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Class 9 Hindi Ganga Chapter 7

NCERT Solutions for Class 9 Hindi Ganga Chapter 7: मैं और मेरा देश

कन्हैयालाल मिश्र 'प्रभाकर' का निबंध 'मैं और मेरा देश' व्यक्ति और राष्ट्र के अटूट संबंध को स्थापित करता है। लेखक के अनुसार व्यक्ति की पहचान केवल उसकी निजता तक सीमित नहीं होती, बल्कि उसके परिवार, क्षेत्र और राष्ट्र से भी जुड़ी होती है। इसलिए व्यक्ति का हर कार्य देश के सम्मान को प्रभावित करता है, और देश तथा नागरिक का सम्मान एक-दूसरे से जुड़ा है।

Circle of Learning • नई NCERT पाठ्यपुस्तक "गंगा" (2026-27) • पाठ के सभी प्रश्नों के उत्तर

पाठ परिचय: ‘मैं और मेरा देश’ प्रसिद्ध निबंधकार कन्हैयालाल मिश्र ‘प्रभाकर’ (1906–1995) का प्रश्नोत्तर शैली में लिखा निबंध है। लेखक बताते हैं कि व्यक्ति और देश अलग नहीं हैं। देश का सम्मान नागरिक का सम्मान है और नागरिक का हर अच्छा-बुरा काम देश के गौरव या हीनता से जुड़ जाता है। प्रत्येक नागरिक देश के ‘शक्ति-बोध’ और ‘सौंदर्य-बोध’ की रक्षा करके तथा चुनाव में सही व्यक्ति को मत देकर देश की सेवा कर सकता है।

रचना से संवाद – मेरे उत्तर मेरे तर्क

प्रश्न 1

“एक दिन आनंद की इस दीवार में दरार पड़ गई”, इस पंक्ति में रेखांकित शब्द ‘दरार’ किस ओर संकेत करता है?

उत्तर

(क) पूर्णता के भाव की तुष्टि (ख) पारस्परिक संबंध टूटने की स्थिति (ग) पूर्णता के भाव पर प्रहार (घ) सुख-सुविधाओं का अभाव

उत्तर: (ग) पूर्णता के भाव पर प्रहार।

तर्क: लेखक अपने घर, पड़ोस और नगर से मिले प्रेम व सहारे के कारण स्वयं को ‘पूरा मनुष्य’ मानता था। लाला लाजपत राय के अनुभव ने उसके इस पूर्णता के भाव को झकझोर दिया और उसे अपनी ‘हीन’ स्थिति का बोध हुआ। अतः ‘दरार’ पूर्णता के भाव पर हुई चोट का प्रतीक है।

प्रश्न 2

निबंध में कहा गया है कि “ऐसे प्रश्नों का उत्तर देने में एक अपूर्व आनंद आता है।” लेखक को किस तरह के प्रश्नों का उत्तर देने में आनंद की अनुभूति होती है?

उत्तर

(क) बात को विस्तार देने वाले प्रश्नों का (ख) बात का निष्कर्ष प्रस्तुत करने वाले प्रश्नों का (ग) बिना किसी संदर्भ के पूछे गए प्रश्नों का (घ) किसी की समझ का आकलन करने वाले प्रश्नों का

उत्तर: (क) बात को विस्तार देने वाले प्रश्नों का।

तर्क: लेखक स्वयं कहते हैं कि यह प्रश्न इसलिए महत्त्वपूर्ण है क्योंकि “यह बात को खिलने का, आगे बढ़ने का अवसर देता है” और ठीक समय पर पूछा गया है। ऐसे ही प्रश्न विचार को आगे बढ़ाते हैं।

प्रश्न 3

“अपने महान राष्ट्र की पराधीनता के दीन दिनों में जिन लोगों ने अपने रक्त से गौरव के दीपक जलाए”, इस वाक्य में पराधीनता के दिनों को दीन कहा गया है क्योंकि पराधीन भारत में—

उत्तर

(क) भोजन, आवास और वस्त्र जैसी मूलभूत सुविधाओं का अभाव था। (ख) लोगों के आत्मसम्मान और गौरव की भावना का दमन होता था। (ग) महत्वपूर्ण निर्णय लेने की स्वतंत्रता थी। (घ) धार्मिक रीति-रिवाजों को मनाने पर रोक लगाई जाती थी।

उत्तर: (ख) लोगों के आत्मसम्मान और गौरव की भावना का दमन होता था।

तर्क: लाला लाजपत राय जैसे महान व्यक्ति को भी विदेशों में ‘भारतवर्ष की गुलामी की लज्जा का कलंक’ अपने माथे पर महसूस होता था। पराधीनता ने भारतीयों का आत्मसम्मान छीन लिया था, इसलिए वे दिन ‘दीन’ थे।

प्रश्न 4

निबंध के अनुसार मनुष्य साधन-संपन्न होते हुए भी गौरव का अनुभव नहीं कर सकते यदि—

उत्तर

(क) उन्हें विदेश भ्रमण के अवसर न मिलें। (ख) उनका देश किसी दूसरे देश के अधीन हो। (ग) उनके नगर की शासन प्रणाली कमजोर हो। (घ) अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का हनन होता हो।

उत्तर: (ख) उनका देश किसी दूसरे देश के अधीन हो।

तर्क: निबंध में स्पष्ट कहा गया है कि किसी के पास स्वर्ग के भी सब उपहार और साधन हों, “पर उसका देश गुलाम हो… तो वे सारे उपहार और साधन उसे गौरव नहीं दे सकते।”

प्रश्न 5

“पर उन दो घटनाओं में वह गाँठ इतनी साफ है”, इस वाक्य में रेखांकित शब्द ‘गाँठ’ किन दो बातों को साथ बाँधती है?

उत्तर

(क) देश और नागरिक (ख) देश और संविधान (ग) देश और विदेश (घ) व्यवसाय और आजीविका

उत्तर: (क) देश और नागरिक।

तर्क: लेखक स्वयं कहते हैं कि यह वह गाँठ है “जो नागरिक और देश को एक साथ बाँधती है।” जापानी युवक के अच्छे काम से उसके देश का गौरव बढ़ा और दूसरे युवक के बुरे काम से उसका देश कलंकित हुआ।

प्रश्न 6

उत्तर

प्रस्तुत निबंध में मुख्यतः कौन-सा भाव व्यक्त हुआ है?

(क) लोकतांत्रिक शासन व्यवस्था (ख) पारिवारिक संबंधों का महत्व (ग) व्यक्ति और देश का अंतर्संबंध (घ) देश का महत्व और व्यक्ति की उपेक्षा

उत्तर: (ग) व्यक्ति और देश का अंतर्संबंध।

तर्क: पूरा निबंध यही सिद्ध करता है कि “मैं और मेरा देश दो अलग चीजें तो हैं ही नहीं।” नागरिक के कर्तव्य और अधिकार, दोनों देश से जुड़े हैं।

रचना से संवाद – मेरी समझ मेरे विचार

प्रश्न 1

स्वामी रामतीर्थ फल देने वाले युवक का उत्तर सुनकर मुग्ध क्यों हो गए?

उत्तर

जापानी युवक ने फलों का दाम लेने से इनकार कर दिया और कहा कि उनका मूल्य यही है कि स्वामी जी अपने देश में जाकर किसी से यह न कहें कि जापान में अच्छे फल नहीं मिलते। स्वामी जी उसकी इस देशभक्ति पर मुग्ध हो गए। उन्होंने देखा कि एक साधारण युवक भी अपने देश की छवि के प्रति कितना सजग है और अपनी बात बीच में छोड़कर देश का मान बचाने दौड़ पड़ता है।

प्रश्न 2

जापान के युवक ने स्वामी रामतीर्थ को दिए गए फलों के मूल्य के रूप में क्या माँगा? आपके मन में उस युवक के व्यक्तित्व की कौन-सी छवि उभरती है, यह भी लिखिए।

उत्तर

युवक ने फलों के मूल्य के रूप में केवल यह वचन माँगा कि स्वामी जी भारत लौटकर किसी से यह न कहें कि जापान में अच्छे फल नहीं मिलते। इससे उस युवक की छवि एक सच्चे देशभक्त, सजग और निःस्वार्थ नागरिक की उभरती है। वह अतिथि की आवश्यकता समझने वाला, विनम्र, तत्पर और अपने देश के सम्मान को अपने निजी काम से ऊपर रखने वाला व्यक्ति है।

प्रश्न 3

“बात यह है कि मैं और मेरा देश दो अलग चीज तो हैं ही नहीं।” स्वयं को देश से अलग न मानने के पीछे क्या तर्क हो सकते हैं, उदाहरण देकर स्पष्ट कीजिए।

उत्तर

स्वयं को देश से अलग न मानने के कई तर्क हैं। पहला, देश के सम्मान और साधनों से ही नागरिक को सहारा और सुरक्षा मिलती है; पराधीन देश के बड़े व्यक्ति, जैसे लाला लाजपत राय, को भी विदेश में अपमान महसूस होता था। दूसरा, नागरिक के आचरण से देश की पहचान बनती है; जापानी युवक के अच्छे व्यवहार से जापान का गौरव बढ़ा, जबकि चित्र चुराने वाले विद्यार्थी के कारण उसका पूरा देश कलंकित हुआ। तीसरा, विदेश में हमें व्यक्ति के रूप में कम, ‘भारतीय’ के रूप में अधिक पहचाना जाता है। आज भी जब कोई भारतीय खिलाड़ी ओलंपिक में पदक जीतता है तो पूरा देश गर्व करता है। इसलिए व्यक्ति और देश एक-दूसरे से अटूट रूप से जुड़े हैं।

रचना से संवाद – मेरे अनुभव मेरे विचार

प्रश्न 1

“देश की हीनता और गौरव का ही फल उसे नहीं मिलता, उसकी हीनता और गौरव का फल भी उसके देश को मिलता है”, अपने आस-पास के विभिन्न उदाहरणों के द्वारा इस पंक्ति का भाव स्पष्ट कीजिए।

उत्तर

इस पंक्ति का भाव है कि नागरिक और देश का संबंध दोतरफा है। जब देश सशक्त और सम्मानित होता है तो उसके नागरिकों को भी हर जगह आदर मिलता है; जैसे चंद्रयान की सफलता के बाद विदेशों में रहने वाले भारतीयों का भी सिर ऊँचा हुआ। दूसरी ओर, नागरिकों का आचरण भी देश की छवि बनाता है। यदि कोई पर्यटक हमारे ऐतिहासिक स्मारकों पर नाम लिखता है या विदेशी अतिथि से ठगी करता है, तो अतिथि पूरे देश के बारे में बुरी धारणा लेकर लौटता है। इसके विपरीत, कोई ऑटो चालक किसी विदेशी यात्री का खोया बटुआ लौटा देता है, तो वह पूरे भारत की ईमानदारी का संदेश देता है। (नमूना उत्तर)

प्रश्न 2

“मुझे बहुतों की अपने लिए जरूरत पड़ती थी। मैं भी बहुतों की जरूरत का उनके लिए जवाब था।”

उत्तर

प्रश्न 3

(क) प्रातःकाल से लेकर रात्रि तक आप अपने किन-किन कार्यों में किस-किसका क्या सहयोग लेते हैं और आप दूसरों को किस तरह का सहयोग देते हैं? अपने अनुभव लिखिए।

उत्तर

(नमूना उत्तर) सुबह माँ नाश्ता बनाती हैं, दूधवाला दूध और अखबार वाला समाचार-पत्र पहुँचाता है। विद्यालय जाने के लिए बस-चालक की सहायता लेता हूँ। विद्यालय में शिक्षक पढ़ाते हैं और सफाई कर्मचारी परिसर स्वच्छ रखते हैं। शाम को दुकानदार से सामान लाता हूँ और रात को पिताजी गृहकार्य में मदद करते हैं। मैं भी दादी को दवा देता हूँ, छोटी बहन को पढ़ाता हूँ, मित्रों को नोट्स देता हूँ और घर के कामों में हाथ बँटाता हूँ।

(ख) उपर्युक्त वाक्य में रेखांकित शब्द ‘बहुतों’ में कौन-कौन सम्मिलित होंगे, अनुमान के आधार पर लिखिए।

‘बहुतों’ में लेखक के परिवारजन, पड़ोसी, मित्र, शिक्षक, नगर के दुकानदार, किसान, डॉक्टर, कारीगर, सहकर्मी पत्रकार, पाठक और समाज के वे सभी लोग सम्मिलित होंगे जिनसे लेखक को सहायता मिलती थी और जिन्हें लेखक अपनी सेवाएँ देता था।

(ग) रचनाकार को स्वयं के लिए दूसरे लोगों से किस प्रकार के सहयोग की आवश्यकता पड़ती होगी और वह दूसरों को किस प्रकार का सहयोग देता होगा, अनुमान के आधार पर लिखिए।

रचनाकार पत्रकार और लेखक थे, इसलिए उन्हें समाचार, जानकारी, पुस्तकों, छापेखाने, संपादकीय सहयोगियों और पाठकों की आवश्यकता पड़ती होगी। दैनिक जीवन में किसान, दुकानदार, डॉक्टर आदि का सहयोग भी चाहिए होगा। बदले में वे अपने लेखन और पत्रों (नया जीवन, विकास) के माध्यम से लोगों को ज्ञान, प्रेरणा और जागरूकता देते होंगे, स्वतंत्रता संग्राम और सामाजिक कार्यों में भाग लेते होंगे तथा जरूरतमंदों को सलाह और सहायता देते होंगे।

प्रश्न 3

“सुना नहीं आपने कि जीवन एक युद्ध है और युद्ध में लड़ना ही तो काम नहीं होता।”

उत्तर

प्रश्न 4

(क) उपर्युक्त वाक्य के रेखांकित अंश “युद्ध में लड़ना ही तो काम नहीं होता” के आधार पर लिखिए कि देश की प्रगति, विकास एवं सुरक्षा के प्रति हम सभी के क्या-क्या दायित्व हैं?

उत्तर

जैसे युद्ध में लड़ने वालों के साथ रसद पहुँचाने वाले, अन्न उपजाने वाले किसान और जय बोलने वाले भी महत्त्वपूर्ण होते हैं, वैसे ही देश की प्रगति में हर नागरिक की भूमिका है। हमारे दायित्व हैं— मन लगाकर पढ़ना और अपना काम ईमानदारी से करना, कर (टैक्स) चुकाना, सार्वजनिक संपत्ति की रक्षा करना, स्वच्छता रखना, पानी-बिजली बचाना, कानून का पालन करना, अफवाहें न फैलाना, सैनिकों और देश के लिए काम करने वालों का सम्मान करना तथा चुनाव में सोच-समझकर मत देना। (नमूना उत्तर)

प्रश्न 5

(ख) अपने पास-पड़ोस में विचरने वाले पशु-पक्षियों की जीवनचर्या का अवलोकन कीजिए और अपने अवलोकन के आधार पर लिखिए कि आप उनके संघर्षों को किस रूप में देखते हैं?

उत्तर

(नमूना उत्तर) मेरे घर के पास गौरैया तिनका-तिनका जोड़कर घोंसला बनाती है और दिन-भर दाना खोजकर बच्चों को खिलाती है। गली के कुत्ते भीषण गर्मी और ठंड में भोजन-पानी के लिए भटकते हैं। गिलहरी सर्दियों के लिए दाने जमा करती है। मैं इनके संघर्ष को जीवन के प्रति अदम्य लगन और परिश्रम के रूप में देखता हूँ। ‘दो बैलों की कथा’ के हीरा-मोती भी अन्याय सहकर हार नहीं मानते और स्वतंत्रता के लिए संघर्ष करते हैं। इनसे सीख मिलती है कि कठिनाइयों में भी हिम्मत नहीं छोड़नी चाहिए।

प्रश्न 6

(ग) इस निबंध में जीवन को युद्ध क्यों कहा गया है? आप अपने घर के बड़ों से इस विषय पर चर्चा करके उनके और अपने विचार लिखिए।

उत्तर

जीवन में मनुष्य को हर कदम पर कठिनाइयों, अभावों और चुनौतियों से जूझना पड़ता है, इसलिए उसे युद्ध कहा गया है। जैसे युद्ध में अनेक लोग अलग-अलग भूमिकाएँ निभाते हैं, वैसे ही जीवन और देश-निर्माण में भी हर व्यक्ति का योगदान होता है। (नमूना उत्तर) मेरे दादाजी का कहना है कि जीवन में संघर्ष के बिना कुछ नहीं मिलता, पर यह लड़ाई धैर्य और ईमानदारी से लड़नी चाहिए। मेरा विचार है कि जीवन-युद्ध में दूसरों का साथ देना और उनका उत्साह बढ़ाना भी जीत जितना ही महत्त्वपूर्ण है।

प्रश्न 7

(घ) देश की भौगोलिक सीमाओं की रक्षा सैनिक करते हैं। इसी तरह हमारे आस-पास हमारे जीवन को बेहतर बनाने के लिए अनेक लोग कार्यरत हैं। ये कौन-कौन लोग हैं और उनके लिए आप क्या-क्या कर सकते हैं?

उत्तर

हमारे जीवन को बेहतर बनाने वाले लोग हैं— किसान, सफाई कर्मचारी, डॉक्टर-नर्स, शिक्षक, पुलिसकर्मी, अग्निशमनकर्मी, डाकिया, बिजली-पानी विभाग के कर्मचारी, निर्माण श्रमिक आदि। हम उनके प्रति आदर और कृतज्ञता प्रकट कर सकते हैं, अन्न व्यर्थ न करके किसान के श्रम का सम्मान कर सकते हैं, कूड़ा कूड़ेदान में डालकर सफाईकर्मियों का काम आसान कर सकते हैं, नियमों का पालन करके पुलिस का सहयोग कर सकते हैं और त्योहारों पर उन्हें धन्यवाद दे सकते हैं। (नमूना उत्तर)

प्रश्न 4

“अपने पड़ोस में खेलकर, पड़ोसियों की ममता-दुलार पा, बड़ा हुआ था।”

उत्तर

प्रश्न 5

(क) उपर्युक्त पंक्ति के आधार पर लिखिए कि पास-पड़ोस के लोगों में किस तरह के पारस्परिक संबंध रहे होंगे?

उत्तर

पास-पड़ोस के लोगों में परिवार जैसे आत्मीय संबंध रहे होंगे। पड़ोसी एक-दूसरे के बच्चों को अपना मानकर स्नेह करते होंगे, सुख-दुख में साथ देते होंगे और बच्चे बिना रोक-टोक किसी भी घर में खेलते-खाते होंगे। आपसी विश्वास, सहयोग और अपनापन उन संबंधों की विशेषता रही होगी।

प्रश्न 6

(ख) वर्तमान समय में ऐसे संबंधों में किस तरह के परिवर्तन आए हैं और इनके क्या कारण हो सकते हैं? लिखिए।

उत्तर

आज, विशेषकर शहरों में, पड़ोसी एक-दूसरे को ठीक से जानते तक नहीं; मेल-जोल औपचारिक हो गया है और बच्चे बाहर खेलने के बजाय मोबाइल-टीवी में व्यस्त रहते हैं। इसके कारण हैं— व्यस्त जीवनशैली, नौकरी के लिए बार-बार स्थान बदलना, फ्लैट संस्कृति, एकल परिवार, असुरक्षा की भावना और मोबाइल-इंटरनेट पर अधिक निर्भरता। फिर भी त्योहारों और संकट के समय पड़ोसी आज भी सहायता करते हैं।

प्रश्न 5

“क्या सुरुचि और सौंदर्य को आपके किसी काम से ठेस लगती है?” अपने घर/विद्यालय के आस-पास, सार्वजनिक संसाधनों और ऐतिहासिक महत्व के स्थानों की स्वच्छता एवं सौंदर्य को बनाए रखने के लिए आप और आपके सहपाठी, संबंधी क्या-क्या करते हैं?

उत्तर

(नमूना उत्तर) हम कूड़ा केवल कूड़ेदान में डालते हैं और गीला-सूखा कचरा अलग रखते हैं। विद्यालय में ‘स्वच्छता सप्ताह’ में कक्षा और मैदान की सफाई करते हैं तथा पौधे लगाते हैं। पार्क, बस और रेल में खाने के रैपर या छिलके नहीं फेंकते, न ही थूकते हैं। ऐतिहासिक स्मारकों की दीवारों पर नाम नहीं लिखते और दूसरों को भी ऐसा करने से रोकते हैं। सार्वजनिक नल खुला दिखे तो बंद कर देते हैं। मेरे चाचाजी हर रविवार मोहल्ले के सफाई अभियान में भाग लेते हैं।

प्रश्न 6

“मैं कोई ऐसा काम न करूँ जिससे मेरे देश की स्वतंत्रता को, दूसरे शब्दों में, उसके सम्मान को धक्का पहुँचे।” देश के सम्मान को धक्का न पहुँचे, इसके लिए क्या करें और क्या नहीं करें? अपने-अपने समूह में इसकी चर्चा कीजिए और चर्चा से उभरे बिंदुओं को प्रातःकालीन सभा में पढ़कर सुनाइए।

उत्तर

(नमूना उत्तर)

क्या करें

क्या न करें

देश के कानूनों और संविधान का पालन करें।

सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान न पहुँचाएँ।

राष्ट्रध्वज और राष्ट्रगान का सम्मान करें।

देश की बुराई करते हुए उसे दूसरे देशों से हीन सिद्ध न करें।

विदेशी अतिथियों से शिष्ट और ईमानदार व्यवहार करें।

स्मारकों पर नाम न लिखें, गंदगी न फैलाएँ।

स्वच्छता, अनुशासन और परिश्रम अपनाएँ।

झूठी खबरें और अफवाहें न फैलाएँ।

चुनाव में योग्य व्यक्ति को मत दें।

रिश्वत, बेईमानी और नियम तोड़ने जैसे काम न करें।

रचना से संवाद – मेरे प्रश्न

प्रश्न 1

निबंध के संदर्भ में दिए गए दो प्रश्न— (क) रचनाकार को किस तरह के प्रश्नों का उत्तर देने में आनंद आता है? (ख) आपको किस तरह के प्रश्नों को बूझना रोचक लगता है?

उत्तर

(क) रचनाकार को ऐसे प्रश्नों का उत्तर देने में आनंद आता है जो बात को खिलने और आगे बढ़ने का अवसर दें तथा ठीक समय पर पूछे गए हों।

(ख) (नमूना उत्तर) मुझे पहेलियों जैसे, सोचने पर विवश करने वाले और ‘क्यों’ तथा ‘कैसे’ से शुरू होने वाले प्रश्न बूझना रोचक लगता है, जैसे— आकाश नीला क्यों दिखता है?

प्रश्न 2

अब इस निबंध के आलोक में नीचे दी गई सामग्री को पढ़कर तीन प्रश्न बनाइए और लिखिए।

उत्तर

(नमूना उत्तर)

प्रश्न 1

क्या केवल संपन्न व्यक्ति ही देश की प्रगति और विकास में योगदान दे सकते हैं?

उत्तर

प्रश्न 2

देश की सुरक्षा और संपन्नता में साधारण नागरिक किस प्रकार योगदान करते हैं?

उत्तर

प्रश्न 3

नागरिक के गलत आचरण का देश की छवि पर क्या प्रभाव पड़ता है?

उत्तर

विधा से संवाद

प्रश्न 1

निबंध की विशेषताओं (विषय-केंद्रीयता, वैयक्तिकता, विचार प्रधानता एवं भावनात्मकता, सजीवता/चित्रात्मकता, तार्किकता, प्रेरणात्मकता, संक्षिप्तता और स्पष्टता, साहित्यिक सौंदर्य) से संबंधित संदर्भ ‘मैं और मेरा देश’ निबंध से खोजकर लिखिए।

उत्तर

विशेषता

निबंध से संदर्भ

विषय-केंद्रीयता

पूरा निबंध व्यक्ति और देश के संबंध पर केंद्रित है— “मैं और मेरा देश दो अलग चीजें तो हैं ही नहीं।”

वैयक्तिकता

लेखक ‘मैं’ शैली में अपनी बात कहते हैं— “मैं अपने घर में जनमा था, पला था।”

विचार प्रधानता एवं भावनात्मकता

“महत्त्व किसी कार्य की विशालता में नहीं है, उस कार्य के करने की भावना में है।” बूढ़े किसान के शहद और खाट वाले किसान के प्रसंग भावनात्मक हैं।

सजीवता/चित्रात्मकता

कमालपाशा का हँडिया खोलकर शहद चाटना और तीसरी उँगली बूढ़े के मुँह में देना— दृश्य आँखों के सामने आ जाता है।

तार्किकता

‘अकेला चना भाड़ नहीं फोड़ सकता’ कहावत का खंडन; युद्ध में रसद पहुँचाने वालों और जय बोलने वालों के महत्त्व का तर्क।

प्रेरणात्मकता

“मेरा यानी हरेक नागरिक का यह कर्तव्य है कि वह जब भी कोई चुनाव हो, ठीक मनुष्य को अपना मत दे।”

संक्षिप्तता और स्पष्टता

शक्ति-बोध और सौंदर्य-बोध की बात छोटे-छोटे उदाहरणों (केले का छिलका फेंकना, पीक थूकना) से स्पष्ट की गई है।

साहित्यिक सौंदर्य

“अपने रक्त से गौरव के दीपक जलाए”, “मेरी पूर्णता को एक ही ठसक में अपूर्णता की कसक से भर दिया”, “सौ लालों का एक लाल” जैसी अलंकृत भाषा।

प्रश्न 2

प्रश्नोत्तर या संवादात्मक शैली इस निबंध की संरचना को विशेष बनाती है। इसी तरह की और भी अन्य विशेषताएँ इस निबंध में से छाँटकर लिखिए।

उत्तर

1. दृष्टांत शैली— लेखक अपनी बात सच्ची घटनाओं से सिद्ध करते हैं, जैसे स्वामी रामतीर्थ, जापानी पुस्तकालय, कमालपाशा और नेहरू जी के प्रसंग।

2. मुहावरे-लोकोक्तियों का प्रयोग— ‘अकेला चना भाड़ नहीं फोड़ता’, ‘छूमंतर होना’, ‘दाद देना’, ‘पैरों में बिजली लगना’।

3. पौराणिक संदर्भ— कर्ण और शल्य का प्रसंग।

4. आत्मीय, बातचीत भरी भाषा— “अजी”, “अरे भाई”, “लो, एक और बात बताता हूँ आपको”।

5. शब्द-युग्म और तुकबंदी— ‘ठसक’-‘कसक’, ‘ममता-दुलार’, ‘भरा-पूरा’।

6. तर्कपूर्ण निष्कर्ष— अंत में चुनाव को देश की उच्चता की कसौटी बताकर बात पूरी की गई है।

प्रश्न 3

नीचे कुछ विषय दिए गए हैं, आप इनमें से किन विषयों पर निबंध लिखना चाहेंगे, कारण सहित लिखिए— मेरा भारत मेरा गौरव; चाँद के साथ गपशप; जहाँ न पहुँचे रवि वहाँ पहुँचे कवि; गागर में सागर; यथा नाम तथा गुण; दूध का दूध और पानी का पानी।

उत्तर

(नमूना उत्तर) मैं ‘मेरा भारत मेरा गौरव’ पर निबंध लिखना चाहूँगा, क्योंकि इस पाठ ने मुझे सिखाया है कि देश का गौरव ही मेरा गौरव है और इस विषय पर मैं भारत की संस्कृति, विविधता और उपलब्धियों का वर्णन कर सकता हूँ। दूसरा विषय ‘चाँद के साथ गपशप’ चुनूँगा, क्योंकि इसमें कल्पना की पूरी छूट है और इसे संवाद शैली में बहुत रोचक ढंग से लिखा जा सकता है।

विषयों से संवाद – चुनाव एवं आपके अनुभव

प्रश्न 1

जब कोई चुनाव प्रक्रिया आपके क्षेत्र में शुरू होती है तो किस तरह की गतिविधियाँ होती हैं?

उत्तर

चुनाव की घोषणा होते ही आचार संहिता लागू हो जाती है। उम्मीदवार नामांकन भरते हैं, जगह-जगह पोस्टर-बैनर लगते हैं, रैलियाँ, जनसभाएँ और घर-घर जनसंपर्क होता है। मतदाता सूचियाँ जाँची जाती हैं, मतदाता पर्चियाँ बाँटी जाती हैं और ‘मतदाता जागरूकता’ अभियान चलते हैं। मतदान के दिन मतदान केंद्रों पर सुरक्षा व्यवस्था होती है, लोग कतार में लगकर ईवीएम से मत डालते हैं और उँगली पर स्याही लगाई जाती है। बाद में मतगणना होकर परिणाम घोषित होते हैं।

प्रश्न 2

“जब भी कोई चुनाव हो, ठीक मनुष्य को अपना मत दें”, आपके विचार से एक अच्छे उम्मीदवार में क्या-क्या गुण होने चाहिए?

उत्तर

एक अच्छा उम्मीदवार ईमानदार, शिक्षित और चरित्रवान होना चाहिए। उसे क्षेत्र की समस्याओं की समझ हो, वह जनता के बीच सुलभ रहे, जाति-धर्म के भेदभाव से ऊपर उठकर सबके लिए काम करे, उत्तेजक नारों से नहीं बल्कि ठोस कार्यों से पहचान बनाए, उस पर कोई आपराधिक आरोप न हो और वह अपने वादों को पूरा करने वाला, विनम्र तथा दूरदर्शी हो।

प्रश्न 3

चुनाव से जुड़ा अपना कोई अनुभव लिखिए। (संकेत– विद्यालय में कक्षा प्रतिनिधि का चुनाव)

उत्तर

(नमूना उत्तर) पिछले वर्ष हमारी कक्षा में कक्षा प्रतिनिधि का चुनाव हुआ। तीन विद्यार्थी उम्मीदवार बने। सबने कक्षा के सामने अपनी योजनाएँ बताईं। एक साथी ने सबको टॉफियाँ बाँटकर वोट माँगे, जबकि मेरी मित्र ने पुस्तकालय-कोना बनाने और कक्षा को साफ रखने की ठोस योजना रखी। गुप्त मतदान पर्चियों से हुआ और मेरी मित्र जीत गई। उसने अपने सारे वादे निभाए। इससे मैंने सीखा कि मत लालच में नहीं, योग्यता देखकर देना चाहिए।

प्रश्न 4

यदि आप किसी सभा, क्लब आदि के चुनाव में उम्मीदवार हों तो आपके क्या-क्या मुद्दे होंगे?

उत्तर

(नमूना उत्तर) विद्यालय के पर्यावरण क्लब के चुनाव में मेरे मुद्दे होंगे— परिसर में अधिक पेड़ लगाना और उनकी देखभाल, प्लास्टिक-मुक्त विद्यालय, वर्षा-जल संचयन, हर कक्षा में गीले-सूखे कूड़े के अलग डिब्बे, हर महीने स्वच्छता अभियान और सभी सदस्यों की राय से निर्णय लेना।

विषयों से संवाद – अधिकार और कर्तव्य

प्रश्न 1

आपकी पाठ्यपुस्तक के प्रारंभिक पृष्ठ पर भारतीय संविधान में प्रदत्त मौलिक अधिकार और कर्तव्य दिए गए हैं। उसे पढ़कर अपनी कक्षा में चर्चा कीजिए।

उत्तर

(नमूना उत्तर – चर्चा के बिंदु) संविधान हमें समानता का अधिकार, स्वतंत्रता का अधिकार, शोषण के विरुद्ध अधिकार, धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार, संस्कृति और शिक्षा संबंधी अधिकार तथा संवैधानिक उपचारों का अधिकार देता है। इसके साथ ही हमारे मौलिक कर्तव्य भी हैं, जैसे— संविधान, राष्ट्रध्वज और राष्ट्रगान का आदर करना, देश की एकता-अखंडता की रक्षा करना, सार्वजनिक संपत्ति की रक्षा करना, पर्यावरण की रक्षा करना और वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित करना। निबंध की तरह यहाँ भी स्पष्ट है कि अधिकार और कर्तव्य साथ-साथ चलते हैं; कर्तव्य निभाकर ही हम अधिकारों के सच्चे हकदार बनते हैं।

सृजन

प्रश्न 1 (हमारा पुस्तकालय)

प्रश्न 1

पुस्तकालय की कोई पुस्तक फटी हुई मिली हो या उसमें से कुछ पृष्ठ गायब हों अथवा उसमें पेन से निशान लगे हों— • ऐसा होने के पीछे क्या कारण हो सकते हैं? • ऐसा न हो, इसके लिए क्या किया जा सकता है? • आप पुस्तकालय में किन नियमों का पालन करते हैं, उन नियमों का पालन करना क्यों अनिवार्य है?

उत्तर

कारण: कुछ पाठक लापरवाही से पुस्तकें रखते हैं, स्वार्थवश अपने काम के पृष्ठ या चित्र फाड़ लेते हैं (जैसे पाठ में दुर्लभ चित्र निकालने वाला विद्यार्थी), पढ़ते समय पेन से निशान लगाते हैं, या पुस्तक बहुत पुरानी होने से फट जाती है।

उपाय: पुस्तक लौटाते समय उसकी जाँच हो, पुस्तकों पर जिल्द चढ़ाई जाए, आवश्यक पृष्ठों की फोटोकॉपी की सुविधा हो, विद्यार्थियों को पुस्तक-संरक्षण के प्रति जागरूक किया जाए और नुकसान करने पर जुर्माना हो।

नियम: पुस्तकालय में शांति रखना, पुस्तकें समय पर लौटाना, पुस्तकों पर कुछ न लिखना, पृष्ठ न मोड़ना, पढ़ने के बाद पुस्तक सही स्थान पर रखना और खाने-पीने की चीजें न ले जाना। ये नियम इसलिए अनिवार्य हैं क्योंकि पुस्तकालय सार्वजनिक संपत्ति है; एक पुस्तक अनेक पाठकों के काम आती है। नियम तोड़ने से दूसरों का अधिकार छिनता है और, जैसा निबंध बताता है, कभी-कभी पूरे समाज या देश की बदनामी भी होती है।

प्रश्न 2 (ब्रेल लिपि में पुस्तकें)

आपके विद्यालय में रोचक पुस्तकों का भंडार है परंतु आपके ‘दृष्टिबाधित’ सहपाठी स्वयं पढ़कर इनका आनंद नहीं उठा पाते हैं। प्रधानाध्यापक को ब्रेल लिपि में पुस्तकें मँगवाने के संदर्भ में पत्र लिखिए।

(नमूना उत्तर)

सेवा में,

प्रधानाध्यापक महोदय,

राजकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय,

क ख ग नगर।

दिनांक: 10 अक्टूबर 2026

विषय: पुस्तकालय में ब्रेल लिपि की पुस्तकें मँगवाने हेतु।

महोदय,

सविनय निवेदन है कि मैं कक्षा नौ ‘अ’ का विद्यार्थी हूँ। हमारे विद्यालय के पुस्तकालय में अनेक रोचक पुस्तकें हैं, परंतु हमारी कक्षा के दो दृष्टिबाधित सहपाठी इन्हें स्वयं नहीं पढ़ पाते। वे भी कहानियाँ, कविताएँ और ज्ञानवर्धक पुस्तकें पढ़ने के लिए उत्सुक रहते हैं। अतः आपसे अनुरोध है कि पुस्तकालय के लिए ब्रेल लिपि में पाठ्यपुस्तकें, कहानी-संग्रह और सामान्य ज्ञान की पुस्तकें तथा कुछ ऑडियो पुस्तकें मँगवाने की कृपा करें। इससे हमारे साथियों को भी पढ़ने का समान अवसर मिलेगा।

सधन्यवाद।

आपका आज्ञाकारी शिष्य,

अ ब स

कक्षा नौ ‘अ’

प्रश्न 3 (कृतज्ञता ज्ञापन)

देश के विकास में सभी का सहयोग होता है जो सीमा पर तैनात हैं और जो देश के भीतर हैं, जैसे– अध्यापक, किसान, श्रमिक, कलाकार, वैज्ञानिक, अभियंता आदि। इन सभी के अमूल्य योगदान के लिए कृतज्ञता ज्ञापन तैयार करके लिखिए।

(नमूना उत्तर)

कृतज्ञता ज्ञापन

हम, कक्षा नौ के विद्यार्थी, उन सभी देशवासियों के प्रति हृदय से आभार प्रकट करते हैं जिनके परिश्रम से हमारा देश सुरक्षित और प्रगतिशील है। सीमा पर बर्फ, रेगिस्तान और समुद्र में डटे हमारे सैनिकों को नमन, जिनके कारण हम चैन की नींद सोते हैं। धूप-बारिश में अन्न उगाने वाले किसानों, सड़कें-भवन बनाने वाले श्रमिकों, ज्ञान का दीप जलाने वाले अध्यापकों, नई खोजों से देश का मान बढ़ाने वाले वैज्ञानिकों, बाँध-पुल बनाने वाले अभियंताओं और हमारी संस्कृति को जीवित रखने वाले कलाकारों का हम हृदय से धन्यवाद करते हैं। हम संकल्प लेते हैं कि हम भी अपने कर्तव्यों का पालन कर आपके परिश्रम का मान रखेंगे।

— कक्षा नौ के विद्यार्थी

प्रश्न 4 (विज्ञापन)

“ठीक मनुष्य को अपना मत दें।” आप भी चुनाव में योग्य उम्मीदवार को चुनने के लिए एक आकर्षक विज्ञापन तैयार कीजिए।

(नमूना उत्तर)

आपका वोट – आपकी ताकत!

न लालच में, न डर में, न जाति-धर्म के चक्कर में— सोच-समझकर चुनें ईमानदार, शिक्षित और काम करने वाला उम्मीदवार।

• मतदाता सूची में अपना नाम जाँचें • पहचान-पत्र साथ लाएँ • मतदान अवश्य करें

“पहले मतदान, फिर जलपान!”

निवेदक: मतदाता जागरूकता समिति

प्रश्न 5 (स्वच्छता और आचरण)

प्रश्न 1

“क्या आप कभी केला खाकर छिलका रास्ते में फेंकते हैं...” इस प्रकार के और कौन-कौन से आचरण हो सकते हैं जिनसे देश के सौंदर्य को आघात लगता है?

उत्तर

ऐसे आचरण हैं— ऐतिहासिक इमारतों और सार्वजनिक स्थानों पर नाम लिखना, दीवारों पर पोस्टर चिपकाना, सड़क पर थूकना या गुटखा खाकर पीक मारना, नदियों-तालाबों में कचरा और पूजन-सामग्री डालना, प्लास्टिक की थैलियाँ फेंकना, खुले में कूड़ा जलाना, सार्वजनिक शौचालय गंदे छोड़ना, पेड़-पौधे तोड़ना, कतार तोड़ना, तेज हॉर्न बजाना और पर्यटकों से अभद्र व्यवहार करना। (नमूना उत्तर)

भाषा से संवाद – व्याकरण की बात

प्रश्न 1 (संदर्भ में शब्द)

अपनी पाठ्यपुस्तक में से ऐसे अन्य शब्द छाँटकर लिखिए जो संदर्भ के अनुसार भिन्न-भिन्न अर्थ देते हों।

शब्द

प्रयोग और अर्थ

लाल

उसने लाल कमीज पहनी। (रंग)

उस शहद ने उसे सौ लालों का एक लाल बना दिया। (रत्न/मूल्यवान)

माँ अपने लाल को दुलार रही है। (पुत्र)

भूकंप

भूकंप से कई घर गिर गए। (धरती का हिलना)

लालाजी का अनुभव मेरे मानस में भूकंप बन गया। (मन की उथल-पुथल)

दीपक

पूजा में दीपक जलाया गया। (दीया)

उन्होंने अपने रक्त से गौरव के दीपक जलाए। (प्रकाश/प्रेरणा)

कसौटी

सुनार सोने को कसौटी पर परखता है। (परखने का पत्थर)

चुनाव देश की उच्चता की कसौटी है। (परख का आधार)

मोती

माला में मोती पिरोए गए। (रत्न)

आपने तो बातचीत में कीमती मोती जड़ दिया। (मूल्यवान बात)

उत्तर

सूरज के सामने खड़े हों तो बाईं ओर उत्तर दिशा होगी। (दिशा)

उसने प्रश्न का सही उत्तर दिया। (जवाब)

प्रश्न 2 (मिलते-जुलते भाव वाले ‘शब्द-युग्म’)

आप इस निबंध में से मिलते-जुलते अर्थ वाले और पुनरुक्त (एक ही शब्द को फिर से कहना) शब्द-युग्म छाँटकर लिखिए।

मिलते-जुलते अर्थ वाले शब्द-युग्म

पुनरुक्त शब्द-युग्म

ममता-दुलार, भरा-पूरा, घूम-फिरकर, दया-प्रार्थना, पास-पड़ोस, दाल-रोटी, मोती-हीरे, होटलों-धर्मशालाओं, ठेलमठेल, चाल-ढाल

पूरा-पूरा, छोटी-छोटी, बड़ी-बड़ी, बड़े-बड़े, बार-बार, खील-खील, चलते-चलते

प्रश्न 3 (शब्दों की कड़ियाँ/शृंखला)

नीचे दिए गए शब्दों में उपसर्ग और प्रत्यय शब्द पहचानकर लिखिए— अलौकिक, निरक्षरता, सम्मानित, अनावश्यक, अपमानित, अभिमानी

शब्द

उपसर्ग

मूल शब्द

प्रत्यय

अपूर्णता

अ

पूर्ण

ता

अलौकिक

अ

लोक

इक

निरक्षरता

निर्

अक्षर

ता

सम्मानित

सम्

मान

इत

अनावश्यक

अन्

आवश्यक

— (प्रत्यय नहीं)

अपमानित

अप

मान

इत

अभिमानी

अभि

मान

ई

(टिप्पणी: ‘अलौकिक’ में ‘लोक + इक’ जुड़ने पर ‘लो’ बदलकर ‘लौ’ हो जाता है।)

गतिविधियाँ

प्रश्न 1

‘देश मात्र एक भौगोलिक सीमा क्षेत्र नहीं है।’ इस विषय पर परिचर्चा का आयोजन कीजिए और परिचर्चा में उभरकर आए बिंदुओं की रिपोर्ट तैयार कीजिए।

उत्तर

(नमूना उत्तर – रिपोर्ट)

परिचर्चा रिपोर्ट: ‘देश मात्र एक भौगोलिक सीमा क्षेत्र नहीं है’

दिनांक 5 अक्टूबर को कक्षा नौ में हिंदी शिक्षिका के मार्गदर्शन में यह परिचर्चा हुई। प्रमुख बिंदु उभरे— (1) देश केवल नक्शे पर खिंची रेखाएँ नहीं, बल्कि वहाँ के लोग, उनकी भाषाएँ, संस्कृति, इतिहास और परंपराएँ हैं। (2) देश की पहचान उसके नागरिकों के आचरण से बनती है, जैसा ‘मैं और मेरा देश’ में जापानी युवक के उदाहरण से स्पष्ट है। (3) विदेश में बसे भारतीय भी भारत से भावनात्मक रूप से जुड़े रहते हैं। (4) साझे मूल्य— लोकतंत्र, सहिष्णुता, विविधता में एकता— देश को जोड़ते हैं। (5) प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है कि वह देश के ‘शक्ति-बोध’ और ‘सौंदर्य-बोध’ की रक्षा करे। निष्कर्ष यह निकला कि देश एक जीवंत भावना है जिसे हम सब मिलकर बनाते हैं।

प्रश्न 2 (भाषा संगम)

इनके अतिरिक्त यदि आप ‘देश’ शब्द को किसी और भाषा में भी जानते हैं तो उस भाषा में भी लिखिए। “मैं अपने देश का नागरिक हूँ” वाक्य को अपनी मातृभाषा में भी लिखिए।

(नमूना उत्तर) अंग्रेज़ी में ‘देश’ को country या nation, फ्रेंच में pays और जर्मन में Land कहते हैं।

वाक्य— अंग्रेज़ी: I am a citizen of my country. मराठी: मी माझ्या देशाचा नागरिक आहे। (विद्यार्थी अपनी मातृभाषा में स्वयं लिखें।)

खोजबीन

प्रश्न 1

निबंध में स्वामी रामतीर्थ के अनुभव का उल्लेख किया गया है। आप अपने पुस्तकालय या इंटरनेट से उनके विषय में सामग्री खोजकर पढ़िए और सहपाठियों के साथ चर्चा कीजिए।

उत्तर

(नमूना उत्तर) स्वामी रामतीर्थ (1873–1906) का जन्म पंजाब में हुआ था। वे लाहौर में गणित के प्राध्यापक रहे, बाद में संन्यास लेकर वेदांत के प्रचारक बने। उन्होंने जापान और अमेरिका की यात्रा करके भारतीय दर्शन का संदेश दिया। वे सरल जीवन, आत्मविश्वास और देशप्रेम पर बल देते थे। बहुत कम आयु में उनका देहांत हो गया। चर्चा में हमने पाया कि जापान यात्रा का प्रसंग उनके जीवन से जुड़ा एक प्रेरक अनुभव है, जो बताता है कि साधारण नागरिक भी देश का मान बढ़ा सकता है।

अतिरिक्त महत्वपूर्ण प्रश्न

बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQ)

प्रश्न 1

लेखक के मानस में ‘भूकंप’ किसके अनुभव से उठा था?

उत्तर

(क) स्वामी रामतीर्थ (ख) लाला लाजपत राय (ग) कमालपाशा (घ) पंडित नेहरू

उत्तर: (ख) लाला लाजपत राय

प्रश्न 2

लेखक के अनुसार देश को सबसे पहले किन दो बातों की आवश्यकता है?

उत्तर

(क) धन और विज्ञान (ख) शिक्षा और स्वास्थ्य (ग) शक्ति-बोध और सौंदर्य-बोध (घ) सेना और शस्त्र

उत्तर: (ग) शक्ति-बोध और सौंदर्य-बोध

प्रश्न 3

कर्ण के आत्मविश्वास में संदेह की तरेड़ किसने डाली?

उत्तर

(क) शल्य (ख) अर्जुन (ग) कृष्ण (घ) दुर्योधन

उत्तर: (क) शल्य

प्रश्न 4

बूढ़ा किसान कमालपाशा के लिए उपहार में क्या लाया था?

उत्तर

(क) रंगीन खाट (ख) ताजे फल (ग) मिट्टी की हँडिया में पाव-भर शहद (घ) हाथ से बुना कपड़ा

उत्तर: (ग) मिट्टी की हँडिया में पाव-भर शहद

प्रश्न 5

लेखक के अनुसार देश की उच्चता और हीनता की कसौटी क्या है?

उत्तर

(क) धन-संपत्ति (ख) चुनाव (ग) सैन्य शक्ति (घ) जनसंख्या

उत्तर: (ख) चुनाव

लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1

लाला लाजपत राय का कौन-सा अनुभव लेखक के लिए ‘मानसिक भूकंप’ बन गया?

उत्तर

लालाजी ने कहा था कि वे अमेरिका, इंग्लैंड, फ्रांस और संसार के अन्य देशों में घूमे, पर जहाँ भी गए, भारतवर्ष की गुलामी की लज्जा का कलंक उनके माथे पर लगा रहा। इस अनुभव ने लेखक को समझाया कि देश पराधीन हो तो व्यक्ति की सारी पूर्णता व्यर्थ है।

प्रश्न 2

लेखक ‘अकेला चना भाड़ नहीं फोड़ सकता’ कहावत को झूठा क्यों मानता है?

उत्तर

लेखक के अनुसार इतिहास साक्षी है कि बहुत बार अकेले व्यक्ति ने ही बड़ा परिवर्तन किया है। जापानी युवक जैसे एक साधारण नागरिक ने अकेले ही अपने देश का गौरव बढ़ा दिया। इसलिए हर अकेला नागरिक भी देश के लिए बहुत कुछ कर सकता है।

प्रश्न 3

हम देश के शक्ति-बोध को चोट कैसे पहुँचाते हैं?

उत्तर

जब हम रेलों, बसों, चौपालों आदि में अपने देश की बुराई करते हैं और दूसरे देशों से तुलना करके उसे हीन सिद्ध करते हैं, तो देश के सामूहिक मानसिक बल का ह्रास होता है। जैसे शल्य के बार-बार अर्जुन की प्रशंसा करने से कर्ण का आत्मविश्वास टूट गया था।

प्रश्न 4

पंडित नेहरू ने खाट लाने वाले किसान को अपना हस्ताक्षरित फोटो क्यों दिया?

उत्तर

वह फोटो मामूली खाट का मूल्य नहीं था, बल्कि किसान की सच्ची भावना का सम्मान था। किसान रंगीन सुतलियों से खाट बुनकर उसे कंधे पर उठाकर प्रधानमंत्री तक लाया था। इससे सिद्ध होता है कि छोटे कार्य के पीछे अच्छी भावना हो तो वह महान बन जाता है।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1

जापान में घटी दो घटनाओं के माध्यम से लेखक ने क्या सिद्ध किया है? स्पष्ट कीजिए।

उत्तर

पहली घटना में एक जापानी युवक ने स्वामी रामतीर्थ के मुँह से सुना कि जापान में शायद अच्छे फल नहीं मिलते। वह दूर से ताजे फल लाया और मूल्य के रूप में केवल यह माँगा कि स्वामी जी भारत में ऐसा न कहें। इससे जापान का गौरव बढ़ा। दूसरी घटना में किसी अन्य देश के एक विद्यार्थी ने सरकारी पुस्तकालय की पुस्तक से दुर्लभ चित्र निकाल लिए। उसे जापान से निकाल दिया गया और पुस्तकालय के बाहर लिख दिया गया कि उस देश का कोई निवासी यहाँ प्रवेश नहीं कर सकता। इन दोनों घटनाओं से लेखक सिद्ध करते हैं कि नागरिक का आचरण सीधे उसके देश की प्रतिष्ठा से जुड़ा है; एक युवक देश का सिर ऊँचा करता है, तो दूसरा उसे कलंकित कर देता है।

प्रश्न 2

‘मैं और मेरा देश’ निबंध में नागरिक के कर्तव्य और अधिकार क्या बताए गए हैं?

उत्तर

लेखक के अनुसार नागरिक का कर्तव्य है कि उसे निजी रूप से सारे संसार का राज्य भी मिलता हो, तब भी वह ऐसा कोई काम न करे जिससे देश की स्वतंत्रता और सम्मान को धक्का पहुँचे या उसकी शक्ति घटे। उसे देश के शक्ति-बोध और सौंदर्य-बोध की रक्षा करनी चाहिए— न देश की निंदा करे, न गंदगी फैलाए। चुनाव में ठीक मनुष्य को मत देना भी उसका बड़ा कर्तव्य है। उसका अधिकार है कि देश के सम्मान का पूरा भाग उसे मिले, देश की शक्तियों से उसे अपने सम्मान की रक्षा का भरोसा रहे और उसका मत लिए बिना कोई भी व्यक्ति अधिकार की कुरसी पर न बैठ सके। इस प्रकार कर्तव्य और अधिकार एक-दूसरे के पूरक हैं।

Frequently Asked Questions

What is Class 9 Hindi Ganga Chapter 7 (मैं और मेरा देश) about?

कन्हैयालाल मिश्र 'प्रभाकर' का निबंध 'मैं और मेरा देश' व्यक्ति और राष्ट्र के अटूट संबंध को स्थापित करता है। लेखक के अनुसार व्यक्ति की पहचान केवल उसकी निजता तक सीमित नहीं होती, बल्कि उसके परिवार, क्षेत्र और राष्ट्र से भी जुड़ी होती है। इसलिए व्यक्ति का हर कार्य देश के सम्मान को प्रभावित करता है, और देश तथा नागरिक का सम्मान एक-दूसरे से जुड़ा है।

What do these NCERT solutions for Class 9 Hindi Ganga Chapter 7 (मैं और मेरा देश) cover?

All 50 questions from the latest NCERT textbook for this chapter are answered step by step, organised as रचना से संवाद – मेरे प्रश्न and अतिरिक्त महत्वपूर्ण प्रश्न.

Are these solutions based on the new NCERT syllabus?

Yes. The answers follow the current NCERT textbook for Class 9 Hindi Ganga and the latest CBSE syllabus, so the question numbers and wording match the book you use in class.

How should I use these solutions to prepare for exams?

Attempt each question on your own first, then compare your working with the answer here. Note the steps or keywords you missed, and revise the chapter notes before taking a chapter-wise MCQ test to check your understanding.

Are the NCERT solutions for Class 9 Hindi Ganga Chapter 7 (मैं और मेरा देश) free?

Yes. All Circle of Learning NCERT solutions and chapter notes are free to read online, with no sign-up needed.