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Class 9 Hindi Ganga Chapter 6

NCERT Solutions for Class 9 Hindi Ganga Chapter 6: रीढ़ की हड्डी

जगदीशचंद्र माथुर का एकांकी 'रीढ़ की हड्डी' (1939) विवाह की पारंपरिक व्यवस्था और स्त्री-शिक्षा के प्रति रूढ़िवादी सोच पर व्यंग्य करता है। रामस्वरूप अपनी पढ़ी-लिखी बेटी उमा को वर-पक्ष के सामने कम पढ़ी बताने को विवश हैं, क्योंकि लड़के वालों को कम शिक्षित बहू चाहिए। अंत में उमा साहसपूर्वक सच कहकर वर-पक्ष की दोहरी मानसिकता उजागर करती है। उमा एक शिक्षित और सशक्त स्त्री का प्रतिनिधित्व करती है।

Circle of Learning • नई NCERT पाठ्यपुस्तक "गंगा" (2026-27) • पाठ के सभी प्रश्नों के उत्तर

रचना से संवाद : मेरे उत्तर मेरे तर्क

निर्देश : निम्नलिखित प्रश्नों के सटीक उत्तर चुनिए और यह भी बताइए कि आपको ये उत्तर उपयुक्त क्यों लगते हैं।

प्रश्न 1

एकांकी 'रीढ़ की हड्डी' का शीर्षक किसका प्रतीक है? (क) शरीर के एक आवश्यक अंग का (ख) व्यक्ति की ऊँचाई के आधार का (ग) आत्म-सम्मान और नैतिक दृढ़ता का (घ) शारीरिक शक्ति और परिश्रम का

उत्तर

(ग) आत्म-सम्मान और नैतिक दृढ़ता का।

तर्क : एकांकी में 'रीढ़ की हड्डी' से अभिप्राय शरीर की हड्डी से अधिक व्यक्तित्व की दृढ़ता है। उमा में स्वाभिमान और सच बोलने का साहस है, जबकि शंकर पिता की हर बात पर हाँ में हाँ मिलाता है और उसमें अपना कोई मत या साहस नहीं है।

प्रश्न 2

'रीढ़ की हड्डी' एकांकी में किस पर व्यंग्य किया गया है? (क) पात्रों की निर्धनता और लाचारी पर (ख) पात्रों की भाषा और हास्य पर (ग) विवाह और अशिक्षा पर (घ) समाज की अनुचित मान्यताओं पर

उत्तर

(घ) समाज की अनुचित मान्यताओं पर।

तर्क : एकांकी उन मान्यताओं पर व्यंग्य करता है जिनमें बहू कम पढ़ी-लिखी चाहिए, लड़की को वस्तु की तरह 'देखा' और परखा जाता है, सुंदरता को निहायत जरूरी माना जाता है और लड़के-लड़कियों की शिक्षा में भेद किया जाता है।

प्रश्न 3

"घर जाकर ज़रा यह पता लगाइएगा कि आपके लाडले बेटे के रीढ़ की हड्डी भी है या नहीं" यह वाक्य शंकर की किस छवि को उजागर करता है? (क) नैतिक साहस की कमी और चारित्रिक दुर्बलता (ख) अनुभव और विवेक की कमी (ग) चारित्रिक दृढ़ता और शारीरिक दुर्बलता (घ) उदासीनता और एकाकीपन

उत्तर

(क) नैतिक साहस की कमी और चारित्रिक दुर्बलता।

तर्क : शंकर का अपना कोई विचार नहीं है; वह पिता की हर बात दोहराता है। वह लड़कियों के होस्टल के आस-पास ताक-झाँक करते पकड़ा गया था और मुँह छिपाकर भागा था। उमा इसी कायरता और चारित्रिक कमजोरी पर चोट करती है।

प्रश्न 4

"जी हाँ, मैं कॉलेज में पढ़ी हूँ। मैंने बी.ए. पास किया है।" उमा की दृष्टि में शिक्षा प्राप्त करने का सही अर्थ है? (क) बड़ी-बड़ी डिग्री प्राप्त करना (ख) कॉलेज में पढ़ना और नौकरी पाना (ग) माता-पिता और पति को प्रसन्न रखना (घ) आत्मबल और स्वतंत्र विचार रखना

उत्तर

(घ) आत्मबल और स्वतंत्र विचार रखना।

तर्क : उमा कहती है, "कोई पाप नहीं किया, कोई चोरी नहीं की… मुझे अपनी इज्जत— अपने मान का खयाल तो है।" उसकी शिक्षा ने उसे अन्याय के विरुद्ध बोलने का साहस और अपने सम्मान की समझ दी है।

प्रश्न 5

गोपालप्रसाद और रामस्वरूप में क्या-क्या समानताएँ हैं? (क) दोनों प्रगतिशील हैं और रूढ़ियों को नकारते हैं। (ख) दोनों दिखावे और परंपरा के शिकार हैं। (ग) दोनों शिक्षा और रूढ़ियों के समर्थक हैं। (घ) दोनों संगीत और स्वादिष्ट भोजन के प्रेमी हैं।

उत्तर

(ख) दोनों दिखावे और परंपरा के शिकार हैं।

तर्क : गोपालप्रसाद पढ़े-लिखे वकील होकर भी कम पढ़ी बहू चाहते हैं और पुराने जमाने की शेखी बघारते हैं। रामस्वरूप बेटी को बी.ए. कराकर भी विवाह के लिए उसकी पढ़ाई छिपाते हैं, कमरे को सजाते हैं और झूठी हँसी से खुशामद करते हैं। दोनों ही समाज की रूढ़ परंपरा के आगे झुके हुए हैं।

प्रश्न 6

इस एकांकी की संवाद शैली मुख्यतः कैसी है? (क) औपचारिक और शुष्क (ख) स्वाभाविक और व्यंग्यपूर्ण (ग) काव्यात्मक और प्रश्नात्मक (घ) भावुक और संक्षिप्त

उत्तर

(ख) स्वाभाविक और व्यंग्यपूर्ण।

तर्क : संवाद रोजमर्रा की बोलचाल जैसे हैं ("हँ-हँ-हँ", "उल्लू कहीं का") और उनमें तीखा व्यंग्य है, जैसे "खूबसूरती पर टैक्स!", "मोर के पंख होते हैं, मोरनी के नहीं" और "मर्द के दाढ़ी होती है, औरत के नहीं"।

रचना से संवाद : मेरी समझ मेरे विचार

प्रश्न 1

बाबू रामस्वरूप समाज में आधुनिक व्यवहार का दिखावा करते हैं, जबकि उनके विचार रूढ़िवादी हैं। इस अंतर्द्वंद्व के उदाहरण एकांकी में से खोजकर लिखिए। (संकेत– उमा के साथ उनका व्यवहार, विवाह के लिए दिखावे करना किंतु इन प्रयासों को छिपाने की चेष्टा करना आदि।)

उत्तर

रामस्वरूप सचमुच आधुनिक विचारों वाले हैं, क्योंकि उन्होंने उमा को बी.ए. तक पढ़ाया और उसे गाना, सितार, चित्रकला सिखाई; वे गोपालप्रसाद के "दकियानूसी खयालों" पर गुस्सा भी करते हैं। पर विवाह के समय वे समाज के दबाव में झुक जाते हैं— (1) वे उमा की बी.ए. की पढ़ाई छिपाकर उसे मैट्रिक पास बताते हैं। (2) चश्मे के बारे में झूठ बोलते हैं कि आँखें दुखने आई थीं। (3) प्रेमा से कहते हैं कि उमा को "ठीक-ठाक करके" लाना, यानी लड़की को सजाकर दिखाना। (4) कमरे में तख्त, दरी, बाजा-सितार सजाकर दिखावा करते हैं और बार-बार "हँ-हँ-हँ" करके खुशामद करते हैं। (5) प्रेमा जब इंट्रेंस की बात कहने लगती है, तो उसे चुप करा देते हैं। यही उनका अंतर्द्वंद्व है।

प्रश्न 2

'रीढ़ की हड्डी' का संदर्भ दो अलग-अलग पात्रों के लिए भिन्न-भिन्न अर्थों में आया है, उनकी पहचान कीजिए और लिखिए।

उत्तर

(1) गोपालप्रसाद द्वारा शंकर के लिए (शारीरिक अर्थ में) : वे शंकर से कहते हैं, "झुककर क्यों बैठते हो? … कमर सीधी करके बैठो। तुम्हारे दोस्त ठीक कहते हैं कि शंकर की 'बैकबोन'…" यहाँ संकेत शंकर की झुकी कमर और शारीरिक कमजोरी की ओर है। (2) उमा द्वारा शंकर के लिए (नैतिक अर्थ में) : "आपके लाडले बेटे के रीढ़ की हड्डी भी है या नहीं— यानी बैकबोन, बैकबोन!" यहाँ इसका अर्थ है आत्मसम्मान, नैतिक साहस और चरित्र की दृढ़ता, जो शंकर में नहीं है। इसके विपरीत उमा स्वयं इस 'रीढ़' यानी दृढ़ता की प्रतीक है।

प्रश्न 3

"मेरी समझ में तो ये पढ़ाई-लिखाई के जंजाल आते नहीं।" प्रेमा की इस सोच से उस समय की स्त्री-शिक्षा की स्थिति के विषय में क्या पता चलता है?

उत्तर

प्रेमा की बात से पता चलता है कि उस समय स्त्रियों की शिक्षा को आवश्यक नहीं माना जाता था। लड़कियों के लिए 'आ-ई' पढ़ लेना, गिनती सीख लेना और 'स्त्री-सुबोधिनी' जैसी पुस्तक पढ़ लेना ही काफी समझा जाता था। ऊँची शिक्षा को 'जंजाल' माना जाता था, जिससे लड़की "सिर चढ़" जाती है और "हाथ से" निकल जाती है। स्वयं स्त्रियाँ भी इसी सोच को सही मानती थीं। विवाह के बाजार में अधिक पढ़ी-लिखी लड़की को बाधा समझा जाता था।

प्रश्न 4

लेखक ने 'रीढ़ की हड्डी' शब्द को एकांकी के शीर्षक के रूप में क्यों चुना होगा? यदि आप इस एकांकी का दूसरा शीर्षक रखना चाहें, जो इसकी मुख्य बात को दर्शाए, तो वह क्या होगा और क्यों?

उत्तर

'रीढ़ की हड्डी' शरीर को सीधा खड़ा रखती है; उसी तरह आत्मसम्मान और नैतिक साहस व्यक्ति को सीधा खड़ा रखते हैं। लेखक ने यह शीर्षक इसलिए चुना, क्योंकि पूरा एकांकी इसी प्रश्न पर टिका है कि असली 'रीढ़' किसमें है— डिग्री और पुरुष होने पर गर्व करने वाले शंकर में, या अपमान के विरुद्ध खड़ी होने वाली उमा में। यह शीर्षक प्रतीकात्मक, व्यंग्यपूर्ण और जिज्ञासा जगाने वाला है।

दूसरा शीर्षक (नमूना उत्तर) : "मैं वस्तु नहीं हूँ" या "उमा का उत्तर"। यह शीर्षक इसलिए उपयुक्त है, क्योंकि एकांकी का मुख्य संदेश यही है कि लड़की कोई कुर्सी-मेज नहीं जिसे खरीदार देखकर पसंद या नापसंद करे; उसमें भी दिल, सम्मान और विचार हैं।

विधा से संवाद : एकांकी की पड़ताल

प्रश्न 1

आगे 'रीढ़ की हड्डी' एकांकी से संबंधित कुछ बिंदु दिए गए हैं। एकांकी में से इन बिंदुओं से संबंधित एक-एक उदाहरण ढूँढ़कर लिखिए।

उत्तर

बिंदु

उदाहरण

1. एकांकी का नाम

रीढ़ की हड्डी

2. लेखक का नाम

जगदीशचंद्र माथुर

3. पात्र

उमा (लड़की), रामस्वरूप (लड़की का पिता), प्रेमा (लड़की की माँ), शंकर (लड़का), गोपालप्रसाद (लड़के का पिता), रतन (घरेलू सहायक)

4. परिवेश/देश-काल

स्वतंत्रता से पहले (1939 के आस-पास) का मध्यमवर्गीय शहरी परिवार; रामस्वरूप के घर का "मामूली तरह से सजा हुआ एक कमरा"; शंकर लखनऊ के मेडिकल कॉलेज में पढ़ता है।

5. रंग-निर्देश/मंच-निर्देश

"(मामूली तरह से सजा हुआ एक कमरा। अंदर के दरवाजे से आते हुए जिन महाशय की पीठ नजर आ रही है, वह अधेड़ उम्र के मालूम होते हैं…)"

6. संवाद-निर्देश

"उमा : (हल्की लेकिन मजबूत आवाज़ में) क्या जवाब दूँ, बाबू जी!" / "गोपालप्रसाद : (ताव में आकर)"

7. समस्या

विवाह के लिए लड़की को वस्तु की तरह परखना, कम पढ़ी बहू की माँग, स्त्री-शिक्षा के प्रति संकीर्ण सोच और विवाह में दिखावा।

8. संवाद

"जनाब, मोर के पंख होते हैं, मोरनी के नहीं; शेर के बाल होते हैं, शेरनी के नहीं।"

9. मुख्य विचार

स्त्री भी सम्मान और भावनाओं वाली मनुष्य है; शिक्षा उसे आत्मबल देती है, और असली 'रीढ़' नैतिक साहस है, न कि लिंग या डिग्री।

10. समाधान/परिणाम

उमा सच कहकर गोपालप्रसाद और शंकर को निरुत्तर कर देती है; वे बिना रिश्ता तय किए चले जाते हैं। उमा रो पड़ती है और रतन के "बाबूजी, मक्खन!" कहने पर परदा गिरता है।

विधा से संवाद : रंग-निर्देश

प्रश्न 1

अब इस एकांकी को कक्षा में प्रस्तुत करने का समय है। अपने समूह के साथ मिलकर एकांकी के किसी एक दृश्य का चुनाव कीजिए। उसकी तैयारी कीजिए और कक्षा में उसे प्रस्तुत कीजिए। (संकेत– (i) समूह बनाइए और उचित हाव-भाव द्वारा उस दृश्य का अभिनय कीजिए। (ii) आप अपनी आवश्यकता के अनुसार दिए गए रंग-निर्देश में परिवर्तन भी कर सकते हैं।)

उत्तर

उत्तर (नमूना योजना) : चुना गया दृश्य : उमा का प्रवेश से लेकर एकांकी का अंत। पात्र-वितरण : उमा, रामस्वरूप, गोपालप्रसाद, शंकर, प्रेमा, रतन— छह विद्यार्थी। मंच-सज्जा : कक्षा के एक कोने में दो कुर्सियाँ, एक छोटी मेज पर चाय के प्याले, एक तख्त (बेंच पर चादर) और उस पर हारमोनियम या सितार का चित्र। वेशभूषा : गोपालप्रसाद के हाथ में छड़ी और कंधे पर गमछा; शंकर झुककर बैठे; उमा सादे कपड़ों और चश्मे में। हाव-भाव : रामस्वरूप बार-बार हाथ मलें और "हँ-हँ-हँ" करें; उमा पहले सिर झुकाए रहे, फिर "क्या जवाब दूँ, बाबू जी!" से आवाज मजबूत करे; अंत में सिसकियाँ। परिवर्तन : सितार न होने पर उमा केवल मीरा का भजन गुनगुना सकती है। अंत में रतन का "बाबूजी, मक्खन!" कहते ही सब स्थिर हो जाएँ और प्रकाश बुझा दिया जाए।

विधा से संवाद : मेरी टिप्पणी

प्रश्न 1

"जी हाँ, जाइए, जरूर चले जाइए! लेकिन घर जाकर ज़रा यह पता लगाइएगा कि आपके लाडले बेटे के रीढ़ की हड्डी भी है या नहीं— यानी बैकबोन, बैकबोन!" अब आप उमा द्वारा शंकर के लिए कही गई उपर्युक्त बात पर अपने विचार प्रस्तुत करते हुए इस पर एक संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।

उत्तर

उत्तर (नमूना उत्तर) : उमा का यह कथन पूरे एकांकी का सार है। शंकर उच्च शिक्षा पा रहा है, फिर भी उसमें न अपना कोई विचार है, न साहस; वह पिता की हर बात दोहराता है और गलत आचरण करके मुँह छिपाकर भागता है। उमा बताती है कि केवल डिग्री या पुरुष होना किसी को श्रेष्ठ नहीं बनाता; असली 'रीढ़' आत्मसम्मान, ईमानदारी और नैतिक साहस है। उसका व्यंग्य तीखा पर सच्चा है। यह कथन उस सोच पर करारा प्रहार है जो लड़की को परखने का अधिकार तो लेती है, पर लड़के के चरित्र को परखना जरूरी नहीं समझती।

विषयों से संवाद : तुलना और विचार

प्रश्न 1

"गोपालप्रसाद : भला पूछिए इन अक्ल के ठेकेदारों से कि क्या लड़कों की पढ़ाई और लड़कियों की पढ़ाई एक बात है।" एकांकी में उन पंक्तियों को खोजिए जहाँ एकांकी के पात्रों के व्यवहार में लड़कियों तथा लड़कों के प्रति भिन्न-भिन्न दृष्टि अभिव्यक्त हुई है। अब यह भी लिखिए कि आप इस भिन्नता को किस प्रकार समझते हैं?

उत्तर

ऐसी पंक्तियाँ—

  • "हमें ज्यादा पढ़ी-लिखी लड़की नहीं चाहिए। मेम साहब तो रखनी नहीं… बस हद से हद मैट्रिक-पास होनी चाहिए।" (गोपालप्रसाद)
  • "मर्दों का काम तो है ही पढ़ना और काबिल होना। अगर औरतें भी वही करने लगीं… तब तो हो चुकी गृहस्थी।" (गोपालप्रसाद)
  • "मोर के पंख होते हैं, मोरनी के नहीं; शेर के बाल होते हैं, शेरनी के नहीं।" (गोपालप्रसाद)
  • "कुछ बातें दुनिया में ऐसी हैं जो सिर्फ मर्दों के लिए हैं। और ऊँची तालीम भी ऐसी चीजों में से एक है।" (गोपालप्रसाद)
  • "लड़की का खूबसूरत होना निहायत जरूरी है।" और लड़के की बीमारी व एक साल पिछड़ने को सामान्य मान लेना।
  • "इंट्रेंस ही पास करा लेते— लड़की अपने हाथ रहती।" (प्रेमा)

मेरे विचार : यह भिन्नता पितृसत्तात्मक सोच का परिणाम है, जिसमें स्त्री को घर तक सीमित और पुरुष के अधीन माना गया। लड़के की कमियों को अनदेखा किया जाता है और लड़की से सुंदरता, गुण और चुप्पी— सब की अपेक्षा की जाती है। मेरे विचार से शिक्षा पर लड़के और लड़की का समान अधिकार है; शिक्षित स्त्री परिवार और समाज दोनों को मजबूत बनाती है। आज लड़कियाँ हर क्षेत्र में आगे हैं, जो सिद्ध करता है कि यह भेद अन्यायपूर्ण और निराधार था।

प्रश्न 2

"मुझे अपनी इज्जत, अपने मान का खयाल तो है। लेकिन इनसे पूछिए कि ये किस तरह अपना मुँह छिपाकर भागे थे।" एकांकी में उमा अपने अधिकार और विचार खुलकर व्यक्त करती है। इससे उमा के व्यक्तित्व के विषय में क्या-क्या पता चलता है? आपके विचार से उसके व्यक्तित्व में ये विशेषताएँ कैसे आई होंगी? (संकेत– शिक्षा, परिवार का व्यवहार आदि)

उत्तर

उमा शिक्षित, स्वाभिमानी, साहसी, स्पष्टवादी और सच्ची है। वह गुणी भी है— सितार, गायन, चित्रकला और सिलाई जानती है। वह बनावटी सजावट (पौडर) से दूर रहती है और अपनी इज्जत के लिए बड़ों के सामने भी सच बोलने का साहस रखती है, फिर भी संवेदनशील है, क्योंकि अंत में रो पड़ती है।

ये विशेषताएँ उसमें मुख्य रूप से कॉलेज की शिक्षा से आई होंगी, जिसने उसे सोचने-समझने और अपने अधिकार पहचानने की शक्ति दी। उसके पिता रामस्वरूप ने उसे पढ़ाया-लिखाया, कलाएँ सिखाईं और "सिर चढ़ा" रखा, यानी घर में उसे अपनी बात कहने की स्वतंत्रता मिली। कॉलेज के वातावरण और अपने अनुभवों (जैसे होस्टल वाली घटना) ने भी उसे आत्मविश्वासी बनाया होगा।

सृजन : एकांकी का विस्तार

प्रश्न 1

"रतन : बाबूजी, मक्खन! (सब रतन की तरफ देखते हैं और परदा गिरता है।)" एकांकी के अंत में रतन कहता है— "बाबूजी, मक्खन…" और परदा गिर जाता है। लेखक ने इस संवाद से एकांकी का अंत क्यों किया होगा? (संकेत– हास्य, व्यंग्य, टिप्पणी आदि)

उत्तर

यह अंत बहुत व्यंग्यपूर्ण और प्रतीकात्मक है। पूरा दिन रामस्वरूप जिस मक्खन के लिए परेशान रहे, ताकि मेहमानों की खातिरदारी में कोई कमी न रहे, वह तब आता है जब मेहमान अपमानित होकर जा चुके हैं और रिश्ता टूट चुका है। गंभीर, भावुक क्षण में यह संवाद हल्का हास्य पैदा करता है और तनाव तोड़ता है। साथ ही यह टिप्पणी भी करता है कि 'मक्खन लगाने' यानी खुशामद और दिखावे के सारे प्रयास व्यर्थ गए। सच्चाई के सामने चापलूसी का कोई मूल्य नहीं रहता।

प्रश्न 2

एकांकी में यदि परदा दोबारा उठ जाए तो अगला दृश्य क्या होगा? अनुमान लगाइए और लिखिए।

उत्तर

उत्तर (नमूना उत्तर)

(वही कमरा। रतन मक्खन का कटोरा हाथ में लिए खड़ा है। उमा तख्त पर बैठी सिसक रही है। प्रेमा उसके सिर पर हाथ फेर रही है।)

प्रेमा : (रामस्वरूप से) देखा! मैंने कहा था न, इंट्रेंस ही करा देते…

रामस्वरूप : (धीरे से उठकर उमा के पास आते हैं।) नहीं प्रेमा, गलती उमा की नहीं, मेरी है। मैंने अपनी पढ़ी-लिखी बेटी को अनपढ़ बताकर उसका अपमान किया।

उमा : (आँसू पोंछते हुए) बाबूजी, मुझे माफ कीजिए, मैंने आपके मेहमानों से कड़वा बोला।

रामस्वरूप : नहीं बेटी, तुमने वही कहा जो मुझे कहना चाहिए था। आज तुमने दिखा दिया कि रीढ़ की हड्डी किसमें है। अब तुम्हारा रिश्ता वहीं होगा, जहाँ तुम्हारी पढ़ाई और तुम्हारे विचारों का सम्मान हो। पहले तुम एम.ए. करो।

प्रेमा : (मुस्कुराकर) और यह मक्खन?

रामस्वरूप : (हँसते हुए) आज इसे हम सब मिलकर खाएँगे। रतन, चाय फिर से चढ़ा दे!

(उमा मुस्कुराती है। परदा गिरता है।)

भाषा से संवाद : व्याकरण की बात — मेरे शब्द

प्रश्न 1

एकांकी में पाँच ऐसे शब्द चुनकर रेखांकित कर लीजिए जो आपके लिए बिल्कुल नए थे। उन शब्दों वाले वाक्य अपनी लेखन-पुस्तिका में लिखिए। अब उन शब्दों के अर्थ अपने अनुमान से लिखिए। इसके बाद उनके अर्थ शब्दकोश में से देखकर लिखिए।

उत्तर

उत्तर (नमूना उत्तर)

वाक्य

नया शब्द

अनुमानित अर्थ

शब्दकोश से अर्थ

गुस्सा तो मुझे बहुत आता है इनके दकियानूसी खयालों पर।

दकियानूसी

अजीब

पुराने ढर्रे का, रूढ़िवादी

यह सब आप क्या तकल्लुफ़ करते हैं!

तकल्लुफ़

तकलीफ

औपचारिकता, शिष्टाचार में किया गया अतिरिक्त प्रयत्न

और जायचा (जन्मपत्र) तो मिल ही गया होगा?

जायचा

जाँच

जन्मकुंडली, जन्मपत्री

काफी अनुभवी और फितरती महाशय हैं।

फितरती

फुर्तीला

चालाक, चालबाज

उनका लड़का कुछ खीस निपोरने वाले नौजवानों में से है।

खीस निपोरना

मुँह बनाना

बेवजह दाँत दिखाकर हँसना, झेंपकर हँसना

भाषा से संवाद : भाषा में मुहावरे

प्रश्न 1

एकांकी में से चुनकर कुछ वाक्य नीचे दिए गए हैं। इन वाक्यों में जहाँ-जहाँ मुहावरे आए हैं, उन्हें पहचानकर रेखांकित कीजिए। इन मुहावरों का प्रयोग करते हुए नए वाक्य बनाकर लिखिए।

उत्तर

एकांकी का वाक्य

मुहावरा (अर्थ)

नया वाक्य

1. उनके पीछे-पीछे भीगी बिल्ली की तरह रतन आ रहा है— खाली हाथ।

भीगी बिल्ली बनना (डरकर या लज्जित होकर दबा हुआ रहना)

शिक्षक के आते ही शोर मचाने वाले बच्चे भीगी बिल्ली बन गए।

2. लेकिन वह तुम्हारी लाडली बेटी तो मुँह फुलाए पड़ी है।

मुँह फुलाना (नाराज होना, रूठना)

खिलौना न मिलने पर छोटा भाई सुबह से मुँह फुलाए बैठा है।

3. और तुम उसकी माँ, किस मर्ज की दवा हो?

किस मर्ज की दवा होना (किसी काम का न होना)

जब तुम मेरी जरा-सी मदद नहीं कर सकते, तो तुम किस मर्ज की दवा हो?

4. तुम्हीं ने उसे पढ़ा-लिखाकर इतना सिर चढ़ा रखा है।

सिर चढ़ाना (बहुत अधिक लाड़-प्यार देकर बिगाड़ना)

दादी ने पोते को इतना सिर चढ़ा रखा है कि वह किसी की नहीं सुनता।

5. मगर तुम तो अभी से सब-कुछ उगले देती हो।

उगल देना (भेद या छिपी बात बता देना)

पुलिस की पूछताछ में चोर ने सारी बातें उगल दीं।

6. यह लीजिए, आप तो मुझे काँटों में घसीटने लगे।

काँटों में घसीटना (अधिक प्रशंसा या सम्मान देकर संकोच में डालना)

मेरी छोटी-सी मदद को इतना बड़ा बताकर आप तो मुझे काँटों में घसीट रहे हैं।

7. बाबू रामस्वरूप, आपने मेरी इज्जत उतारने के लिए मुझे यहाँ बुलाया था?

इज्जत उतारना (अपमानित करना)

भरी सभा में किसी की इज्जत उतारना सभ्यता नहीं है।

8. लेकिन इनसे पूछिए कि ये किस तरह अपना मुँह छिपाकर भागे थे।

मुँह छिपाना (लज्जा के कारण सामने न आना)

परीक्षा में नकल करते पकड़े जाने पर वह सबसे मुँह छिपाता फिर रहा है।

भाषा से संवाद : संदर्भ में शब्द

प्रश्न 1

"बाप सेर है तो लड़का सवा सेर।" एकांकी में इस कहावत का प्रयोग रामस्वरूप द्वारा गोपालप्रसाद और शंकर की नकारात्मक प्रवृत्ति का उल्लेख करने के लिए किया गया है। लेकिन इस कहावत का प्रयोग सकारात्मक अर्थ में भी किया जा सकता है। अब आप इस नए प्रयोग से वाक्य बनाकर लिखिए।

उत्तर

पिताजी राज्य स्तर के अच्छे धावक थे, पर बेटे ने तो ओलंपिक में पदक जीत लिया; सच है, बाप सेर तो बेटा सवा सेर।

माँ अच्छी चित्रकार हैं, पर बेटी की पेंटिंग अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शनी में चुनी गई— यहाँ भी माँ सेर तो बेटी सवा सेर निकली।

गतिविधियाँ : आप भी संवाददाता

प्रश्न 1

मान लीजिए कि आप एक संवाददाता हैं और आपको उमा की कहानी का पता चलता है। अब आप उमा तथा अन्य पात्रों का साक्षात्कार लेकर उनका पक्ष दर्शकों के सामने प्रस्तुत कीजिए।

उत्तर

उत्तर (नमूना उत्तर)

संवाददाता : उमा जी, आपने लड़के वालों के सामने इतनी कड़ी बात क्यों कही?

उमा : मुझे कुर्सी-मेज की तरह देखा-परखा जा रहा था। मेरी पढ़ाई को छिपाना पड़ा, मानो बी.ए. करना कोई पाप हो। मुझे अपने सम्मान के लिए बोलना पड़ा।

संवाददाता : रामस्वरूप जी, आपने बेटी की पढ़ाई क्यों छिपाई?

रामस्वरूप : समाज का दबाव था। अच्छे घर के लोग पढ़ी-लिखी बहू नहीं चाहते। आज समझ आया कि मैंने गलत किया; मेरी बेटी ने सच का साथ दिया।

संवाददाता : गोपालप्रसाद जी, आप स्वयं वकील हैं, फिर कम पढ़ी बहू क्यों चाहते हैं?

गोपालप्रसाद : देखिए साहब, घर-गृहस्थी के लिए ज्यादा पढ़ाई की क्या जरूरत! पर… (रुककर) हमें धोखा दिया गया, यह बात गलत है।

संवाददाता : शंकर जी, आप कुछ कहना चाहेंगे?

शंकर : जी… जो बाबूजी कहें।

संवाददाता (दर्शकों से) : आपने देखा, किसमें सच्चा साहस है और किसमें नहीं। फैसला आप पर छोड़ते हैं।

प्रश्न 2

मान लीजिए कि आप उमा के घर से रिपोर्टिंग कर रहे हैं जब उसके घर में शंकर आया था। इस पूरे घटनाक्रम को जीवंत प्रसारण (लाइव रिपोर्ट) की तरह प्रस्तुत कीजिए।

उत्तर

उत्तर (नमूना उत्तर) : "नमस्कार! मैं आपका संवाददाता, सीधे बाबू रामस्वरूप के घर से। सुबह से यहाँ हलचल है— तख्त बिछाया जा रहा है, बाजा-सितार सजाए जा रहे हैं और मक्खन अभी तक नहीं आया है! … लीजिए, लड़के वाले पहुँच गए हैं— वकील बाबू गोपालप्रसाद, हाथ में बेंत, और उनके सुपुत्र शंकर, जो कुछ झुककर बैठे हैं। चाय और समोसे के बीच 'बिजनेस' की बात शुरू हो गई है। गोपालप्रसाद साफ कह रहे हैं कि उन्हें ज्यादा पढ़ी-लिखी बहू नहीं चाहिए। … अब उमा पान की तश्तरी लेकर आई हैं— और यह क्या! चश्मा देखकर बाप-बेटे चौंक गए हैं। उमा ने मीरा का भजन गाया, पर सवालों पर चुप हैं। … बड़ी खबर! उमा ने चुप्पी तोड़ दी है— उन्होंने पूछा है कि क्या लड़कियाँ भेड़-बकरियाँ हैं! उन्होंने बताया कि वे बी.ए. पास हैं और शंकर के होस्टल वाले प्रकरण का भी खुलासा कर दिया है। गोपालप्रसाद गुस्से में छड़ी उठाकर चल दिए हैं, और उमा का अंतिम वाक्य गूँज रहा है— 'पता लगाइएगा कि आपके बेटे के रीढ़ की हड्डी भी है या नहीं!' … और ठीक इसी समय रतन मक्खन लेकर लौटा है। कैमरामैन के साथ, मैं, आपका संवाददाता।"

गतिविधियाँ : भाषा संगम

"मक्खन वाले की दुकान दूर है।"

प्रश्न 1

इनके अतिरिक्त यदि आप 'मक्खन' शब्द को किसी और भाषा में भी जानते हैं तो उस भाषा में भी लिखिए।

उत्तर

अंग्रेजी में 'मक्खन' को 'Butter' कहते हैं। हिंदी में इसके पर्याय 'नवनीत' और 'माखन' भी हैं; श्रीकृष्ण को इसी कारण 'माखनचोर' कहा जाता है।

प्रश्न 2

उत्तर

उपर्युक्त वाक्य को अपनी मातृभाषा में भी लिखिए।

उत्तर (नमूना उत्तर) : अंग्रेजी : "The butter seller's shop is far away."

(विद्यार्थी अपनी मातृभाषा में लिखें।)

अतिरिक्त महत्वपूर्ण प्रश्न

बहुविकल्पीय प्रश्न

प्रश्न 1

'रीढ़ की हड्डी' एकांकी की रचना कब की गई?

उत्तर

(क) 1929 (ख) 1939 (ग) 1947 (घ) 1950

उत्तर : (ख) 1939

प्रश्न 2

गोपालप्रसाद का पेशा क्या था?

उत्तर

(क) डॉक्टर (ख) अध्यापक (ग) वकील (घ) व्यापारी

उत्तर : (ग) वकील

प्रश्न 3

उमा ने गाने के लिए कौन-सा गीत चुना?

उत्तर

(क) मीरा का 'मेरे तो गिरधर गोपाल दूसरो न कोई' (ख) सूर का पद (ग) कबीर का दोहा (घ) तुलसी की चौपाई

उत्तर : (क) मीरा का 'मेरे तो गिरधर गोपाल दूसरो न कोई'

प्रश्न 4

गोपालप्रसाद के अनुसार सरकार को कौन-सा टैक्स लगाना चाहिए?

उत्तर

(क) चीनी पर (ख) खूबसूरती पर (ग) चाय पर (घ) शिक्षा पर

उत्तर : (ख) खूबसूरती पर

प्रश्न 5

जगदीशचंद्र माथुर का सर्वाधिक चर्चित और मंचित नाटक कौन-सा है?

उत्तर

(क) भोर का तारा (ख) कोणार्क (ग) पहला राजा (घ) शारदीया

उत्तर : (ख) कोणार्क

लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1

रामस्वरूप ने उमा के चश्मे के बारे में क्या बहाना बनाया?

उत्तर

उमा का चश्मा देखकर गोपालप्रसाद और शंकर चौंक गए। रामस्वरूप ने झूठ बोला कि पिछले महीने उमा की आँखें दुखने आ गई थीं, इसलिए कुछ दिनों के लिए चश्मा लगाना पड़ रहा है, ताकि वे यह न समझें कि चश्मा अधिक पढ़ाई के कारण है।

प्रश्न 2

उमा ने अपनी तुलना कुर्सी-मेज से क्यों की?

उत्तर

गोपालप्रसाद उमा की चाल, चेहरा, गाना, चित्रकला, सिलाई सब परख रहे थे, मानो कोई सामान खरीद रहे हों। उमा ने कहा कि जैसे दुकानदार कुर्सी-मेज से कुछ नहीं पूछता, सिर्फ खरीदार को दिखा देता है, वैसे ही उसे भी केवल दिखाया जा रहा है; उसकी भावनाओं का कोई मूल्य नहीं है।

प्रश्न 3

गोपालप्रसाद अपने जमाने की कौन-सी बातें बढ़ा-चढ़ाकर बताते हैं?

उत्तर

वे कहते हैं कि उनके जमाने में लड़के स्कूल से आकर दर्जनों कचौड़ियाँ खा जाते थे, दो आने की बालाई अकेले हजम कर लेते थे, बारह घंटे की 'सिटिंग' में पढ़ते थे और उस समय का मैट्रिक भी आज के एम.ए. से अच्छी अंग्रेजी लिखता था।

प्रश्न 4

प्रेमा उमा के विषय में रामस्वरूप से क्या शिकायत करती है?

उत्तर

प्रेमा कहती है कि उमा मुँह फुलाए पड़ी है; पौडर उसके सामने रखा तो वह आँचल में मुँह लपेटकर लेट गई। वह रामस्वरूप को दोष देती है कि उन्होंने उमा को पढ़ा-लिखाकर सिर चढ़ा रखा है और इंट्रेंस ही पास कराना चाहिए था।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1

'रीढ़ की हड्डी' एकांकी के आधार पर उमा का चरित्र-चित्रण कीजिए।

उत्तर

उमा एकांकी की केंद्रीय पात्र और शिक्षित, सशक्त स्त्री की प्रतिनिधि है। वह बी.ए. पास है और सितार, गायन, चित्रकला तथा सिलाई में निपुण है। वह सादगी पसंद करती है और विवाह के लिए बनावटी सजावट से इनकार करती है। उसमें आत्मसम्मान है; वह स्वयं को 'खरीदी जाने वाली वस्तु' की तरह परखे जाने का विरोध करती है। वह साहसी और स्पष्टवादी है, बड़ों के सामने भी सच बोलती है और शंकर की कायरता उजागर करती है। फिर भी वह संवेदनशील है; अंत में उसकी खामोशी सिसकियों में बदल जाती है। उमा नई सोच वाली भारतीय नारी का प्रतीक है।

प्रश्न 2

'रीढ़ की हड्डी' एकांकी में निहित सामाजिक संदेश स्पष्ट कीजिए।

उत्तर

यह एकांकी विवाह से जुड़ी कुरीतियों पर तीखा व्यंग्य करता है। इसमें दिखाया गया है कि पढ़े-लिखे लोग भी बहू कम पढ़ी चाहते हैं, लड़की को सुंदरता और गुणों के आधार पर वस्तु की तरह परखते हैं और लड़के के चरित्र को अनदेखा करते हैं। लड़की के पिता को अपनी बेटी की शिक्षा छिपानी पड़ती है। एकांकी संदेश देता है कि स्त्री भी सम्मान और भावनाओं वाली मनुष्य है, शिक्षा पर उसका समान अधिकार है और शिक्षा उसे आत्मबल देती है। असली 'रीढ़ की हड्डी' नैतिक साहस और आत्मसम्मान है, जो उमा में है, न कि डिग्रीधारी पर कायर शंकर में।

Frequently Asked Questions

What is Class 9 Hindi Ganga Chapter 6 (रीढ़ की हड्डी) about?

जगदीशचंद्र माथुर का एकांकी 'रीढ़ की हड्डी' (1939) विवाह की पारंपरिक व्यवस्था और स्त्री-शिक्षा के प्रति रूढ़िवादी सोच पर व्यंग्य करता है। रामस्वरूप अपनी पढ़ी-लिखी बेटी उमा को वर-पक्ष के सामने कम पढ़ी बताने को विवश हैं, क्योंकि लड़के वालों को कम शिक्षित बहू चाहिए। अंत में उमा साहसपूर्वक सच कहकर वर-पक्ष की दोहरी मानसिकता उजागर करती है। उमा एक शिक्षित और सशक्त स्त्री का प्रतिनिधित्व करती है।

What do these NCERT solutions for Class 9 Hindi Ganga Chapter 6 (रीढ़ की हड्डी) cover?

All 35 questions from the latest NCERT textbook for this chapter are answered step by step, organised as अतिरिक्त महत्वपूर्ण प्रश्न.

Are these solutions based on the new NCERT syllabus?

Yes. The answers follow the current NCERT textbook for Class 9 Hindi Ganga and the latest CBSE syllabus, so the question numbers and wording match the book you use in class.

How should I use these solutions to prepare for exams?

Attempt each question on your own first, then compare your working with the answer here. Note the steps or keywords you missed, and revise the chapter notes before taking a chapter-wise MCQ test to check your understanding.

Are the NCERT solutions for Class 9 Hindi Ganga Chapter 6 (रीढ़ की हड्डी) free?

Yes. All Circle of Learning NCERT solutions and chapter notes are free to read online, with no sign-up needed.