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Class 9 Hindi Ganga Chapter 5

NCERT Solutions for Class 9 Hindi Ganga Chapter 5: आखिरी चट्टान तक

मोहन राकेश का 'आखिरी चट्टान तक' कन्याकुमारी की यात्रा पर आधारित एक रोचक यात्रा-वृत्तांत है। लेखक बंगाल की खाड़ी, हिंद महासागर और अरब सागर के संगम-स्थल के प्राकृतिक दृश्यों का सजीव वर्णन करते हैं। इसमें वहाँ की भौगोलिक और सांस्कृतिक सुंदरता के साथ-साथ समुद्र तट पर लेखक के मन में उठने वाले विस्मय, रोमांच और शांति के भाव भी व्यक्त हुए हैं।

Circle of Learning • नई NCERT पाठ्यपुस्तक "गंगा" (2026-27) • पाठ के सभी प्रश्नों के उत्तर

रचना से संवाद : मेरे उत्तर मेरे तर्क

निर्देश : निम्नलिखित प्रश्नों के सटीक उत्तर चुनिए और यह भी बताइए कि आपको ये उत्तर उपयुक्त क्यों लगते हैं।

प्रश्न 1

लेखक ने सूर्यास्त का मनोहारी दृश्य कहाँ से देखा? (क) विवेकानंद चट्टान से (ख) अरब सागर की ओर के ऊँचे टीले से (ग) पच्छिमी क्षितिज से (घ) सैंड हिल से

उत्तर

(ख) अरब सागर की ओर के ऊँचे टीले से।

तर्क : सैंड हिल से अरब सागर की ओर का विस्तार एक ऊँचे टीले की ओट में था। इसलिए लेखक एक के बाद एक कई टीले पार करके उस टीले पर पहुँचा जहाँ से "पच्छिमी क्षितिज का खुला विस्तार" दिखा और वहीं बैठकर उसने सूर्यास्त देखा।

प्रश्न 2

"मैं कुछ देर भूला रहा कि मैं मैं ही हूँ।" यह कथन लेखक की किस मनःस्थिति को दर्शाता है? (क) मौन हो जाना (ख) विस्मित हो जाना (ग) भ्रमित हो जाना (घ) आशंकित होना

उत्तर

(ख) विस्मित हो जाना।

तर्क : तीनों सागरों का अपार विस्तार देखकर लेखक इतना चकित और मुग्ध हो गया कि वह अपने अस्तित्व को भूलकर "दृश्य का एक हिस्सा" बन गया। यह भ्रम नहीं, बल्कि प्रकृति की भव्यता से उपजा विस्मय है।

प्रश्न 3

"मैंने, सिर्फ मैंने उस चोटी को पहली बार सर किया हो।" इस कथन में कौन-सा भाव व्यक्त होता है? (क) करुणा (ख) विनम्रता (ग) आत्मीयता (घ) संतुष्टि

उत्तर

(घ) संतुष्टि।

तर्क : कई टीले पार करने के बाद जब लेखक को सूर्यास्त का खुला दृश्य मिला, तो वह "अपने प्रयत्न की सार्थकता से संतुष्ट" होकर बैठ गया। उसे ऐसा लगा मानो उसने संसार की सबसे ऊँची चोटी जीत ली हो।

प्रश्न 4

"शक्ति का विस्तार, विस्तार की शक्ति" वाक्य में वर्णन है— (क) बलखाती लहरों का (ख) सागर की व्यापकता का (ग) सूर्यास्त के दृश्य का (घ) पच्छिमी क्षितिज का

उत्तर

(ख) सागर की व्यापकता का।

तर्क : यह वाक्य तीनों ओर क्षितिज तक फैले "पानी-ही-पानी" को देखकर कहा गया है। सागर का अपार फैलाव ही उसकी शक्ति है और उसकी शक्ति ही इतने बड़े फैलाव में दिखती है।

प्रश्न 5

लेखक की कन्याकुमारी की यात्रा का वर्णन पढ़कर कहा जा सकता है कि— (क) यह कन्याकुमारी के मौसम को प्रमुखता से वर्णित करता है। (ख) यह यात्रा को जीवंत अनुभूतियों से जोड़ता है। (ग) यह केवल यात्रा के रोमांच पर केंद्रित है। (घ) इसमें कन्याकुमारी का काल्पनिक वर्णन मिलता है।

उत्तर

(ख) यह यात्रा को जीवंत अनुभूतियों से जोड़ता है।

तर्क : लेखक केवल स्थान नहीं बताता, बल्कि अपने विस्मय, संतोष, उदासी, डर और राहत जैसी अनुभूतियाँ भी साझा करता है, जिससे पाठक को लगता है कि वह भी साथ यात्रा कर रहा है।

रचना से संवाद : मेरी समझ मेरे विचार

प्रश्न 1

यात्रियों का समूह सूर्यास्त का दृश्य देखने के लिए सैंड हिल की ओर बढ़ता जा रहा था लेकिन लेखक सैंड हिल पर पहुँचकर कुछ देर रुकने के बाद दूसरे टीले की ओर बढ़ने लगा। उसके ऐसा करने के पीछे मूल कारण क्या था?

उत्तर

सैंड हिल से सामने का विस्तार तो दिखता था, पर अरब सागर की ओर एक और ऊँचा टीला उधर के विस्तार को ओट में लिए हुए था। लेखक सूर्यास्त को "पूरे विस्तार की पृष्ठभूमि में" देखना चाहता था। इसके अतिरिक्त सैंड हिल पर रंग-बिरंगे कपड़ों वाले लोगों की भीड़ थी, जबकि लेखक प्रकृति के साथ एकांत में यह दृश्य अनुभव करना चाहता था। इसलिए वह आगे के टीलों की ओर चल दिया।

प्रश्न 2

लेखक ने कन्याकुमारी के स्थानीय लोगों के विषय में क्या-क्या बताया?

उत्तर

लेखक के अनुसार कन्याकुमारी की आठ हजार की आबादी में चार-पाँच सौ शिक्षित नवयुवक बेरोजगार थे, जिनमें लगभग सौ ग्रेजुएट थे। उनका मुख्य काम नौकरियों के लिए अर्जियाँ देना और आपस में बहस करना था। लेखक का साथी ग्रेजुएट फोटो-एल्बम बेचता था और कहता था, "हम लोग सीपियों का गूदा खाते हैं और दार्शनिक सिद्धांतों पर बहस करते हैं।" स्थानीय मल्लाह रबड़ के तीन तनों को जोड़कर बनी नाव से लोगों को चट्टान तक ले जाते थे। स्थानीय युवतियाँ टोकरियों में शंख और मालाएँ बेचती थीं, और लोग घाट पर उगते सूर्य को अर्घ्य देते थे।

प्रश्न 3

"अपने प्रयत्न की सार्थकता से संतुष्ट होकर मैं टीले पर बैठ गया" इस पंक्ति में 'प्रयत्न की सार्थकता' से क्या अभिप्राय है?

उत्तर

लेखक थकी टाँगों के बावजूद रेत पर कदम घसीटता हुआ एक के बाद एक कई टीले पार करता गया, ताकि सूर्यास्त का खुला दृश्य देख सके। अंत में जब वह ऐसे टीले पर पहुँचा जहाँ से पूरा पच्छिमी क्षितिज दिख रहा था और सूर्य अभी डूबा नहीं था, तब उसे लगा कि उसकी मेहनत बेकार नहीं गई। 'प्रयत्न की सार्थकता' का अर्थ है— मेहनत का सफल होना, उद्देश्य का पूरा होना।

प्रश्न 4

यात्रा-वृत्तांत में आए उन दृश्यों के विषय में लिखिए जिनका अनुभव लेखक के लिए बिल्कुल नया था।

उत्तर

(1) तीन सागरों— अरब सागर, हिंद महासागर और बंगाल की खाड़ी— का संगम और तीनों ओर क्षितिज तक फैला पानी। (2) सूर्यास्त के समय पानी का रंग पहले सोने जैसा, फिर लहू जैसा, फिर बैंजनी और अंत में काला पड़ जाना। (3) तट की रंग-बिरंगी रेत— "कितने ही अनाम रंग थे वे"; लेखक ने पहले कभी ऐसी रेत नहीं देखी थी। (4) रबड़ के तीन तनों से बनी छोटी-सी मछुआ नाव में बैठकर विवेकानंद चट्टान तक जाना। (5) बेरोजगार ग्रेजुएट का सीपी तोड़कर उसका गूदा खा लेना।

प्रश्न 5

यात्रा-वृत्तांत से ऐसे दो अंश चुनकर लिखिए जिससे लेखक की मानसिक दृढ़ता और हार न मानने की प्रवृत्ति का पता चलता है।

उत्तर

  • "जल्दी-जल्दी चलते हुए मैंने एक के बाद एक कई टीले पार किए। टाँगें थक रही थीं पर मन थकने को तैयार नहीं था।"
  • "मैंने जूता उतारकर हाथ में ले लिया। एक ऊँची लहर से बचकर इस तरह दौड़ा जैसे सचमुच वह मुझे अपनी लपेट में लेने आ रही हो। … मैं चट्टान की नोकों पर पैर रखता किसी तरह उसके ऊपर पहुँच गया।"

विधा से संवाद : यात्रा का वृत्तांत

प्रश्न 1

नीचे यात्रा-वृत्तांत के प्रमुख तत्वों/विशेषताओं को कुछ प्रमुख बिंदुओं (दृश्य-वर्णन, आत्मानुभूति व भावनाएँ, सांस्कृतिक परिप्रेक्ष्य, जीवन-दर्शन, शैलीगत विशेषताएँ, रोमांच व संघर्ष) के माध्यम से दर्शाया गया है। इन्हें पढ़कर यात्रा-वृत्तांत की रचना-प्रक्रिया को समझने का प्रयास कीजिए। अपनी किसी यात्रा को इन बिंदुओं के माध्यम से समझाइए।

उत्तर

उत्तर (नमूना उत्तर) : मेरी ऋषिकेश यात्रा—

तत्व

मेरी यात्रा में

1. दृश्य-वर्णन

पहाड़ों के बीच हरे-नीले रंग की तेज बहती गंगा, लक्ष्मण झूला, घाटों पर जलते दीये और शाम को सुनहरा होता पानी।

2. आत्मानुभूति व भावनाएँ

गंगा आरती के समय मन में अद्भुत शांति और श्रद्धा; पहाड़ों के सामने अपने छोटे होने का एहसास।

3. सांस्कृतिक परिप्रेक्ष्य

त्रिवेणी घाट की गंगा आरती, आश्रम, साधु-संत, विदेशी पर्यटकों का योग सीखना, स्थानीय लोगों की सादगी।

4. जीवन-दर्शन

नदी की निरंतर धारा ने सिखाया कि जीवन में रुकना नहीं, बहते रहना चाहिए।

5. शैलीगत विशेषताएँ

चित्रात्मक भाषा, उपमाएँ (जैसे "पानी पर बिखरे दीये तारों की तरह") और आत्मकथात्मक शैली।

6. रोमांच व संघर्ष

रिवर राफ्टिंग में ऊँची लहरों से जूझना, नाव पलटने का डर और सुरक्षित किनारे पहुँचने की राहत।

विषयों से संवाद : यात्रा और खोज

प्रश्न 1

संसार में बहुत से लोगों ने लंबी-लंबी यात्राएँ की हैं और अपनी यात्रा से अर्जित ज्ञान और अनुभव से समाज को समृद्ध किया है। पुस्तकालय एवं शिक्षक की सहायता से कुछ महत्वपूर्ण यात्रा-वृत्तांत और उनके लेखकों के विषय में जानकारी एकत्रित कीजिए और लिखिए।

उत्तर

यात्रा-वृत्तांत

स्थान

रचनाकार

किन्नर देश में

हिमाचल प्रदेश में स्थित किन्नौर

राहुल सांकृत्यायन (पुस्तक में दिया गया)

ल्हासा की ओर / मेरी तिब्बत यात्रा

तिब्बत

राहुल सांकृत्यायन

आखिरी चट्टान तक

दक्षिण भारत, कन्याकुमारी

मोहन राकेश

अरे यायावर रहेगा याद?

भारत के विभिन्न प्रदेश (असम, कश्मीर आदि)

अज्ञेय

चीड़ों पर चाँदनी

यूरोप के देश

निर्मल वर्मा

स्पीति में बारिश

हिमाचल प्रदेश का स्पीति क्षेत्र

कृष्णनाथ

विषयों से संवाद : मेरे देश की धरती

प्रश्न 1

भारत के समुद्री तट पर स्थित अन्य राज्यों के नाम तथा उनकी अवस्थिति को भारत के मानचित्र पर चिह्नित कीजिए।

उत्तर

भारत के तटीय राज्य— पश्चिमी तट (अरब सागर) : गुजरात, महाराष्ट्र, गोवा, कर्नाटक, केरल। दक्षिणी छोर : तमिलनाडु (कन्याकुमारी, जहाँ तीनों सागर मिलते हैं)। पूर्वी तट (बंगाल की खाड़ी) : तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, ओडिशा, पश्चिम बंगाल। तटीय केंद्रशासित प्रदेश— दादरा और नगर हवेली तथा दमन और दीव, पुदुचेरी, लक्षद्वीप (अरब सागर) और अंडमान-निकोबार द्वीप समूह (बंगाल की खाड़ी)। (विद्यार्थी इन्हें मानचित्र पर चिह्नित करें।)

प्रश्न 2

यात्रा करना सभी को अच्छा लगता है। आपके मन में भी कुछ जगहों को देखने की इच्छा अवश्य हुई होगी। अपनी पसंद की उन जगहों की सूची दिए गए शीर्षकों (पर्यटन स्थल, राज्य जहाँ वह स्थित है, पर्वतीय/समुद्री/मैदानी/अन्य क्षेत्र, जलवायु, घूमने का अनुकूल समय) के अनुसार बनाइए।

उत्तर

उत्तर (नमूना उत्तर)

पर्यटन स्थल

राज्य जहाँ वह स्थित है

पर्वतीय/समुद्री/मैदानी/अन्य क्षेत्र

जलवायु

घूमने का अनुकूल समय

कन्याकुमारी

तमिलनाडु

समुद्री

उष्ण और आर्द्र

अक्टूबर से मार्च

मनाली

हिमाचल प्रदेश

पर्वतीय

ठंडी

मार्च से जून, दिसंबर-जनवरी (हिमपात)

जैसलमेर

राजस्थान

मरुस्थलीय

गर्म और शुष्क

नवंबर से फरवरी

वाराणसी

उत्तर प्रदेश

मैदानी (गंगा तट)

गर्मी में गर्म, सर्दी में ठंडी

अक्टूबर से मार्च

चेरापूँजी (सोहरा)

मेघालय

पर्वतीय/पठारी

अत्यधिक वर्षा वाली, सुहावनी

अक्टूबर से अप्रैल

प्रश्न 3

कन्याकुमारी की भौगोलिक स्थिति, परिवेश, महत्वपूर्ण पर्यटन स्थल एवं जन-जीवन का वर्णन करते हुए बताइए कि वहाँ की स्थिति आपके राज्य अथवा शहर/गाँव से किस प्रकार भिन्न है?

उत्तर

उत्तर (नमूना उत्तर) : कन्याकुमारी तमिलनाडु में भारत की मुख्य भूमि के दक्षिणी छोर पर है, जहाँ अरब सागर, हिंद महासागर और बंगाल की खाड़ी मिलते हैं। यहाँ की जलवायु पूरे वर्ष गर्म और नम रहती है; चारों ओर समुद्र, नारियल के झुरमुट और रंग-बिरंगी रेत है। प्रमुख पर्यटन स्थल हैं— कन्याकुमारी मंदिर, विवेकानंद स्मारक चट्टान, तिरुवल्लुवर की प्रतिमा, गांधी मंडपम और सूर्योदय-सूर्यास्त के दर्शन। लोग मछली पकड़ने, नाव चलाने, शंख-सीपी की मालाएँ बेचने और पर्यटन से जुड़े कामों से जीविका चलाते हैं; भोजन में चावल, नारियल और समुद्री मछली प्रमुख हैं। मेरा शहर (उत्तर भारत का मैदानी क्षेत्र) समुद्र से बहुत दूर है; यहाँ गर्मी और सर्दी दोनों तीखी होती हैं, लोग खेती और व्यापार करते हैं और भोजन में गेहूँ की रोटी प्रमुख है।

प्रश्न 4

इस यात्रा-वृत्तांत में कन्याकुमारी में स्थित चट्टान को आखिरी चट्टान कहा गया है। पुस्तकालय या अन्य स्रोतों तथा समाज विज्ञान के अपने शिक्षक से बातचीत करके पता लगाइए कि वर्तमान समय में भारत का अंतिम छोर (दक्षिणतम बिंदु) किसे माना जाता है। उस स्थान के विषय में लिखिए।

उत्तर

भारत की मुख्य भूमि का दक्षिणतम बिंदु कन्याकुमारी (केप कोमोरिन) है, पर पूरे भारत का दक्षिणतम बिंदु 'इंदिरा पॉइंट' है। यह अंडमान और निकोबार द्वीप समूह के ग्रेट निकोबार द्वीप के दक्षिणी सिरे पर स्थित है। पहले इसे 'पिग्मेलियन पॉइंट' कहा जाता था। यहाँ एक प्रकाश-स्तंभ (लाइटहाउस) है, जो समुद्री जहाजों को रास्ता दिखाता है। 2004 की सुनामी में इस क्षेत्र को भारी क्षति पहुँची थी और भूमि का कुछ भाग समुद्र में डूब गया था।

प्रश्न 5

इंटरनेट या अन्य किन्हीं माध्यमों से पता लगाइए कि आखिरी चट्टान में वर्णित कन्याकुमारी के विवेकानंद स्मारक चट्टान के स्वरूप में किस प्रकार का विस्तार हुआ है? (संकेत– तिरुवल्लुवर की प्रतिमा इत्यादि)

उत्तर

लेखक के समय यह केवल एक प्राकृतिक चट्टान थी, जहाँ मछुआरों की छोटी नाव से जाना पड़ता था। बाद में 1970 में यहाँ 'विवेकानंद स्मारक शिला' (विवेकानंद रॉक मेमोरियल) बनाया गया, जिसमें स्वामी विवेकानंद की प्रतिमा वाला मंडपम और ध्यान-कक्ष है। पास की दूसरी चट्टान पर तमिल संत-कवि तिरुवल्लुवर की 133 फुट ऊँची प्रतिमा स्थापित की गई (सन् 2000 में), जो उनके ग्रंथ 'तिरुक्कुरल' के 133 अध्यायों का प्रतीक है। अब पर्यटकों को ले जाने के लिए नियमित नौका (फेरी) सेवा है और हाल में दोनों चट्टानों को जोड़ने वाला काँच का पुल भी बनाया गया है।

विषयों से संवाद : हस्तशिल्प कौशल

प्रश्न 1

"दो स्थानीय नवयुवतियाँ उन्हें अपनी टोकरियों से शंख-मालाएँ दिखला रही थीं।" शिक्षक की सहायता से हस्तकला और कुटीर उद्योग के विषय में जानकारी एकत्रित कीजिए। किसी भी स्थानीय शिल्पकार से बात करके निम्नलिखित बिंदुओं पर जानकारी संगृहीत कीजिए— शिल्प का नाम, यह कार्य कब से कर रहे हैं, इसका प्रशिक्षण कहाँ से लिया, शिल्प निर्माण में घर की महिलाओं की साझेदारी, प्रयुक्त सामग्री, तकनीक, लागत और विपणन, औपचारिक संस्थागत प्रशिक्षण।

उत्तर

उत्तर (नमूना उत्तर)

बिंदु

जानकारी (टोकरी बुनने वाले शिल्पकार श्री रामलाल से बातचीत)

शिल्प का नाम

बाँस की टोकरी और डलिया बुनाई

यह कार्य कब से कर रहे हैं?

लगभग पच्चीस वर्षों से; यह उनका पुश्तैनी काम है।

प्रशिक्षण कहाँ से लिया?

बचपन में अपने पिता और दादा से घर पर ही सीखा।

घर की महिलाओं की साझेदारी

पत्नी और बेटी बाँस की पतली पट्टियाँ चीरती हैं, रंगती हैं और छोटी डलियाँ बुनती हैं।

सामग्री, तकनीक, लागत और विपणन

बाँस, प्राकृतिक रंग, धागा; हाथ से चीरना और बुनना। एक टोकरी की लागत लगभग 60 रुपये, बिक्री 150–200 रुपये में साप्ताहिक हाट और मेलों में; अब कुछ सामान ऑनलाइन भी बिकता है।

औपचारिक संस्थागत प्रशिक्षण

कोई औपचारिक प्रशिक्षण नहीं, पर हाल ही में सरकारी योजना के अंतर्गत डिजाइन और विपणन पर एक सप्ताह की कार्यशाला में भाग लिया।

प्रश्न 2

डिजिटल खरीदारी और ई-वाणिज्य कुटीर उद्योग को बढ़ावा देने में किस प्रकार उपयोगी है?

उत्तर

ई-वाणिज्य से छोटे गाँवों के शिल्पकार अपने उत्पाद सीधे देश-विदेश के ग्राहकों तक बेच सकते हैं, जिससे बिचौलियों पर निर्भरता घटती है और उन्हें उचित दाम मिलता है। ऑनलाइन दुकान खोलने में बहुत कम खर्च आता है और उत्पादों के फोटो व विवरण से उनकी पहचान बनती है। डिजिटल भुगतान से लेन-देन सुरक्षित और तेज होता है। ग्राहकों की समीक्षाओं से शिल्पकार नए डिजाइन और माँग को समझ पाते हैं। इस प्रकार लुप्त होती कलाओं को नया बाजार और नया जीवन मिलता है।

प्रश्न 3

हस्तशिल्प कला को बढ़ावा देने के लिए सरकार द्वारा किए जा रहे प्रयासों की जानकारी इकट्ठा कीजिए और अपनी कक्षा में उस पर चर्चा कीजिए।

उत्तर

सरकार के प्रमुख प्रयास— (1) पीएम विश्वकर्मा योजना : पारंपरिक कारीगरों को प्रशिक्षण, औजारों के लिए सहायता और सस्ता ऋण। (2) 'एक जिला एक उत्पाद' (ODOP) : हर जिले के विशेष शिल्प की पहचान और प्रचार। (3) भौगोलिक संकेतक (GI टैग) : बनारसी साड़ी, मधुबनी चित्रकला जैसे उत्पादों को कानूनी पहचान। (4) खादी और ग्रामोद्योग आयोग तथा हस्तशिल्प विकास आयुक्त कार्यालय द्वारा प्रशिक्षण, प्रदर्शनियाँ और विपणन सहायता। (5) सरकारी ई-मार्केटप्लेस (GeM) और ऑनलाइन मंचों पर शिल्पकारों को जोड़ना। (6) 'वोकल फॉर लोकल' जैसे अभियानों से स्थानीय उत्पादों को खरीदने की प्रेरणा।

विषयों से संवाद : मिलकर चलें

प्रश्न 1

आपकी कक्षा में कुछ विशेष आवश्यकता वाले साथी भी होंगे। ऐसे साथियों को अगर किसी यात्रा पर जाना हो तो उनके समक्ष किस प्रकार की चुनौतियाँ आ सकती हैं?

उत्तर

व्हीलचेयर उपयोग करने वाले साथियों के लिए बस-ट्रेन में चढ़ना, सीढ़ियाँ, ऊबड़-खाबड़ रास्ते और रैंप-रहित शौचालय बड़ी चुनौती हैं। दृष्टिबाधित साथियों को सूचना-पट पढ़ने, अनजान जगह पर रास्ता खोजने और भीड़ में चलने में कठिनाई होती है। श्रवणबाधित साथी स्टेशन या हवाई अड्डे की घोषणाएँ नहीं सुन पाते। कई साथियों को भीड़ और शोर से घबराहट होती है। लोगों का असंवेदनशील व्यवहार भी एक बड़ी बाधा है।

प्रश्न 2

उनकी विशिष्ट आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर कुछ ऐसे सुझाव दीजिए जो उनकी यात्रा को सहज बनाने में उपयोगी हों।

उत्तर

(1) यात्रा से पहले ऐसे स्थान और होटल चुनें जहाँ रैंप, लिफ्ट और सुगम्य शौचालय हों। (2) रेलवे में दिव्यांगजन आरक्षण और व्हीलचेयर सहायता पहले से बुक करें। (3) हर विशेष आवश्यकता वाले साथी के साथ एक 'यात्रा-मित्र' नियुक्त हो। (4) दृष्टिबाधित साथियों के लिए ऑडियो गाइड और ब्रेल नक्शे; श्रवणबाधित साथियों के लिए लिखित या संकेत भाषा में सूचना। (5) दवाइयाँ, आपात संपर्क नंबर और आराम के लिए अतिरिक्त समय रखें। (6) पूरे समूह को संवेदनशील और धैर्यवान व्यवहार के लिए पहले से तैयार करें।

प्रश्न 3

अपने द्वारा दिए गए सुझावों पर विद्यालय के विशेष शिक्षा शिक्षक के साथ चर्चा कीजिए और समझिए कि आपके द्वारा सुझाए गए उपाय कितने प्रभावी हैं तथा उनमें और क्या बदलाव किए जा सकते हैं?

उत्तर

उत्तर (नमूना उत्तर) : विशेष शिक्षा शिक्षक ने हमारे सुझावों को उपयोगी बताया, पर कुछ बदलाव सुझाए— (1) हर साथी की आवश्यकता अलग होती है, इसलिए योजना उनसे पूछकर बनानी चाहिए, अपने अनुमान से नहीं। (2) 'यात्रा-मित्र' को पहले से थोड़ा प्रशिक्षण दिया जाए, जैसे व्हीलचेयर सँभालना या दृष्टिबाधित साथी को सही ढंग से रास्ता दिखाना। (3) 'सुगम्य भारत' जैसे ऐप से पहले ही जगहों की सुगम्यता जाँच ली जाए।

प्रश्न 4

प्राप्त सुझावों के विषय में कक्षा के विशेष आवश्यकता वाले साथियों से भी चर्चा कीजिए और उनकी राय जानने का प्रयास कीजिए।

उत्तर

उत्तर (नमूना उत्तर) : हमारी कक्षा के साथी, जो व्हीलचेयर का प्रयोग करते हैं, ने कहा कि उन्हें सबसे अच्छा यह लगा कि योजना उनसे पूछकर बनाई जा रही है। उन्होंने कहा कि वे हर काम में मदद नहीं चाहते, केवल वहीं सहायता चाहते हैं जहाँ सचमुच जरूरत हो, ताकि उनकी आत्मनिर्भरता बनी रहे। एक दृष्टिबाधित साथी ने सुझाव दिया कि दर्शनीय स्थलों का वर्णन बोलकर किया जाए, ताकि वे भी यात्रा का पूरा आनंद ले सकें।

सृजन : प्रकृति की ओर

प्रश्न 1

क्या आपने कभी सूर्योदय और सूर्यास्त के समय का दृश्य देखा है? अगर नहीं तो एक दिन सुबह जल्दी उठकर उगते सूरज की लालिमा को देखिए और अस्त होते सूर्य के साथ शाम का भी आनंद लीजिए। अब इन दोनों दृश्यों की तुलना करते हुए अपने अनुभव का वर्णन कीजिए।

उत्तर

उत्तर (नमूना उत्तर) : रविवार की सुबह मैं पाँच बजे छत पर पहुँचा/पहुँची। पूर्व दिशा में आसमान धीरे-धीरे नारंगी हुआ और फिर एक लाल गोला पेड़ों के पीछे से झाँकने लगा। चिड़ियों की चहचहाहट, ठंडी हवा और ताजगी ने मन में नई ऊर्जा और उत्साह भर दिया। उसी शाम मैंने पश्चिम में सूर्यास्त देखा। सूरज सुनहरा, फिर गहरा लाल हुआ और बादल गुलाबी-बैंगनी हो गए। पक्षी अपने घोंसलों की ओर लौट रहे थे। सूर्योदय में आशा और शुरुआत का भाव था, जबकि सूर्यास्त में शांति, थकान के बाद विश्राम और हल्की-सी उदासी थी। दोनों दृश्य सुंदर थे, पर एक दिन की शुरुआत का गीत था और दूसरा उसकी विदाई का।

सृजन : अनुभव की साझेदारी

प्रश्न 1

विधा से संवाद के अंतर्गत आपने दिए गए बिंदुओं के माध्यम से यात्रा-वृत्तांत के प्रमुख तत्वों के विषय में जाना और समझा। इन तत्वों को ध्यान में रखते हुए आप भी अपने घूमे हुए किसी प्रिय स्थान के अनुभवों पर एक यात्रा-संस्मरण लिखिए।

उत्तर

उत्तर (नमूना उत्तर)

नैनी झील के किनारे एक दिन

पिछली गर्मियों में हम नैनीताल गए। काठगोदाम से घुमावदार सड़क पर चढ़ते हुए हर मोड़ पर चीड़ के पेड़ और नीचे गहरी घाटियाँ दिखती थीं; ठंडी हवा का पहला झोंका लगा तो जैसे गर्मी का बोझ उतर गया। शाम को हम नैनी झील पहुँचे। चारों ओर पहाड़ों से घिरी झील में रंग-बिरंगी नावें तैर रही थीं और किनारे की बत्तियों की परछाइयाँ पानी में काँप रही थीं। हमने नाव ली। बीच झील में पहुँचकर लगा कि पहाड़, आकाश और पानी मिलकर एक चित्र बन गए हैं और मैं उसका एक छोटा-सा हिस्सा हूँ। नैना देवी मंदिर की घंटियाँ बज रही थीं। अगली सुबह स्नो व्यू से हिमालय की बर्फीली चोटियाँ सुनहरी धूप में चमकती दिखीं। लौटते समय मन उदास था, पर आँखों में वे दृश्य हमेशा के लिए बस गए।

सृजन : चर्चा-परिचर्चा

प्रश्न 1

'यात्राएँ हमें समृद्ध करती हैं' विषय पर कक्षा में एक परिचर्चा आयोजित कीजिए।

उत्तर

उत्तर (परिचर्चा के बिंदु) : यात्राएँ हमें नए स्थान, लोग, भाषाएँ, भोजन और रीति-रिवाज दिखाकर ज्ञान बढ़ाती हैं। वे हमें आत्मनिर्भर बनाती हैं, क्योंकि अनजान जगह पर निर्णय स्वयं लेने पड़ते हैं। विविधता देखकर हमारी सोच उदार होती है और देश की एकता का अनुभव होता है। प्रकृति के बीच जाकर मन शांत होता है, जैसा मोहन राकेश को कन्याकुमारी में हुआ। राहुल सांकृत्यायन जैसे यात्रियों ने अपनी यात्राओं से पूरे समाज को ज्ञान दिया। अतः यात्राएँ केवल घूमना नहीं, जीवन की पाठशाला हैं।

प्रश्न 2

"एक लहर मेरे पैरों को भिगो गई तो सहसा मुझे खतरे का एहसास हुआ।" यात्रा के दौरान कई बार ऐसी अप्रत्याशित चुनौतियाँ सामने आ जाती हैं। ऐसी किसी स्थिति का सामना करने के लिए व्यक्ति में किन गुणों का होना आवश्यक है? अपने सहपाठियों के साथ मिलकर इस विषय पर चर्चा कीजिए।

उत्तर

ऐसी स्थिति में सबसे आवश्यक है धैर्य और घबराहट पर नियंत्रण। साथ ही, तुरंत सही निर्णय लेने की क्षमता (प्रत्युत्पन्नमति) चाहिए, जैसे लेखक ने रेत के रास्ते के बजाय तट से जाने का निर्णय लिया। साहस, शारीरिक फुर्ती, परिस्थिति का सही आकलन, सावधानी और जरूरत पड़ने पर दूसरों से सहायता माँगने की समझ भी जरूरी है। यात्रा से पहले स्थान की जानकारी लेना, अँधेरा होने से पहले लौटना और समुद्र के ज्वार-भाटे जैसे खतरों को समझना भी बहुत काम आता है।

प्रश्न 3

यदि आपके पास भी कोई ऐसा अनुभव हो तो उसे अपने सहपाठियों के साथ साझा कीजिए।

उत्तर

उत्तर (नमूना उत्तर) : एक बार परिवार के साथ पहाड़ी झरना देखने गए तो लौटते समय अचानक तेज बारिश होने लगी और पगडंडी फिसलन भरी हो गई। मेरा पैर फिसलते-फिसलते बचा। पिताजी ने सबको एक-दूसरे का हाथ पकड़कर धीरे-धीरे चलने को कहा और हम एक चट्टान की ओट में बारिश रुकने तक बैठे रहे। उस दिन मैंने सीखा कि पहाड़ों पर मौसम की जानकारी लेकर ही निकलना चाहिए और कठिन समय में घबराने के बजाय धैर्य से काम लेना चाहिए।

भाषा से संवाद : व्याकरण की बात — क्रिया-विशेषण की पहचान और रेखांकन

प्रश्न 1

नीचे दिए गए वाक्यों को ध्यानपूर्वक पढ़कर उनमें क्रिया-विशेषण पदों की पहचान कीजिए तथा दिए गए उदाहरण के अनुसार लिखिए। (उदाहरण : मैं जल्दी-जल्दी चलने लगा। — जल्दी-जल्दी — 'चलने लगा' क्रिया की विशेषता)

उत्तर

वाक्य

क्रिया-विशेषण

क्रिया, जिसकी विशेषता बताई जा रही है

(क) बल खाती लहरें रास्ते की नुकीली चट्टानों से कटती हुई आती थीं।

कटती हुई (रीतिवाचक)

'आती थीं' क्रिया की विशेषता (लहरें किस प्रकार आती थीं)

(ख) यात्रियों की कितनी ही टोलियाँ उस दिशा में जा रही थीं।

उस दिशा में (स्थानवाचक)

'जा रही थीं' क्रिया की विशेषता (कहाँ जा रही थीं)

(ग) मैं देर तक भारत के स्थल-भाग की आखिरी चट्टान को देखता रहा।

देर तक (कालवाचक)

'देखता रहा' क्रिया की विशेषता (कब तक देखता रहा)

भाषा से संवाद : आओ नए वाक्य बनाएँ

प्रश्न 1

पाठ से चुनकर कुछ वाक्य नीचे तालिका में दिए गए हैं। इन वाक्यों में रेखांकित शब्दों का अर्थ बताते हुए उनसे नए वाक्य बनाइए।

उत्तर

पाठ का वाक्य

रेखांकित शब्द का अर्थ

नया वाक्य

तीनों तरफ से क्षितिज तक पानी-पानी था।

क्षितिज — वह रेखा जहाँ धरती या समुद्र और आकाश मिलते हुए दिखाई देते हैं

सुबह-सुबह पूर्वी क्षितिज पर सूर्य की लालिमा फैल गई।

पीछे दाईं तरफ दूर-दूर हटकर नारियलों के झुरमुट नजर आ रहे थे।

झुरमुट — पेड़ों या झाड़ियों का घना समूह

बाँसों के झुरमुट में चिड़ियों का बसेरा था।

दूर तक एक रेत की लंबी ढलान थी।

ढलान — ऊँचाई से नीचे की ओर झुकी हुई भूमि

पहाड़ की ढलान पर चाय के बागान फैले हुए हैं।

पच्छिमी तट के साथ-साथ सूखी पहाड़ियों की एक शृंखला दूर तक चली गई थी।

शृंखला — कड़ी, क्रमबद्ध पंक्ति या सिलसिला

विद्यालय में व्याख्यानों की एक शृंखला आयोजित की गई।

सामने फैली रेत के कारण बहुत रूखी, बीहड़ और वीरान लग रही थी।

बीहड़ — ऊबड़-खाबड़, दुर्गम और सुनसान

चंबल के बीहड़ों में कभी डाकुओं का डर रहता था।

गतिविधियाँ

प्रश्न 1

कल्पना कीजिए कि आप अपने परिवार के साथ कहीं घूमने गए हैं। वहाँ आपकी भेंट एक ऐसे यात्री से होती है जिसे आपकी सहायता की आवश्यकता है लेकिन आप दोनों एक-दूसरे की भाषा से अपरिचित हैं। ऐसे में उस अनजान यात्री की सहायता आप कैसे करेंगे?

उत्तर

उत्तर (नमूना उत्तर) : मैं पहले मुस्कुराकर और शांत भाव से उसकी बात समझने की कोशिश करूँगा/करूँगी, ताकि वह सहज हो सके। हाथ के इशारों, चित्रों और मानचित्र की सहायता से पता करूँगा/करूँगी कि उसे कहाँ जाना है या क्या चाहिए। मोबाइल के अनुवाद ऐप से उसकी भाषा में बात करूँगा/करूँगी। यदि वह रास्ता भटक गया हो, तो उसे नजदीकी पुलिस सहायता केंद्र या पर्यटन सूचना केंद्र तक ले जाऊँगा/जाऊँगी। मैं अपने माता-पिता को भी साथ रखूँगा/रखूँगी, ताकि सहायता सुरक्षित ढंग से हो।

प्रश्न 2

पधारो म्हारे देश— अपने क्षेत्र के महत्वपूर्ण पर्यटन स्थलों की एक सूची बनाइए और उनकी विशेषताओं को ध्यान में रखकर एक विवरणिका (ब्रोशर) तैयार कीजिए।

उत्तर

उत्तर (नमूना उत्तर)

पधारो म्हारे देश — राजस्थान की स्वर्ण नगरी जैसलमेर

देखने योग्य स्थल : सोनार किला (पीले पत्थर का जीवित किला), पटवों की हवेली (बारीक नक्काशी), गड़ीसर झील, सम के रेतीले धोरे (ऊँट सफारी और सूर्यास्त)।

क्या करें : लोक-संगीत और कालबेलिया नृत्य का आनंद लें, ऊँट सफारी करें, रेगिस्तान में तारों भरी रात देखें।

क्या खाएँ : दाल-बाटी-चूरमा, केर-सांगरी, घेवर।

क्या खरीदें : कढ़ाईदार वस्त्र, चमड़े की जूतियाँ, लोक-वाद्य।

घूमने का उत्तम समय : नवंबर से फरवरी (फरवरी में 'मरु महोत्सव')।

कैसे पहुँचें : रेल और सड़क मार्ग से जुड़ा; निकटतम हवाई अड्डा जैसलमेर।

"आपका स्वागत है— पधारो म्हारे देश!"

गतिविधियाँ : भाषा संगम

"ऊँची-ऊँची लहरों से बचाते हुए मल्लाह नाव को ला रहे थे।"

प्रश्न 1

इनके अतिरिक्त यदि आप 'नाव' शब्द को किसी और भाषा में भी जानते हैं तो उस भाषा में भी लिखिए।

उत्तर

अंग्रेजी में 'नाव' को 'Boat' कहते हैं। हिंदी में इसके पर्याय 'नौका', 'तरणी', 'तरी' और 'डोंगी' भी हैं।

प्रश्न 2

उत्तर

उपर्युक्त वाक्य को अपनी मातृभाषा में भी लिखिए।

उत्तर (नमूना उत्तर) : अंग्रेजी : "The boatmen were bringing the boat, saving it from the high waves."

(विद्यार्थी अपनी मातृभाषा में लिखें।)

झरोखे से

इस अंश में निर्मल वर्मा के कुंभ मेले (प्रयाग, 1976) पर आधारित यात्रा-वृत्तांत का एक अंश दिया गया है। इसमें प्रश्न केवल यह है कि क्या यह अंश आपको रोचक लगा।

उत्तर (नमूना उत्तर) : हाँ, यह अंश बहुत रोचक लगा। लेखक ने रात के अँधेरे में सीटी की आवाज, रेत पर चलते हजारों पैरों की 'रेंगती हुई आवाजों का रेला' और किले पर ऊँघते पूर्णिमा के चाँद का ऐसा चित्र खींचा है कि कुंभ का रहस्यमय वातावरण आँखों के सामने आ जाता है। चाँद को "एक गोल, सफेद, मुरझाई बिंदी" कहना बहुत सुंदर उपमा है। इसे पढ़कर पूरा वृत्तांत पढ़ने की इच्छा जागती है।

खोजबीन

प्रश्न 1

इस यात्रा-वृत्तांत में उल्लिखित 'आखिरी चट्टान' को 'विवेकानंद चट्टान' के नाम से भी जाना जाता है। विवेकानंद के जीवन, लेखन और सामाजिक कार्यों के विषय में पुस्तकालय और इंटरनेट से खोजकर पढ़िए और कक्षा में चर्चा कीजिए।

उत्तर

उत्तर (चर्चा के बिंदु) : स्वामी विवेकानंद (मूल नाम नरेंद्रनाथ दत्त) का जन्म 12 जनवरी 1863 को कोलकाता में हुआ। वे रामकृष्ण परमहंस के शिष्य थे। 1892 में उन्होंने कन्याकुमारी की इसी चट्टान पर ध्यान लगाया था। 1893 में शिकागो की विश्व धर्म महासभा में "अमेरिका के बहनो और भाइयो" संबोधन से उन्होंने भारतीय संस्कृति और वेदांत का संदेश विश्व तक पहुँचाया। 1897 में उन्होंने 'रामकृष्ण मिशन' की स्थापना की, जो शिक्षा, स्वास्थ्य और सेवा के कार्य करता है। उनका प्रसिद्ध संदेश है— "उठो, जागो और लक्ष्य प्राप्ति तक रुको मत।" 1902 में 39 वर्ष की आयु में उनका देहांत हुआ। उनकी जयंती 'राष्ट्रीय युवा दिवस' के रूप में मनाई जाती है।

अतिरिक्त महत्वपूर्ण प्रश्न

बहुविकल्पीय प्रश्न

प्रश्न 1

कन्याकुमारी में कौन-से तीन सागर मिलते हैं?

उत्तर

(क) अरब सागर, लाल सागर, हिंद महासागर (ख) अरब सागर, हिंद महासागर, बंगाल की खाड़ी (ग) बंगाल की खाड़ी, प्रशांत महासागर, अरब सागर (घ) हिंद महासागर, भूमध्य सागर, अरब सागर

उत्तर : (ख) अरब सागर, हिंद महासागर, बंगाल की खाड़ी

प्रश्न 2

लेखक विवेकानंद चट्टान तक किस नाव से गया?

उत्तर

(क) मोटरबोट (ख) स्टीमर (ग) रबड़ पेड़ के तीन तनों से बनी मछुआ नाव (घ) पाल वाली बड़ी नाव

उत्तर : (ग) रबड़ पेड़ के तीन तनों से बनी मछुआ नाव

प्रश्न 3

सूर्यास्त के बाद पानी का रंग किस क्रम में बदला?

उत्तर

(क) सोना
⇒ लहू
⇒ बैंजनी
⇒ काला (ख) लहू
⇒ सोना
⇒ काला (ग) नीला
⇒ हरा
⇒ काला (घ) सोना
⇒ नीला
⇒ सफेद

उत्तर : (क) सोना → लहू → बैंजनी → काला

प्रश्न 4

'आषाढ़ का एक दिन' किस विधा की रचना है?

उत्तर

(क) उपन्यास (ख) नाटक (ग) कहानी (घ) यात्रा-वृत्तांत

उत्तर : (ख) नाटक

प्रश्न 5

ग्रेजुएट नवयुवक के अनुसार कन्याकुमारी में लगभग कितने ग्रेजुएट बेकार थे?

उत्तर

(क) पचास (ख) सौ (ग) चार सौ (घ) आठ हजार

उत्तर : (ख) सौ

लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1

लेखक को अपनी चट्टान पर खड़े-खड़े अचानक सिहरन क्यों हुई?

उत्तर

लेखक दृश्य में इतना खो गया था कि उसे समय का ध्यान नहीं रहा। जब होश आया, तो उसने देखा कि जिस चट्टान पर वह खड़ा था, वह बढ़ते पानी से काफी घिर गई है। खतरे का एहसास होते ही उसका शरीर सिहर उठा और वह कूदता हुआ किनारे पहुँचा।

प्रश्न 2

रेत पर अपने पैरों के निशान देखकर लेखक के मन में कैसा भाव आया?

उत्तर

सूर्य की सुनहली किरणों से रेत ऐसे चमक रही थी मानो अभी-अभी बनाई गई हो। उस पर अपने पैरों के निशान देखकर लेखक को लगा कि रेत पहली बार उन निशानों से टूटी है। इससे उसके मन में सिहरन भी हुई और हल्की उदासी भी घिर आई।

प्रश्न 3

"कडल-काक… इन दोनों से बे-लाग" का क्या आशय है?

उत्तर

कडल-काक (समुद्री पक्षी) आस-पास तैर रहे थे। उन्हें न तो वहाँ की बेकारी की समस्या से कोई मतलब था और न सूर्योदय की सुंदरता से। लेखक संकेत करता है कि प्रकृति मनुष्य की समस्याओं और भावनाओं से निरपेक्ष रहती है।

प्रश्न 4

चट्टान पर चढ़ने के बाद लेखक को ऐसा क्यों लगा कि उसके साथ मजाक किया गया हो?

उत्तर

लेखक डर के मारे बड़ी कठिनाई से नुकीली चट्टान पर चढ़ा था। ऊपर पहुँचकर उसने देखा कि चट्टान के उस पार लगभग सौ फुट चौड़ा खुला तट था, जहाँ लोग आराम से टहल रहे थे और सड़क तक रास्ता भी बना था। उसका सारा डर व्यर्थ निकला, इसलिए उसे यह स्थिति मजाक जैसी लगी।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1

'आखिरी चट्टान तक' में वर्णित सूर्यास्त के दृश्य का वर्णन अपने शब्दों में कीजिए।

उत्तर

लेखक कई टीले पार करके ऐसे टीले पर पहुँचा जहाँ से पच्छिमी क्षितिज का खुला विस्तार दिखता था। सूर्य पानी की सतह के पास था और उसकी सुनहली किरणों ने पीली रेत को नया रंग दे दिया था। जैसे ही सूर्य का गोला पानी को छुआ, पानी पर दूर तक "सोना-ही-सोना ढुल आया"। रंग इतनी जल्दी बदल रहे थे कि उन्हें नाम देना असंभव था। सूर्य मानो बेबसी में पानी के लावे में डूबता गया; जहाँ सोना बह रहा था वहाँ लहू बहता लगा, फिर वह बैंजनी और अंत में काला पड़ गया। पूरे दृश्यपट पर स्याही फैल गई और नारियल के झुरमुट सिर धुनते-से लगने लगे।

प्रश्न 2

यह यात्रा-वृत्तांत केवल प्रकृति-चित्रण नहीं, बल्कि जीवन के यथार्थ का भी चित्रण है। स्पष्ट कीजिए।

उत्तर

इस वृत्तांत में एक ओर तीन सागरों का संगम, सूर्योदय-सूर्यास्त और रंगीन रेत का सुंदर चित्रण है, तो दूसरी ओर कन्याकुमारी के जन-जीवन का कड़वा यथार्थ भी है। वहाँ की आठ हजार की आबादी में सैकड़ों शिक्षित युवक बेरोजगार हैं; एक ग्रेजुएट फोटो-एल्बम बेचता है और सीपियों का गूदा खाकर दार्शनिक बहस करता है। गरीब मल्लाह रबड़ के तनों से बनी नाव चलाते हैं और युवतियाँ शंख-मालाएँ बेचती हैं। सरकारी मेहमान कॉफी पीते हुए दूरबीन से सूर्य देखते हैं। यह विरोधाभास दिखाता है कि प्राकृतिक सौंदर्य के बीच भी आम आदमी का जीवन संघर्षपूर्ण है।

Frequently Asked Questions

What is Class 9 Hindi Ganga Chapter 5 (आखिरी चट्टान तक) about?

मोहन राकेश का 'आखिरी चट्टान तक' कन्याकुमारी की यात्रा पर आधारित एक रोचक यात्रा-वृत्तांत है। लेखक बंगाल की खाड़ी, हिंद महासागर और अरब सागर के संगम-स्थल के प्राकृतिक दृश्यों का सजीव वर्णन करते हैं। इसमें वहाँ की भौगोलिक और सांस्कृतिक सुंदरता के साथ-साथ समुद्र तट पर लेखक के मन में उठने वाले विस्मय, रोमांच और शांति के भाव भी व्यक्त हुए हैं।

What do these NCERT solutions for Class 9 Hindi Ganga Chapter 5 (आखिरी चट्टान तक) cover?

All 47 questions from the latest NCERT textbook for this chapter are answered step by step, organised as अतिरिक्त महत्वपूर्ण प्रश्न.

Are these solutions based on the new NCERT syllabus?

Yes. The answers follow the current NCERT textbook for Class 9 Hindi Ganga and the latest CBSE syllabus, so the question numbers and wording match the book you use in class.

How should I use these solutions to prepare for exams?

Attempt each question on your own first, then compare your working with the answer here. Note the steps or keywords you missed, and revise the chapter notes before taking a chapter-wise MCQ test to check your understanding.

Are the NCERT solutions for Class 9 Hindi Ganga Chapter 5 (आखिरी चट्टान तक) free?

Yes. All Circle of Learning NCERT solutions and chapter notes are free to read online, with no sign-up needed.