Circle of Learning • नई NCERT पाठ्यपुस्तक "गंगा" (2026-27) • पाठ के सभी प्रश्नों के उत्तर
रचना से संवाद : मेरे उत्तर मेरे तर्क
निर्देश : निम्नलिखित प्रश्नों के सटीक उत्तर चुनिए और यह भी बताइए कि आपको ये उत्तर उपयुक्त क्यों लगते हैं।
"हैट टाँगने के लिए कोई भी खूँटी काम दे सकती है… असली वस्तु है हैट, खूँटी नहीं।" निबंध में 'हैट' और 'खूँटी' का उल्लेख किस भाव को सबसे अधिक उजागर करता है? (क) विषय से अधिक लेखक के भावों की प्रधानता को दर्शाना (ख) विचार से अधिक तथ्य आधारित सामग्री को प्रमुख बताना (ग) शैली से अधिक भाषा व्यवस्था की उपयोगिता बताना (घ) उदाहरण से अधिक सिद्धांत आधारित लेखन का समर्थन करना
उत्तर
(क) विषय से अधिक लेखक के भावों की प्रधानता को दर्शाना।
तर्क : गार्डिनर के अनुसार 'हैट' लेखक के मनोभाव हैं और 'खूँटी' विषय। जैसे हैट टाँगने के लिए कोई भी खूँटी चल जाती है, वैसे ही भाव व्यक्त करने के लिए कोई भी विषय उपयुक्त है— "मन के भाव ही तो यथार्थ वस्तु हैं, विषय नहीं।"
"उनमें लेखक की सच्ची अनुभूति रहती है… उसका उल्लास रहता है।" मानटेन की पद्धति लेखक के लिए किस निर्णय का आधार बनती है? (क) शैली और स्पष्ट-सहज भाषा को महत्व न देना (ख) परंपरागत निबंधकारों को अस्वीकार करना (ग) अध्ययन के बिना अपने विचार प्रस्तुत कर देना (घ) अनुभव आधारित स्वच्छंद लेखन को अपनाना
उत्तर
(घ) अनुभव आधारित स्वच्छंद लेखन को अपनाना।
तर्क : मानटेन ने जो देखा, सुना और अनुभव किया, उसी को लिपिबद्ध किया। उनके निबंध "मन की स्वच्छंद रचनाएँ" हैं। इसी से प्रेरित होकर लेखक कहता है, "तब इसी पद्धति का अनुसरण कर मैं भी क्यों न निबंध लिखूँ।"
"तरुणों के लिए भविष्य उज्ज्वल… वृद्धों के लिए अतीत सुखद…" यह तुलना किस पर आधारित है? (क) तर्क और भावना (ख) ज्ञान और शिक्षा (ग) परिश्रम और उपलब्धि (घ) अभिलाषा और अनुभव
उत्तर
(घ) अभिलाषा और अनुभव।
तर्क : तरुणों के पास भविष्य की अभिलाषाएँ और सपने होते हैं, इसलिए भविष्य उन्हें उज्ज्वल लगता है। वृद्धों के पास बीते जीवन का अनुभव और स्मृतियाँ होती हैं, इसलिए अतीत उन्हें सुखद लगता है।
निबंध में अमीर खुसरो की कहानी का उल्लेख किस संदर्भ में किया गया है? (क) कविता लेखन की कला को समझाने के लिए (ख) एक साथ कई विषयों को संबोधित करने की प्रतिभा दिखाने के लिए (ग) ढोल के महत्व को दर्शाने के लिए (घ) सामाजिक सुधार के उदाहरण के रूप में
उत्तर
(ख) एक साथ कई विषयों को संबोधित करने की प्रतिभा दिखाने के लिए।
तर्क : खुसरो ने खीर, चरखा, कुत्ता और ढोल, चारों विषयों को एक ही पद्य में समेट दिया था। इसी पद्धति को अपनाकर लेखक ने 'दूर के ढोल सुहावने' और 'समाज-सुधार' दोनों विषयों को एक निबंध में जोड़ दिया।
निबंध में समाज-सुधार के संदर्भ में क्या कहा गया है? (क) सुधारों की आवश्यकता हर युग में बनी रहती है। (ख) सुधार केवल बड़े विचारकों द्वारा संभव हैं। (ग) सुधार केवल आधुनिक युग की देन हैं। (घ) सुधारों का कोई अंत नहीं, लेकिन दोष समाप्त हो जाते हैं।
उत्तर
(क) सुधारों की आवश्यकता हर युग में बनी रहती है।
तर्क : लेखक कहता है, "मनुष्य जाति के इतिहास में कोई ऐसा काल ही नहीं हुआ, जब सुधारों की आवश्यकता न हुई हो।" वह यह भी कहता है कि "न दोषों का अंत है और न सुधारों का", इसलिए विकल्प (घ) गलत है।
रचना से संवाद : मेरी समझ मेरे विचार
निबंध लेखन के विषय में ए.जी. गार्डिनर और लेखक के विचारों में क्या अंतर है?
उत्तर
गार्डिनर मानते हैं कि लिखने की एक विशेष मानसिक स्थिति होती है, जब मन में उमंग, हृदय में स्फूर्ति और मस्तिष्क में आवेग उठता है। उस समय विषय की चिंता नहीं रहती और भाव अपने आप लेख बन जाते हैं। लेखक इस बात को सच मानते हुए भी कहते हैं कि उन्होंने ऐसी मानसिक स्थिति का अनुभव कभी नहीं किया। उन्हें लिखने के लिए सोचना, चिंता करना और परिश्रम करना पड़ता है। अर्थात गार्डिनर के लिए लेखन सहज प्रेरणा है, जबकि लेखक के लिए वह सोच-विचार और मेहनत का काम है।
लेखक के अनुसार वृद्ध और तरुण दोनों ही वर्तमान से असंतुष्ट रहते हैं, पर दोनों की असंतुष्टि के कारण भिन्न हैं। आपके विचार से उनकी असंतुष्टि के क्या-क्या कारण हो सकते हैं?
उत्तर
तरुण भविष्य के सपने देखते हैं। उन्हें लगता है कि वर्तमान व्यवस्था धीमी और पुरानी है, इसलिए वे तुरंत बदलाव और क्रांति चाहते हैं। रोजगार, अवसरों की कमी और बड़ों की रोक-टोक भी उनकी असंतुष्टि के कारण हैं। वृद्धों को अपना अतीत सुखद लगता है। उन्हें लगता है कि आज के समय में पुराने मूल्य, अपनापन, सादगी और परंपराएँ खो रही हैं; तेज बदलाव से वे स्वयं को अकेला भी महसूस करते हैं। इसलिए वे अतीत को वर्तमान में खींच लाना चाहते हैं। लेखक के शब्दों में, "तरुण क्रांति के समर्थक होते हैं और वृद्ध अतीत-गौरव के संरक्षक।"
नमिता और अमिता किन विषयों पर निबंध लिखवाना चाहती हैं? उनके द्वारा सुझाए गए विषयों पर निबंध लिखने में लेखक को क्या-क्या कठिनाइयाँ आईं?
उत्तर
नमिता 'दूर के ढोल सुहावने होते हैं' पर और अमिता 'समाज-सुधार' पर आदर्श निबंध लिखवाना चाहती थीं। लेखक की कठिनाइयाँ थीं— (1) 'दूर के ढोल' पर पाँच पेज लिखने लायक सामग्री नहीं सूझ रही थी। (2) समाज-सुधार बहुत विशाल विषय था, जिस पर विद्वानों में भी मतभेद है। (3) पुस्तकालय जाने या विश्वकोश देखने का समय नहीं था; दो ही घंटों में दो निबंध लिखने थे। (4) पहले से रूपरेखा बनाना उन्हें असंभव लगा। (5) शैली को लेकर दुविधा थी कि छोटे स्पष्ट वाक्य लिखें या विद्वत्ता दिखाने वाले लंबे, दुर्बोध वाक्य।
निबंधशास्त्र के आचार्यों ने आदर्श निबंध लिखने की कौन-सी युक्तियाँ सुझाई हैं? आप किसी भी विषय पर निबंध लिखने से पहले किस तरह की तैयारी करते हैं?
उत्तर
आचार्यों की युक्तियाँ— (1) निबंध छोटा होना चाहिए, क्योंकि बड़े निबंध में रचना की सुंदरता नहीं बनी रहती। (2) निबंध के दो प्रधान अंग हैं— सामग्री और शैली; मनन करके सामग्री और विचार एकत्र करने चाहिए। (3) लिखने से पहले रूपरेखा बना लेनी चाहिए। (4) भाषा में प्रवाह हो, वाक्य छोटे पर एक-दूसरे से जुड़े हों। (5) अलंकारों, मुहावरों और लोकोक्तियों का समावेश हो।
मेरी तैयारी (नमूना उत्तर) : मैं पहले विषय को ध्यान से समझता/समझती हूँ, फिर उससे जुड़ी बातें पुस्तकों, समाचार पत्रों और अपने अनुभव से एकत्र करता/करती हूँ। फिर भूमिका, मुख्य बिंदु और उपसंहार की रूपरेखा बनाता/बनाती हूँ और कुछ उपयुक्त उदाहरण, सूक्तियाँ या मुहावरे चुन लेता/लेती हूँ।
मानटेन ने "जो कुछ देखा, सुना और अनुभव किया, उसी को अपने निबंधों में लिपिबद्ध कर दिया।" निबंध लेखन के लिए देखने, सुनने और अनुभव करने की क्या उपयोगिता हो सकती है?
उत्तर
देखने, सुनने और अनुभव करने से लेखक के पास सच्ची और जीवंत सामग्री आती है। अपने अनुभव से लिखी बात में बनावट नहीं होती, उसमें लेखक की सच्ची अनुभूति और उल्लास होता है, इसलिए वह पाठक के मन को छूती है। ऐसे निबंध में नए उदाहरण, ताजा दृश्य और मौलिक विचार आते हैं। लेखक को किसी विश्वकोश पर निर्भर नहीं रहना पड़ता। इसीलिए मानटेन के निबंध आचार्यों की कसौटी पर खरे न उतरकर भी अंग्रेजी साहित्य में सम्मानित हैं।
विधा से संवाद : निबंध लिखने की कला
इस पाठ में निबंध लेखन की प्रक्रियाओं के विषय में चर्चा की गई है। दिए गए आरेख (प्रेरणा, विषय चयन, सामग्री संग्रह, रूपरेखा निर्माण, शैली निर्धारण, लेखन और समापन) को देखिए और इसके आधार पर एक निबंध लिखिए। अगर आपको निबंध लेखन का कोई और ढंग बेहतर लगता है तो उसे ऐसे ही आरेख से दर्शाइए और बताइए कि आपको वह ढंग क्यों बेहतर लगता है?
उत्तर
उत्तर (नमूना उत्तर) : आरेख के अनुसार तैयारी— प्रेरणा : विद्यालय के पुस्तकालय में बिताया एक दिन। विषय चयन : 'पुस्तकालय का महत्व'। सामग्री संग्रह : पुस्तकालय की सुविधाएँ, अपने अनुभव, प्रसिद्ध लोगों के कथन। रूपरेखा : भूमिका, पुस्तकालय के लाभ, पुस्तकालय में आचरण, उपसंहार। शैली : सरल, छोटे जुड़े वाक्य, आत्मपरक ढंग।
पुस्तकालय का महत्व
पुस्तकें मनुष्य की सबसे अच्छी मित्र होती हैं और पुस्तकालय इन मित्रों का घर है। एक साधारण विद्यार्थी हर पुस्तक खरीद नहीं सकता, पर पुस्तकालय में उसे इतिहास, विज्ञान, साहित्य और कहानियों की हजारों पुस्तकें एक ही स्थान पर मिल जाती हैं। वहाँ का शांत वातावरण मन को एकाग्र करता है। पिछले सप्ताह मैंने पुस्तकालय में प्रेमचंद की कहानियाँ पढ़ीं, तो लगा कि मैं उनके गाँवों में घूम रहा हूँ। पुस्तकालय से पढ़ने की आदत बनती है, ज्ञान बढ़ता है और समय का सदुपयोग होता है। पुस्तकालय में हमें शांति बनाए रखनी चाहिए और पुस्तकों को सँभालकर रखना चाहिए। सच ही कहा गया है कि जिस समाज में अच्छे पुस्तकालय होते हैं, वह समाज कभी पिछड़ता नहीं।
दूसरा ढंग : मुझे "अनुभव → प्रश्न → विचार-मंथन → मुक्त लेखन → संशोधन → शीर्षक" वाला क्रम भी अच्छा लगता है। इसमें पहले अपने अनुभव से मन की बात खुलकर लिख दी जाती है और बाद में उसे सुधारा जाता है। यह मानटेन की पद्धति के निकट है और इसमें लेखन अधिक सच्चा और स्वाभाविक बनता है।
विधा से संवाद : भाव-विस्तार
"जो तरुण संसार के जीवन-संग्राम से दूर हैं, उन्हें संसार का चित्र बड़ा ही मनमोहक प्रतीत होता है।"
उत्तर
जिन युवाओं ने अभी तक जीविका कमाने, परिवार चलाने और जीवन की कठिनाइयों से जूझने का अनुभव नहीं किया है, उन्हें दुनिया बहुत सुंदर और आसान लगती है। वे सोचते हैं कि हर सपना सहज ही पूरा हो जाएगा। जब वे स्वयं जीवन-संघर्ष में उतरते हैं, तब उन्हें यथार्थ की कठोरता का पता चलता है। यह 'दूर के ढोल सुहावने' का ही एक रूप है।
"मनुष्य जाति के इतिहास में कोई ऐसा काल ही नहीं हुआ, जब सुधारों की आवश्यकता न हुई हो।"
उत्तर
समाज कभी पूर्ण नहीं होता। हर युग में कुछ नई बुराइयाँ और कमियाँ पैदा होती हैं, इसलिए हर युग को अपने सुधारक चाहिए। बुद्ध, कबीर, राजा राममोहन राय और गांधी जैसे सुधारकों ने अपने समय की बुराइयों को दूर किया, पर बाद में नई समस्याएँ आ गईं। सुधार की यह निरंतर प्रक्रिया ही समाज को आगे बढ़ाती है और जीवन को प्रगतिशील बनाती है।
"आज जो तरुण हैं, वही वृद्ध होकर अतीत के गौरव का स्वप्न देखेंगे।"
उत्तर
समय का चक्र सदा चलता रहता है। आज के युवा जिन नए विचारों और नई रचनाओं को भविष्य का गौरव मानते हैं, वे भी कुछ समय बाद पुरानी हो जाएँगी। तब यही युवा बूढ़े होकर अपने बीते दिनों को सुनहरा बताएँगे और नई पीढ़ी भविष्य के सपने देखेगी। अर्थात हर पीढ़ी पहले भविष्य की और फिर अतीत की प्रशंसक बनती है।
"निबंध छोटा होना चाहिए। छोटा निबंध बड़े की अपेक्षा अधिक अच्छा होता है।"
उत्तर
छोटे निबंध में लेखक कम शब्दों में अपनी बात कसावट के साथ कहता है। उसमें अनावश्यक विस्तार और दोहराव नहीं होता, इसलिए रचना की सुंदरता और प्रभाव बना रहता है। पाठक भी उसे रुचि से अंत तक पढ़ता है। बड़े निबंध में विचार बिखरने लगते हैं और पाठक ऊब सकता है। अतः संक्षिप्तता अच्छे निबंध का गुण है।
विधा से संवाद : मेरा अनुभव
इस निबंध में लेखक को दो विषयों ('दूर के ढोल सुहावने होते हैं' और 'समाज-सुधार') पर निबंध लिखने थे। पिछली कक्षाओं में आपने भी बहुत से विषयों पर अनुच्छेद, संवाद और निबंध लिखे हैं। आपको किन विषयों पर लिखना सरल या कठिन लगा और क्यों?
उत्तर
उत्तर (नमूना उत्तर) : मुझे 'मेरा प्रिय त्योहार', 'मेरी पहली रेल यात्रा' और 'मेरा विद्यालय' जैसे विषयों पर लिखना सरल लगा, क्योंकि इनसे जुड़े मेरे अपने अनुभव थे और बातें अपने आप याद आती गईं। 'वैश्वीकरण', 'बेरोजगारी की समस्या' या 'लोकतंत्र में मीडिया की भूमिका' जैसे विषय कठिन लगे, क्योंकि इनके लिए तथ्य, आँकड़े और गहरी समझ चाहिए, जो केवल अनुभव से नहीं आती। इससे मैं समझ पाया/पाई कि अपने अनुभव से जुड़े विषय पर लिखना सबसे सहज होता है, जैसा मानटेन की पद्धति में है।
विषयों से संवाद
निबंध में बुद्धदेव, महावीर स्वामी, नागार्जुन, शंकराचार्य, कबीर, नानक आदि कई महान व्यक्तियों के नाम आए हैं। इनके विषय में जानकारी एकत्रित करके संक्षेप में बताइए कि इन्होंने अपने समय में समाज के लिए क्या-क्या कार्य किए।
उत्तर
महान व्यक्ति | समाज के लिए कार्य |
बुद्धदेव (गौतम बुद्ध) | बौद्ध धर्म के संस्थापक; अहिंसा, करुणा और मध्यम मार्ग का उपदेश दिया; यज्ञों में पशुबलि और जाति-भेद का विरोध किया। |
महावीर स्वामी | जैन धर्म के चौबीसवें तीर्थंकर; अहिंसा, सत्य, अपरिग्रह जैसे व्रतों पर बल दिया और संयमित जीवन की शिक्षा दी। |
नागार्जुन | प्राचीन बौद्ध दार्शनिक; माध्यमिक (शून्यवाद) दर्शन का प्रतिपादन किया और बौद्ध चिंतन को तर्कपूर्ण आधार दिया। |
शंकराचार्य | अद्वैत वेदांत का प्रचार किया; देश की चारों दिशाओं में मठ स्थापित कर सांस्कृतिक एकता को मजबूत किया। |
कबीर | संत कवि; जाति-पाँति, मूर्तिपूजा, आडंबर और धार्मिक कट्टरता का विरोध किया; हिंदू-मुस्लिम एकता और सच्ची भक्ति का संदेश दिया। |
गुरु नानक | सिख धर्म के प्रथम गुरु; एक ईश्वर, समानता, ईमानदार परिश्रम और सेवा (लंगर) पर बल दिया। |
राजा राममोहन राय | ब्रह्म समाज की स्थापना की; सती प्रथा के विरोध और आधुनिक शिक्षा के प्रसार के लिए कार्य किया। |
स्वामी दयानंद | आर्य समाज की स्थापना की; 'वेदों की ओर लौटो' का नारा दिया; बाल-विवाह और छुआछूत का विरोध किया, स्त्री-शिक्षा का समर्थन किया। |
महात्मा गांधी | सत्य और अहिंसा के मार्ग से स्वतंत्रता आंदोलन का नेतृत्व किया; छुआछूत-निवारण, स्वदेशी और ग्राम-स्वराज पर बल दिया। |
निबंध में उल्लिखित महान व्यक्तियों ने अपने द्वारा किए गए कार्यों से समाज को एक नई दिशा दिखाई। हमारे आस-पास और भी ऐसे व्यक्ति और संस्थाएँ हैं जो स्त्री-शिक्षा, पर्यावरण, असमानता, विशेष आवश्यकता समूह (दिव्यांगजन) आदि के लिए कार्य करते हैं। ऐसे व्यक्तियों, संस्थाओं के विषय में पता लगाइए और लिखिए।
उत्तर
उत्तर (नमूना उत्तर)
- स्त्री-शिक्षा : सावित्रीबाई फुले ने उन्नीसवीं सदी में लड़कियों के लिए विद्यालय खोले। आज 'बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ' जैसे अभियान इसी दिशा में काम कर रहे हैं।
- पर्यावरण : सुंदरलाल बहुगुणा ने 'चिपको आंदोलन' के माध्यम से हिमालय के पेड़ों को बचाने का कार्य किया।
- असमानता और सेवा : बाबा आमटे ने कुष्ठ रोगियों के लिए 'आनंदवन' बनाया और उन्हें सम्मानपूर्ण जीवन दिया।
- दिव्यांगजन : हमारे नगर की एक स्वयंसेवी संस्था दृष्टिबाधित बच्चों को ब्रेल लिपि सिखाती है और उनके लिए ऑडियो पुस्तकें तैयार करती है। (विद्यार्थी अपने क्षेत्र की संस्थाओं के नाम लिखें।)
आपको 'समाज-सुधार' करने का अवसर मिले तो आप क्या-क्या सुधार करना चाहेंगे और कैसे करना चाहेंगे? लिखिए।
उत्तर
उत्तर (नमूना उत्तर) : (1) शिक्षा : मैं अपने मोहल्ले के उन बच्चों को शाम को पढ़ाना चाहूँगा/चाहूँगी जो विद्यालय नहीं जा पाते। (2) स्वच्छता : मित्रों के साथ मिलकर सप्ताह में एक दिन सफाई अभियान चलाऊँगा/चलाऊँगी और गीले-सूखे कचरे को अलग रखने के लिए लोगों को समझाऊँगा/समझाऊँगी। (3) नशामुक्ति : नुक्कड़ नाटकों और पोस्टरों से नशे के दुष्परिणाम बताऊँगा/बताऊँगी। (4) लैंगिक समानता : घर से ही शुरुआत करूँगा/करूँगी कि बेटे और बेटी को समान अवसर मिलें। (5) पर्यावरण : हर जन्मदिन पर एक पेड़ लगाने की परंपरा शुरू करूँगा/करूँगी। मेरा मानना है कि सुधार दूसरों से पहले स्वयं से शुरू होना चाहिए।
भारतीय ज्ञान साहित्य में अनेक स्थानों पर नैतिक, आध्यात्मिक और व्यावहारिक जीवन में संतुलन की बात की गई है। इस विषय पर अपने शिक्षक के साथ मिलकर चर्चा कीजिए।
उत्तर
उत्तर (चर्चा के बिंदु) : भारतीय परंपरा में जीवन के चार पुरुषार्थ— धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष— बताए गए हैं। धर्म (नैतिकता) की मर्यादा में रहकर अर्थ (धन) कमाना और कामनाएँ पूरी करना तथा अंत में मोक्ष (आध्यात्मिक मुक्ति) की ओर बढ़ना संतुलित जीवन है। गीता में कहा गया है कि उचित आहार-विहार और उचित कर्म करने वाले के लिए ही योग सफल होता है; वहाँ "योगः कर्मसु कौशलम्" कहकर कर्म को कुशलता से करने को ही योग बताया गया है। बुद्ध ने भी अत्यधिक भोग और अत्यधिक तप, दोनों को छोड़कर 'मध्यम मार्ग' अपनाने की शिक्षा दी। कबीर ने कहा कि "साईं इतना दीजिए, जा में कुटुम समाय।" इन सबका सार यही है कि जीवन में न अति भोग हो, न अति त्याग; कर्तव्य, नैतिकता और आत्मिक शांति के बीच संतुलन होना चाहिए।
सृजन
'दूर के ढोल सुहावने होते हैं' एक लोकोक्ति है। आपने यह लोकोक्ति भी सुनी होगी— 'आम के आम गुठलियों के दाम'। अब आप इस लोकोक्ति और 'जैविक खाद की निर्मिति में हमारा प्रयास' विषय को मिलाकर एक संक्षिप्त लेख तैयार कीजिए।
उत्तर
उत्तर (नमूना उत्तर)
जैविक खाद की निर्मिति में हमारा प्रयास : आम के आम, गुठलियों के दाम
हमारे घर से हर दिन सब्जियों के छिलके, फलों के बचे हिस्से, चाय की पत्ती और सूखे पत्ते कचरे में जाते थे। एक दिन हमारी विज्ञान अध्यापिका ने बताया कि इसी कचरे से जैविक खाद बनाई जा सकती है। हमने घर के आँगन में एक पुराने मटके में नीचे सूखे पत्ते, फिर रसोई का गीला कचरा और ऊपर थोड़ी मिट्टी की परतें डालनी शुरू कीं। हर सप्ताह उसे पलटते रहे। लगभग दो महीने में भुरभुरी, सुगंधित खाद तैयार हो गई। इससे दोहरा लाभ हुआ— घर का कचरा आधा रह गया और गमलों व किचन-गार्डन के लिए मुफ्त में बढ़िया खाद मिल गई। रासायनिक खाद का खर्च भी बचा और मिट्टी की सेहत भी सुधरी। सच में यह 'आम के आम गुठलियों के दाम' वाली बात है। अब हमारे पड़ोसी भी यह तरीका अपना रहे हैं।
"जब ढोल के पास बैठे हुए लोगों के कान के पर्दे फटते रहते हैं, तब दूर किसी नदी के तट पर संध्या समय, किसी दूसरे के कान में वही शब्द मधुरता का संचार कर देते हैं।" आपने पढ़ा कि ढोल के पास बैठे व्यक्ति की अपेक्षा दूर बैठे व्यक्ति के लिए ढोल की आवाज का अनुभव भिन्न है। अपने अनुभव के आधार पर किसी ऐसी घटना का उल्लेख अपनी डायरी में कीजिए, जब किसी वस्तु, व्यक्ति या संस्था के विषय में दूर से आपका अनुमान कुछ और रहा हो, पर निकट से आपका अनुभव बिल्कुल अलग रहा हो।
उत्तर
उत्तर (नमूना उत्तर)
दिनांक : 12 अगस्त
प्रिय डायरी,
आज मुझे 'दूर के ढोल सुहावने' का सही अर्थ समझ में आया। मैं हमेशा सोचता था कि छात्रावास में रहने वाले बच्चे कितने मजे में रहते हैं— न माँ की डाँट, न घर का कोई काम, दिन-भर दोस्तों के साथ। आज मैं अपने चचेरे भाई से मिलने उसके छात्रावास गया। वहाँ देखा कि सुबह पाँच बजे उठना पड़ता है, अपने कपड़े खुद धोने पड़ते हैं, खाना जैसा भी हो खाना पड़ता है और रात को घर की याद में कई बच्चे उदास बैठे रहते हैं। भैया ने बताया कि उन्हें माँ के हाथ का खाना सबसे ज्यादा याद आता है। लौटते समय मुझे अपना घर पहले से कहीं अधिक प्यारा लगा। अब समझ आया कि दूर से जो चीज सुहानी लगती है, पास से उसकी कठिनाइयाँ भी दिखती हैं।
भाषा से संवाद : व्याकरण की बात — समास
निबंध में ऐसे अनेक सामासिक शब्द आए हैं। उन शब्दों को ढूँढ़कर उनका समास विग्रह कीजिए और समास का नाम लिखिए। (उदाहरण : निबंधशास्त्र — निबंध का शास्त्र — तत्पुरुष समास)
उत्तर
(टिप्पणी : जिन शब्दों के साथ "(अतिरिक्त उदाहरण)" लिखा है, वे निबंध के मुख्य पाठ में नहीं, पाठ से पहले दिए गए लेखक-परिचय में आए हैं; उन्हें द्विगु और बहुव्रीहि समास समझाने के लिए जोड़ा गया है। शेष सभी शब्द निबंध से लिए गए हैं।)
सामासिक पद | समास विग्रह | समास का नाम |
निबंधशास्त्र | निबंध का शास्त्र | तत्पुरुष समास (उदाहरण) |
निबंध-रचना | निबंध की रचना | तत्पुरुष समास |
समाज-सुधार | समाज का सुधार | तत्पुरुष समास |
पुस्तकालय | पुस्तकों का आलय (घर) | तत्पुरुष समास |
विश्वकोश | विश्व (संसार) का कोश | तत्पुरुष समास |
विवाहोत्सव | विवाह का उत्सव | तत्पुरुष समास |
अतीत-गौरव | अतीत का गौरव | तत्पुरुष समास |
बाल्यावस्था | बाल्य की अवस्था | तत्पुरुष समास |
दूरस्थ | दूर में स्थित | तत्पुरुष समास |
नव-वधू | नई है जो वधू | कर्मधारय समास |
जीवन-संग्राम | जीवन रूपी संग्राम | कर्मधारय समास |
पंच-पात्र (अतिरिक्त उदाहरण) | पाँच पात्रों का समाहार | द्विगु समास |
त्रिवेणी (अतिरिक्त उदाहरण) | तीन वेणियों (धाराओं) का समाहार | द्विगु समास |
शतदल (अतिरिक्त उदाहरण) | सौ दल (पंखुड़ियाँ) हैं जिसके, अर्थात कमल | बहुव्रीहि समास |
महात्मा | महान है आत्मा जिसकी, अर्थात महात्मा गांधी (विशेष व्यक्ति) | बहुव्रीहि समास |
दस-पाँच | दस या पाँच | द्वंद्व समास |
यथार्थ | अर्थ के अनुसार | अव्ययीभाव समास |
नगर-नगर, गाँव-गाँव | प्रत्येक नगर, प्रत्येक गाँव | अव्ययीभाव समास (पुनरुक्त) |
भाषा से संवाद : उपसर्ग एवं प्रत्यय
निबंध से उपसर्ग और प्रत्यय वाले शब्द ढूँढ़कर अपनी लेखन-पुस्तिका में लिखिए।
उत्तर
उपसर्ग वाले शब्द | उपसर्ग + मूल शब्द | प्रत्यय वाले शब्द | मूल शब्द + प्रत्यय |
अनादि | अन् + आदि | सुधारक | सुधार + क |
दुर्बोध | दुर् + बोध | कठिनाई | कठिन + आई |
असंतोष | अ + संतोष | मधुरता | मधुर + ता |
अनुभव | अनु + भव | मानसिक | मानस + इक |
प्रकट | प्र + कट | प्रतिभावान | प्रतिभा + वान |
विशेष | वि + शेष | प्रगतिशील | प्रगति + शील |
प्रगति | प्र + गति | सुखद | सुख + द |
उत्पन्न | उत् + पन्न | निबंधकार | निबंध + कार |
अस्पष्टता | अ + स्पष्टता | गांभीर्य | गंभीर + य |
नीचे दिए गए वाक्यों को उचित उपसर्ग या प्रत्यय लगाकर पूरा कीजिए।
उत्तर
- निबंध लिखना बड़ी कठिनाई (कठिन + आई) की बात है।
- वर्तमान से दोनों को असंतोष (अ + संतोष) होता है।
- वाक्यों में कुछ अस्पष्टता (अ + स्पष्ट + ता) भी चाहिए, क्योंकि यह अस्पष्टता (अ + स्पष्ट + ता) या दुर्बोधता (दुर् + बोध + ता) गांभीर्य ला देती है।
नीचे दिए गए शब्दों में उपसर्ग या प्रत्यय लगाकर नए शब्द बनाकर लिखिए— मधुर, सुधार, सुंदर, गति, समाज। (उदाहरण— मधुर → मधुरता, मधुरमय, सुमधुर)
उत्तर
मूल शब्द | नए शब्द |
मधुर | मधुरता, मधुरिमा, सुमधुर |
सुधार | सुधारक, सुधारवादी, सुधारना |
सुंदर | सुंदरता, असुंदर, सौंदर्य |
गति | प्रगति, दुर्गति, सद्गति, गतिशील, गतिमान |
समाज | सामाजिक, समाजवाद, असामाजिक, समाजसेवी |
भाषा से संवाद : भाव एक शब्द अनेक
इस पाठ में अनेक ऐसे शब्दों का प्रयोग किया गया है जिनके अर्थ परस्पर मिलते-जुलते हैं। उदाहरण के लिए, विचार-मनन-चिंतन या सुहावने-मधुर-मनमोहक। पाठ से ऐसे शब्द ढूँढ़िए तथा वाक्य प्रयोग के द्वारा उनके अर्थ स्पष्ट कीजिए।
उत्तर
मिलते-जुलते शब्द | वाक्य प्रयोग |
विचार – मनन – चिंतन | परीक्षा से पहले हमें पाठ पर गहन चिंतन और मनन करना चाहिए, तभी नए विचार आते हैं। |
सुहावने – मधुर – मनमोहक | वर्षा ऋतु की सुहावनी शाम में कोयल की मधुर कूक और भी मनमोहक लगती है। |
उमंग – स्फूर्ति – आवेग | सुबह की सैर से शरीर में स्फूर्ति और मन में उमंग भर जाती है; क्रोध के आवेग में निर्णय नहीं लेना चाहिए। |
विज्ञ – विद्वान – आचार्य | सभा में अनेक विज्ञ जन, विद्वान लेखक और संस्कृत के आचार्य उपस्थित थे। |
कठिनता – कठिनाई | गणित के इस प्रश्न की कठिनता देखकर मुझे बड़ी कठिनाई महसूस हुई। |
अनुभव – अनुभूति | पहाड़ों की यात्रा का अनुभव अद्भुत था; वहाँ शांति की गहरी अनुभूति हुई। |
आनंद – उल्लास – प्रमोद | दीवाली पर घर-घर में आनंद, उल्लास और प्रमोद का वातावरण था। |
अस्पष्टता – दुर्बोधता | वाक्यों की अस्पष्टता के कारण लेख में दुर्बोधता आ गई। |
तरुण – युवा | देश का भविष्य तरुणों पर निर्भर है; युवा ही परिवर्तन लाते हैं। |
गतिविधियाँ
"खीर पकाई जतन से, चरखा दिया चला। आया कुत्ता खा गया, तू बैठी ढोल बजा।।" पाठ में अमीर खुसरो की यह प्रसिद्ध अनमेली आई है। आप उनके द्वारा रचित अन्य अनमेलियों, मुकरियों व पहेलियों का शिक्षक की सहायता से ढूँढ़कर संकलन कीजिए।
उत्तर
उत्तर (नमूना संकलन)
- पहेली : "एक थाल मोती से भरा, सबके सिर पर औंधा धरा। चारों ओर वह थाली फिरे, मोती उससे एक न गिरे।" — उत्तर : आकाश (तारों भरा)।
- दो सखुने : "पान सड़ा क्यों? घोड़ा अड़ा क्यों?" — उत्तर : फेरा न था।
- कह-मुकरी : "रात समय वह मेरे आवे, भोर भए वह घर उठि जावे। यह अचरज है सबसे न्यारा, ऐ सखि साजन? ना सखि तारा।"
(विद्यार्थी शिक्षक की सहायता से और भी रचनाएँ संकलित करें।)
कक्षा में 'युवा और वृद्ध— दो पीढ़ियों के पीढ़ीगत अंतर' पर वाद-विवाद का आयोजन कीजिए। वाद-विवाद के नियमों के लिए आप कक्षा 7 और 8 की पाठ्यपुस्तक मल्हार के कुछ पाठों का अभ्यास देखकर अपनी प्रतियोगिता के नियम निर्धारित कर सकते हैं।
उत्तर
उत्तर (नमूना उत्तर) : नियम : दोनों पक्षों से तीन-तीन वक्ता, प्रत्येक को दो मिनट; विषय से बाहर न जाना; विरोधी पक्ष का सम्मान; अंत में एक-एक मिनट का खंडन।
पक्ष (पीढ़ीगत अंतर हानिकारक है) : "आज युवा और बुजुर्ग एक ही घर में रहकर भी एक-दूसरे से बात नहीं करते। युवा बड़ों के अनुभव को पुराना कहकर ठुकरा देते हैं और बड़े युवाओं की नई सोच को समझना नहीं चाहते। इससे परिवार टूट रहे हैं।"
विपक्ष (पीढ़ीगत अंतर आवश्यक है) : "लेखक ने स्वयं कहा है कि तरुण क्रांति के समर्थक होते हैं और वृद्ध अतीत-गौरव के संरक्षक, इसी से वर्तमान सुधारों का काल बना रहता है। युवाओं का जोश और बड़ों का अनुभव मिलकर ही समाज को आगे ले जाते हैं; अंतर टकराव नहीं, संतुलन का साधन है।"
गतिविधियाँ : भाषा संगम
"निबंध लिखने के पहले उसकी रूपरेखा बना लेनी चाहिए।"
इनके अतिरिक्त यदि आप 'निबंध' शब्द को किसी और भाषा में भी जानते हैं तो उस भाषा में भी लिखिए।
उत्तर
अंग्रेजी में 'निबंध' को 'Essay' कहते हैं। फ्रांसीसी भाषा में इसके लिए 'Essai' शब्द है, जिसका अर्थ 'प्रयास' है; मानटेन ने अपने निबंधों के संग्रह का यही नाम रखा था।
उत्तर
उपर्युक्त वाक्य को अपनी मातृभाषा में भी लिखिए।
उत्तर (नमूना उत्तर) : अंग्रेजी : "An outline should be prepared before writing an essay."
(विद्यार्थी अपनी मातृभाषा में भी लिखें।)
झरोखे से
इस अंश में अज्ञेय का लेख 'मैं क्यों लिखता हूँ?' पढ़ने के लिए दिया गया है। इसमें कोई प्रश्न नहीं है। इसका सार यह है कि लेखक अपनी आंतरिक विवशता को पहचानने और उससे मुक्त होने के लिए लिखता है; बाहरी दबाव (संपादक, प्रकाशक, आर्थिक आवश्यकता) भी कभी-कभी भीतरी प्रेरणा को जगाने का निमित्त बन जाता है। यह विचार पाठ में गार्डिनर की 'विशेष मानसिक स्थिति' से मेल खाता है।
खोजबीन
पाठ में आए साहित्यकारों बाणभट्ट, श्रीहर्ष, अमीर खुसरो, सेनापति, महात्मा गांधी, ए.जी. गार्डिनर, शेक्सपीयर, मानटेन के विषय में पुस्तकालय या इंटरनेट से ढूँढ़कर पढ़िए।
उत्तर
साहित्यकार | संक्षिप्त परिचय |
बाणभट्ट | सम्राट हर्षवर्धन के दरबार के संस्कृत गद्यकार; 'कादंबरी' और 'हर्षचरित' के रचयिता; लंबे, अलंकृत वाक्यों के लिए प्रसिद्ध। |
श्रीहर्ष | संस्कृत महाकाव्य 'नैषधीयचरित' के रचयिता; जान-बूझकर कठिन और विद्वत्तापूर्ण शैली के लिए प्रसिद्ध। |
अमीर खुसरो | फारसी और हिंदवी के कवि, संगीतज्ञ; निजामुद्दीन औलिया के शिष्य; पहेलियों, मुकरियों और दो सखुनों के लिए प्रसिद्ध। |
सेनापति | हिंदी के रीतिकालीन कवि; 'कवित्त रत्नाकर' के रचयिता; श्लेष अलंकार और ऋतु-वर्णन के लिए प्रसिद्ध। |
महात्मा गांधी | स्वतंत्रता आंदोलन के नेता; 'सत्य के प्रयोग' (आत्मकथा) और 'हिंद स्वराज' के लेखक। |
ए.जी. गार्डिनर | अंग्रेजी के पत्रकार और निबंधकार; हल्के-फुल्के व्यक्तिगत निबंधों के लिए प्रसिद्ध। |
शेक्सपीयर | अंग्रेजी के महान नाटककार और कवि; 'हैमलेट', 'मैकबेथ', 'रोमियो एंड जूलियट', 'ऐज़ यू लाइक इट' (जैसा तुम चाहो) आदि के रचयिता। |
मानटेन | सोलहवीं शताब्दी के फ्रांसीसी लेखक; व्यक्तिगत अनुभवों पर आधारित निबंध-शैली के जन्मदाता माने जाते हैं। |
अतिरिक्त महत्वपूर्ण प्रश्न
बहुविकल्पीय प्रश्न
'क्या लिखूँ?' निबंध के लेखक कौन हैं?
उत्तर
(क) प्रेमचंद (ख) पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी (ग) अज्ञेय (घ) मोहन राकेश
उत्तर : (ख) पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी
लेखक को कितने समय में दो निबंध तैयार करने थे?
उत्तर
(क) एक दिन में (ख) दो घंटों में (ग) एक सप्ताह में (घ) पाँच घंटों में
उत्तर : (ख) दो घंटों में
अंग्रेजी की व्यक्तिगत निबंध पद्धति के जन्मदाता किसे माना जाता है?
उत्तर
(क) गार्डिनर (ख) शेक्सपीयर (ग) मानटेन (घ) बाणभट्ट
उत्तर : (ग) मानटेन
दूर के ढोल सुहावने क्यों होते हैं?
उत्तर
(क) वे सुंदर होते हैं (ख) उनकी कर्कशता दूर तक नहीं पहुँचती (ग) वे धीरे बजते हैं (घ) वे विवाह में बजते हैं
उत्तर : (ख) उनकी कर्कशता दूर तक नहीं पहुँचती
शेक्सपीयर ने नाम न सूझने पर अपने एक नाटक का क्या नाम रखा?
उत्तर
(क) हैमलेट (ख) मैकबेथ (ग) जैसा तुम चाहो (घ) ओथेलो
उत्तर : (ग) जैसा तुम चाहो
लघु उत्तरीय प्रश्न
लेखक ने रूपरेखा बनाने में कठिनाई क्यों बताई?
उत्तर
लेखक का कहना है कि निबंध लिख लेने के बाद उसका सार कुछ वाक्यों में लिखा जा सकता है, पर लिखने से पहले दस-पाँच शब्दों में उसका सार कैसे लिखा जाए। गार्डिनर को भी शीर्षक बनाने में कठिनाई होती थी, इसलिए लेखक को लगा कि उनसे रूपरेखा तैयार न होगी।
लेखक ने 'मास्टर' होने के कारण कैसी शैली की बात व्यंग्य में कही है?
उत्तर
लेखक व्यंग्य करते हैं कि मास्टर होने के नाते अपनी विद्वत्ता दिखाने के लिए उनके वाक्य कम से कम आधे पृष्ठ के होने चाहिए और उनमें अस्पष्टता भी होनी चाहिए, क्योंकि दुर्बोधता से गांभीर्य आता है। इस प्रकार वे दिखावटी, कठिन शैली पर व्यंग्य करते हैं।
ढोल की कर्कश ध्वनि दूर बैठे व्यक्ति को मधुर क्यों लगती है?
उत्तर
दूर बैठा व्यक्ति ढोल की आवाज सुनकर किसी विवाहोत्सव और लज्जाशील नव-वधू की कल्पना करता है। ढोल की ध्वनि के साथ आनंद, उत्सव और प्रेम के भाव जुड़ जाते हैं और उसकी कर्कशता दूर तक नहीं पहुँचती, इसलिए वह मधुर लगती है।
लेखक ने दोनों विषयों को एक निबंध में कैसे जोड़ा?
उत्तर
लेखक ने बताया कि दूर रहने से यथार्थ की कठोरता नहीं दिखती; तरुणों को भविष्य और वृद्धों को अतीत सुहावना लगता है। इन दोनों के असंतोष से वर्तमान सदा क्षुब्ध रहता है और सुधारों का काल बना रहता है। इस प्रकार 'दूर के ढोल' से 'समाज-सुधार' तक बात जुड़ गई।
दीर्घ उत्तरीय प्रश्न
1. 'क्या लिखूँ?' निबंध की शैली की विशेषताएँ लिखिए।
यह निबंध आत्मपरक शैली में लिखा गया है, जिसमें लेखक स्वयं पाठक से बात करता प्रतीत होता है। लेखक अपनी कठिनाइयों को सहज ढंग से बताते हुए निबंध-रचना के नियम भी समझा देते हैं। इसमें हल्का व्यंग्य और हास्य है, जैसे मास्टर की विद्वत्ता दिखाने वाले लंबे वाक्य। गार्डिनर, मानटेन, शेक्सपीयर, बाणभट्ट, श्रीहर्ष और अमीर खुसरो के प्रसंगों से निबंध रोचक और ज्ञानवर्धक बनता है। भाषा तत्सम-प्रधान होते हुए भी सरल है और 'दूर के ढोल सुहावने' जैसी लोकोक्ति का सुंदर प्रयोग है। निबंध स्वयं ही उस पद्धति का उदाहरण बन जाता है जिसकी वह चर्चा करता है।
"न दोषों का अंत है और न सुधारों का।" इस कथन के आधार पर लेखक के समाज-सुधार संबंधी विचार स्पष्ट कीजिए।
उत्तर
लेखक के अनुसार समाज-सुधार एक निरंतर प्रक्रिया है। मानव इतिहास में ऐसा कोई काल नहीं आया जब सुधारों की आवश्यकता न रही हो। बुद्ध, महावीर, शंकराचार्य, कबीर, नानक, राजा राममोहन राय, दयानंद और गांधी जैसे सुधारकों के बाद भी सुधार का काम समाप्त नहीं हुआ; सुधारक तो नगर-नगर और गाँव-गाँव में होते हैं। जीवन में नए-नए दोष पैदा होते हैं और उनके लिए नए सुधार होते हैं। यहाँ तक कि कभी के सुधार आगे चलकर दोष बन जाते हैं और उनका फिर सुधार करना पड़ता है। यही निरंतरता जीवन को प्रगतिशील बनाती है।