रहते हैं। कहानी के अंत में वे समझाते हैं कि किताबी ज्ञान से बड़ा जीवन का अनुभव होता है, और इसी से छोटा भाई उनके त्याग और स्नेह को समझ पाता है।

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Are these solutions based on the new NCERT syllabus?

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How should I use these solutions to prepare for exams?

Attempt each question on your own first, then compare your working with the answer here. Note the steps or keywords you missed, and revise the chapter notes before taking a chapter-wise MCQ test to check your understanding.

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