Circle of Learning • नई NCERT पाठ्यपुस्तक "गंगा" (2026-27) • पाठ के सभी प्रश्नों के उत्तर
कवि परिचय: भवानीप्रसाद मिश्र का जन्म सन् 1913 में मध्य प्रदेश के होशंगाबाद (अब नर्मदापुरम) में हुआ था। वे स्वाधीनता आंदोलन में सक्रिय रहे। गीत-फ़रोश, खुशबू के शिलालेख, चकित है दुख, अँधेरी कविताएँ, बुनी हुई रस्सी, कवितांतर, शतदल, गांधी-पंचशती, त्रिकाल संध्या उनकी प्रमुख रचनाएँ हैं। ‘बुनी हुई रस्सी’ पर उन्हें साहित्य अकादमी पुरस्कार मिला। उन्होंने हैदराबाद से प्रकाशित पत्रिका ‘कल्पना’ का संपादन (1952–55) किया, आकाशवाणी से जुड़े रहे (1955–58) और संपूर्ण गांधी वाङ्मय का संपादन किया। सन् 1985 में उनका निधन हुआ। 1942 के ‘भारत छोड़ो आंदोलन’ में भाग लेने पर उन्हें तीन वर्ष का कारावास मिला; जेल में रहते हुए ही उन्होंने ‘घर की याद’ कविता लिखी।
काव्यांश की व्याख्या / भावार्थ
(कविता लंबी है, इसलिए भाव के क्रम से पद्यांशों का सरल भावार्थ दिया गया है।)
पद्यांश 1 – “आज पानी गिर रहा है … हाय कैसा तरस है रे” तथा “अब सबेरा हो गया है … रातवाली छाप है सब”
सरल भावार्थ: जेल में बंद कवि कहते हैं कि आज बहुत वर्षा हो रही है; रात-भर पानी गिरता रहा और मेरा मन-प्राण यादों से घिरता रहा। आज का दिन, दिन जैसा नहीं लगता; इसका एक क्षण भी चैन का नहीं, हर क्षण सौ वर्ष के समान लंबा है। कब सवेरा हुआ, यह भी ठीक से पता नहीं चला; बादलों के अँधेरे के कारण अभी भी रात जैसी छाप है और सब ओर सन्नाटा है।
पद्यांश 2 – “गिर रहा पानी झरा-झर … काँपते हैं प्राण थर-थर”
सरल भावार्थ: झर-झर पानी गिर रहा है, पत्ते हर-हर करते हिल रहे हैं और हवा सर-सर बह रही है। इस वातावरण में कवि के प्राण घर की याद और चिंता से थर-थर काँप रहे हैं।
पद्यांश 3 – “बहुत पानी गिर रहा है, घर नजर में तिर रहा है … भुजा भाई प्यार बहिनें”
सरल भावार्थ: वर्षा के साथ कवि की आँखों में घर तैरने लगता है, जो उनसे दूर है और खुशियों से भरा है। उस घर में चार भाई हैं और बहन (सावन में) मायके आई होगी, पर भाई के जेल में होने से पिता का घर दुख (परिताप) का घर बन गया है। आज सब घर में इकट्ठे होंगे। चार भाई और चार बहनें हैं; भाई कवि की भुजाओं के समान शक्ति हैं और बहनें प्यार का रूप हैं।
पद्यांश 4 – “और माँ बिन-पढ़ी मेरी … जो कि उसका पत्र पाता”
सरल भावार्थ: कवि की माँ पढ़ी-लिखी नहीं है, पर दुख में भी वह कवि के लिए सहारे का गढ़ (किला) है। उसकी गोद में सिर रख लेने से सारे दुख मिट जाते हैं। उसके स्नेह की धारा जेल तक फैली हुई है। उसे लिखना नहीं आता, नहीं तो कवि को उसका पत्र मिलता।
पद्यांश 5 – “पिताजी भोले बहादुर, वज्र-भुज नवनीत-सा उर … काम में झंझा लरजता”
सरल भावार्थ: पिताजी भोले और बहादुर हैं; उनकी भुजाएँ वज्र जैसी कठोर हैं और हृदय मक्खन जैसा कोमल। बुढ़ापा उन्हें एक क्षण भी नहीं छू पाया; वे आज भी दौड़ सकते हैं और खिलखिलाकर हँसते हैं। वे मौत के आगे नहीं हिचकते, शेर के आगे भी नहीं डरते। उनकी आवाज़ में बादल जैसी गर्जना है और काम में आँधी जैसी तेज़ी।
पद्यांश 6 – “आज गीता-पाठ करके … लगे होंगे उन्हें हेटे”
सरल भावार्थ: कवि कल्पना करते हैं कि आज पिताजी ने गीता-पाठ किया होगा, दो सौ साठ दंड-बैठक लगाई होगी और मुगदर घुमाया होगा। फिर जब वे नीचे आए होंगे और बाकी बच्चों को खेलते-खड़े देखा होगा, तो उनकी आँखें भर आई होंगी और वे पाँचवें बेटे (कवि) का नाम लेकर रो पड़े होंगे। कवि स्वयं को ‘अभागा’ कहते हैं, जिसे पिता सोने पर सुहागा मानते रहे हैं। आज उसके न होने से पिता को अपने बाकी सोने जैसे बेटे भी फीके लगे होंगे।
पद्यांश 7 – “और माँ ने कहा होगा … धीर मैं खोता, कहाँ हूँ”
सरल भावार्थ: तब माँ ने अपने मन का दुख छिपाकर पिताजी को समझाया होगा— आँखों में पानी क्यों? भवानी वहाँ अच्छा है। वह तुम्हारा मन और अपनापन समझकर (देश के लिए) गया है, यह तुम्हारी ही परंपरा है। यदि वह पाँव पीछे हटाता, तो मेरी कोख लजाती। तुम इस तरह कमज़ोर मत बनो, नहीं तो बच्चे भी रो पड़ेंगे। इस पर पिताजी ने कहा होगा— मैं रोता कहाँ हूँ, धैर्य कहाँ खोता हूँ! पर उन्होंने भीतर कितना दुख सहा होगा।
पद्यांश 8 – “गिर रहा है आज पानी, याद आता है भवानी … आज इससे याद आती”
सरल भावार्थ: पिताजी को वर्षा देखकर भवानी की याद आई होगी, जिसे बरसात बहुत प्यारी थी। वह खुले सिर, नंगे बदन मगन होकर बारिश में घूमता था, बड़े बाड़े में लौकी के बीज लगाता था और माँ को बताता था कि बेला पर कौन-सा फूल खिला है; माँ भी उसके साथ जाती थी। आज यही सब याद आता है।
पद्यांश 9 – “मैं न रोऊँगा — कहा होगा … आज सबका मन चुआ होगा”
सरल भावार्थ: पिताजी ने ‘मैं नहीं रोऊँगा’ कहा होगा, फिर भी आँसू बह निकले होंगे। उसके बाद का दृश्य ऐसा रहा होगा कि भाई-बहन व्याकुल हो उठे होंगे, माँ बादल की तरह भीतर से भरी होंगी, भाभी और सरला की आँखें भी सहज ही भर आई होंगी, पर संकोच से वे रो भी नहीं पाई होंगी और भीतर ही भीतर छटपटाती रही होंगी। आज सबका मन आँसुओं की तरह टपक पड़ा होगा।
पद्यांश 10 – “अभी पानी थम गया है … किसलिए इतनी तृषा रे”
सरल भावार्थ: अब वर्षा रुक गई है, पर कवि का मन बहुत भीगा हुआ है। आकाश में एक जैसे बादल जमे हैं, जिनसे छनकर किरणें झाँक रही हैं; ऐसा लगता है मानो माँ ने आँगन लीप दिया हो। दसों दिशाएँ शांत हैं। पेड़ आँखें बंद किए, साँस रोके चुपचाप क्षितिज पर जड़े-से खड़े हैं। एक पक्षी बोलता है तो कवि के हृदय के घाव खुल जाते हैं। कवि सोचते हैं कि बेचारे मनुष्य के हृदय में अपनों से मिलने की इतनी प्यास क्यों है।
पद्यांश 11 – “तू जरा-सा दुख कितना … अश्रु सिंचित हास तेरे!” तथा “हे सजीले हरे सावन … पाँचवें को वे न तरसें”
सरल भावार्थ: कवि सावन से कहते हैं कि तू ज़रा-से दुख में ही बरस पड़ता है; तू इतना दुख कैसे सह पाएगा जितना मेरे परिवार ने सहा है? हवा आते ही तू उड़ चलता है, झटका लगते ही टूटकर बरस पड़ता है। तेरी हँसी भी आँसुओं से भीगी है। हे सुंदर, हरे-भरे, पवित्र सावन! तुम चाहे जितना बरस लो, पर मेरे माता-पिता की आँखें न बरसें; वे अपने पाँचवें बेटे के लिए न तरसें।
पद्यांश 12 – “मैं मजे में हूँ सही है … यों न कहना अस्त हूँ मैं”
सरल भावार्थ: कवि सावन को संदेशवाहक बनाकर कहते हैं— उनसे कहना कि मैं मज़े में हूँ, बस घर में नहीं हूँ; यही एक कमी है जिससे सब नीरस लगता है, पर यह बात उनसे मत कहना। उन्हें धीरज बँधाना और कहना कि मैं लिख-पढ़ रहा हूँ, काम कर रहा हूँ, नाम कमा रहा हूँ, लोग मुझे चाहते हैं, वे कोई शोक न करें। कहना कि मैं मस्त हूँ, सूत कातने में व्यस्त हूँ, मेरा वज़न सत्तर सेर है, खूब खाता हूँ, कूदता-खेलता हूँ और दुख को डटकर धकेल देता हूँ। यह कभी मत कहना कि मैं टूट गया हूँ। साथ ही कवि बताते हैं कि पिताजी का शरीर पहाड़ जैसा मज़बूत है पर मन बरगद के पेड़ जैसा है— एक पत्ता टूटे तो आँसुओं की धारा फूट पड़े, हल्की चोट से ही प्रेम की नदी उमड़ पड़े। उनकी जितनी डालें हैं, उतनी ही गहरी जड़ें हैं; उन्हें सबकी इतनी चिंता है।
पद्यांश 13 – “इस तरह का हाल उनका … पाँचवें को वे न तरसें”
सरल भावार्थ: कवि हवा और सावन से विनती करते हैं कि पिताजी का ऐसा हाल है, इसलिए उन्हें धीरज देना, उनका हृदय मत चीर देना। उनसे यह मत कहना कि मैं रातों को जागता हूँ, लोगों से कटा-कटा रहता हूँ, चुप रहता हूँ या स्वयं को भी नहीं पहचान पा रहा हूँ। कुछ भी उल्टा-सीधा मत बोल देना, जिससे उन्हें कोई शंका हो। तुम चाहे बरस लो, पर वे न रोएँ और अपने पाँचवें बेटे के लिए न तरसें।
रचना से संवाद – मेरे उत्तर मेरे तर्क
उत्तर
भवानीप्रसाद मिश्र ने यह कविता कहाँ और क्यों लिखी?
(क) विदेश से मित्र के लिए (ख) युद्धभूमि से जनता के लिए (ग) जेल से परिवार के लिए (घ) यात्रा से किसी संबंधी के लिए
उत्तर: (ग) जेल से परिवार के लिए।
तर्क: 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन में भाग लेने पर कवि को कारावास मिला था। जेल में रहते हुए उन्होंने परिवार की याद में यह कविता लिखी और सावन के बादल से परिवार तक संदेश भेजा।
उत्तर
लगातार बरसता पानी कवि के मन की किस भावना का परिचायक है?
(क) उत्साह और आवेग (ख) भय और क्रोध (ग) साहस और उमंग (घ) चिंता और बेचैनी
उत्तर: (घ) चिंता और बेचैनी।
तर्क: “रात-भर गिरता रहा है, प्राण मन घिरता रहा है” और “काँपते हैं प्राण थर-थर” से स्पष्ट है कि लगातार वर्षा कवि के मन में घर की चिंता और बेचैनी बढ़ा रही है।
उत्तर
कविता में माँ की कैसी छवि उभरती है?
(क) कमजोर और निष्क्रिय (ख) स्नेहमयी और दृढ़ (ग) शिक्षित और अनुशासनप्रिय (घ) सरल और उदासीन
उत्तर: (ख) स्नेहमयी और दृढ़।
तर्क: माँ की “स्नेह-धारा” जेल तक फैली है, उसकी गोद में सिर रखने से दुख मिट जाता है। वह दृढ़ भी है, क्योंकि रोते पिताजी को समझाती है— “इस तरह होओ न कच्चे, रो पड़ेंगे और बच्चे।”
“वज्र-भुज नवनीत-सा उर” पंक्ति के माध्यम से पिता के व्यक्तित्व की कैसी छवि प्रस्तुत की गई है?
उत्तर
(क) कर्मठ और सृजनशील (ख) साहसी और पराक्रमी (ग) दृढ़ और संवेदनशील (घ) प्रसन्नचित्त और सक्रिय
उत्तर: (ग) दृढ़ और संवेदनशील।
तर्क: ‘वज्र-भुज’ (वज्र जैसी भुजाएँ) उनकी शारीरिक शक्ति और दृढ़ता का, तथा ‘नवनीत-सा उर’ (मक्खन जैसा कोमल हृदय) उनकी संवेदनशीलता का प्रतीक है।
“एक पत्ता टूट जाए, बस कि धारा फूट जाए” पंक्ति किस ओर संकेत करती है?
उत्तर
(क) पिता की कठोरता (ख) पिता की भावुकता (ग) वर्षा की तीव्रता (घ) पिता की निर्बलता
उत्तर: (ख) पिता की भावुकता।
तर्क: पिता का मन बरगद के पेड़ जैसा है; परिवार रूपी पेड़ का एक पत्ता (एक सदस्य) भी अलग हो जाए तो उनकी आँखों से आँसुओं की धारा फूट पड़ती है।
“बहिन आई बाप के घर, हाय रे परिताप के घर” पंक्ति में ‘परिताप’ शब्द से क्या संकेत मिलता है?
उत्तर
(क) घर का समृद्ध होना (ख) घर की सजावट (ग) घर में दुख का वातावरण (घ) घर की शांति
उत्तर: (ग) घर में दुख का वातावरण।
तर्क: ‘परिताप’ का अर्थ है अत्यधिक दुख या शोक। बहन खुशी से मायके आई, पर भाई के जेल में होने से घर दुख से भरा है।
“और कहना मस्त हूँ मैं” पंक्ति में कवि का ऐसा कहना किस बात की ओर संकेत करता है?
उत्तर
(क) कवि अपने जीवन में बहुत खुश है। (ख) अपने दुख को परिजनों से छिपाना चाहता है। (ग) घर के लोगों के प्रति उदासीन है। (घ) कवि प्राकृतिक सौंदर्य से अभिभूत है।
उत्तर: (ख) अपने दुख को परिजनों से छिपाना चाहता है।
तर्क: कवि सावन से कहते हैं कि माता-पिता को धीरज देना, यह न कहना कि मैं जागता हूँ या मौन हूँ, ताकि “उन्हें कोई शक न देना” और वे दुखी न हों।
उत्तर
इस कविता में किस बात को प्रमुखता से वर्णित किया गया है?
(क) घर की शांति और सुरक्षा (ख) घर के सदस्यों के बीच का संबंध (ग) घर के निर्माण की प्रक्रिया (घ) घर की याद और अकेलेपन की पीड़ा
उत्तर: (घ) घर की याद और अकेलेपन की पीड़ा।
तर्क: कविता का शीर्षक ही ‘घर की याद’ है। जेल में अकेले कवि को वर्षा के बीच परिवार के एक-एक सदस्य की याद आती है और वह उनसे दूर होने की पीड़ा व्यक्त करता है।
रचना से संवाद – मेरी समझ मेरे विचार
कविता में वर्णित पिता के व्यक्तित्व की उन विशेषताओं का वर्णन कीजिए जिनसे उनका बहुआयामी रूप सामने आता है।
उत्तर
कवि के पिता का व्यक्तित्व बहुआयामी है। वे “भोले बहादुर” हैं, यानी सरल हृदय के होते हुए भी निडर हैं; मौत और शेर के सामने भी नहीं हिचकते। वे शारीरिक रूप से बलवान हैं— “वज्र-भुज”, रोज़ दो सौ साठ दंड लगाते और मुगदर घुमाते हैं; बुढ़ापा उन्हें छू तक नहीं पाया। वे धार्मिक हैं और गीता-पाठ करते हैं। उनकी वाणी में बादल की गर्जना और काम में आँधी जैसी फुर्ती है। वे हँसमुख और खिलखिलाने वाले हैं। साथ ही उनका हृदय “नवनीत-सा” कोमल है; पाँचवें बेटे की याद में वे रो पड़ते हैं। उनकी देह पहाड़ जैसी, पर मन बरगद जैसा है, जो परिवार के हर सदस्य से गहराई से जुड़ा है।
“दुख डटकर ठेलता हूँ” यह कथन मनुष्य के संघर्षशील स्वभाव को उजागर करता है। कविता के आधार पर बताइए कि कठिन परिस्थितियों में कवि किस प्रकार धैर्य, साहस और त्याग का परिचय देता है?
उत्तर
कवि ने देश की स्वतंत्रता के लिए परिवार का सुख छोड़कर जेल जाना स्वीकार किया, यह उनका त्याग है। जेल में अकेलेपन, बेचैनी और घर की याद से उनका मन टूटता है, फिर भी वे हार नहीं मानते। वे सावन से कहलवाते हैं कि “मस्त हूँ मैं”, “कातने में व्यस्त हूँ”, “कूदता हूँ, खेलता हूँ, दुख डटकर ठेलता हूँ”। अपने दुख को छिपाकर वे परिवार को धीरज देना चाहते हैं, ताकि माता-पिता न रोएँ। अपने कष्ट से अधिक परिवार की चिंता करना और दुख का डटकर सामना करना उनके धैर्य और साहस का प्रमाण है।
कविता में बार-बार वर्षा का वर्णन कवि के भावों को किस प्रकार व्यक्त करता है?
उत्तर
कविता में वर्षा कवि के मन का दर्पण है। रात-भर बरसता पानी उनकी बेचैनी और यादों की झड़ी है— “रात-भर गिरता रहा है, प्राण मन घिरता रहा है।” झर-झर गिरता पानी, सर-सर बहती हवा और थर-थर काँपते प्राण उनके मन की उथल-पुथल दिखाते हैं। “बहुत पानी गिर रहा है, घर नजर में तिर रहा है” में वर्षा आँसुओं जैसी लगती है और घर की यादें उभार देती है। वर्षा से ही उन्हें याद आता है कि भवानी को बरसात प्यारी थी। जब “पानी थम गया है” तब भी “मन निहायत नम गया है।” अंत में वे सावन से कहते हैं— “तुम बरस लो वे न बरसें।” इस प्रकार वर्षा कवि के आँसुओं, यादों और करुणा की प्रतीक बन जाती है।
कविता से उन पंक्तियों को चुनकर लिखिए और भाव स्पष्ट कीजिए जिनसे माँ की भावनात्मक मजबूती का परिचय मिलता है।
उत्तर
पंक्तियाँ: “आँख में किसलिए पानी, / वहाँ अच्छा है भवानी, / वह तुम्हारा मन समझकर, / और अपनापन समझकर, / गया है सो ठीक ही है / यह तुम्हारी लीक ही है, / पाँव जो पीछे हटाता, / कोख को मेरी लजाता, / इस तरह होओ न कच्चे, / रो पड़ेंगे और बच्चे।” साथ ही— “और माँ बिन-पढ़ी मेरी, / दुख में वह गढ़ी मेरी।”
भाव: माँ स्वयं भी पुत्र के वियोग में दुखी है, फिर भी वह अपने आँसू रोककर रोते हुए पिता को समझाती है। उसे गर्व है कि बेटा देश के लिए गया है और कहती है कि यदि वह पीछे हटता तो उसकी कोख लज्जित होती। वह पिता को कमज़ोर न पड़ने को कहती है ताकि बाकी बच्चे भी हिम्मत न हारें। दुख की घड़ी में वह परिवार के लिए किले (गढ़ी) के समान सहारा है।
कविता का कौन-सा अंश आपको सबसे अधिक भावनात्मक और प्रभावी लगता है और क्यों?
उत्तर
(नमूना उत्तर) मुझे वह अंश सबसे अधिक भावनात्मक लगता है जिसमें कवि सावन से कहते हैं— “और कहना मस्त हूँ मैं, / कातने में व्यस्त हूँ मैं, / वजन सत्तर सेर मेरा, / और भोजन ढेर मेरा … दुख डटकर ठेलता हूँ।” कवि जेल में अकेलेपन से टूट रहे हैं, फिर भी चाहते हैं कि माता-पिता को केवल अच्छी ख़बर मिले। अपने दुख को छिपाकर परिवार की खुशी की चिंता करना मन को छू जाता है। यह अंश हमें बताता है कि सच्चा प्रेम दूसरों के दुख को कम करने की कोशिश करता है।
विधा से संवाद – कविता का सौंदर्य
उत्तर
कविता से दी गई विशेषताओं वाली पंक्तियों को ढूँढ़कर लिखिए।
विशेषता | कविता की पंक्तियाँ |
स्मृति और दृश्य बिंब | “खुले सिर नंगे बदन वह, / घूमता फिरता मगन वह, / बड़े बाड़े में कि जाता, / बीज लौकी का लगाता” |
लोकभाषा की सहजता | “और भौजी और सरला, / सहज पानी सहज तरला”; “आज सबका मन चुआ होगा”; “तुझे बतलाता कि बेला / ने फलानी फूल झेला” |
पंक्तियों का दोहराव | “बहुत पानी गिर रहा है, / घर नजर में तिर रहा है”; “चार भाई चार बहिनें, / भुजा भाई प्यार बहिनें”; “हे सजीले हरे सावन, / हे कि मेरे पुण्य पावन, / तुम बरस लो वे न बरसें, / पाँचवें को वे न तरसें” |
आलंकारिक प्रयोग | “वज्र-भुज नवनीत-सा उर” (उपमा); “एक छिन सौ बरस है रे” (अतिशयोक्ति); “देह एक पहाड़ जैसे, / मन कि बड़ का झाड़ जैसे” (उपमा); “गिर रहा पानी झरा-झर” (अनुप्रास, ध्वन्यात्मकता) |
प्राकृतिक दृश्यों और भावों का संयोजन | “अभी पानी थम गया है, / मन निहायत नम गया है”; “एक पंछी बोलता है, / घाव उर के खोलता है” |
संबोधनात्मकता | “हे सजीले हरे सावन, / हे कि मेरे पुण्य पावन”; “हवा, उनको धीर देना”; “तू जरा-सा दुख कितना” |
विधा से संवाद – कविता की संरचना
‘घर की याद’ कवि के भीतर उठते भावों की यात्रा है। कविता में प्रकृति के माध्यम से व्यक्त इस यात्रा के प्रमुख चरणों का वर्णन करें। (संकेत– पानी का गिरना, सबेरा होना)
उत्तर
1. रात-भर पानी का गिरना: लगातार वर्षा से कवि का मन बेचैन है, हर क्षण सौ वर्ष जैसा लगता है।
2. सबेरा होना: बादलों के अँधेरे के कारण सबेरा भी रात जैसा लगता है; झर-झर पानी, सर-सर हवा के बीच कवि के प्राण काँपते हैं।
3. घर का आँखों में तैरना: वर्षा के साथ घर, भाई-बहन, माँ और पिता की यादें उमड़ती हैं।
4. कल्पना में परिवार का दुख: पिता का रोना, माँ का समझाना, भवानी के बचपन की बरसात वाली यादें और सबके मन का ‘चुआ’ होना (आँसुओं के रूप में बह निकलना)।
5. पानी का थमना: वर्षा रुकती है, पर मन “निहायत नम” है; बादलों से झाँकती किरणें माँ के लीपे आँगन जैसी लगती हैं; पेड़ चुप खड़े हैं, एक पक्षी की आवाज़ हृदय के घाव खोल देती है।
6. सावन को संदेशवाहक बनाना: कवि सावन और हवा से अनुरोध करते हैं कि वे परिवार को उनकी कुशलता का समाचार दें, दुख न बताएँ।
7. अंतिम प्रार्थना: “तुम बरस लो वे न बरसें, पाँचवें को वे न तरसें”— कवि की भावयात्रा बेचैनी से शुरू होकर परिवार के प्रति त्यागपूर्ण चिंता पर पूरी होती है।
विषयों से संवाद
वर्तमान में एकल परिवारों के बढ़ते चलन के संदर्भ में संयुक्त परिवार और एकल परिवार की तुलना कीजिए और कारण सहित लिखिए कि दोनों की कौन-कौन-सी बातें आपको पसंद हैं और कौन-कौन-सी नापसंद?
उत्तर
संयुक्त परिवार | एकल परिवार | |
पसंद | बड़ों का मार्गदर्शन और प्यार; दुख-सुख में सबका साथ; बच्चों को संस्कार और कहानियाँ; काम और खर्च का बँटवारा; अकेलापन नहीं। | अधिक स्वतंत्रता और निजता; निर्णय जल्दी होते हैं; बच्चों पर अधिक ध्यान; नौकरी के लिए कहीं भी जाना आसान। |
नापसंद | कभी-कभी निजता की कमी; मतभेद और झगड़े; सबकी राय से निर्णय में देरी। | बच्चों और बुज़ुर्गों का अकेलापन; संकट में सहारे की कमी; दादा-दादी के प्यार और अनुभव से दूरी। |
(नमूना उत्तर) मुझे संयुक्त परिवार का अपनापन और सहारा अधिक पसंद है, जैसा इस कविता के घर में है जहाँ चार भाई, चार बहनें और माता-पिता एक-दूसरे के दुख में साथ हैं। फिर भी एकल परिवार की स्वतंत्रता भी अच्छी लगती है। मेरे विचार से परिवार चाहे कोई भी हो, उसमें प्रेम और एक-दूसरे का ध्यान रखना सबसे ज़रूरी है।
कविता में बार-बार पानी गिरने का वर्णन है। लगातार बारिश होती रहे तो ग्रामीण और शहरी क्षेत्र में किस प्रकार की समस्याएँ उत्पन्न हो सकती हैं?
उत्तर
ग्रामीण क्षेत्र: खेतों में पानी भरने से फसलें सड़ जाती हैं; कच्चे घर और दीवारें गिर जाती हैं; नदियों में बाढ़ से गाँव कट जाते हैं; पशुओं का चारा खराब होता है; कच्ची सड़कें कीचड़ से भर जाती हैं; मलेरिया, डेंगू जैसे रोग फैलते हैं।
शहरी क्षेत्र: नालियाँ जाम होने से सड़कों पर जलभराव होता है; यातायात ठप हो जाता है; निचले इलाकों और तहख़ानों में पानी भर जाता है; बिजली कटौती और करंट का ख़तरा रहता है; पुरानी इमारतें गिर सकती हैं; दफ़्तर-विद्यालय बंद होते हैं और गंदगी से बीमारियाँ फैलती हैं।
कविता में सावन के बादल का प्रयोग एक संचार माध्यम के रूप में किया गया है जिसके द्वारा कवि अपने परिवार तक संदेश भेज रहा है। कक्षा में संचार के नए-पुराने माध्यमों में अंतर बताते हुए चर्चा कीजिए और लिखिए।
उत्तर
पुराने माध्यम | नए माध्यम |
संदेशवाहक, कबूतर, चिट्ठी, तार (टेलीग्राम), लैंडलाइन फ़ोन | मोबाइल फ़ोन, ई-मेल, संदेश-ऐप, वीडियो कॉल, सोशल मीडिया |
संदेश पहुँचने में दिन या सप्ताह लगते थे। | संदेश पल भर में पहुँच जाता है। |
हाथ से लिखे पत्रों में भावनाएँ और अपनापन अधिक झलकता था; पत्र सँजोकर रखे जाते थे। | संदेश छोटे और औपचारिक होते हैं, पर चित्र, आवाज़ और वीडियो भी भेजे जा सकते हैं। |
साक्षरता और डाक-व्यवस्था पर निर्भर। | बिजली, इंटरनेट और उपकरण पर निर्भर; निजता और साइबर सुरक्षा की चुनौती। |
चर्चा का निष्कर्ष: नए माध्यम तेज़ और सुविधाजनक हैं, पर पुराने पत्रों की आत्मीयता का अपना महत्त्व था। कविता में माँ को लिखना न आने की बात बताती है कि उस समय संचार कितना कठिन था।
भवानीप्रसाद मिश्र ने यह कविता स्वतंत्रता संग्राम के दौरान कारावास में लिखी थी। अपने शिक्षक और पुस्तकालय की सहायता से ‘भारत का स्वतंत्रता संग्राम’ विषय पर लेख लिखिए।
उत्तर
(नमूना उत्तर)
भारत का स्वतंत्रता संग्राम
भारत का स्वतंत्रता संग्राम लगभग नब्बे वर्षों तक चला एक लंबा संघर्ष था। इसकी पहली बड़ी लहर 1857 की क्रांति थी, जिसमें रानी लक्ष्मीबाई, तात्या टोपे, कुँवर सिंह जैसे वीरों ने अंग्रेज़ों से लोहा लिया। 1885 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना हुई। बाल गंगाधर तिलक ने “स्वराज मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है” का नारा दिया। 1905 के बंग-भंग के विरोध में स्वदेशी आंदोलन चला। महात्मा गांधी के नेतृत्व में असहयोग आंदोलन (1920), नमक सत्याग्रह और सविनय अवज्ञा आंदोलन (1930) तथा भारत छोड़ो आंदोलन (1942) हुए, जिनमें लाखों लोग जेल गए; भवानीप्रसाद मिश्र भी उनमें से एक थे। भगत सिंह, चंद्रशेखर आज़ाद जैसे क्रांतिकारियों और सुभाषचंद्र बोस की आज़ाद हिंद फ़ौज ने भी बलिदान दिए। अंततः 15 अगस्त 1947 को भारत स्वतंत्र हुआ। यह संग्राम हमें सिखाता है कि एकता, त्याग और दृढ़ संकल्प से कोई भी लक्ष्य पाया जा सकता है।
सृजन
कल्पना कीजिए कि कवि की माँ को पत्र लिखना आता है। कविता में वर्णित उनकी छवि और अनुमान के आधार पर लिखिए कि वे कवि के लिए पत्र में क्या-क्या लिखतीं?
उत्तर
(नमूना उत्तर)
प्रिय भवानी,
ढेर सारा आशीर्वाद।
आज सावन की झड़ी लगी है और तेरी बहुत याद आ रही है। तुझे बरसात कितनी प्यारी थी! तेरे लगाए लौकी के बीज की बेल बाड़े में खूब फैल गई है और बेला पर नए फूल आए हैं। तेरी बहनें मायके आई हैं, सब तुझे याद करती हैं। तेरे पिताजी ऊपर से तो कड़े बनते हैं, पर तेरा नाम लेते ही उनकी आँखें भर आती हैं; मैंने उन्हें समझा दिया है कि हमारा बेटा देश के काम से गया है, यह गर्व की बात है। बेटा, तू हिम्मत मत हारना, समय पर खाना खाना, सूत कातते रहना और सेहत का ध्यान रखना। हम सब ठीक हैं, हमारी चिंता न करना। भगवान तेरी रक्षा करें।
तेरी माँ
कविता में माँ और पिताजी के बीच कवि के विषय में की जाने वाली बातचीत का वर्णन है। उनकी इस बातचीत को संवाद-लेखन के रूप में प्रस्तुत कीजिए।
उत्तर
(नमूना उत्तर)
पिताजी (गीता-पाठ के बाद नीचे आकर, भरी आँखों से): सब बच्चे यहाँ हैं, बस हमारा पाँचवाँ नहीं है… भवानी…
माँ: अरे, आँख में पानी किसलिए? भवानी वहाँ अच्छा है।
पिताजी: आज इतनी बारिश हो रही है, उसे बरसात कितनी प्यारी थी!
माँ: वह आपका मन और अपनापन समझकर गया है। यह आपकी ही तो लीक है। अगर वह पाँव पीछे हटाता, तो मेरी कोख लजाती।
पिताजी: ठीक कहती हो।
माँ: तो फिर इस तरह कच्चे मत बनिए, नहीं तो बच्चे भी रो पड़ेंगे।
पिताजी (आँसू पोंछते हुए): कहाँ, मैं रोता कहाँ हूँ? धीरज मैं कहाँ खोता हूँ? … मैं नहीं रोऊँगा।
(और फिर उनकी आँखों से पानी बह निकलता है।)
अगर आपको किसी प्राकृतिक उपादान के माध्यम से अपने घर, मित्र या किसी संबंधी व्यक्ति को कोई संदेश भेजना हो तो आप किसे चुनेंगे और क्यों?
उत्तर
(नमूना उत्तर) मैं चाँद को अपना संदेशवाहक चुनूँगा, क्योंकि छात्रावास में रहते हुए मैं और मेरी माँ दोनों रात को एक ही चाँद देखते हैं। चाँद शांत, शीतल और सबको दिखाई देने वाला है। मैं उससे कहूँगा कि माँ को बताना, मैं मन लगाकर पढ़ रहा हूँ, ठीक से खाना खाता हूँ और उनकी बहुत याद आती है; पर यह मत बताना कि परीक्षा से पहले मैं थोड़ा घबराया हुआ हूँ।
भाषा से संवाद – व्याकरण की बात
कविता की पंक्तियों में रेखांकित स्थानीय भाषा के शब्दों का अर्थ स्पष्ट करते हुए उनसे नए वाक्य बनाइए।
उत्तर
पंक्ति | शब्द और अर्थ | नया वाक्य |
आज सबका मन चुआ होगा | चुआ — टपका, रिसा (आँसुओं के रूप में बह निकला) | बरसात में पुरानी छत से पानी चुआ रहा है। |
एक छिन सौ बरस है रे | छिन — क्षण, पल | बस छूटने के डर से एक-एक छिन भारी लग रहा था। |
तुझे बतलाता कि बेला / ने फलानी फूल झेला | फलानी — अमुक, कोई (विशेष) (बेला — एक सुगंधित फूल, मोगरा) | दादी कहती थीं कि फलानी तारीख़ को मेला लगेगा। |
और भौजी और सरला, सहज पानी सहज तरला | भौजी — भाभी (भाई की पत्नी) | भौजी ने त्योहार पर सबके लिए पकवान बनाए। |
मन कि बड़ का झाड़ जैसे | बड़ — बरगद का पेड़ (वट) | गाँव के चौपाल पर पुराना बड़ का पेड़ सबको छाया देता है। |
नीचे दी गई कविता की पंक्तियों में आए शब्दों की व्याकरणिक पहचान लिखिए।
उत्तर
पंक्ति | शब्द | व्याकरणिक पहचान |
(क) “बहुत पानी गिर रहा है” | पानी | संज्ञा |
बहुत | विशेषण | |
गिर रहा है | क्रिया | |
(ख) “पिताजी जिनको बुढ़ापा, एक क्षण भी नहीं व्यापा” | बुढ़ापा | संज्ञा (भाववाचक) |
व्यापा | क्रिया | |
जिनको | सर्वनाम (संबंधवाचक) | |
(ग) “खुले सिर नंगे बदन वह, घूमता फिरता मगन वह” | खुले | विशेषण (गुणवाचक) |
वह | सर्वनाम (पुरुषवाचक – अन्य पुरुष) | |
बदन | संज्ञा (जातिवाचक) | |
फिरता | क्रिया (‘घूमता फिरता’ संयुक्त क्रिया का अंश) | |
(घ) “एक पत्ता टूट जाए, बस कि धारा फूट जाए” | एक | विशेषण (संख्यावाचक) |
फूट जाए | क्रिया (संयुक्त क्रिया) | |
पत्ता | संज्ञा (जातिवाचक) | |
(ङ) “हे सजीले हरे सावन, हे कि मेरे पुण्य पावन” | सजीले | विशेषण (गुणवाचक) |
मेरे | सर्वनाम (उत्तम पुरुष; यहाँ सार्वनामिक विशेषण के रूप में) | |
सावन | संज्ञा |
गतिविधियाँ
कवि ने कविता में अपने परिवार का उल्लेख किया है। आप भी अपना एक परिवार-वृक्ष तैयार कीजिए और प्रत्येक सदस्य के व्यक्तित्व के बारे में कुछ पंक्तियाँ लिखिए।
उत्तर
(नमूना उत्तर)
पीढ़ी | सदस्य | व्यक्तित्व |
पहली पीढ़ी | दादाजी, दादीजी | दादाजी अनुशासनप्रिय हैं और रोज़ सुबह सैर करते हैं; दादीजी कहानियाँ सुनाती हैं और सबका ध्यान रखती हैं। |
दूसरी पीढ़ी | पिताजी, माँ, चाचाजी, चाचीजी | पिताजी मेहनती और शांत स्वभाव के हैं; माँ स्नेहमयी हैं और पढ़ाई में मदद करती हैं; चाचाजी हँसमुख हैं; चाचीजी बहुत अच्छा खाना बनाती हैं। |
तीसरी पीढ़ी | मैं, मेरी छोटी बहन, चचेरा भाई | मुझे किताबें पढ़ना पसंद है; बहन चित्रकारी में निपुण है; चचेरा भाई क्रिकेट का शौकीन है। |
कविता में प्रयुक्त ध्वनि आधारित शब्द (जैसे– झरा-झर, थर-थर, सर-सर) को पढ़कर एक छोटी-सी ऑडियो रिकॉर्डिंग या मौखिक पाठ तैयार कीजिए। बताइए कि ये शब्द कविता में कैसे वातावरण का निर्माण करते हैं?
उत्तर
‘झरा-झर’ से लगातार गिरती वर्षा की आवाज़, ‘हरा-हर’ से पत्तों के हिलने की सरसराहट, ‘सर-सर’ से बहती हवा और ‘थर-थर’ से काँपते प्राण की अनुभूति होती है। इन ध्वन्यात्मक शब्दों से पाठक को लगता है मानो वह स्वयं भीगी, ठंडी, उदास बरसाती सुबह में जेल की कोठरी में बैठा हो। ये शब्द बाहरी प्रकृति की ध्वनि को कवि के भीतर की बेचैनी से जोड़ देते हैं और कविता को संगीतमय तथा सजीव बनाते हैं। पाठ करते समय इन शब्दों को धीमी, लयबद्ध आवाज़ में पढ़ने से उदासी का वातावरण और गहरा हो जाता है।
प्रश्न 3 (भाषा संगम)
यदि आप ‘घर’ शब्द को किसी और भाषा में भी जानते हैं तो उस भाषा में भी लिखिए। “घर कि घर में सब जुड़े हैं” वाक्य को अपनी मातृभाषा में भी लिखिए।
(नमूना उत्तर) अंग्रेज़ी में ‘घर’ को home या house कहते हैं।
सरल हिंदी में: “घर, जहाँ घर के सब लोग इकट्ठे हैं।”
अंग्रेज़ी में: “Home, where everyone at home has gathered together.”
खोजबीन
शिक्षक की सहायता से ऐसी किसी अन्य कविता अथवा कहानी के बारे में जानकारी एकत्रित कीजिए जिसमें घर, परिवार की याद जैसी भावनाएँ चित्रित हों। साथ ही पुस्तकालय अथवा इंटरनेट की सहायता से उस रचना को कक्षा में पढ़कर एक संक्षिप्त प्रस्तुति दीजिए।
उत्तर
(नमूना उत्तर) निदा फ़ाज़ली की कविता ‘माँ’ (“बेसन की सोंधी रोटी पर खट्टी चटनी जैसी माँ”) में कवि घर से दूर रहते हुए माँ की छोटी-छोटी बातों को याद करते हैं— उसकी रसोई, उसकी थकान, उसका प्यार। ‘घर की याद’ की तरह इसमें भी घर की स्मृतियाँ दृश्य-बिंबों के रूप में उभरती हैं और माँ परिवार का केंद्र दिखाई देती है। प्रस्तुति में हमने दोनों कविताओं की तुलना करके बताया कि दोनों में दूरी के कारण परिवार का महत्त्व और गहरा अनुभव होता है।
प्रकृति के उपादानों की कल्पना संदेशवाहक के रूप में करने के अनेक उदाहरण साहित्य में मिलते हैं। ऐसी कुछ रचनाओं के बारे में पता लगाइए और बताइए कि इनमें प्रकृति के किन उपादानों को संदेशवाहक बनाया गया है?
उत्तर
रचना | रचनाकार | संदेशवाहक |
मेघदूत | कालिदास | मेघ (बादल)— यक्ष अपनी पत्नी के पास बादल से संदेश भेजता है। |
पवनदूत | धोयी | पवन (हवा) |
भ्रमरगीत (सूरसागर का अंश) | सूरदास | भ्रमर (भौंरा)— गोपियाँ उद्धव को भौंरे के बहाने उत्तर देती हैं। |
पद्मावत (नागमती वियोग खंड) | मलिक मुहम्मद जायसी | पक्षी (भौंरा और कौआ) — नागमती उनके द्वारा संदेश भेजती है। |
नल-दमयंती की कथा (महाभारत) | — | हंस — नल और दमयंती के बीच संदेश पहुँचाता है। |
घर की याद | भवानीप्रसाद मिश्र | सावन का बादल और हवा |
अतिरिक्त महत्वपूर्ण प्रश्न
बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQ)
कवि परिवार में कौन-सी संतान है?
उत्तर
(क) पहली (ख) तीसरी (ग) पाँचवीं (घ) सबसे छोटी
उत्तर: (ग) पाँचवीं
कवि ने संदेशवाहक किसे बनाया है?
उत्तर
(क) कबूतर (ख) सावन (बादल) (ग) चाँद (घ) डाकिया
उत्तर: (ख) सावन (बादल)
3. ‘नवनीत’ शब्द का अर्थ है
(क) नया गीत (ख) ताज़ा मक्खन (ग) नई नीति (घ) नवीन वस्त्र
उत्तर: (ख) ताज़ा मक्खन
कवि सावन से कहलवाते हैं कि वे किस काम में व्यस्त हैं?
उत्तर
(क) लिखने में (ख) सूत कातने में (ग) खेती में (घ) पढ़ाने में
उत्तर: (ख) सूत कातने में
‘बुनी हुई रस्सी’ के लिए भवानीप्रसाद मिश्र को कौन-सा पुरस्कार मिला?
उत्तर
(क) ज्ञानपीठ (ख) साहित्य अकादमी पुरस्कार (ग) पद्म भूषण (घ) सेकसरिया पुरस्कार
उत्तर: (ख) साहित्य अकादमी पुरस्कार
लघु उत्तरीय प्रश्न
“चार भाई चार बहिनें, भुजा भाई प्यार बहिनें” का भाव स्पष्ट कीजिए।
उत्तर
कवि के चार भाई और चार बहनें हैं। भाई उनकी भुजाओं के समान हैं, अर्थात शक्ति और सहारा हैं, और बहनें प्यार का स्वरूप हैं। इससे परिवार के प्रति कवि का गहरा लगाव प्रकट होता है।
कवि स्वयं को ‘अभागा’ क्यों कहते हैं?
उत्तर
पिता कवि को “सोने पर सुहागा” मानते हैं, पर वही बेटा आज जेल में बंद है और पिता के दुख का कारण बना है। परिवार के बीच न रह पाने और उनकी आँखों में आँसू लाने के कारण कवि स्वयं को अभागा कहते हैं।
कवि सावन से परिवार को कौन-सी बातें न बताने का आग्रह करते हैं?
उत्तर
कवि कहते हैं कि सावन यह न बताए कि वे रातों को जागते हैं, लोगों से भागते हैं, मौन रहते हैं या स्वयं को भी नहीं पहचान पा रहे। ऐसी कोई बात न कहे जिससे परिवार को उनके दुख की शंका हो।
पिता की देह और मन की तुलना किससे की गई है और क्यों?
उत्तर
पिता की देह की तुलना पहाड़ से और मन की तुलना बरगद (बड़) के पेड़ से की गई है। शरीर पहाड़ जैसा मज़बूत है, पर मन बरगद जैसा फैला हुआ है, जिसकी हर डाल (परिवार का हर सदस्य) से गहरी जड़ें जुड़ी हैं; एक पत्ता टूटे तो भी आँसू बह निकलते हैं।
दीर्घ उत्तरीय प्रश्न
‘घर की याद’ कविता में चित्रित परिवार का परिचय देते हुए बताइए कि यह कविता पारिवारिक संबंधों की गरिमा को कैसे प्रकट करती है।
उत्तर
कविता में एक बड़ा, संयुक्त और प्रेमपूर्ण परिवार है— चार भाई, चार बहनें, भाभी, सरला, माता और पिता। पिता “भोले बहादुर” हैं, जिनकी भुजाएँ वज्र जैसी और हृदय मक्खन जैसा है। माँ अनपढ़ है, पर स्नेह और धैर्य की मूर्ति है; वह दुख में भी परिवार का गढ़ बनी रहती है। भाई कवि की भुजाएँ और बहनें प्यार हैं। कवि के जेल जाने पर पूरा परिवार दुखी है, पर एक-दूसरे को सँभालता भी है— माँ पिता को धीरज देती है, पिता “मैं नहीं रोऊँगा” कहते हैं, भाभी और बहनें संकोच से आँसू रोकती हैं। कवि भी अपने कष्ट छिपाकर परिवार को खुश रखना चाहते हैं। इस प्रकार कविता दिखाती है कि सच्चे पारिवारिक संबंध प्रेम, त्याग, धैर्य और एक-दूसरे के सुख की चिंता पर टिके होते हैं।
‘घर की याद’ कविता में देशप्रेम और परिवार-प्रेम के बीच के संतुलन को स्पष्ट कीजिए।
उत्तर
कवि ने देश की स्वतंत्रता के लिए जेल जाना स्वीकार किया, यह उनका देशप्रेम है। जेल में उन्हें परिवार की गहरी याद सताती है, यह उनका परिवार-प्रेम है। पर वे अपने निर्णय पर पछताते नहीं। माँ भी कहती है कि भवानी “तुम्हारी लीक” पर चलकर गया है और यदि वह पाँव पीछे हटाता तो उसकी कोख लजाती। इसका अर्थ है कि परिवार भी कवि के देशप्रेम पर गर्व करता है। कवि अपने दुख को छिपाकर परिवार को धीरज देना चाहते हैं— “कहना मस्त हूँ मैं”। इस प्रकार कविता में दोनों प्रेम एक-दूसरे के विरोधी नहीं, बल्कि पूरक हैं; परिवार का प्रेम ही उन्हें देश के लिए कष्ट सहने की शक्ति देता है।