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Class 9 Hindi Ganga Chapter 3

NCERT Solutions for Class 9 Hindi Ganga Chapter 3: संवादहीन

शेखर जोशी की कहानी 'संवादहीन' गाँव की एक बुजुर्ग स्त्री ताई के अकेलेपन की मार्मिक कहानी है, जिनका एकमात्र साथी उनका तोता मिट्ठू है। कुंभ-स्नान पर जाते समय ताई मिट्ठू को जगन मास्टर के घर छोड़ जाती हैं, जहाँ जगन मास्टर उसे आज़ाद कर देते हैं। लौटने पर ताई को पिंजरे में दूसरा तोता मिलता है, जो उनकी पुकार का कोई जवाब नहीं देता। कहानी पलायन और अकेलेपन जैसी समकालीन समस्याओं को भी उभारती है।

Circle of Learning • नई NCERT पाठ्यपुस्तक "गंगा" (2026-27) • पाठ के सभी प्रश्नों के उत्तर

रचना से संवाद : मेरे उत्तर मेरे तर्क

निर्देश : निम्नलिखित प्रश्नों के सटीक उत्तर चुनिए और यह भी बताइए कि आपको ये उत्तर उपयुक्त क्यों लगते हैं।

प्रश्न 1

कहानी में ताई और मिट्ठू का संबंध किस भाव को दर्शाता है? (क) परोपकार और त्याग (ख) ममता और स्नेह (ग) करुणा और क्रोध (घ) जिज्ञासा और सहायता

उत्तर

(ख) ममता और स्नेह।

तर्क : "ताई की सारी ममता मिट्ठू पर बरस पड़ी।" जो ताई अपने लिए चूल्हा जलाने में आलस करती थीं, वे मिट्ठू के लिए नियम से दाल-भात बनातीं, उसे आशीष देतीं और घड़ी-भर का वियोग भी सहन नहीं कर पाती थीं।

प्रश्न 2

जगन मास्टर द्वारा मिट्ठू को पिंजरे से बाहर निकालना किस भावना या मूल्य का संकेत देता है? (क) अनुशासन और परंपरा (ख) उदासीनता और असावधानी (ग) आत्मगौरव और विद्रोह (घ) करुणा और नैतिकता

उत्तर

(घ) करुणा और नैतिकता।

तर्क : जगन मास्टर स्वतंत्र विचारों के थे और दूसरों की स्वतंत्रता में बाधा नहीं डालना चाहते थे। पिंजरे में बंद मिट्ठू की यातना उन्हें असह्य लगी, इसलिए उन्होंने "अपने पाप का थोड़ा प्रायश्चित" करने के लिए उसे खुली हवा में आने का अवसर दिया।

प्रश्न 3

मिट्ठू का उड़ जाना किस विचार को प्रस्तुत करता है? (क) भोजन की खोज (ख) प्रेम की आकांक्षा (ग) स्वतंत्रता की चाह (घ) पक्षियों में सम्मान की प्रवृत्ति

उत्तर

(ग) स्वतंत्रता की चाह।

तर्क : पिंजरे का आदी हो जाने पर भी मिट्ठू ने रोशनदान से "बाहर की दुनिया" देखी और उड़ गया। फिर वह "एक पेड़ से दूसरे पेड़ पर अपने पंख तौलने में मशगूल" रहा। यह हर प्राणी की स्वाभाविक स्वतंत्रता-प्रियता को दर्शाता है।

प्रश्न 4

ताई के जीवन के दुख का मुख्य कारण क्या था? (क) सम्मान और प्रतिष्ठा में कमी आना (ख) परिवार से दूरी और संवाद का अभाव (ग) आर्थिक विपन्नता और निर्धनता (घ) मिट्ठू के प्रति प्रेम और संवाद

उत्तर

(ख) परिवार से दूरी और संवाद का अभाव।

तर्क : बहू-बेटे शहरों में बस गए, बेटियाँ ससुराल चली गईं। ताई के लिए "पेट की समस्या कभी समस्या नहीं रही, पर सूने घर की भाँय-भाँय" उन्हें काटने को दौड़ती थी। उनका असली दुख अकेलापन और बात करने वाले का न होना था।

प्रश्न 5

कहानी में मानव-समाज में व्याप्त किस विसंगति को उजागर किया गया है? (क) मजबूरी (ख) कर्मपरायणता (ग) अकेलापन (घ) संवादधर्मिता

उत्तर

(ग) अकेलापन।

तर्क : गाँवों से शहरों की ओर पलायन के कारण बूढ़े माता-पिता अकेले छूट जाते हैं। ताई का एक तोते को ही अपना सहारा बना लेना और अंत में उसका भी खो जाना, इसी अकेलेपन की पीड़ा को सामने लाता है।

रचना से संवाद : मेरी समझ मेरे विचार

प्रश्न 1

"भगवान! कैसे नैया पार लगेगी?" ताई इस वाक्य में किस 'नैया' की बात कर रही हैं? वे यह बात क्यों कह रही हैं?

उत्तर

यहाँ 'नैया' ताई की जीवन-नौका है, अर्थात उनका बचा हुआ बुढ़ापा। परिवार के सब लोग उन्हें छोड़कर चले गए हैं, खेती-बाड़ी और कारबार पराए हाथों में चला गया है और वे बड़े घर में अकेली रह गई हैं। इस असहायता और अकेलेपन की चिंता में वे भगवान से पूछती हैं कि बाकी जीवन कैसे कटेगा।

प्रश्न 2

"धीरे-धीरे सब पराए हाथ में चला गया।" इस वाक्य में किस घटना की ओर संकेत किया गया है?

उत्तर

यह वाक्य ताई के परिवार के बिखरने और संपत्ति के छिन जाने की ओर संकेत करता है। बहू-बेटे गाँव छोड़कर शहर चले गए और बेटियाँ ब्याहकर अपनी गृहस्थी में रम गईं। कारबार सँभालने वाला कोई नहीं रहा, इसलिए खेत, जमीन और कारोबार धीरे-धीरे दूसरों के हाथ चला गया। खेती न रही तो नौकर-चाकर भी चले गए।

प्रश्न 3

"ताई की सारी ममता मिट्ठू पर बरस पड़ी।" क्यों?

उत्तर

ताई के जीवन में ममता लुटाने के लिए कोई नहीं बचा था; बच्चे दूर चले गए थे और सूना घर उन्हें काटने दौड़ता था। ऐसे में गनपत द्वारा लाया गया प्यारा-सा पहाड़ी तोता उनके अकेलेपन का साथी बन गया। वह उनकी बातें दोहराता, उन्हें जगाता और दिलासा देता था। इसलिए अपने बच्चों के लिए संचित सारी ममता उन्होंने मिट्ठू पर उँडेल दी।

प्रश्न 4

"अब ताई को इस बात की पूरी जानकारी रहने लगी थी कि किसके खेत में हरी मिर्चें तैयार हो गई हैं और किस पेड़ में फसल के आखिरी अमरूद बचे हैं।" इस वाक्य द्वारा ताई के व्यक्तित्व में आए परिवर्तनों के विषय में क्या-क्या पता चलता है?

उत्तर

इस वाक्य से पता चलता है कि मिट्ठू के आने से ताई के जीवन में फिर से रुचि और उत्साह लौट आया। पहले वे उदासीन होकर अपने लिए भी चूल्हा नहीं जलाती थीं; अब वे मिट्ठू की पसंद की चीजें जुटाने के लिए गाँव के खेतों-बागों की खबर रखने लगीं। वे फिर से सक्रिय, जिम्मेदार और बाहरी दुनिया से जुड़ी हुई बन गईं। उनमें माँ जैसी देखभाल की भावना फिर जाग उठी।

प्रश्न 5

"जगन मास्टर दूसरे मिजाज के आदमी थे।" जगन मास्टर का व्यक्तित्व कैसा था? कहानी में से उदाहरण देकर स्पष्ट कीजिए।

उत्तर

जगन मास्टर आदर्शवादी, स्वतंत्र विचारों वाले और संवेदनशील व्यक्ति थे। उन्होंने कुछ नियम-सिद्धांत बना रखे थे और कोशिश करते थे कि उनके कारण किसी को कष्ट न पहुँचे। पिंजरे में बंद मिट्ठू को देखकर उन्हें बेचैनी होती थी, इसलिए वे रोज उसे बाहर निकालते थे। वे अपनी धुन के पक्के थे— मिट्ठू को बाहर लाने के लिए दाने बिखेरे। साथ ही वे जिम्मेदार भी थे: मिट्ठू के उड़ जाने पर पसीना-पसीना होकर उसे खोजते रहे और नए तोते को घंटों पाठ रटाते रहे, यहाँ तक कि खाना-पीना छोड़ दिया। गीता-रहस्य पढ़ना उनकी विद्वत्ता का संकेत है।

प्रश्न 6

कहानी का शीर्षक 'संवादहीन' किसके लिए सबसे अधिक सार्थक प्रतीत होता है— ताई, जगन मास्टर, मिट्ठू या नया तोता? कारण सहित स्पष्ट कीजिए।

उत्तर

शीर्षक 'संवादहीन' सबसे अधिक ताई के लिए सार्थक है। परिवार के चले जाने से उनके जीवन में बात करने वाला कोई नहीं रहा था; मिट्ठू ही उनका एकमात्र संवाद-साथी था। अंत में मिट्ठू के उड़ जाने और नए तोते के चुप रहने से ताई फिर पूरी तरह संवादहीन हो जाती हैं। एक अर्थ में नया तोता भी संवादहीन है, क्योंकि वह कुछ नहीं बोलता, पर कहानी की मूल पीड़ा ताई की है।

प्रश्न 7

"अब ये ही दो प्राणी गाँव के बीच में स्थित बड़े घर के उस सूने खंडहर में एक-दूसरे को सहारा देने के लिए रह गए थे।" ताई के बड़े-से घर को सूना खंडहर क्यों कहा गया होगा?

उत्तर

कभी ताई का घर पूत-परिवार, बहू-बेटियों, नौकर-चाकरों और गाय-ढोरों से भरा रहता था और वहाँ जमींदारी की रौनक थी। अब सब लोग चले गए, कारबार छिन गया और देखभाल न होने से घर जर्जर हो गया। घर बड़ा होते हुए भी उसमें जीवन, चहल-पहल और आवाजें नहीं रहीं। जिस घर में रहने वाले अपने न हों, वह भवन होते हुए भी खंडहर जैसा लगता है; इसलिए उसे 'सूना खंडहर' कहा गया।

रचना से संवाद : मेरे प्रश्न

निर्देश : नीचे कुछ उत्तर और उनके दो-दो प्रश्न दिए गए हैं। पहचानिए कि इनमें से कौन-सा प्रश्न उस उत्तर के लिए उपयुक्त है?

प्रश्न 1

उत्तर

ताई के अकेलेपन को मिट्ठू ने सहारा दिया। प्रश्न क : ताई के सूनेपन को किसने सहारा दिया था? प्रश्न ख : ताई को मिट्ठू किसने भेंट में दिया था?

उत्तर : प्रश्न क उपयुक्त है। प्रश्न ख का उत्तर 'गनपत' होगा, 'मिट्ठू' नहीं।

प्रश्न 2

उत्तर

ताई के लौटने से पहले मिट्ठू उड़ गया था। प्रश्न क : ताई के लौटने के बाद मिट्ठू कहाँ चला गया था? प्रश्न ख : ताई के प्रयागराज से लौटने से पहले क्या अनहोनी हुई?

उत्तर : प्रश्न ख उपयुक्त है। मिट्ठू ताई के लौटने के बाद नहीं, बल्कि पहले ही उड़ गया था, इसलिए प्रश्न क गलत है।

प्रश्न 3

उत्तर

गाँववालों को डर था कि ताई को सच्चाई जानकर सदमा लगेगा। प्रश्न क : गाँववाले ताई की वापसी से क्यों चिंतित थे? प्रश्न ख : गाँववाले मिट्ठू के उड़ने से खुश क्यों थे?

उत्तर : प्रश्न क उपयुक्त है। गाँववाले मिट्ठू के उड़ने से खुश नहीं, बल्कि आशंकित थे।

प्रश्न 4

उत्तर

कहानी का शीर्षक 'संवादहीन' जीवन के मौन का प्रतीक है। प्रश्न क : कहानी का शीर्षक 'संवादहीन' क्यों उपयुक्त नहीं है? प्रश्न ख : शीर्षक 'संवादहीन' का क्या भावार्थ है?

उत्तर : प्रश्न ख उपयुक्त है, क्योंकि उत्तर शीर्षक का अर्थ बताता है, उसकी अनुपयुक्तता नहीं।

रचना से संवाद : मेरे अनुभव मेरे विचार

प्रश्न 1

"कभी-कभार गाँव में थोड़ी देर के लिए भी न्यौते-बुलावे में जातीं, तो दस बार खिड़की-दरवाजों की साँकलें टोहकर देखतीं…" ताई की तरह जब आप अपने घर या परिवार से दूर होते हैं, तो किसी वस्तु या व्यक्ति की चिंता आपको भीतर से कैसे परेशान करती है?

उत्तर

उत्तर (नमूना उत्तर) : पिछली गर्मियों में मैं विद्यालय के शिविर में पाँच दिन के लिए बाहर गया/गई था/थी। घर पर मेरी दादी अकेली थीं, जिन्हें समय पर दवा लेना भूल जाने की आदत है। शिविर में खेलते हुए भी बार-बार मन में आता कि दादी ने दवा ली होगी या नहीं। मैं हर शाम फोन करके पूछता/पूछती था/थी। अपने पालतू कुत्ते की भी याद आती थी कि उसे कोई घुमाने ले गया या नहीं। इस चिंता के कारण मैं कई बार गतिविधियों का पूरा आनंद नहीं ले पाया/पाई।

प्रश्न 2

"आखिर वह भी तो बोलता-बतियाता प्राणी है।" क्या आप मानते हैं कि पशु-पक्षियों में भी संवेदनाएँ होती हैं? अपने किसी अनुभव का वर्णन करते हुए लिखिए।

उत्तर

उत्तर (नमूना उत्तर) : हाँ, मैं मानता/मानती हूँ कि पशु-पक्षियों में भी संवेदनाएँ होती हैं। हमारी गली की एक कुतिया को मैं रोज रोटी देता/देती था/थी। एक बार मैं बीमार होकर एक सप्ताह घर से नहीं निकला/निकली। ठीक होकर बाहर गया/गई, तो वह दौड़कर आई, पूँछ हिलाती रही और मेरे पैरों से लिपटकर कूँ-कूँ करने लगी, मानो पूछ रही हो कि इतने दिन कहाँ थे। उसकी आँखों में खुशी साफ दिख रही थी। इससे मुझे लगा कि पशु भी प्रेम, प्रतीक्षा और दुख का अनुभव करते हैं।

प्रश्न 3

"गनपत ने ही एक सुझाव दिया कि मिट्ठू की ही सूरत-शक्ल का एक दूसरा तोता ले आया जाए ताकि ताई को भ्रम में रखा जा सके…" ताई को भ्रम में रखना उचित था या नहीं? तर्क सहित अपने विचार लिखिए।

उत्तर

उत्तर (नमूना उत्तर) : मेरे विचार से ताई को भ्रम में रखना उचित नहीं था, यद्यपि गाँववालों की नीयत अच्छी थी। वे ताई को सदमे से बचाना चाहते थे, पर ताई मिट्ठू को अपने बच्चे की तरह पहचानती थीं; नकली तोता उन्हें धोखा नहीं दे सकता था। अंत में सच सामने आया तो उन्हें दोहरा दुख हुआ— मिट्ठू के खोने का भी और छले जाने का भी। अच्छा होता कि जगन मास्टर और उनकी पत्नी स्वयं सच्चाई बताकर क्षमा माँगते और ताई के दुख में साथ देते।

प्रश्न 4

"ताई सोच रही थीं कि उन्हें देखते ही मिट्ठू 'राम राम सीताराम' की रट लगाकर आसमान सिर पर उठा लेगा।" क्या कभी ऐसा हुआ कि आपने सोचा कुछ और, हुआ कुछ और? उस अनुभव को लिखिए।

उत्तर

उत्तर (नमूना उत्तर) : एक बार मैंने अपने मित्र के जन्मदिन के लिए बड़ी मेहनत से एक चित्र बनाया। मैंने सोचा था कि उसे देखकर वह बहुत खुश होगा और सबको दिखाएगा। पर उस दिन उसे बहुत सारे उपहार मिले और उसने मेरा चित्र बिना देखे एक ओर रख दिया। मुझे बहुत बुरा लगा। अगले दिन उसने फोन करके कहा कि मेरा चित्र उसे सबसे अच्छा लगा और उसने उसे अपने कमरे में लगा दिया है। तब मैंने सीखा कि किसी की तत्काल प्रतिक्रिया से जल्दी निष्कर्ष नहीं निकालना चाहिए।

प्रश्न 5

"मिट्ठू अब पिंजरे में रहने के इतने आदी हो चुके थे कि उन्होंने बाहर आने की कोई इच्छा नहीं प्रकट की।" क्या प्राणी सचमुच पिंजरे में रहने के आदी हो सकते हैं? अपने उत्तर के समर्थन में अपने आस-पास से उदाहरण भी दीजिए।

उत्तर

हाँ, लंबे समय तक बंधन में रहने से प्राणी उसके आदी हो जाते हैं और बाहर की दुनिया से डरने लगते हैं। पिंजरे में पले तोते को खुला छोड़ दें तो वह कई बार उड़ नहीं पाता या लौट आता है। सर्कस में वर्षों बँधा रहा हाथी पतली रस्सी से भी बँधा रहता है, क्योंकि उसने छूटने की कोशिश करना छोड़ दिया होता है। मनुष्य भी गलत आदतों या दबाव के आदी हो जाते हैं। फिर भी कहानी बताती है कि अवसर मिलने पर स्वतंत्रता की स्वाभाविक इच्छा जाग उठती है, जैसे मिट्ठू रोशनदान से उड़ गया।

विधा से संवाद : कहानी का सौंदर्य

प्रश्न 1

संवादहीन कहानी में अनेक विशेष बिंदु हैं जो इसे प्रभावपूर्ण बनाते हैं। नीचे कहानी के कुछ विशेष बिंदु और उनके उदाहरण दिए गए हैं। आप भी कहानी से इसी प्रकार के एक-एक उदाहरण खोजकर लिखिए।

उत्तर

विशेष बिंदु

अर्थ

पुस्तक में दिया उदाहरण

नया उदाहरण (उत्तर)

चित्रात्मकता (दृश्य बिंब)

शब्दों से पाठक के मन में स्पष्ट और जीवंत चित्र बनाना

मिट्ठू एक डाल से दूसरी डाल पर, एक पेड़ से दूसरे पेड़ पर अपने पंख तौलने में मशगूल रहे।

ढीली धोती को दोनों हाथों से सँभालते हुए वह बाग में एक पेड़ से दूसरे पेड़ के पास, 'मिट्ठू आ! मिट्ठू आ!!' पुकारते हुए पसीना-पसीना होते रहे।

संवादात्मकता

पात्रों के विचार-भाव व्यक्त करने के लिए बातचीत का प्रयोग

"राम-राम कहो, सीताराम कहो।"

"मेरी जान खाने को आ गया है, मर जा!" — "मर जा! मर जा! मर जा!"

पुनरुक्ति

शब्दों की बार-बार आवृत्ति से भाव की तीव्रता

"कटेगी! कटेगी!! कटेगी!!!"

"खुश रहो! खुश रहो!!" / "हर हर गंगे! हर हर गंगे!!"

अतिशयोक्ति

किसी बात का इतना बढ़ाकर वर्णन कि वह असंभव लगे

रेलगाड़ी में उसका भी टिकट लगेगा, आखिर वह भी तो बोलता-बतियाता प्राणी है।

उन्हें देखते ही मिट्ठू 'राम राम सीताराम' की रट लगाकर आसमान सिर पर उठा लेगा।

लोकधर्मी भाषा

ग्रामीण, सहज, बोलचाल की भाषा

भगवान! कैसे नैया पार लगेगी?

अपनी अकेली जान के लिए ताई दो जून का एक जून चूल्हा फूँक लेतीं।

प्रश्नोत्तर शैली

पात्रों या लेखक द्वारा प्रश्न पूछना

मिट्ठू! अब कैसे कटेगी?

बेटियाँ अपने-अपने हाथ पीले कराकर अपनी गृहस्थी में रम गईं, किसके भरोसे कारबार सँभलता?

विधा से संवाद : कहानी का अंत

प्रश्न 1

आपके अनुसार 'संवादहीन' कहानी के अंत को किस श्रेणी में रखा जा सकता है? अपने उत्तर के कारण भी बताइए। आप इस कहानी का नया अंत किस प्रकार करना चाहेंगे?

उत्तर

'संवादहीन' कहानी का अंत दुखांत और साथ ही मुक्त अंत है। यह दुखांत है, क्योंकि ताई का एकमात्र साथी मिट्ठू खो जाता है और वे फिर अकेली रह जाती हैं— "उनके सूनेपन का साथी न जाने किन अमराइयों में घूम रहा होगा।" यह मुक्त अंत भी है, क्योंकि लेखक यह नहीं बताते कि सच जानकर ताई ने क्या किया; पाठक को सोचने के लिए छोड़ दिया गया है। इसमें यथार्थवादी अंत की झलक भी है, क्योंकि जीवन में अकेलेपन की पीड़ा ऐसी ही होती है।

नया अंत (नमूना उत्तर) : ताई चुपचाप एवजी तोते को देखती रहीं। जगन मास्टर ने हाथ जोड़कर सारा सच बता दिया। ताई की आँखें भर आईं, पर उन्होंने कहा, "मास्टर, अच्छा ही हुआ। मैंने उसे पिंजरे में रखकर अपना अकेलापन दूर किया, पर उसकी आजादी छीन ली थी।" वे नए तोते का पिंजरा लेकर घर लौटीं और अगले दिन उसे भी आँगन में खोल दिया। अब वे रोज आँगन में दाना-पानी रखतीं। धीरे-धीरे कई तोते, गौरैया और मैना आने लगे। एक सुबह पेड़ से आवाज आई— "राम राम, सीताराम!" ताई मुस्कुरा उठीं। उनका घर अब पिंजरे से नहीं, खुले आकाश से गूँजने लगा।

विषयों से संवाद

प्रश्न 1

"अंत में जगन मास्टर की घरवाली ने उनकी चिंता दूर कर दी।" कहानी में रेखांकित पात्र का नाम नहीं दिया गया है। इसे कहीं 'मास्टराइन', तो कहीं 'जगन मास्टर की घरवाली' कहा गया है। आपके अनुसार कहानी में ऐसा क्यों किया गया होगा?

उत्तर

ग्रामीण समाज में प्रायः विवाहित स्त्रियों को उनके नाम से नहीं, पति के नाम या पद से पुकारा जाता है, जैसे 'मास्टराइन' या 'जगन मास्टर की घरवाली'। लेखक ने इसी यथार्थ को दिखाने के लिए नाम नहीं दिया है। यह इस बात की ओर भी संकेत है कि समाज में स्त्री की अपनी स्वतंत्र पहचान को महत्व नहीं दिया जाता। साथ ही, कहानी में यह पात्र गौण है, इसलिए नाम की आवश्यकता भी नहीं पड़ी।

प्रश्न 2

"गाँव के कई लोग कुंभ-स्नान के लिए प्रयागराज जा रहे थे।" (क) 'कुंभ-स्नान' एक सुप्रसिद्ध आयोजन है जिसमें करोड़ों लोग भाग लेते हैं। पता लगाइए— इसका आयोजन क्यों किया जाता है? पिछली बार इसका आयोजन कब और कहाँ हुआ था? अगला आयोजन कब और कहाँ होगा?

उत्तर

कुंभ मेला हिंदुओं का सबसे बड़ा धार्मिक पर्व है। मान्यता है कि समुद्र-मंथन से निकले अमृत-कलश (कुंभ) की कुछ बूँदें प्रयागराज, हरिद्वार, उज्जैन और नासिक में गिरी थीं। ग्रहों की विशेष स्थिति में इन स्थानों पर पवित्र नदियों में स्नान को पुण्यदायी माना जाता है, इसलिए लगभग बारह वर्ष के अंतराल पर बारी-बारी से इन चारों स्थानों पर कुंभ लगता है। पिछला महाकुंभ जनवरी-फरवरी 2025 में प्रयागराज में गंगा, यमुना और सरस्वती के संगम पर हुआ था। अगला कुंभ (सिंहस्थ) 2027 में नासिक-त्र्यंबकेश्वर में गोदावरी के तट पर प्रस्तावित है; इसके बाद 2028 में उज्जैन में क्षिप्रा के तट पर सिंहस्थ कुंभ होगा। (विद्यार्थी नवीनतम तिथियाँ समाचार पत्रों से जाँच लें।)

प्रश्न 3

(ख) मान लीजिए कि ताई आपके मोहल्ले में रहती हैं। वे कुंभ-स्नान के लिए कैसे गई होंगी? उनकी यात्रा का वर्णन लिखिए। (संकेत– कहाँ से कहाँ तक की यात्रा, टिकट, यात्रा के साधन, संगी-साथी, खान-पान, ठहरना आदि।)

उत्तर

उत्तर (नमूना उत्तर) : ताई गाँव के आठ-दस लोगों के साथ पहले बस से जिले के रेलवे स्टेशन पहुँचीं। गनपत ने पहले ही प्रयागराज के लिए रेल के टिकट आरक्षित करवा दिए थे। ताई की गठरी में धोती, कंबल, लोटा, तुलसी की माला और रास्ते के लिए पूरी-आलू की सब्जी व गुड़ के लड्डू थे। रेल में पूरे रास्ते भजन-कीर्तन चलता रहा, पर ताई बार-बार मिट्ठू को याद करती रहीं। प्रयागराज पहुँचकर सब मेला क्षेत्र में एक धर्मशाला के शिविर में ठहरे, जहाँ भंडारे में भोजन मिलता था। भोर में ताई ने संगम में डुबकी लगाई, गंगा मैया को दीप-दान किया और सबके कुशल की प्रार्थना की। तीन दिन बाद वे उसी रेल से गाँव लौट आईं।

प्रश्न 4

(ग) आपके गाँव या नगर में कौन-सा मेला, उत्सव या पर्व मनाया जाता है? वहाँ का दृश्य, भीड़, श्रद्धा और वातावरण का वर्णन कीजिए। मेले में कैसी आवाजें, रंग, गंध, खान-पान, दृश्य और भाव होंगे? (संकेत– उनका वर्णन पाँच ज्ञानेंद्रियों— देखने, सुनने, सूँघने, छूने और स्वाद महसूस करने के आधार पर कीजिए।)

उत्तर

उत्तर (नमूना उत्तर) : हमारे नगर में दशहरे पर बड़ा मेला लगता है। देखना : चारों ओर रंग-बिरंगी झंडियाँ, झूले, खिलौनों की दुकानें और मैदान के बीच रावण का विशाल पुतला दिखाई देता है। सुनना : ढोल-नगाड़ों की थाप, झूलों पर बच्चों की किलकारियाँ, गुब्बारेवालों की आवाजें और लाउडस्पीकर पर रामलीला के संवाद गूँजते हैं। सूँघना : गरम जलेबियों, पकौड़ों और भुने भुट्टों की खुशबू हवा में तैरती है। छूना : भीड़ में कंधे से कंधा टकराता है, हाथ में ठंडी बर्फ की चुस्की और नए खिलौनों की चिकनी सतह महसूस होती है। स्वाद : मीठी जलेबी, चटपटी चाट और गुड़ की गजक का स्वाद लंबे समय तक याद रहता है। रावण-दहन के समय सबके मन में बुराई पर अच्छाई की जीत की श्रद्धा और उल्लास भर जाता है।

सृजन

प्रश्न 1

"बहू-बेटे गाँव का मोह छोड़कर शहरों के होकर रह गए।" अपना घर छोड़कर नए स्थान पर बस जाना आसान नहीं होता। ताई के बहू-बेटों ने गाँव क्यों छोड़ा होगा? गाँव छोड़ते समय क्या-क्या सोचा होगा? अपना घर छोड़ने के लिए स्वयं को कैसे तैयार किया होगा?

उत्तर

उत्तर (नमूना उत्तर) : ताई के बेटों ने शायद अच्छी नौकरी, बेहतर कमाई, बच्चों की अच्छी पढ़ाई और शहरी सुविधाओं के लिए गाँव छोड़ा होगा, क्योंकि जमींदारी समाप्त होने के बाद गाँव में आय के साधन कम हो गए होंगे। गाँव छोड़ते समय उन्होंने सोचा होगा कि माँ अकेली कैसे रहेंगी, पुरखों का घर और खेत कौन सँभालेगा, और शहर में नया जीवन कैसे शुरू होगा। उन्होंने स्वयं को यह कहकर समझाया होगा कि कुछ वर्षों बाद लौट आएँगे या माँ को भी बुला लेंगे, और त्योहारों पर गाँव आते रहेंगे। पर धीरे-धीरे शहर की व्यस्तता में वे वहीं के होकर रह गए।

प्रश्न 2

"वहाँ बैठे एवजी मिट्ठू ने उन्हें देखकर कोई हरकत नहीं की।" कल्पना कीजिए कि एक दिन असली मिट्ठू वापस आ गया। मिट्ठू ने नए तोते को देखकर क्या कहा होगा? आगे की कहानी लिखिए। (संकेत– प्रारंभ कीजिए— "एक दिन आकाश में वही हरे पंख चमके…")

उत्तर

उत्तर (नमूना उत्तर) : एक दिन आकाश में वही हरे पंख चमके और जानी-पहचानी आवाज गूँजी— "हर हर गंगे! हर हर गंगे!!" ताई आँगन में दौड़ी चली आईं। मुंडेर पर उनका मिट्ठू बैठा था। उसने पिंजरे में बैठे नए तोते को देखा और गर्दन टेढ़ी करके बोला, "मर जा! मर जा!" ताई हँस पड़ीं, "अरे, अपने भाई से ऐसे बोलते हैं?" मिट्ठू उतरकर पिंजरे की छत पर बैठ गया और दोनों तोते चोंच से चोंच मिलाने लगे। अब मिट्ठू दिन-भर बागों में घूमता और शाम को ताई के पास लौट आता। ताई ने पिंजरे का दरवाजा हमेशा के लिए खोल दिया। सुबह-शाम दोनों तोते मिलकर "राम राम, सीताराम" बोलते और ताई का सूना घर फिर से गुलजार हो गया।

प्रश्न 3

"अब ये ही दो प्राणी गाँव के बीच में स्थित बड़े घर के उस सूने खंडहर में एक-दूसरे को सहारा देने के लिए रह गए थे।" आज घर जाकर अपने किसी बड़े या बुजुर्ग से बात कीजिए। उनसे पूछिए— "आप जब मेरी आयु के थे, तब समय कैसे बिताया करते थे; क्या-क्या बातें या काम करते थे? आदि"। उनके कहे हुए अनुभव अपनी पुस्तिका में लिखिए।

उत्तर

उत्तर (नमूना उत्तर) : मैंने अपने दादाजी से बात की। उन्होंने बताया कि जब वे चौदह-पंद्रह वर्ष के थे, तब गाँव में बिजली नहीं थी। वे सुबह चार बजे उठकर कुएँ से पानी भरते, बैलों को चारा डालते और फिर चार किलोमीटर पैदल चलकर विद्यालय जाते थे। शाम को सब बच्चे गुल्ली-डंडा, कबड्डी और कंचे खेलते। रात को लालटेन की रोशनी में पढ़ाई होती और फिर दादी-नानी से कहानियाँ सुनी जातीं। मनोरंजन के लिए गाँव में रामलीला और नौटंकी आती थी। वे बताते हैं कि तब साधन कम थे, पर लोग एक-दूसरे के सुख-दुख में साथ खड़े रहते थे और कोई अकेला नहीं रहता था।

प्रश्न 4

"मिट्ठू ने फिर तिरछी आँख से रोशनदान के बाहर की दुनिया की ओर देखा और ये गए! वो गए!!" मान लीजिए कि जगन मास्टर ने मिट्ठू की खोज के लिए एक विज्ञापन प्रकाशित किया है। अपनी कल्पना से वह विज्ञापन बनाइए।

उत्तर

उत्तर (नमूना उत्तर)

तलाश है! खोया हुआ पहाड़ी तोता 'मिट्ठू'

रंग : हरा, गले पर लाल-काली कंठी, लाल चोंच।

पहचान : "राम राम, सीताराम", "हर हर गंगे" और "कटेगी! कटेगी!" बोलता है। "मिट्ठू" पुकारने पर गर्दन टेढ़ी करके देखता है।

कब और कहाँ से : पिछले सप्ताह मंगलवार दोपहर को जगन मास्टर के घर के रोशनदान से उड़ गया।

यह तोता एक बुजुर्ग ताई के जीवन का एकमात्र सहारा है। जिस किसी सज्जन को यह दिखाई दे, कृपया पकड़कर सुरक्षित पहुँचाएँ या सूचना दें। उचित इनाम दिया जाएगा।

संपर्क : जगन मास्टर, प्राथमिक पाठशाला के पास, (गाँव का नाम)

भाषा से संवाद : व्याकरण की बात

प्रश्न 1

'मिट्ठू' शब्द का प्रयोग एक मुहावरे में भी किया जाता है— 'अपने मुँह मियाँ मिट्ठू बनना'। आप कुछ ऐसे मुहावरों की सूची बनाइए जिनमें किसी अन्य जीव-जंतु का उल्लेख किया गया हो, जैसे— "अकेले मिट्ठू क्या उड़े, आदर्शवादी जगन मास्टर के हाथों के सभी तोते उड़ गए।"

उत्तर

मुहावरा

अर्थ

हाथों के तोते उड़ना

घबरा जाना, होश उड़ जाना

भैंस के आगे बीन बजाना

मूर्ख के सामने ज्ञान की बात करना

आस्तीन का साँप

विश्वासघाती मित्र

गिरगिट की तरह रंग बदलना

बार-बार अपनी बात या पक्ष बदलना

ऊँट के मुँह में जीरा

आवश्यकता से बहुत कम वस्तु

मगरमच्छ के आँसू बहाना

झूठी सहानुभूति दिखाना

बिल्ली के गले में घंटी बाँधना

कठिन और जोखिम भरा काम करना

घोड़े बेचकर सोना

निश्चिंत होकर गहरी नींद सोना

कुएँ का मेंढक होना

सीमित ज्ञान वाला होना

उल्लू सीधा करना

अपना स्वार्थ सिद्ध करना

भाषा से संवाद : ध्वन्यात्मकता शब्दों से

प्रश्न 1

"जगन मास्टर का ध्यान अचानक 'गीता-रहस्य' से हटकर मिट्ठू के पंखों की 'फड़फड़ाहट' पर गया।" पक्षी के उड़ने पर पंखों के हिलने-डुलने से उत्पन्न ध्वनि 'फड़फड़ाहट' कहलाती है। ध्वनियों का आभास कराने वाले कुछ और शब्द लिखिए और उनसे नए वाक्य बनाइए।

उत्तर

ध्वन्यात्मक शब्द

वाक्य

भाँय-भाँय

सूने घर की भाँय-भाँय ताई को काटने दौड़ती थी।

चहचहाना

भोर होते ही पेड़ों पर चिड़ियाँ चहचहाने लगीं।

खटखटाना

आधी रात को किसी ने दरवाजा खटखटाया।

सरसराहट

सूखे पत्तों में साँप की सरसराहट सुनकर हम डर गए।

गड़गड़ाहट

बादलों की गड़गड़ाहट से बच्चे सहम गए।

कल-कल

पहाड़ी नदी कल-कल करती बह रही थी।

भिनभिनाना

मिठाई पर मक्खियाँ भिनभिना रही थीं।

छम-छम

नर्तकी के घुँघरू छम-छम बज रहे थे।

भाषा से संवाद : शब्द-युग्म

प्रश्न 1

पाठ से चुनकर कुछ शब्द-युग्म नीचे दिए गए हैं। उनका अर्थ स्पष्ट करते हुए वाक्य में प्रयोग कीजिए— वक्त-बेवक्त, नियम-सिद्धांत, शादी-ब्याह, तीज-त्योहार।

उत्तर

शब्द-युग्म

अर्थ

वाक्य प्रयोग

वक्त-बेवक्त

समय-असमय, कभी भी (विपरीतार्थक युग्म)

छोटा भाई वक्त-बेवक्त खाने की फरमाइश करता रहता है।

नियम-सिद्धांत

जीवन के निश्चित नियम और आदर्श (समानार्थक/सजातीय युग्म)

दादाजी अपने नियम-सिद्धांतों से कभी समझौता नहीं करते।

शादी-ब्याह

विवाह और उससे जुड़े आयोजन (समानार्थक युग्म)

गर्मियों में गाँव में शादी-ब्याह की धूम रहती है।

तीज-त्योहार

पर्व, उत्सव और त्योहार (सजातीय युग्म)

तीज-त्योहार पर पूरा परिवार एक साथ इकट्ठा होता है।

भाषा से संवाद : खोजबीन शब्दों की

अनुच्छेद : "ढीली धोती को दोनों हाथों से सँभालते हुए वह बाग में एक पेड़ से दूसरे पेड़ के पास, 'मिट्ठू आ! मिट्ठू आ!!' पुकारते हुए पसीना-पसीना होते रहे और मिट्ठू एक डाल से दूसरी डाल पर, एक पेड़ से दूसरे पेड़ पर अपने पंख तौलने में मशगूल रहे।"

प्रश्न 1

उपर्युक्त अनुच्छेद में से खोजिए— 'तंग' का विपरीतार्थक शब्द, मुहावरा, क्रिया, संज्ञा, सर्वनाम, विशेषण, कारक और कर्ता।

उत्तर

क्या खोजना है

उत्तर

'तंग' का विपरीतार्थक शब्द

ढीली

मुहावरा

पसीना-पसीना होना (बहुत घबरा जाना/थक जाना); पंख तौलना (उड़ने का अभ्यास या अपनी शक्ति परखना)

क्रिया

सँभालते, पुकारते, होते रहे, आ, (मशगूल) रहे

संज्ञा

धोती, हाथों, बाग, पेड़, मिट्ठू, डाल, पंख

सर्वनाम

वह, अपने

विशेषण

ढीली, दोनों, एक, दूसरे/दूसरी

कारक (चिह्न)

को (कर्म), से (करण/अपादान), में (अधिकरण), पर (अधिकरण), के पास

कर्ता

वह (जगन मास्टर), मिट्ठू

भाषा से संवाद : अर्थ के आधार पर वाक्य

प्रश्न 1

अब आप भी अपनी पुस्तक में से प्रत्येक प्रकार का एक-एक वाक्य चुनकर लिखिए।

उत्तर

वाक्य का भेद

पुस्तक से उदाहरण

विधानवाचक वाक्य

ताई तो कुंभ-स्नान के लिए चल दीं। (संवादहीन)

निषेधवाचक वाक्य

पेट की समस्या उनके लिए कभी समस्या नहीं रही। (संवादहीन)

प्रश्नवाचक वाक्य

तुम हम गरीबों को क्यों निकाल रहे हो? (दो बैलों की कथा)

विस्मयादिबोधक वाक्य

देखते ही देखते क्या से क्या हो गया! (संवादहीन)

आज्ञावाचक वाक्य

ताई, मिट्ठू को भी साथ ले चलो, उसे भी गंगा-स्नान करा देना। (संवादहीन)

इच्छावाचक वाक्य

खुश रहो! (संवादहीन)

संदेहवाचक वाक्य

वह पिंजरे के अंदर से टुकुर-टुकुर उन्हें देखता रहता या शायद उनकी बेवकूफी पर हँसता रहता हो। (संवादहीन)

संकेतवाचक वाक्य

गले में बड़ी-बड़ी रस्सियाँ न होतीं, तो दोनों पकड़ाई में न आते। (दो बैलों की कथा)

गतिविधियाँ

प्रश्न 1

कहानी के रंग— समूहों को अलग-अलग भावनाएँ (दुख, स्नेह, आजादी) दीजिए और इसे मूक अभिनय द्वारा प्रस्तुत कीजिए।

उत्तर

उत्तर (नमूना उत्तर) : दुख : एक विद्यार्थी ताई बनकर खाली पिंजरे के पास बैठे, बार-बार झाँके, सिर पर हाथ रखे और आँसू पोंछे। स्नेह : ताई पिंजरे को गोद में रखकर मिट्ठू को दाल-भात खिलाएँ, सिर हिलाकर आशीष दें। आजादी : मिट्ठू बना विद्यार्थी पिंजरे से धीरे-धीरे दाना चुगते हुए बाहर आए, फिर बाँहें फैलाकर खुले में उड़ने का अभिनय करे और प्रसन्नता से घूमे।

प्रश्न 2

पंखों की योजना— छोटे समूहों में सोचें कि अगर आपको मिट्ठू की तरह उड़ने का मौका मिले तो आप कहाँ जाते और क्यों?

उत्तर

उत्तर (नमूना उत्तर) : यदि मुझे उड़ने का अवसर मिले तो मैं सबसे पहले हिमालय की बर्फीली चोटियों पर जाता/जाती, जहाँ से गंगा निकलती है, ताकि उसकी शुरुआत अपनी आँखों से देख सकूँ। फिर मैं अपनी नानी के गाँव उड़कर जाता/जाती, जो बहुत दूर है और जहाँ हम साल में एक बार ही जा पाते हैं। अंत में मैं समुद्र के ऊपर उड़कर देखना चाहूँगा/चाहूँगी कि ऊपर से धरती कितनी सुंदर दिखती है।

प्रश्न 3

"पेट की समस्या उनके लिए कभी समस्या नहीं रही।" यह वाक्य बताता है कि ताई ने भोजन संबंधी अपनी आवश्यकताओं पर कभी ध्यान नहीं दिया। हमारे परिवेश में ऐसी बहुत-सी महिलाएँ हैं जो परिवार के सदस्यों की आवश्यकताओं को प्राथमिकता देती हैं और अपनी आवश्यकताओं की अनदेखी करती हैं। अपने घर की महिलाओं की भोजन संबंधी रुचियों के विषय में जानिए और समझिए कि उनकी पसंद का भोजन माह में कब-कब बनता है।

उत्तर

उत्तर (नमूना उत्तर) : मैंने अपनी माँ और दादी से बात की। माँ को कढ़ी-चावल और दादी को बाजरे की खिचड़ी व सरसों का साग पसंद है। पता चला कि घर में प्रायः बच्चों और पिताजी की पसंद का खाना बनता है; माँ की पसंद की कढ़ी महीने में मुश्किल से एक बार बनती है और दादी की खिचड़ी केवल तब, जब वे बीमार होती हैं। यह जानकर हमने तय किया कि अब हर रविवार घर की किसी एक महिला की पसंद का भोजन बनेगा और उस दिन रसोई में हम सब उनकी मदद करेंगे।

गतिविधियाँ : मेरी पहेली

प्रश्न 1

अपने समूह के साथ मिलकर ऐसी पहेलियाँ या प्रश्न बनाइए जिनके उत्तर निम्नलिखित हों— तोता, ताई, कुंभ, पिंजरा, कमरा, गंगा।

उत्तर

पहेली

उत्तर

हरा रंग, लाल चोंच, बोलूँ मीठी बोली; जो सिखाओ वही दोहराऊँ, बताओ मैं हूँ कौन-सी टोली?

तोता

बड़े घर की बूढ़ी रानी, सूनी जिसकी पूरी कहानी; मिट्ठू जिसका एकमात्र सहारा, बोलो किसने उसे पुकारा?

ताई

बारह बरस में आता हूँ, संगम पर मेला लगवाता हूँ; अमृत-कलश का नाम मेरा, बोलो कौन-सा पर्व घनेरा?

कुंभ

तीलियों से बना घर मेरा, चिड़िया बोले यह बंदी डेरा।

पिंजरा

चार दीवारें, एक छत, एक द्वार, घर के भीतर हूँ मैं यार।

कमरा

हिमालय से निकलूँ, सागर में समाऊँ; पावन जल मेरा, कुंभ में नहलाऊँ।

गंगा

गतिविधियाँ : भाषा संगम

"वह न जाने कहाँ से एक प्यारा-सा पहाड़ी तोता ले आया था।"

प्रश्न 1

इनके अतिरिक्त यदि आप 'तोता' शब्द को किसी और भाषा में भी जानते हैं तो उस भाषा में भी लिखिए।

उत्तर

अंग्रेजी में 'तोता' को 'Parrot' कहते हैं। हिंदी में इसके अन्य पर्याय 'सुग्गा', 'सुआ', 'कीर' और 'शुक' भी हैं।

प्रश्न 2

उत्तर

उपर्युक्त वाक्य को अपनी मातृभाषा में भी लिखिए।

उत्तर (नमूना उत्तर) : अंग्रेजी : "He had brought a lovely little mountain parrot from somewhere."

(विद्यार्थी अपनी मातृभाषा में लिखें।)

अतिरिक्त महत्वपूर्ण प्रश्न

बहुविकल्पीय प्रश्न

प्रश्न 1

ताई को मिट्ठू किसने लाकर दिया था?

उत्तर

(क) जगन मास्टर (ख) गनपत (ग) मास्टराइन (घ) ताई का बेटा

उत्तर : (ख) गनपत

प्रश्न 2

ताई कुंभ-स्नान के लिए कहाँ गई थीं?

उत्तर

(क) हरिद्वार (ख) उज्जैन (ग) प्रयागराज (घ) नासिक

उत्तर : (ग) प्रयागराज

प्रश्न 3

मिट्ठू किस रास्ते से उड़ गया?

उत्तर

(क) खिड़की से (ख) दरवाजे से (ग) रोशनदान से (घ) आँगन से

उत्तर : (ग) रोशनदान से

प्रश्न 4

मिट्ठू के उड़ते समय जगन मास्टर क्या पढ़ रहे थे?

उत्तर

(क) रामचरितमानस (ख) गीता-रहस्य (ग) समाचार पत्र (घ) महाभारत

उत्तर : (ख) गीता-रहस्य

प्रश्न 5

शेखर जोशी का पहला कहानी संग्रह कौन-सा है?

उत्तर

(क) साथ के लोग (ख) कोसी का घटवार (ग) मेरा पहाड़ (घ) हलवाहा

उत्तर : (ख) कोसी का घटवार

लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1

मिट्ठू ताई के लिए 'नौजवान सहारा' कैसे था?

उत्तर

जब थकी हुई ताई पूछतीं, "मिट्ठू! अब कैसे कटेगी?" तो मिट्ठू दम-खम से कहता, "कटेगी! कटेगी!! कटेगी!!!" उसकी इस बात से ताई के थके शरीर में प्राण लौट आते। इस तरह मिट्ठू बुढ़ापे में एक जवान बेटे की तरह उन्हें दिलासा देता था।

प्रश्न 2

ताई कुंभ जाने के निर्णय में धर्म-संकट में क्यों पड़ गईं?

उत्तर

ताई को परलोक की चिंता थी, इसलिए कुंभ-स्नान का पुण्य उन्हें खींच रहा था। दूसरी ओर वे मिट्ठू को घड़ी-भर भी अकेला नहीं छोड़ सकती थीं और मेले की भीड़ में उसे ले जाना सुरक्षित नहीं था। इन्हीं दो खिंचावों के बीच वे धर्म-संकट में पड़ गईं।

प्रश्न 3

"जगन मास्टर के घर में महाकुंभ हो गया"— इसका क्या आशय है?

उत्तर

इसका आशय है कि मिट्ठू के आने से जगन मास्टर के घर में बड़ा हंगामा और उथल-पुथल मच गई। मास्टराइन ने पति से पूछे बिना मिट्ठू को रख लिया था, जबकि स्वतंत्रता-प्रेमी जगन मास्टर को पिंजरे में बंद पक्षी देखकर बेचैनी होती थी।

प्रश्न 4

एवजी तोते ने ताई को देखकर कोई हरकत क्यों नहीं की?

उत्तर

एवजी तोता ताई को पहचानता नहीं था और उसे ताई के सिखाए पाठ भी याद नहीं थे। जगन मास्टर के रटाने के बावजूद वह कुछ नहीं सीख पाया था, इसलिए वह केवल इधर-उधर ताकता रहा।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1

'संवादहीन' कहानी किन सामाजिक समस्याओं की ओर संकेत करती है?

उत्तर

यह कहानी मुख्य रूप से गाँवों से शहरों की ओर पलायन और उससे उपजे बुजुर्गों के अकेलेपन की समस्या को सामने लाती है। ताई के बहू-बेटे शहर में बस गए और वे भरे-पूरे घर में अकेली रह गईं; उनका दुख भोजन का नहीं, संवाद के अभाव का है। कहानी आदर्श और यथार्थ के द्वंद्व को भी दिखाती है— जगन मास्टर का स्वतंत्रता-प्रेम ताई के लिए दुख का कारण बन जाता है। स्त्री की पहचान का प्रश्न भी उभरता है, क्योंकि मास्टराइन का नाम तक नहीं है। अंत में अच्छे इरादे से किया गया छल भी समस्या का समाधान नहीं बनता।

2. ताई का चरित्र-चित्रण कीजिए।

ताई एक जमींदार परिवार की वृद्ध स्त्री हैं, जिन्होंने वैभव के दिन भी देखे हैं और अब अकेलेपन के दिन देख रही हैं। वे ममतामयी हैं; अपने लिए आलस करने वाली ताई मिट्ठू के लिए नियम से भोजन बनाती हैं। वे धार्मिक हैं, रोज राम-नाम लेती हैं और परलोक की चिंता में कुंभ जाती हैं। उनका स्वभाव कुछ तेज भी है, गाँव वाले उनके गुस्से से डरते हैं, और कभी-कभी वे मिट्ठू को "मर जा!" भी कह देती हैं। वे अतीत की स्मृतियों में जीती हैं और मिट्ठू को घंटों अपनी जीवन-गाथा सुनाती हैं। उनका चरित्र आज के बहुत से अकेले बुजुर्गों का प्रतिनिधि है।

Frequently Asked Questions

What is Class 9 Hindi Ganga Chapter 3 (संवादहीन) about?

शेखर जोशी की कहानी 'संवादहीन' गाँव की एक बुजुर्ग स्त्री ताई के अकेलेपन की मार्मिक कहानी है, जिनका एकमात्र साथी उनका तोता मिट्ठू है। कुंभ-स्नान पर जाते समय ताई मिट्ठू को जगन मास्टर के घर छोड़ जाती हैं, जहाँ जगन मास्टर उसे आज़ाद कर देते हैं। लौटने पर ताई को पिंजरे में दूसरा तोता मिलता है, जो उनकी पुकार का कोई जवाब नहीं देता। कहानी पलायन और अकेलेपन जैसी समकालीन समस्याओं को भी उभारती है।

What do these NCERT solutions for Class 9 Hindi Ganga Chapter 3 (संवादहीन) cover?

All 52 questions from the latest NCERT textbook for this chapter are answered step by step, organised as रचना से संवाद : मेरे प्रश्न and अतिरिक्त महत्वपूर्ण प्रश्न.

Are these solutions based on the new NCERT syllabus?

Yes. The answers follow the current NCERT textbook for Class 9 Hindi Ganga and the latest CBSE syllabus, so the question numbers and wording match the book you use in class.

How should I use these solutions to prepare for exams?

Attempt each question on your own first, then compare your working with the answer here. Note the steps or keywords you missed, and revise the chapter notes before taking a chapter-wise MCQ test to check your understanding.

Are the NCERT solutions for Class 9 Hindi Ganga Chapter 3 (संवादहीन) free?

Yes. All Circle of Learning NCERT solutions and chapter notes are free to read online, with no sign-up needed.