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Class 9 Hindi Ganga Chapter 11

NCERT Solutions for Class 9 Hindi Ganga Chapter 11: झाँसी की रानी

सुभद्रा कुमारी चौहान की प्रसिद्ध कविता 'झाँसी की रानी' 1857 के स्वतंत्रता संग्राम की पृष्ठभूमि पर लिखी गई है। इसमें रानी लक्ष्मीबाई के बचपन, विवाह, राजा के निधन के बाद अंग्रेज़ों द्वारा झाँसी हड़पने के प्रयास और रानी के वीरतापूर्ण संघर्ष का ओजपूर्ण वर्णन है। 'खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी' की पंक्ति के साथ यह कविता रानी के साहस और बलिदान को अमर बनाती है।

Circle of Learning • नई NCERT पाठ्यपुस्तक "गंगा" (2026-27) • पाठ के सभी प्रश्नों के उत्तर

कवयित्री परिचय: सुभद्रा कुमारी चौहान का जन्म 1904 में उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में हुआ था। वे प्रसिद्ध रचनाकार होने के साथ-साथ स्वतंत्रता सेनानी भी थीं और दो बार जेल गईं। मुकुल, त्रिधारा (कविता संग्रह), बिखरे मोती, उन्मादिनी, सीधे-सादे चित्र (कहानी संग्रह), कदंब का पेड़, सभा का खेल (बाल साहित्य) उनकी प्रमुख रचनाएँ हैं। ‘मुकुल’ और ‘बिखरे मोती’ के लिए उन्हें दो बार ‘सेकसरिया पुरस्कार’ मिला। सन् 1948 में उनकी आकस्मिक मृत्यु हो गई। भारतीय डाक विभाग ने उनके सम्मान में डाक टिकट भी जारी किया।

काव्यांश की व्याख्या / भावार्थ

(प्रत्येक पद्यांश के अंत में आने वाली टेक “बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी। खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी॥” का भाव है— बुंदेलखंड के हरबोले लोकगायकों से हमने यह कथा सुनी है कि झाँसी की रानी पुरुषों जैसी वीरता से खूब लड़ी।)

पद्यांश 1 – “सिंहासन हिल उठे … झाँसी वाली रानी थी॥”

सरल भावार्थ: सन् 1857 में राजसिंहासन हिल उठे और राजवंशों ने अंग्रेज़ों के विरुद्ध भौंहें तान लीं। गुलामी से थके, बूढ़े हो चुके भारत में फिर से नई जवानी और जोश आ गया। सबने खोई हुई आज़ादी का मूल्य समझ लिया और अंग्रेज़ों को देश से बाहर निकालने का दृढ़ निश्चय किया। वर्षों से म्यान में पड़ी पुरानी तलवार फिर चमक उठी।

पद्यांश 2 – “कानपूर के नाना की मुँहबोली बहन ‘छबीली’ थी …”

सरल भावार्थ: लक्ष्मीबाई कानपुर के नाना साहब की मुँहबोली बहन थीं और उन्हें प्यार से ‘छबीली’ कहा जाता था। वे अपने पिता की इकलौती संतान थीं। वे नाना के साथ पढ़ीं और खेलीं। बरछी, ढाल, तलवार और कटार ही उनकी सहेलियाँ थीं, और वीर शिवाजी की गाथाएँ उन्हें ज़बानी याद थीं।

पद्यांश 3 – “लक्ष्मी थी या दुर्गा थी वह स्वयं वीरता की अवतार …”

सरल भावार्थ: वे सौंदर्य में लक्ष्मी और शक्ति में दुर्गा जैसी थीं, मानो स्वयं वीरता का अवतार हों। उनकी तलवारबाज़ी देखकर मराठे पुलकित हो उठते थे। नकली युद्ध करना, व्यूह-रचना करना, शिकार खेलना, सेना को घेरना और किले तोड़ना उनके प्रिय खेल थे। महाराष्ट्र की कुलदेवी भवानी उनकी भी आराध्य थीं।

पद्यांश 4 – “हुई वीरता की वैभव के साथ सगाई झाँसी में …”

सरल भावार्थ: झाँसी के राजा से उनका विवाह हुआ, मानो वीरता की वैभव के साथ सगाई हुई हो। वे रानी बनकर झाँसी आईं और राजमहल में बधाइयाँ बजने लगीं। वे बुंदेले वीरों की यश-गाथा जैसी लगती थीं। यह जोड़ी ऐसी थी जैसे चित्रांगदा को अर्जुन और भवानी को शिव मिले हों।

पद्यांश 5 – “उदित हुआ सौभाग्य, मुदित महलों में उजियाली छाई …”

सरल भावार्थ: सौभाग्य का उदय हुआ और महलों में खुशी का उजाला फैल गया, पर समय ने चुपचाप दुर्भाग्य की काली घटा ला दी। तीर चलाने वाले हाथों को चूड़ियाँ कब अच्छी लगती थीं! रानी विधवा हो गईं; विधाता को भी दया न आई। राजा निःसंतान ही मर गए और रानी शोक में डूब गईं।

पद्यांश 6 – “बुझा दीप झाँसी का तब डलहौजी मन में हरषाया …”

सरल भावार्थ: झाँसी का दीपक (राजा) बुझ गया तो गवर्नर-जनरल डलहौज़ी मन में प्रसन्न हुआ। उसे राज्य हड़पने का अच्छा अवसर मिल गया। उसने तुरंत सेना भेजकर किले पर अपना झंडा फहरा दिया और ब्रिटिश राज ‘लावारिस’ झाँसी का ‘वारिस’ बन बैठा। आँसू भरी आँखों से रानी ने देखा कि झाँसी पराई हो गई है।

पद्यांश 7 – “अनुनय-विनय नहीं सुनता है, विकट फ़िरंगी की माया …”

सरल भावार्थ: अंग्रेज़ों की चाल बड़ी कुटिल थी; वे किसी की विनती नहीं सुनते थे। जो व्यापारी बनकर दया माँगते हुए भारत आए थे, उन्होंने डलहौज़ी के समय पैर पसार दिए और स्थिति पूरी तरह पलट गई। उन्होंने राजाओं और नवाबों को भी ठुकरा दिया। रानी दासी बन गई और व्यापारी कंपनी, जो कभी दासी थी, अब महारानी बन बैठी।

पद्यांश 8 – “छिनी राजधानी देहली की, लिया लखनऊ बातों-बात …”

सरल भावार्थ: अंग्रेज़ों ने दिल्ली की सत्ता छीन ली और लखनऊ को बातों-बातों में हड़प लिया। पेशवा बिठूर में कैद थे और नागपुर के साथ भी धोखा हुआ। उदयपुर, तंजौर, सतारा, कर्नाटिक की तो कोई हैसियत ही नहीं बची; सिंध, पंजाब और बर्मा पर भी हाल ही में वज्रपात हुआ था। बंगाल, मद्रास आदि की भी यही कहानी थी।

पद्यांश 9 – “रानी रोईं रनिवासों में बेगम ग़म से थीं बेज़ार …”

सरल भावार्थ: रानियाँ रनिवासों में रो रही थीं और बेगमें दुख से व्याकुल थीं। उनके गहने-कपड़े कलकत्ते के बाज़ारों में बिक रहे थे और अंग्रेज़ी अख़बार खुलेआम उनकी नीलामी के विज्ञापन छापते थे— ‘नागपुर के जेवर ले लो’, ‘लखनऊ के नौलखा हार लो’। इस प्रकार परदे में रहने वाली रानियों की इज़्ज़त विदेशियों के हाथों बिक रही थी।

पद्यांश 10 – “कुटियों में थी विषम वेदना, महलों में आहत अपमान …”

सरल भावार्थ: झोंपड़ियों में रहने वाले गरीब भयंकर पीड़ा सह रहे थे और महलों में राजपरिवार अपमान से आहत थे। वीर सैनिकों के मन में अपने पूर्वजों का स्वाभिमान जाग रहा था। नाना धुंधूपंत पेशवा युद्ध का सारा सामान जुटा रहे थे और ‘छबीली’ रानी ने रणचंडी का आह्वान कर दिया। स्वतंत्रता का यज्ञ शुरू हुआ, जिसका लक्ष्य सोई हुई चेतना की ज्योति जगाना था।

पद्यांश 11 – “महलों ने दी आग, झोंपड़ी ने ज्वाला सुलगाई थी …”

सरल भावार्थ: महलों (राजा-रानियों) ने आग दी और झोंपड़ियों (आम जनता) ने उसे ज्वाला बना दिया। स्वतंत्रता की यह चिनगारी लोगों के अंतर्मन से निकली थी। झाँसी, दिल्ली और लखनऊ में विद्रोह की लपटें फैल गईं; मेरठ, कानपुर और पटना में भारी हलचल हुई और जबलपुर-कोल्हापुर में भी विद्रोह भड़का।

पद्यांश 12 – “इस स्वतंत्रता-महायज्ञ में कई वीरवर आए काम …”

सरल भावार्थ: इस स्वतंत्रता रूपी महायज्ञ में अनेक वीरों ने बलिदान दिया— नाना धुंधूपंत, तात्या टोपे, चतुर अज़ीमुल्ला, मौलवी अहमद शाह और वीर ठाकुर कुँवर सिंह। इनके नाम भारत के इतिहास-आकाश में अमर रहेंगे, भले ही (अंग्रेज़ी शासन में) आज उनकी कुर्बानी को अपराध कहा जाता है।

पद्यांश 13 – “इनकी गाथा छोड़ चलें हम झाँसी के मैदानों में …”

सरल भावार्थ: अब कवयित्री झाँसी के युद्ध-मैदान की ओर ले चलती हैं, जहाँ लक्ष्मीबाई पुरुष वेश में वीरों के बीच डटी थीं। लेफ़्टिनेंट वॉकर सैनिकों के साथ आगे बढ़ा। रानी ने तलवार खींच ली और दोनों में असमान युद्ध हुआ। वॉकर घायल होकर भाग गया और रानी की वीरता पर हैरान रह गया।

पद्यांश 14 – “रानी बढ़ी कालपी आई, कर सौ मील निरंतर पार …”

सरल भावार्थ: रानी लगातार सौ मील की यात्रा करके कालपी पहुँचीं। उनका घोड़ा थककर गिर पड़ा और वहीं मर गया। यमुना के तट पर अंग्रेज़ों को रानी से फिर हार खानी पड़ी। विजयी रानी ने आगे बढ़कर ग्वालियर पर अधिकार कर लिया और अंग्रेज़ों के मित्र सिंधिया को राजधानी छोड़नी पड़ी।

पद्यांश 15 – “विजय मिली, पर अंग्रेज़ों की फिर सेना घिर आई थी …”

सरल भावार्थ: विजय तो मिली, पर अंग्रेज़ों की सेना फिर घिर आई। इस बार सामने जनरल स्मिथ था, जिसे मुँह की खानी पड़ी। रानी की सखियाँ काना और मंदरा भी उनके साथ थीं और उन्होंने युद्ध में भारी मार-काट मचाई। तभी पीछे से ह्यू रोज़ आ गया और रानी चारों ओर से घिर गईं।

पद्यांश 16 – “तो भी रानी मार-काटकर चलती बनी सैन्य के पार …”

सरल भावार्थ: फिर भी रानी शत्रुओं को काटती हुई सेना के पार निकल गईं, पर सामने एक नाला आ गया, जो बड़ा संकट था। उनका घोड़ा नया था, वह नाले के आगे अड़ गया। इतने में शत्रु के घुड़सवार आ पहुँचे। रानी अकेली थीं और शत्रु अनेक; उन पर वार पर वार होने लगे। घायल होकर वह सिंहनी गिर पड़ीं और उन्होंने वीरगति पाई।

पद्यांश 17 – “रानी गई सिधार, चिता अब उसकी दिव्य सवारी थी …”

सरल भावार्थ: रानी स्वर्ग सिधार गईं; अब चिता ही उनकी दिव्य सवारी थी। उनका तेज परम तेज में मिल गया, वे सचमुच उस तेज की अधिकारी थीं। उनकी आयु केवल तेईस वर्ष थी; वे साधारण मनुष्य नहीं, अवतारी थीं, जो स्वतंत्रता की देवी बनकर हमें जगाने आई थीं। वे हमें मार्ग दिखा गईं और सीख दे गईं।

पद्यांश 18 – “जाओ रानी याद रखेंगे हम कृतज्ञ भारतवासी …”

सरल भावार्थ: कवयित्री कहती हैं— हे रानी! हम कृतज्ञ भारतवासी तुम्हें सदा याद रखेंगे। तुम्हारा बलिदान अमर स्वतंत्रता की भावना जगाता रहेगा। चाहे इतिहास चुप हो जाए, सच्चाई को फाँसी दे दी जाए, या घमंड में चूर विजेता गोलों से झाँसी को ही मिटा दे, फिर भी तुम्हारा स्मारक तुम स्वयं हो; तुम स्वयं एक अमिट निशानी हो।

रचना से संवाद – मेरे उत्तर मेरे तर्क

प्रश्न 1

‘झाँसी की रानी’ कविता की पंक्ति “बूढ़े भारत में भी आई फिर से नई जवानी थी” में ‘नई जवानी’ शब्द किस भाव को व्यक्त करता है?

उत्तर

(क) देश का स्वाभिमान (ख) विद्रोह की चिंगारी (ग) स्वाधीनता का भय (घ) भारत की युवावस्था

उत्तर: (ख) विद्रोह की चिंगारी।

तर्क: लंबी गुलामी से थका ‘बूढ़ा’ भारत 1857 में फिर जोश से भर उठा। ‘नई जवानी’ उसी नए उत्साह और विद्रोह की भावना का प्रतीक है, जिसके बारे में अगली पंक्तियों में कहा गया है— “दूर फ़िरंगी को करने की सबने मन में ठानी थी।”

प्रश्न 2

लक्ष्मीबाई को ‘छबीली’ कहना उनके व्यक्तित्व की किस विशेषता को दर्शाता है?

उत्तर

(क) विनम्रता (ख) शोभायुक्त (ग) सहिष्णुता (घ) कठोरता

उत्तर: (ख) शोभायुक्त।

तर्क: ‘छबीली’ का अर्थ है छवि वाली, सुंदर, तेजस्वी और सजीली। यह नाम उनके आकर्षक और शोभायुक्त व्यक्तित्व को दर्शाता है।

प्रश्न 3

उत्तर

“बुझा दीप झाँसी का” पंक्ति का भावार्थ है

(क) अंग्रेज़ों का झाँसी पर अधिकार हो जाना (ख) झाँसी राज्य की उम्मीदों का नष्ट हो जाना (ग) राजा की आकस्मिक मृत्यु होना (घ) रानी के जीवन में उदासी होना

उत्तर: (ग) राजा की आकस्मिक मृत्यु होना।

तर्क: इससे ठीक पहले के पद्यांश में कहा गया है— “निःसंतान मरे राजाजी।” झाँसी का ‘दीप’ उसके राजा थे, जिनकी अचानक मृत्यु से राज्य में अँधेरा छा गया और इसी कारण डलहौज़ी को राज्य हड़पने का अवसर मिला।

प्रश्न 4

“इस स्वतंत्रता-महायज्ञ में कई वीरवर आए काम” पंक्ति में स्वतंत्रता आंदोलन की किस ऐतिहासिक घटना की ओर संकेत किया गया है?

उत्तर

(क) असहयोग आंदोलन (ख) भारत छोड़ो आंदोलन (ग) 1857 की क्रांति (घ) सविनय अवज्ञा आंदोलन

उत्तर: (ग) 1857 की क्रांति।

तर्क: कविता में “चमक उठी सन् सत्तावन में वह तलवार पुरानी थी” कहा गया है और नाना धुंधूपंत, तात्या टोपे, कुँवर सिंह जैसे 1857 के वीरों के नाम आए हैं।

प्रश्न 5

“व्यापारी बन दया चाहता था जब यह भारत आया” पंक्ति में ‘यह’ शब्द किसके लिए कहा गया है?

उत्तर

(क) नवाबों के लिए (ख) जनरल डलहौजी के लिए (ग) लेफ़्टिनेंट वॉकर के लिए (घ) ब्रिटिश राज के लिए

उत्तर: (घ) ब्रिटिश राज के लिए।

तर्क: अंग्रेज़ ईस्ट इंडिया कंपनी के रूप में व्यापारी बनकर भारत आए थे और व्यापार की अनुमति (दया) माँगते थे। बाद में यही ब्रिटिश राज शासक बन बैठा।

रचना से संवाद – मेरी समझ मेरे विचार

प्रश्न 1

‘झाँसी की रानी’ कविता के आधार पर बताइए कि लक्ष्मीबाई के प्रिय खेल कौन-कौन से थे? उनका बचपन दूसरों से किस प्रकार भिन्न था?

उत्तर

लक्ष्मीबाई के प्रिय खेल थे— नकली युद्ध करना, व्यूह-रचना करना, शिकार खेलना, सेना को घेरना और दुर्ग तोड़ना। उनका बचपन दूसरी लड़कियों से भिन्न था, क्योंकि उस समय लड़कियाँ प्रायः गुड़ियों और घरेलू खेलों तक सीमित रहती थीं, जबकि बरछी, ढाल, कृपाण और कटारी उनकी सहेलियाँ थीं। वे नाना साहब के साथ पढ़ती-खेलती थीं, घुड़सवारी और शस्त्र-विद्या सीखती थीं और उन्हें वीर शिवाजी की गाथाएँ ज़बानी याद थीं।

प्रश्न 2

“किंतु कालगति चुपके-चुपके काली घटा घेर लाई” पंक्ति के माध्यम से किस घटना की ओर संकेत किया गया है?

उत्तर

इस पंक्ति में झाँसी के राजा गंगाधर राव की असमय मृत्यु की ओर संकेत है। विवाह के बाद महलों में खुशियाँ छाई थीं, पर समय ने चुपचाप दुर्भाग्य की काली घटा ला दी। राजा निःसंतान मर गए, रानी विधवा हो गईं और इसी घटना के बाद अंग्रेज़ों ने झाँसी हड़प ली।

प्रश्न 3

“महलों ने दी आग, झोंपड़ी ने ज्वाला सुलगाई थी” पंक्ति समाज के विभिन्न वर्गों की एकता को दर्शाती है, इस एकता का स्वतंत्रता संग्राम के संदर्भ में क्या महत्व है?

उत्तर

इस पंक्ति से पता चलता है कि 1857 का संग्राम केवल राजाओं का युद्ध नहीं था; राजा-रानी, नवाब, सैनिक, किसान और आम जनता सब एक साथ अंग्रेज़ों के विरुद्ध खड़े हुए। इस एकता का बहुत महत्त्व है, क्योंकि अंग्रेज़ ‘फूट डालो और राज करो’ की नीति से ही शासन करते थे। जब अमीर-गरीब, हिंदू-मुसलमान मिलकर लड़े, तो विद्रोह दिल्ली से लखनऊ, मेरठ, कानपुर, पटना तक फैल गया। इसी एकता ने आगे के स्वतंत्रता आंदोलन की नींव रखी और सिखाया कि सबके साझा प्रयास से ही आज़ादी मिल सकती है।

प्रश्न 4

“सरे-आम नीलाम छापते थे अंग्रेज़ों के अखबार” पंक्ति में ‘नीलाम छापते’ शब्द किसकी ओर संकेत करता है? यह भी बताइए कि किसकी नीलामी की जाती थी और क्यों?

उत्तर

‘नीलाम छापते’ से संकेत है कि अंग्रेज़ी अख़बार खुलेआम नीलामी के विज्ञापन छापते थे। जिन देशी रियासतों को अंग्रेज़ों ने हड़प लिया था, जैसे नागपुर और लखनऊ, उनकी रानियों और बेगमों के गहने और कपड़े कलकत्ते के बाज़ारों में नीलाम किए जाते थे— “नागपूर के जेवर ले लो, लखनऊ के लो नौलख हार।” ऐसा इसलिए किया जाता था ताकि अंग्रेज़ उनकी संपत्ति से धन कमा सकें और पराजित राजपरिवारों को अपमानित कर अपनी शक्ति दिखा सकें। यह भारतीयों के सम्मान पर गहरी चोट थी।

प्रश्न 5

“अभी उम्र कुल तेइस की थी, मनुज नहीं अवतारी थी” पंक्ति में ‘अवतारी’ शब्द व्यक्ति के विशेष गुणों की ओर इंगित कर रहा है। कविता के आधार पर बताइए कि लक्ष्मीबाई के किन गुणों के कारण उनको ‘अवतारी’ कहा गया है?

उत्तर

लक्ष्मीबाई ने केवल तेईस वर्ष की आयु में ऐसे काम किए जो साधारण मनुष्य के लिए असंभव लगते हैं। वे “स्वयं वीरता की अवतार” थीं; युद्ध-कला, व्यूह-रचना और तलवारबाज़ी में निपुण थीं। उन्होंने अपार साहस से वॉकर को घायल कर भगाया, सौ मील लगातार यात्रा की, अंग्रेज़ों को हराकर ग्वालियर जीता और अंत तक हार नहीं मानी। उनमें अद्भुत नेतृत्व, आत्मसम्मान, देशप्रेम और त्याग था। वे स्वतंत्रता का संदेश देने और देशवासियों को जगाने आई थीं, इसलिए उन्हें ‘अवतारी’ कहा गया है।

विधा से संवाद – कविता में कहानी

प्रश्न 1

पाठ की संरचना को समझते हुए इसमें वर्णित प्रमुख घटनाओं को समय-रेखा (टाइमलाइन) पर दर्शाएँ। (संकेत– लक्ष्मीबाई का बचपन, विवाह, अन्य घटनाएँ आदि।)

उत्तर

क्रम

घटना (कविता के अनुसार)

1

बचपन— पिता की इकलौती संतान; नाना साहब के साथ पढ़ना-खेलना; शस्त्र-विद्या, नकली युद्ध, शिकार।

2

झाँसी के राजा से विवाह; रानी बनकर झाँसी आना; महलों में खुशियाँ।

3

राजा की निःसंतान मृत्यु; रानी का विधवा होना।

4

डलहौज़ी द्वारा झाँसी हड़पना; किले पर अंग्रेज़ी झंडा।

5

दिल्ली, लखनऊ, नागपुर आदि अनेक रियासतों पर अंग्रेज़ों का कब्ज़ा; रानियों-बेगमों के गहनों की नीलामी।

6

सन् 1857— स्वतंत्रता का महायज्ञ आरंभ; झाँसी, दिल्ली, लखनऊ, मेरठ, कानपुर, पटना आदि में विद्रोह।

7

झाँसी के मैदान में लेफ़्टिनेंट वॉकर से युद्ध; वॉकर घायल होकर भागा।

8

सौ मील चलकर कालपी पहुँचना; घोड़े की मृत्यु; यमुना-तट पर अंग्रेज़ों की हार।

9

ग्वालियर पर अधिकार; सिंधिया का राजधानी छोड़ना।

10

जनरल स्मिथ की हार; काना-मंदरा का पराक्रम; ह्यू रोज़ द्वारा घेराबंदी।

11

नाले के पास नया घोड़ा अड़ना; शत्रुओं से घिरकर तेईस वर्ष की आयु में वीरगति।

12

कवयित्री द्वारा रानी को श्रद्धांजलि— “तू खुद अमिट निशानी थी।”

विषयों से संवाद – साझा साथ/साझा संघर्ष

प्रश्न 1

“लावारिस का वारिस बनकर ब्रिटिश राज्य झाँसी आया”, ब्रिटिश राज किस नीति के कारण ‘लावारिस का वारिस’ बन जाता था? अपने इतिहास के शिक्षक से पता लगाकर उस नीति के विषय में लिखिए।

उत्तर

ब्रिटिश राज ‘हड़प नीति’ (व्यपगत का सिद्धांत / Doctrine of Lapse) के कारण ‘लावारिस का वारिस’ बन जाता था। यह नीति गवर्नर-जनरल लॉर्ड डलहौज़ी (1848–1856) ने लागू की। इसके अनुसार यदि किसी देशी रियासत का राजा बिना अपने स्वाभाविक पुत्र के मर जाता, तो उसके द्वारा गोद लिए गए पुत्र को उत्तराधिकारी नहीं माना जाता था और राज्य अंग्रेज़ी शासन में मिला लिया जाता था। इसी नीति से सतारा, जैतपुर, संबलपुर, उदयपुर (छत्तीसगढ़), झाँसी और नागपुर जैसी रियासतें हड़पी गईं। रानी लक्ष्मीबाई के दत्तक पुत्र दामोदर राव को भी उत्तराधिकारी नहीं माना गया। इस अन्यायपूर्ण नीति से राजाओं में भारी असंतोष फैला, जो 1857 के विद्रोह का एक प्रमुख कारण बना।

प्रश्न 2

इस कविता में लक्ष्मीबाई की जीवन-गाथा के साथ-साथ अनेक वीरों के त्याग और बलिदान का भी उल्लेख है। उनकी सूची बनाइए तथा शिक्षक की सहायता से 1857 की क्रांति में उनके योगदान के विषय में लिखिए।

उत्तर

वीर

1857 की क्रांति में योगदान

नाना धुंधूपंत (नाना साहब)

अंतिम पेशवा बाजीराव द्वितीय के दत्तक पुत्र; पेंशन बंद होने पर कानपुर में विद्रोह का नेतृत्व किया और युद्ध का सामान जुटाया।

तात्या टोपे

नाना साहब के सेनापति; कुशल छापामार योद्धा; कानपुर, कालपी और ग्वालियर में रानी लक्ष्मीबाई के साथ अंग्रेज़ों से लड़े।

अज़ीमुल्ला खाँ

नाना साहब के चतुर सलाहकार; विद्रोह की योजना बनाने और प्रचार में भूमिका निभाई।

मौलवी अहमद शाह (अहमदुल्ला शाह)

फ़ैज़ाबाद के मौलवी; अवध और लखनऊ क्षेत्र में जनता को संगठित कर अंग्रेज़ों से लड़े।

ठाकुर कुँवर सिंह

बिहार के जगदीशपुर के ज़मींदार; लगभग अस्सी वर्ष की आयु में बिहार और आसपास के क्षेत्रों में अंग्रेज़ों से वीरता से लड़े।

काना और मंदरा

रानी की सखियाँ; ग्वालियर के युद्ध में रानी के साथ लड़ीं और भारी मार-काट मचाई।

प्रश्न 3

वर्तमान में लगभग हर क्षेत्र में महिलाएँ कार्य कर रही हैं। दिए गए कार्यक्षेत्रों में काम करने वाली स्त्रियों के नाम और उनके विषय में लिखिए।

उत्तर

कार्यक्षेत्र

महिला

परिचय

दमकल केंद्र (फायर ब्रिगेड)

हर्षिनी कान्हेकर

भारत की पहली महिला अग्निशमन अधिकारी (फायर फाइटर) मानी जाती हैं; उन्होंने नागपुर के राष्ट्रीय अग्निशमन सेवा महाविद्यालय से प्रशिक्षण लिया।

रेलगाड़ी चालक

सुरेखा यादव

भारत (और एशिया) की पहली महिला रेल चालक; 1988 में मध्य रेलवे में चालक बनीं और बाद में वंदे भारत एक्सप्रेस भी चलाई।

खेल के विभिन्न क्षेत्र

मैरी कॉम, पी.वी. सिंधु, मिताली राज

मैरी कॉम छह बार की विश्व मुक्केबाज़ी चैंपियन और ओलंपिक पदक विजेता; पी.वी. सिंधु दो ओलंपिक पदक जीतने वाली बैडमिंटन खिलाड़ी; मिताली राज भारतीय महिला क्रिकेट की पूर्व कप्तान।

व्यापार और प्रबंधन

किरण मजूमदार-शॉ, इंद्रा नूयी

किरण मजूमदार-शॉ ने बायोकॉन कंपनी की स्थापना की; इंद्रा नूयी पेप्सिको की अध्यक्ष और मुख्य कार्यकारी अधिकारी रहीं।

विज्ञान और तकनीक

कल्पना चावला, टेसी थॉमस

कल्पना चावला अंतरिक्ष में जाने वाली भारतीय मूल की पहली महिला; टेसी थॉमस ‘मिसाइल वुमन’ कहलाती हैं, जिन्होंने अग्नि मिसाइल परियोजना का नेतृत्व किया।

(अतिरिक्त) सेना/वायुसेना

अवनी चतुर्वेदी

भारतीय वायुसेना की पहली महिला लड़ाकू पायलटों में से एक, जिन्होंने अकेले मिग-21 उड़ाया।

प्रश्न 4

कविता में 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम से संबंधित अनेक स्थानों के नाम आए हैं। अपने शिक्षक की सहायता से दिए गए मानचित्र में उन स्थानों/नगरों को चिह्नित करके नाम लिखिए।

उत्तर

मानचित्र पर चिह्नित किए जाने वाले स्थान (वर्तमान राज्य सहित):

स्थान

वर्तमान राज्य/क्षेत्र

झाँसी, कानपुर, लखनऊ, मेरठ, कालपी, बिठूर

उत्तर प्रदेश

दिल्ली (देहली)

दिल्ली

ग्वालियर, जबलपुर

मध्य प्रदेश

नागपुर, सतारा, कोल्हापुर

महाराष्ट्र

पटना

बिहार

उदयपुर (उदैपूर) – हड़प नीति से छीनी गई रियासत

छत्तीसगढ़

तंजौर (तंजावुर), मद्रास (चेन्नई)

तमिलनाडु

करनाटक (कर्नाटिक/आर्काट के नवाब का क्षेत्र)

तमिलनाडु

कलकत्ता (कोलकाता), बंगाल

पश्चिम बंगाल

पंजाब

पंजाब

सिंध, ब्रह्म (बर्मा)

वर्तमान भारत से बाहर (पाकिस्तान, म्यांमार)

भाषा से संवाद – व्याकरण की बात (शब्द एक अर्थ अनेक)

प्रश्न 1

तालिका में दी गई कविता की पंक्तियों में रेखांकित शब्द अनेकार्थी शब्द हैं। कविता के संदर्भ में उनके सही अर्थ पर घेरा लगाइए।

उत्तर

काव्य-पंक्ति

दिए गए अर्थ

कविता के संदर्भ में सही अर्थ

तीर चलाने वाले कर में उसे चूड़ियाँ कब भाईं

नदी का किनारा, बाण, सीसा

बाण

रानी विधवा हुई हाय! विधि को भी नहीं दया आई

शास्त्र में लिखी व्यवस्था, प्रणाली, विधाता, तरीका

विधाता

रानी ने तलवार खींच ली, हुआ द्वंद्व असमानों में

युद्ध, संशय, युग्म

युद्ध

हो मदमाती विजय, मिटा दे गोलों से चाहे झाँसी

किसी पदार्थ का गोल पिंड, रस्सी/सूत/बर्फ का गोला, तोप से दागने वाले गोले, नारियल

तोप से दागने वाले गोले

मिला तेज से तेज, तेज की वह सच्ची अधिकारी थी

आभा, गति, तेज चाकू (धार)

आभा

प्रश्न 2

‘कानपूर’ और ‘कानपुर’ की तरह इस कविता में अन्य शब्दों के भी ऐसे प्रयोग मिलते हैं, उन्हें ढूँढ़कर लिखिए और कक्षा में चर्चा कीजिए। इसी पाठ्यपुस्तक की अन्य कविताओं में भी ऐसे प्रयोग खोजिए और चर्चा कीजिए कि ऐसे प्रयोग क्यों किए गए हैं?

उत्तर

कविता में प्रयुक्त रूप

मानक वर्तनी

कानपूर, नागपूर, उदैपूर

कानपुर, नागपुर, उदयपुर

देहली

दिल्ली

बंगाले

बंगाल

करनाटक

कर्नाटक

रजधानी

राजधानी

महरानी

महारानी

नव्वाबों

नवाबों

तेइस

तेईस

उजयाली

उजियाली/उजाला

जगावेगा, होवे

जगाएगा, हो

ताँतिया

तात्या

अन्य कविताओं से: ‘पद’ (रैदास) में भगति (भक्ति), बरत (व्रत), तीरथ (तीर्थ), जोति (ज्योति); ‘राम-लक्ष्मण-परशुराम संवाद’ में बेषु (वेष), बिस्वामित्रु (विश्वामित्र), सिवधनु (शिवधनुष), कलप (कल्प)।

चर्चा के निष्कर्ष: कवि ऐसे प्रयोग (1) छंद की मात्राएँ और लय ठीक रखने के लिए, (2) तुक मिलाने के लिए, (3) बोलचाल और लोकभाषा का स्वाभाविक रूप देने के लिए, तथा (4) उस समय प्रचलित वर्तनी (जैसे ‘कानपूर’, ‘देहली’) को अपनाने के कारण करते हैं। इसे काव्य की स्वतंत्रता कहा जाता है; हमें अपने लेखन में मानक वर्तनी का ही प्रयोग करना चाहिए।

भाषा से संवाद – मुहावरे

प्रश्न 1

पाठ में से चुनी गई पंक्तियों में आए मुहावरे ढूँढ़कर लिखिए और उन मुहावरों का प्रयोग करते हुए नए वाक्य भी बनाइए।

उत्तर

काव्य पंक्ति

प्रयुक्त मुहावरा (अर्थ)

नया वाक्य

1. अबके जनरल स्मिथ सन्मुख था, उसने मुँह की खाई थी

मुँह की खाना (बुरी तरह हारना)

मोहन ने सोचा था कि वह आसानी से जीत जाएगा लेकिन अंत में उसे मुँह की खानी पड़ी।

2. डलहौजी ने पैर पसारे अब तो पलट गई काया

पैर पसारना (अधिकार या प्रभाव फैलाना); काया पलटना (पूरी तरह बदल जाना)

शहर में बड़ी कंपनियों ने पैर पसारे तो छोटी दुकानों की काया ही पलट गई।

3. राजाओं नव्वाबों को भी उसने पैरों ठुकराया

पैरों ठुकराना (तिरस्कार/अपमान करना)

सफलता मिलते ही उसने अपने पुराने मित्रों को पैरों से ठुकरा दिया।

4. हुआ यज्ञ प्रारंभ उन्हें तो/ सोई ज्योति जगानी थी

(सोई) ज्योति जगाना (चेतना या जागृति पैदा करना)

गांधी जी ने गाँव-गाँव जाकर लोगों में स्वाभिमान की सोई ज्योति जगाई।

5. मेरठ, कानपुर, पटना ने भारी धूम मचाई थी

धूम मचाना (हलचल या उत्पात मचाना; खूब चर्चित होना)

विद्यालय के वार्षिकोत्सव में हमारे नाटक ने धूम मचा दी।

सृजन

प्रश्न 1

लक्ष्मीबाई की सखियों काना तथा मंदरा की ओर से लक्ष्मीबाई को एक पत्र लिखिए जिसमें काना तथा मंदरा द्वारा ब्रिटिश हुकूमत के विरुद्ध युद्ध की रणनीति पर चर्चा की गई हो।

उत्तर

(नमूना उत्तर)

सैनिक शिविर, ग्वालियर के निकट

ज्येष्ठ मास

परम आदरणीया महारानी लक्ष्मीबाई जी,

सादर प्रणाम।

हमें सूचना मिली है कि जनरल स्मिथ पूर्व दिशा से और ह्यू रोज़ पीछे से हमारी ओर बढ़ रहे हैं। हमारी राय है कि हम अपनी सेना को तीन टुकड़ियों में बाँटें। एक टुकड़ी तात्या टोपे जी के साथ पहाड़ियों पर मोर्चा सँभाले और तोपों से शत्रु को रोके। दूसरी टुकड़ी, जिसका नेतृत्व हम दोनों करेंगी, घुड़सवारों के साथ बगल से अचानक हमला करेगी, ताकि शत्रु भ्रम में पड़ जाए। तीसरी टुकड़ी आपके साथ बीच में रहे और आवश्यकता पड़ने पर आगे बढ़े। रसद और गोला-बारूद को किले के भीतर सुरक्षित रखा जाए। हमें यह भी ध्यान रखना होगा कि पीछे हटने का एक सुरक्षित मार्ग पहले से तय हो और उस मार्ग पर नालों-खाइयों की जाँच कर ली जाए। आप चिंता न करें, हम अंतिम साँस तक आपके साथ रहेंगी।

जय भवानी!

आपकी विश्वासपात्र सखियाँ,

काना और मंदरा

प्रश्न 2

युद्ध पूर्व रात्रि में झाँसी की रानी के मन में अगले दिन की संभावनाओं को लेकर कई तरह के भाव और विचार उठ रहे होंगे। आपके जीवन में भी कई ऐसे क्षण आए होंगे जब आपने मानसिक ऊहापोह का अनुभव किया होगा। ऐसी किसी घटना के विषय में अपनी डायरी में लिखिए।

उत्तर

(नमूना उत्तर)

14 मार्च, रात 10 बजे

प्रिय डायरी,

कल गणित की बोर्ड-पूर्व परीक्षा है। पूरी तैयारी करने के बाद भी मन में बेचैनी है। बार-बार लगता है कि त्रिकोणमिति के सूत्र भूल न जाऊँ। एक मन कहता है कि रात भर पढ़ लूँ, दूसरा कहता है कि आराम ज़रूरी है। माँ ने समझाया कि घबराहट से अच्छा है आत्मविश्वास रखना। मैंने सारे सूत्र एक बार दोहरा लिए हैं और प्रवेश-पत्र, पेन, पेंसिल बैग में रख दिए हैं। आज ‘झाँसी की रानी’ पढ़ी थी; सोचता हूँ, जब रानी इतनी बड़ी लड़ाई से पहले नहीं डरीं, तो मैं एक परीक्षा से क्यों डरूँ? अब सोने जा रहा हूँ, कल पूरे मन से परीक्षा दूँगा।

गतिविधियाँ

प्रश्न 1 (शौर्य के समाचार)

कविता में वर्णित घटनाओं को एक समाचार-वाचक की तरह समाचार के रूप में प्रस्तुत कीजिए।

(नमूना उत्तर)

“नमस्कार, आप सुन रहे हैं ‘स्वतंत्र भारत समाचार’। आज झाँसी की रणभूमि पर रानी लक्ष्मीबाई ने अपनी अद्भुत वीरता और शौर्य का परिचय दिया। पुरुष वेश में मैदान में उतरी रानी ने लेफ़्टिनेंट वॉकर से सीधा द्वंद्व किया और उसे घायल कर भागने पर मजबूर कर दिया। हमारे संवाददाता के अनुसार रानी लगातार सौ मील की यात्रा कर कालपी पहुँचीं, जहाँ उनका थका घोड़ा वीरगति को प्राप्त हुआ। यमुना-तट पर अंग्रेज़ी सेना को करारी हार मिली है। ताज़ा समाचार यह है कि रानी ने ग्वालियर पर अधिकार कर लिया है और अंग्रेज़ों के मित्र सिंधिया राजधानी छोड़कर चले गए हैं। अंग्रेज़ी सेना फिर से जुट रही है; जनरल स्मिथ को मुँह की खानी पड़ी है, पर ह्यू रोज़ के आगमन से स्थिति गंभीर हो गई है। देश भर में लोग रानी की सफलता की प्रार्थना कर रहे हैं। बाकी समाचारों के लिए जुड़े रहिए।”

प्रश्न 2 (‘हरबोलों’ और हमारी कहानी)

आपके क्षेत्र में अथवा आपकी भाषा में भी ऐसे लोकगायक और उनके द्वारा गाए जाने वाले देशभक्तिपूर्ण गीत अवश्य प्रचलित होंगे। ऐसे गीतों का एक संकलन तैयार कीजिए और कक्षा में साझा कीजिए।

(नमूना उत्तर – संकलन की रूपरेखा)

क्षेत्र

लोकगायन परंपरा

विषय

बुंदेलखंड

हरबोले, आल्हा गायन

रानी लक्ष्मीबाई और आल्हा-ऊदल की वीरता

महाराष्ट्र

पोवाड़ा (शाहीर गायक)

छत्रपति शिवाजी और स्वतंत्रता सेनानियों का गुणगान

बिहार (भोजपुरी क्षेत्र)

लोकगीत, होली-गीत

बाबू कुँवर सिंह की वीरता

राजस्थान

भोपा, चारण-भाट गायन

महाराणा प्रताप और लोकदेवताओं की वीर गाथाएँ

पंजाब

ढाडी, वार गायन

सिख योद्धाओं और शहीदों की गाथाएँ

विद्यार्थी अपने घर के बड़ों से ऐसे गीत सुनकर लिखें, उनका अर्थ हिंदी में दें और कक्षा में गाकर सुनाएँ।

प्रश्न 3 (भाषा संगम)

यदि आप ‘बहन’ शब्द को किसी और भाषा में भी जानते हैं तो उस भाषा में भी लिखिए। “कानपूर के नाना की मुँहबोली बहन ‘छबीली’ थी।” वाक्य को अपनी मातृभाषा में भी लिखिए।

(नमूना उत्तर) अंग्रेज़ी में ‘बहन’ को sister कहते हैं।

अंग्रेज़ी में: “Chhabili was the adopted (rakhi) sister of Nana of Kanpur.”

(विद्यार्थी यह वाक्य अपनी मातृभाषा में भी लिखें।)

झरोखे से

प्रश्न 1

‘झलकारी बाई’ लेख पढ़कर 1857 के स्वतंत्रता संग्राम में उनके योगदान के विषय में जानिए।

उत्तर

(सार) झलकारी बाई का जन्म 22 नवंबर 1830 को झाँसी के निकट भोजला गाँव में हुआ। वे घुड़सवारी, अस्त्र-शस्त्र चलाने, तीरंदाज़ी और कुश्ती में निपुण थीं और रानी लक्ष्मीबाई की ‘दुर्गा दल’ नामक महिला सेना में ऊँचे पद पर थीं। उनका चेहरा रानी से मिलता-जुलता था। 1858 में जब ह्यू रोज़ ने झाँसी के किले को घेरा, तो उन्होंने स्वयं रानी का वेश धारण कर सेना की कमान सँभाली और अंग्रेज़ों को भ्रम में डाले रखा, जिससे रानी अपने पुत्र के साथ किले से निकल सकीं। उनका यह त्याग बुंदेलखंड की लोक-स्मृति में आज भी जीवित है।

खोजबीन

प्रश्न 1

दी गई इंटरनेट कड़ियों तथा पुस्तकों के माध्यम से लक्ष्मीबाई तथा भारतीय स्वतंत्रता संग्राम की अन्य वीरांगनाओं और राष्ट्रीय वीरता पुरस्कार से सम्मानित बालिका कांति के अदम्य साहस के बारे में जानकारी प्राप्त कीजिए।

उत्तर

(नमूना उत्तर) स्वतंत्रता संग्राम की अन्य वीरांगनाएँ— बेगम हज़रत महल (लखनऊ, अवध में 1857 का नेतृत्व), रानी अवंतीबाई लोधी (रामगढ़, मध्य प्रदेश), झलकारी बाई (झाँसी), रानी चेन्नम्मा (कित्तूर, कर्नाटक, जिन्होंने 1824 में ही अंग्रेज़ों का सामना किया)। दी गई कड़ी के अनुसार छत्तीसगढ़ की सात वर्षीय बालिका कांति ने हाथियों के हमले से अपनी बहन की जान बचाई, जिसके लिए उसे राष्ट्रीय वीरता पुरस्कार के लिए चुना गया। इनसे सीख मिलती है कि साहस उम्र या लिंग का मोहताज नहीं होता।

अतिरिक्त महत्वपूर्ण प्रश्न

बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQ)

प्रश्न 1

लक्ष्मीबाई किसकी मुँहबोली बहन थीं?

उत्तर

(क) तात्या टोपे (ख) नाना धुंधूपंत (ग) कुँवर सिंह (घ) अज़ीमुल्ला

उत्तर: (ख) नाना धुंधूपंत

प्रश्न 2

झाँसी के मैदान में रानी से लड़कर कौन घायल होकर भागा?

उत्तर

(क) जनरल स्मिथ (ख) ह्यू रोज़ (ग) लेफ़्टिनेंट वॉकर (घ) डलहौज़ी

उत्तर: (ग) लेफ़्टिनेंट वॉकर

प्रश्न 3

वीरगति के समय रानी की आयु कितनी थी?

उत्तर

(क) बीस वर्ष (ख) तेईस वर्ष (ग) पच्चीस वर्ष (घ) तीस वर्ष

उत्तर: (ख) तेईस वर्ष

प्रश्न 4

रानी ने किस नगर पर अधिकार किया, जिससे सिंधिया को राजधानी छोड़नी पड़ी?

उत्तर

(क) कालपी (ख) कानपुर (ग) ग्वालियर (घ) लखनऊ

उत्तर: (ग) ग्वालियर

प्रश्न 5

‘हरबोले’ कौन थे?

उत्तर

(क) अंग्रेज़ सैनिक (ख) बुंदेलखंड के लोकगायक (ग) मराठा सरदार (घ) अख़बार वाले

उत्तर: (ख) बुंदेलखंड के लोकगायक

लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1

‘रानी दासी बनी, बनी यह दासी अब महरानी थी’ का आशय स्पष्ट कीजिए।

उत्तर

इसका आशय है कि अंग्रेज़ों की चालों से स्थिति उलट गई। जो भारतीय रानियाँ और राजा शासक थे, वे अधिकारहीन होकर दासी जैसे बन गए, और जो अंग्रेज़ व्यापारी (कंपनी) कभी दासी की तरह अनुमति माँगते थे, वे अब महारानी बनकर शासन करने लगे।

प्रश्न 2

रानी की मृत्यु का तात्कालिक कारण क्या बना?

उत्तर

शत्रु सेना को काटकर निकलते समय रानी के सामने एक नाला आ गया। उनका घोड़ा नया था, इसलिए वह नाले के आगे अड़ गया। इतने में शत्रु के घुड़सवार आ पहुँचे और अकेली रानी पर लगातार वार होने लगे, जिससे वे घायल होकर वीरगति को प्राप्त हुईं।

प्रश्न 3

कविता की टेक (बार-बार दोहराई जाने वाली पंक्तियाँ) का क्या महत्त्व है?

उत्तर

टेक “बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी। खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी॥” हर पद्यांश के बाद आती है। इससे कविता में गेयता और लय आती है, रानी की वीरता बार-बार मन में बैठती है और यह भी पता चलता है कि यह कथा लोकगायकों के माध्यम से जन-जन तक पहुँची है।

प्रश्न 4

‘तेरा स्मारक तू ही होगी’ पंक्ति से कवयित्री क्या कहना चाहती हैं?

उत्तर

कवयित्री कहना चाहती हैं कि रानी की याद के लिए किसी पत्थर के स्मारक की आवश्यकता नहीं है। उनका बलिदान और उनकी वीरता ही उनका अमर स्मारक है, जिसे न इतिहास की चुप्पी मिटा सकती है, न शत्रु के गोले।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1

‘झाँसी की रानी’ कविता के आधार पर 1857 के संग्राम के कारणों पर प्रकाश डालिए।

उत्तर

कविता बताती है कि अंग्रेज़ व्यापारी बनकर भारत आए, पर धीरे-धीरे शासक बन बैठे। डलहौज़ी की हड़प नीति के कारण निःसंतान राजा की मृत्यु पर झाँसी जैसे राज्य छीन लिए गए। दिल्ली, लखनऊ, नागपुर, सतारा, तंजौर आदि अनेक रियासतें हड़प ली गईं और पेशवा बिठूर में कैद कर दिए गए। रानियों-बेगमों के गहने कलकत्ते के बाज़ारों में नीलाम होने लगे, जिससे राजपरिवारों का घोर अपमान हुआ। दूसरी ओर, झोंपड़ियों में गरीब जनता भयंकर पीड़ा सह रही थी। सैनिकों के मन में पूर्वजों का स्वाभिमान जाग उठा। इस प्रकार राजनीतिक अन्याय, अपमान, आर्थिक शोषण और स्वाभिमान की भावना ने मिलकर 1857 की क्रांति को जन्म दिया।

प्रश्न 2

‘झाँसी की रानी’ एक कथात्मक कविता है— इस कथन की पुष्टि कीजिए।

उत्तर

कथात्मक कविता में कहानी के तत्त्व और घटनाओं का क्रम होता है। ‘झाँसी की रानी’ में लक्ष्मीबाई के जीवन की कथा क्रम से आगे बढ़ती है— बचपन, विवाह, राजा की मृत्यु, झाँसी का छिनना, 1857 का विद्रोह, वॉकर से युद्ध, कालपी और ग्वालियर की विजय, घेराबंदी और अंत में वीरगति। कविता में नायिका (रानी), खलनायक (डलहौज़ी और अंग्रेज़ अधिकारी), सहायक पात्र (नाना, तात्या, काना-मंदरा) और चरम-बिंदु (नाले के पास अंतिम युद्ध) सब मौजूद हैं। हर पद्यांश के बाद आने वाली टेक इसे लोकगाथा जैसा रूप देती है। इसकी सरल भाषा, गेयता और ओज इसे जीवंत कहानी बना देते हैं।

Frequently Asked Questions

What is Class 9 Hindi Ganga Chapter 11 (झाँसी की रानी) about?

सुभद्रा कुमारी चौहान की प्रसिद्ध कविता 'झाँसी की रानी' 1857 के स्वतंत्रता संग्राम की पृष्ठभूमि पर लिखी गई है। इसमें रानी लक्ष्मीबाई के बचपन, विवाह, राजा के निधन के बाद अंग्रेज़ों द्वारा झाँसी हड़पने के प्रयास और रानी के वीरतापूर्ण संघर्ष का ओजपूर्ण वर्णन है। 'खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी' की पंक्ति के साथ यह कविता रानी के साहस और बलिदान को अमर बनाती है।

What do these NCERT solutions for Class 9 Hindi Ganga Chapter 11 (झाँसी की रानी) cover?

All 33 questions from the latest NCERT textbook for this chapter are answered step by step, organised as अतिरिक्त महत्वपूर्ण प्रश्न.

Are these solutions based on the new NCERT syllabus?

Yes. The answers follow the current NCERT textbook for Class 9 Hindi Ganga and the latest CBSE syllabus, so the question numbers and wording match the book you use in class.

How should I use these solutions to prepare for exams?

Attempt each question on your own first, then compare your working with the answer here. Note the steps or keywords you missed, and revise the chapter notes before taking a chapter-wise MCQ test to check your understanding.

Are the NCERT solutions for Class 9 Hindi Ganga Chapter 11 (झाँसी की रानी) free?

Yes. All Circle of Learning NCERT solutions and chapter notes are free to read online, with no sign-up needed.