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Class 11 Hindi Antra Chapter 5

NCERT Solutions for Class 11 Hindi Antra Chapter 5: ज्योतिबा फुले

Class

Subject

Book

Chapter

Session

Questions covered

XI

Hindi

Antra (NCERT)

5 – ज्योतिबा फुले

2026-27

13 of 13

बिंदु

विवरण

लेखिका

सुधा अरोड़ा (जन्म 1946)

विधा

जीवनी-परक लेख

विषय

महात्मा ज्योतिबा फुले (1827–1890) और सावित्री बाई फुले का संघर्ष – जाति, वर्ण और लिंग-आधारित शोषण के विरुद्ध; स्त्री-शिक्षा; सत्यशोधक समाज

प्रमुख तथ्य

‘गुलामगिरी’, ‘शेतकर्यांचा आसूड’, ‘सार्वजनिक सत्यधर्म’; 14 जनवरी 1848 को पुणे के भिड़े बाड़े में पहली कन्याशाला; नई विवाह-विधि और मंगलाष्टक; 1888 में ‘महात्मा’ उपाधि; बालहत्या प्रतिबंधक गृह; घर का पानी का हौद सबके लिए खोलना

संदेश

समानता, शिक्षा और आचरण से समाज-परिवर्तन; आदर्श दांपत्य

Q1

ज्योतिबा फुले का नाम समाज-सुधारकों की सूची में शुमार क्यों नहीं किया गया? तर्क सहित उत्तर लिखिए।

Answer

उत्तर

  1. सूची बनाने वालों की मानसिकता: भारत के पाँच प्रमुख समाज-सुधारकों की सूची बनाने वाले उच्चवर्णीय समाज के प्रतिनिधि थे। वे वही सुधार चाहते थे जिससे उनका वर्चस्व बना रहे।
  2. फुले का क्रांतिकारी दृष्टिकोण: फुले ब्राह्मण वर्चस्व और पुराने सामाजिक मूल्यों को बनाए रखने वाली शिक्षा और सुधार के समर्थक नहीं थे; उन्होंने पूँजीवादी और पुरोहितवादी मानसिकता पर सीधा हल्ला बोला।
  3. सत्यशोधक समाज और साहित्य: उनके द्वारा स्थापित सत्यशोधक समाज और ‘गुलामगिरी’ जैसा क्रांतिकारी साहित्य जाति-व्यवस्था की जड़ों पर चोट करता था।
  4. सर्वांगीण सुधार: वे दलितों, शूद्रों, किसानों और स्त्रियों – सबकी समानता चाहते थे; सर्वांगीण सुधार न चाहने वाले ‘संभ्रांत’ समीक्षकों को यह स्वीकार नहीं था।
  5. ब्राह्मणी मानसिकता का पर्दाफ़ाश: लेखिका कहती है कि फुले को सूची में स्थान न देना इसी मानसिकता की असलियत उजागर करता है।

सूची बनाने वाले उच्चवर्णीय प्रतिनिधि थे, जो अपना वर्चस्व बनाए रखने वाला सीमित सुधार चाहते थे; फुले ने ब्राह्मण वर्चस्व, पुरोहितवाद और जाति-व्यवस्था पर सीधा प्रहार कर सर्वांगीण समानता की माँग की, इसलिए उन्हें जान-बूझकर सूची से बाहर रखा गया।

Q2

शोषण-व्यवस्था ने क्या-क्या षड्यंत्र रचे और क्यों?

Answer

उत्तर

षड्यंत्र

  1. राजसत्ता और धर्मसत्ता की साँठ-गाँठ: फुले के अनुसार राजसत्ता और ब्राह्मण आधिपत्य वाली धर्मवादी सत्ता आपस में मिलकर सामाजिक व्यवस्था और मशीनरी का उपयोग शोषण के लिए करती थीं।
  2. वर्ण, जाति और वर्ग-व्यवस्था: इन तीनों को एक-दूसरे का पूरक बनाकर शोषण को स्थायी बनाया गया।
  3. शिक्षा से वंचित करना: शूद्रों, दलितों और स्त्रियों के लिए शिक्षा के दरवाज़े बंद रखे गए, ताकि वे अपने मानवीय अधिकार न समझ सकें। गरीबों से कर लेकर उसे उच्चवर्ग के बच्चों की शिक्षा पर खर्च किया गया।
  4. स्त्रियों के लिए अलग नियम: पुरुषों के लिए अलग और स्त्रियों के लिए अलग नियम बनाए गए; विवाह-विधि में स्त्री की गुलामी सिद्ध करने वाले मंत्र रखे गए।
  5. विरोध और बहिष्कार: फुले दंपति के काम में बाधाएँ डाली गईं – पुरोहितों और रिश्तेदारों के दबाव में फुले के पिता ने उन्हें घर से निकाल दिया; सावित्री बाई पर गालियाँ, थूक, पत्थर और गोबर फेंके गए।
  6. इतिहास से मिटाना: फुले को समाज-सुधारकों की सूची से बाहर रखा गया।

क्यों: ताकि उच्चवर्ग और पुरोहितों का वर्चस्व, विशेषाधिकार और आर्थिक लाभ बना रहे; शोषित वर्ग अज्ञानी, असंगठित और दबा रहे और विरोध न कर सके।

राजसत्ता-धर्मसत्ता की साँठ-गाँठ, वर्ण-जाति-वर्ग का गठजोड़, शूद्रों व स्त्रियों को शिक्षा से वंचित रखना, स्त्रियों के लिए अलग नियम, फुले दंपति का बहिष्कार और उत्पीड़न, और इतिहास से उनका नाम हटाना – यह सब उच्चवर्ग और पुरोहितों का वर्चस्व व लाभ बनाए रखने और शोषितों को अज्ञानी व असंगठित रखने के लिए किया गया।

Q3

ज्योतिबा फुले द्वारा प्रतिपादित आदर्श परिवार क्या आपके विचारों के आदर्श परिवार से मेल खाता है? पक्ष-विपक्ष में अपने उत्तर दीजिए।

Answer

उत्तर

फुले का आदर्श परिवार: “जिस परिवार में पिता बौद्ध, माता ईसाई, बेटी मुसलमान और बेटा सत्यधर्मी हो, वह परिवार एक आदर्श परिवार है।” – इसका मूल भाव है धार्मिक सहिष्णुता, विचार-स्वातंत्र्य और परस्पर सम्मान।

पक्ष में

  1. यह विचार सिखाता है कि परिवार के हर सदस्य को अपनी आस्था चुनने की स्वतंत्रता होनी चाहिए।
  2. विभिन्न धर्मों के लोग एक छत के नीचे प्रेम से रह सकें, तो समाज में सांप्रदायिक सद्भाव बढ़ेगा।
  3. यह ‘वसुधैव कुटुंबकम्’ और भारत की ‘विविधता में एकता’ के अनुरूप है।

विपक्ष में/व्यावहारिक कठिनाइयाँ

  1. अलग-अलग धर्मों के रीति-रिवाज, त्योहार, खान-पान से व्यावहारिक मतभेद और संघर्ष हो सकते हैं।
  2. आज के समाज में ऐसे परिवार को सामाजिक स्वीकृति मिलना कठिन है।

मेरा विचार: मेरे लिए आदर्श परिवार वह है जिसमें प्रेम, परस्पर सम्मान, समानता (स्त्री-पुरुष दोनों को बराबर अधिकार), संवाद और हर सदस्य की स्वतंत्रता हो – चाहे सब एक ही धर्म के हों या अलग-अलग। इस अर्थ में फुले का विचार मेरे आदर्श से मूल भावना में मेल खाता है।

फुले का आदर्श परिवार (अलग-अलग धर्मों के सदस्य) धार्मिक सहिष्णुता और विचार-स्वातंत्र्य का प्रतीक है – पक्ष में यह सद्भाव और स्वतंत्रता सिखाता है, विपक्ष में व्यावहारिक मतभेद और सामाजिक स्वीकृति की कठिनाई है; मूल भावना (प्रेम, सम्मान, समानता, स्वतंत्रता) में यह मेरे आदर्श परिवार से मेल खाता है।

Q4

स्त्री-समानता को प्रतिष्ठित करने के लिए ज्योतिबा फुले के अनुसार क्या-क्या होना चाहिए?

Answer

उत्तर

  1. स्त्री-शिक्षा: पुरुषों ने स्त्री-शिक्षा के दरवाज़े इसलिए बंद रखे कि वह अपने मानवीय अधिकार न समझ सके; इसलिए स्त्रियों को शिक्षा मिलनी चाहिए – उन्होंने स्वयं सावित्री बाई को पढ़ाया और कन्याशालाएँ खोलीं।
  2. समान स्वतंत्रता और समान नियम: जैसी स्वतंत्रता पुरुष लेता है, वैसी ही स्त्री को मिले; पुरुषों और स्त्रियों के लिए अलग-अलग नियम पक्षपात हैं।
  3. नई विवाह-विधि: विवाह से ब्राह्मण (पुरोहित) का स्थान हटाया जाए; पुरुष-प्रधान संस्कृति और स्त्री की गुलामी सिद्ध करने वाले मंत्र निकाले जाएँ; सरल मंगलाष्टक हों, जिनमें वधू वर से शपथ ले कि वह स्त्री को उसका अधिकार और स्वतंत्रता देगा।
  4. शोषण के विरुद्ध आंदोलन: दलितों के साथ स्त्रियों को भी शोषण-व्यवस्था के विरुद्ध आंदोलन करना चाहिए।
  5. विधवाओं और अनाथों का संरक्षण: बालहत्या प्रतिबंधक गृह में विधवाओं और उनके बच्चों को आश्रय।

स्त्री-शिक्षा, स्त्री-पुरुष के लिए समान स्वतंत्रता व समान नियम, पुरोहित-रहित नई विवाह-विधि जिसमें वर स्त्री के अधिकार और स्वतंत्रता की शपथ ले, शोषण के विरुद्ध स्त्रियों का आंदोलन, और विधवाओं-अनाथों का संरक्षण।

Q5

सावित्री बाई के जीवन में क्रांतिकारी परिवर्तन किस प्रकार आए? क्रमबद्ध रूप में लिखिए।

Answer

उत्तर

  1. बचपन की जिज्ञासा: छह-सात साल की उम्र में शिखल गाँव के हाट में मिशनरियों का गाना सुनते हुए एक लाट साहब ने उसे एक पुस्तक दी।
  2. पहला विद्रोह: पिता ने ‘ईसाइयों की चीज़’ कहकर पुस्तक कूड़े में फेंक दी, पर सावित्री ने उसे उठाकर छिपा लिया।
  3. विवाह (1840): ज्योतिबा फुले से विवाह के बाद वह उस किताब को सहेजकर ससुराल ले आई।
  4. शिक्षा: ज्योतिबा ने उसे मराठी के साथ अंग्रेज़ी लिखना-पढ़ना-बोलना भी सिखाया; शिक्षित होने के बाद उसने वह पुस्तक पढ़ी।
  5. पहली शिक्षिका: 14 जनवरी 1848 को पुणे के भिड़े बाड़े में पहली कन्याशाला खुली, जहाँ वह पढ़ाने लगी।
  6. संघर्ष: पाठशाला जाते समय लोग गालियाँ देते, थूकते, पत्थर और गोबर फेंकते; पुरोहितों के दबाव में ससुर ने घर से निकाल दिया – फिर भी वह डटी रही।
  7. समाज-सेवा: झुग्गी-झोपड़ियों में जाकर लड़कियों को पढ़ने भेजने का आग्रह; बालहत्या प्रतिबंधक गृह में विधवाओं और अनाथ बच्चों की देखभाल; घर का पानी का हौद सभी जातियों के लिए खोलना।
  8. पचास वर्षों तक (1840–1890) पति के साथ कंधे-से-कंधा मिलाकर मिशन पूरा किया।

हाट में मिली पुस्तक को पिता के विरोध के बावजूद छिपाकर रखना → 1840 में ज्योतिबा से विवाह → पति से मराठी-अंग्रेज़ी की शिक्षा → 1848 में पहली कन्याशाला में शिक्षिका → गालियाँ-पत्थर और घर से निकाले जाने के बावजूद डटे रहना → विधवाओं, अनाथों, दलितों की सेवा – पचास वर्ष तक पति के साथ मिशन।

Q6

ज्योतिबा फुले और सावित्री बाई के जीवन से प्रेरित होकर आप समाज में क्या परिवर्तन करना चाहेंगे?

Answer

उत्तर

  1. बालिका-शिक्षा: अपने आसपास की उन लड़कियों को विद्यालय भेजने के लिए परिवारों को प्रेरित करूँगा/करूँगी जो पढ़ाई छोड़ चुकी हैं; ज़रूरतमंद बच्चों को निःशुल्क पढ़ाऊँगा।
  2. जाति-भेद का विरोध: जाति के आधार पर भेदभाव, छुआछूत और अपमान का विरोध करूँगा; सभी के साथ बराबरी का व्यवहार करूँगा।
  3. स्त्री-पुरुष समानता: घर में लड़के-लड़की को समान अवसर, घरेलू कामों में बराबर भागीदारी को बढ़ावा दूँगा; दहेज और बाल-विवाह का विरोध करूँगा।
  4. अंधविश्वास और कर्मकांड के विरुद्ध जागरूकता फैलाऊँगा; सरल, खर्चीले कर्मकांडों से मुक्त विवाह का समर्थन करूँगा।
  5. वंचितों की सेवा: अनाथ बच्चों, विधवाओं और बुज़ुर्गों के लिए काम करने वाली संस्थाओं में सहयोग करूँगा।
  6. कथनी-करनी में एकता: फुले की तरह जो कहूँगा, उसे पहले अपने आचरण में उतारूँगा।

बालिका-शिक्षा का प्रसार, जाति-भेद और छुआछूत का विरोध, स्त्री-पुरुष समानता, दहेज-बाल विवाह-अंधविश्वास के विरुद्ध जागरूकता, वंचितों की सेवा, और फुले की तरह कथनी-करनी में एकता – ये परिवर्तन करना चाहूँगा।

Q7

उनका दांपत्य जीवन किस प्रकार आधुनिक दंपतियों को प्रेरणा प्रदान करता है?

Answer

उत्तर

  1. समानता: ज्योतिबा ने पत्नी को शिक्षित कर बराबरी का दर्जा दिया; दोनों ने हर मुकाम पर कंधे-से-कंधा मिलाकर काम किया।
  2. साझा लक्ष्य: दोनों का जीवन एक लक्ष्य – समाज-सुधार, शिक्षा और समानता – के प्रति समर्पित था; “एक और एक मिलकर ग्यारह”।
  3. परस्पर सहयोग और विश्वास: घर से निकाले जाने, अपमान और विरोध के बीच भी दोनों एक-दूसरे का संबल बने रहे।
  4. दीर्घ साथ: पचास वर्षों (1840–1890) तक एक प्राण होकर साथ रहे।
  5. आधुनिक संदर्भ: लेखिका कहती है कि आज जब प्रबुद्ध, प्रतिष्ठित दंपति भी कुछ वर्षों बाद अलग होकर एक-दूसरे को नष्ट करने पर आमादा हो जाते हैं, तब फुले दंपति का एक-दूसरे और एक लक्ष्य के प्रति समर्पित जीवन आदर्श दांपत्य की मिसाल है।

आधुनिक दंपति इससे सीख सकते हैं – समानता, सम्मान, संवाद, एक-दूसरे के सपनों में सहयोग और कठिन समय में साथ।

समानता (पत्नी को शिक्षित कर बराबरी), साझा लक्ष्य के प्रति समर्पण, संकट में परस्पर सहयोग-विश्वास और पचास वर्षों का अटूट साथ – जब आज प्रतिष्ठित दंपति भी अलग होकर एक-दूसरे को नष्ट करने लगते हैं, तब फुले दंपति का जीवन आदर्श दांपत्य की प्रेरणा देता है।

Q8

फुले दंपति ने स्त्री समस्या के लिए जो कदम उठाया था, क्या उसी का अगला चरण ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ कार्यक्रम है?

Answer

उत्तर

हाँ, ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ (2015) को फुले दंपति के प्रयासों का अगला चरण कहा जा सकता है।

फुले दंपति के कदम

‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’

1848 में पहली कन्याशाला खोलकर स्त्री-शिक्षा की शुरुआत

बालिकाओं की शिक्षा सुनिश्चित करना, ड्रॉप-आउट रोकना

बालहत्या प्रतिबंधक गृह – अनाथ और विधवाओं के नवजात शिशुओं को बचाना

कन्या भ्रूण-हत्या रोकना, घटते बाल लिंगानुपात को सुधारना

झुग्गियों में जाकर लड़कियों को पाठशाला भेजने का आग्रह

जन-जागरूकता अभियान, सामुदायिक भागीदारी

स्त्री-समानता और अधिकारों की लड़ाई

लड़कियों के प्रति सामाजिक सोच बदलना, सशक्तीकरण

अंतर: फुले दंपति का प्रयास निजी, विरोध और बहिष्कार के बीच किया गया क्रांतिकारी कदम था; आज का कार्यक्रम सरकार द्वारा संचालित, कानूनी और संस्थागत सहयोग से युक्त है। फुले दंपति ने जो बीज बोया, यह कार्यक्रम उसी का विस्तार है – पर लक्ष्य पूरा करने के लिए समाज की सोच में बदलाव अब भी आवश्यक है।

हाँ – फुले दंपति की कन्याशाला (स्त्री-शिक्षा) और बालहत्या प्रतिबंधक गृह (शिशु-रक्षा) का ही विस्तार ‘बेटी बचाओ’ (भ्रूण-हत्या रोकना) और ‘बेटी पढ़ाओ’ (बालिका-शिक्षा) में दिखता है; अंतर यह है कि उनका प्रयास विरोध के बीच निजी क्रांति था, जबकि आज का कार्यक्रम सरकारी और संस्थागत है।

Q9

निम्नलिखित पंक्तियों का आशय स्पष्ट कीजिए –
(क) सच का सबेरा होते ही वेद डूब गए, विद्या शूद्रों के घर चली गई, भू-देव (ब्राह्मण) शरमा गए।
(ख) इस शोषण-व्यवस्था के खिलाफ़ दलितों के अलावा स्त्रियों को भी आंदोलन करना चाहिए।

Answer

उत्तर

(क) जब ब्राह्मणों ने शिकायत के स्वर में कहा कि ‘विद्या शूद्रों के घर चली गई’, तो फुले ने तुरंत यह उत्तर दिया। इसका आशय है – जब सत्य और ज्ञान का प्रकाश (सबेरा) फैला, तो वेदों के नाम पर चलाया जा रहा ज्ञान का एकाधिकार और अंधविश्वास समाप्त हो गया (‘डूब गए’); शिक्षा अब केवल ऊँची जातियों की बपौती नहीं रही, शूद्रों तक भी पहुँच गई; और जो ब्राह्मण स्वयं को पृथ्वी का देवता (भू-देव) मानते थे, उनका अहंकार टूटा और वे लज्जित हुए। यह शिक्षा के लोकतंत्रीकरण और जातिगत वर्चस्व के अंत की घोषणा है।

(ख) फुले मानते थे कि वर्ण, जाति और वर्ग पर आधारित यह शोषण-व्यवस्था केवल दलितों को ही नहीं, स्त्रियों को भी दबाती है – उन्हें शिक्षा, स्वतंत्रता और अधिकारों से वंचित रखती है; उनके लिए अलग नियम बनाती है। इसलिए दलितों की तरह स्त्रियों को भी संगठित होकर इस व्यवस्था के विरुद्ध आंदोलन करना चाहिए, क्योंकि शोषित वर्ग की मुक्ति तभी संभव है जब सब मिलकर संघर्ष करें।

(क) सत्य-ज्ञान का प्रकाश फैलते ही वेदों के नाम पर ज्ञान का एकाधिकार टूटा, शिक्षा शूद्रों तक पहुँची और स्वयं को भू-देव मानने वाले ब्राह्मणों का अहंकार लज्जित हुआ। (ख) यह शोषण-व्यवस्था दलितों के साथ स्त्रियों को भी दबाती है, इसलिए स्त्रियों को भी इसके विरुद्ध संगठित आंदोलन करना चाहिए।

Q10

निम्नलिखित गद्यांशों की संदर्भ सहित व्याख्या कीजिए –
(क) स्वतंत्रता का अनुभव … हर स्त्री की थी।
(ख) मुझे ‘महात्मा’ कहकर … अलग न करें।

Answer

उत्तर

संदर्भ: प्रस्तुत गद्यांश हमारी पाठ्यपुस्तक अंतरा (भाग 1) में संकलित सुधा अरोड़ा द्वारा लिखित पाठ ‘ज्योतिबा फुले’ से लिए गए हैं।

(क) “स्वतंत्रता का अनुभव हम स्त्रियों को है ही नहीं। इस बात की आज शपथ लो कि स्त्री को उसका अधिकार दोगे और उसे अपनी स्वतंत्रता का अनुभव करने दोगे। यह आकांक्षा सिर्फ़ वधू की ही नहीं, गुलामी से मुक्ति चाहनेवाली हर स्त्री की थी।”

प्रसंग: ज्योतिबा फुले ने स्त्री-समानता को प्रतिष्ठित करने वाली नई विवाह-विधि बनाई और उसके लिए नए मंगलाष्टक रचे। यह उन्हीं मंगलाष्टकों का अंश है।

व्याख्या: इन मंगलाष्टकों में वधू वर से कहती है कि हम स्त्रियों को आज तक स्वतंत्रता का अनुभव ही नहीं हुआ; तुम आज शपथ लो कि मुझे मेरा अधिकार दोगे और स्वतंत्रता से जीने दोगे। लेखिका कहती है कि यह माँग केवल उस विवाह की वधू की नहीं, बल्कि सदियों से गुलामी झेल रही हर स्त्री के मन की आकांक्षा थी। फुले ने विवाह जैसे संस्कार को स्त्री की गुलामी के बजाय उसकी स्वतंत्रता और समानता की शपथ का अवसर बना दिया।

विशेष: स्त्री-मुक्ति की चेतना; पारंपरिक विवाह-मंत्रों के विरोध में क्रांतिकारी विकल्प; सरल, स्पष्ट भाषा।

(ख) “मुझे ‘महात्मा’ कहकर मेरे संघर्ष को पूर्णविराम मत दीजिए। जब व्यक्ति मठाधीश बन जाता है तब वह संघर्ष नहीं कर सकता। इसलिए आप सब साधारण जन ही रहने दें, मुझे अपने बीच से अलग न करें।”

प्रसंग: सन् 1888 में जब ज्योतिबा फुले को ‘महात्मा’ की उपाधि से सम्मानित किया गया, तब उन्होंने यह कहा।

व्याख्या: फुले कहते हैं कि मुझे ‘महात्मा’ कहकर मेरे संघर्ष पर पूर्णविराम मत लगाइए। जब कोई व्यक्ति महान बनाकर ऊँचे आसन (मठाधीश) पर बैठा दिया जाता है, तो वह जनता से कट जाता है और संघर्ष नहीं कर पाता – उसकी पूजा होने लगती है, पर उसके विचारों पर अमल नहीं होता। इसलिए वे चाहते थे कि उन्हें साधारण जन ही समझा जाए, ताकि वे लोगों के बीच रहकर उनके हक की लड़ाई जारी रख सकें। इससे फुले की विनम्रता, निरहंकारिता और संघर्ष के प्रति अटूट प्रतिबद्धता प्रकट होती है।

विशेष: व्यक्ति-पूजा का विरोध; ‘पूर्णविराम’ और ‘मठाधीश’ का सार्थक प्रयोग; कथनी-करनी की एकता।

(क) फुले के मंगलाष्टक में वधू वर से स्त्री के अधिकार और स्वतंत्रता की शपथ माँगती है – यह गुलामी से मुक्ति चाहने वाली हर स्त्री की आकांक्षा थी; विवाह को स्त्री-स्वतंत्रता की शपथ बनाया गया। (ख) 1888 में ‘महात्मा’ उपाधि मिलने पर फुले ने कहा कि महान बनाकर ऊँचे आसन पर बिठाने से संघर्ष रुक जाता है, इसलिए उन्हें साधारण जन ही रहने दें – यह उनकी विनम्रता और संघर्ष के प्रति प्रतिबद्धता है।

योग्यता-विस्तार

Q11

अपने आसपास के कुछ सामाजिक कार्यकर्ताओं से बातचीत कर उसके आधार पर एक रिपोर्ट तैयार कीजिए।

Answer

उत्तर

रिपोर्ट: हमारे मोहल्ले के सामाजिक कार्यकर्ता

दिनांक: 20 अक्टूबर 2026 | तैयारकर्ता: कक्षा 11 का विद्यार्थी

हमारी कक्षा के कुछ विद्यार्थियों ने अपने क्षेत्र के तीन सामाजिक कार्यकर्ताओं से बातचीत की।

  1. श्रीमती सुनीता वर्मा (सेवानिवृत्त शिक्षिका): पिछले आठ वर्षों से झुग्गी बस्ती के 40 बच्चों को शाम को निःशुल्क पढ़ाती हैं। उन्होंने बताया कि शुरू में माता-पिता बेटियों को भेजने से हिचकते थे, पर अब लड़कियाँ लड़कों से अधिक संख्या में आती हैं। चुनौती – किताबों और जगह की कमी।
  2. श्री रमेश यादव (युवा कार्यकर्ता): ‘स्वच्छ मोहल्ला’ अभियान चलाते हैं, नशा-मुक्ति पर नुक्कड़ नाटक करते हैं। उनका कहना है कि युवाओं को सकारात्मक दिशा देना सबसे बड़ा काम है।
  3. श्रीमती फ़ातिमा ख़ान (स्वयं सहायता समूह संयोजिका): 60 महिलाओं को सिलाई, अचार-पापड़ और लघु-ऋण के माध्यम से आत्मनिर्भर बना रही हैं; घरेलू हिंसा की शिकार महिलाओं को कानूनी सहायता दिलाती हैं।

निष्कर्ष: तीनों कार्यकर्ताओं ने बताया कि उन्हें शुरुआत में विरोध और उपहास झेलना पड़ा – ठीक वैसे ही जैसे फुले दंपति को। उनका संदेश है – “परिवर्तन धीरे होता है, पर निरंतर प्रयास से अवश्य होता है।” हमने तय किया कि हम सप्ताह में एक दिन बच्चों को पढ़ाने में सहयोग करेंगे।

तीन सामाजिक कार्यकर्ताओं (निःशुल्क शिक्षा, स्वच्छता-नशामुक्ति अभियान, महिला स्वयं सहायता समूह) से बातचीत पर आधारित रिपोर्ट ऊपर दी गई है – उनके कार्य, चुनौतियाँ, फुले दंपति से समानता और हमारा संकल्प।

Q12

क्या आज भी समाज में स्त्री-पुरुष के बीच भेदभाव किया जाता है? कक्षा में चर्चा कीजिए।

Answer

उत्तर

हाँ, कम हुआ है पर पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ।

भेदभाव के रूप

  1. जन्म से पहले: कन्या भ्रूण-हत्या, बेटे की चाह; कई राज्यों में बाल लिंगानुपात असंतुलित।
  2. शिक्षा: कुछ परिवारों में बेटों की शिक्षा पर अधिक खर्च; लड़कियों की पढ़ाई जल्दी छुड़वाना।
  3. घर में: घरेलू काम और देखभाल का बोझ मुख्यतः स्त्रियों पर; निर्णयों में कम भागीदारी।
  4. कार्यस्थल: समान काम के लिए कम वेतन (वेतन अंतर), नेतृत्व पदों पर कम प्रतिनिधित्व, उत्पीड़न।
  5. सामाजिक: दहेज, बाल-विवाह, पहनावे-आने-जाने पर रोक, सुरक्षा का भय, घरेलू हिंसा।
  6. संपत्ति: कानूनन अधिकार होते हुए भी व्यवहार में बेटियों को पैतृक संपत्ति से वंचित करना।

सकारात्मक बदलाव: लड़कियाँ शिक्षा, खेल, विज्ञान, सेना, अंतरिक्ष, राजनीति में आगे बढ़ रही हैं; कानून (घरेलू हिंसा अधिनियम, POSH अधिनियम, महिला आरक्षण अधिनियम 2023), बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ जैसी योजनाएँ।

निष्कर्ष: कानून से अधिक सोच में बदलाव ज़रूरी है – यह बदलाव घर से, हमसे शुरू होना चाहिए।

हाँ – कन्या भ्रूण-हत्या, शिक्षा में असमानता, घरेलू काम का बोझ, वेतन अंतर, दहेज, हिंसा और संपत्ति से वंचना के रूप में भेदभाव आज भी है, हालाँकि शिक्षा, कानूनों और योजनाओं से स्थिति सुधरी है; सबसे ज़रूरी है सोच में बदलाव।

Q13

सावित्री बाई और महात्मा फुले ने समाज-हित के जो काम किए उनकी सूची बनाइए।

Answer

उत्तर

  1. स्त्री-शिक्षा: 14 जनवरी 1848 को पुणे के भिड़े बाड़े में भारत की पहली कन्याशाला की स्थापना; शूद्र और अतिशूद्र लड़कियों के लिए एक के बाद एक पाठशालाएँ।
  2. सावित्री बाई को शिक्षित करना – जो भारत की पहली महिला शिक्षिका बनीं।
  3. सत्यशोधक समाज (1873) की स्थापना – जाति-भेद, पुरोहितवाद और अंधविश्वास के विरुद्ध।
  4. क्रांतिकारी साहित्य: ‘गुलामगिरी’, ‘शेतकर्यांचा आसूड’ (किसानों की दशा पर), ‘सार्वजनिक सत्यधर्म’।
  5. नई विवाह-विधि: पुरोहित-रहित विवाह, स्त्री-समानता वाले नए मंगलाष्टक।
  6. बालहत्या प्रतिबंधक गृह: विधवाओं और उनके नवजात शिशुओं, अनाथ बच्चों को आश्रय और देखभाल।
  7. छुआछूत का विरोध: अपने घर का पानी का हौद महार, चमार, मांग जैसी सभी जातियों के लिए खोलना।
  8. जन-जागरूकता: झुग्गी-झोपड़ियों में जाकर लड़कियों को पढ़ने भेजने का आग्रह।
  9. किसानों और श्रमिकों के अधिकारों की आवाज़ उठाना।
  10. विधवा-पुनर्विवाह का समर्थन और विधवाओं के केश-मुंडन जैसी कुप्रथाओं का विरोध।

पहली कन्याशाला (1848) और अनेक पाठशालाएँ, सावित्री बाई को शिक्षित करना, सत्यशोधक समाज, ‘गुलामगिरी’ आदि साहित्य, पुरोहित-रहित विवाह-विधि, बालहत्या प्रतिबंधक गृह, पानी का हौद सबके लिए खोलना, झुग्गियों में शिक्षा-जागरूकता, किसान-अधिकार और विधवा-पुनर्विवाह का समर्थन।

विषय-सूची की जाँच

  • ☒ फुले की उपेक्षा और शोषण-व्यवस्था (प्रश्न 1, 2, 9)
  • ☒ आदर्श परिवार और स्त्री-समानता (प्रश्न 3, 4, 10)
  • ☒ सावित्री बाई और फुले दंपति का दांपत्य (प्रश्न 5, 7, 13)
  • ☒ आज के संदर्भ में प्रेरणा (प्रश्न 6, 8, 11, 12)

Total questions answered: 13 of 13

Frequently Asked Questions

What do these NCERT solutions for Class 11 Hindi Antra Chapter 5 (ज्योतिबा फुले) cover?

All 13 questions from the latest NCERT textbook for this chapter are answered step by step.

Are these solutions based on the new NCERT syllabus?

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How should I use these solutions to prepare for exams?

Attempt each question on your own first, then compare your working with the answer here. Note the steps or keywords you missed, and revise the chapter notes before taking a chapter-wise MCQ test to check your understanding.

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