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Class 11 Hindi Antra Chapter 13

NCERT Solutions for Class 11 Hindi Antra Chapter 13: जाग तुझको दूर जाना

Class

Subject

Book

Chapter

Session

Questions covered

XI

Hindi

Antra (NCERT)

13 – जाग तुझको दूर जाना

2026-27

6 of 6

बिंदु

विवरण

कवयित्री

महादेवी वर्मा (1907–1987), छायावाद की प्रमुख कवयित्री, ‘आधुनिक मीरा’

कविता

‘जाग तुझको दूर जाना’ – स्वाधीनता आंदोलन की प्रेरणा से रचित जागरण गीत

भाव

हिमालय काँपे, आकाश रोए, अँधेरा छाए, तूफ़ान गरजे – फिर भी लक्ष्य की ओर बढ़ना; मोह के ‘मोम के बंधन’, तितलियों के रंगीले पर, भौंरों की गुनगुन, ओस-गीले फूल – इन कोमल आकर्षणों से मुक्त होना; हार भी जय की पताका बनेगी

शिल्प

संबोधन और प्रश्न-शैली; प्रतीक और लाक्षणिकता; रूपक, विरोधाभास, अनुप्रास, मानवीकरण; तत्सम खड़ी बोली; गेयता, टेक – ‘जाग तुझको दूर जाना’

Q1

‘जाग तुझको दूर जाना’ कविता में कवयित्री मानव को किन विपरीत स्थितियों में आगे बढ़ने के लिए उत्साहित कर रही है?

Answer

उत्तर

कवयित्री कहती है कि चाहे –

  1. अचल हिमालय के हृदय में कंपन (भूकंप) हो जाए – अर्थात् सबसे स्थिर चीज़ें भी डगमगा जाएँ;
  2. आकाश प्रलय के आँसुओं में मौन होकर रो ले – भयंकर वर्षा या विनाश हो;
  3. घोर अँधेरा प्रकाश को पीकर डोलने लगे – चारों ओर निराशा छा जाए;
  4. बिजली की चमक के साथ निर्दयी तूफ़ान गरजने लगे – भयानक संकट आ जाएँ;

– फिर भी हे मानव, तुझे विनाश के पथ पर भी अपने चरण-चिह्न छोड़ते हुए आगे बढ़ना है। साथ ही, मोह के कोमल, आकर्षक बंधन भी तुझे रोक न सकें।

हिमालय के काँपने, आकाश के प्रलय के आँसू बहाने, घोर अँधेरा छाने और बिजली के साथ निर्दयी तूफ़ान गरजने जैसी विपरीत, विनाशकारी परिस्थितियों में भी कवयित्री मानव को नाश-पथ पर अपने पदचिह्न छोड़ते हुए आगे बढ़ने को उत्साहित करती है।

Q2

कवयित्री किस मोहपूर्ण बंधन से मुक्त होकर मानव को जागृति का संदेश दे रही है?

Answer

उत्तर

कवयित्री सांसारिक सुख-सुविधाओं और प्रेम-आकर्षण के कोमल, मोहक बंधनों से मुक्त होने को कहती है:

  1. मोम के सजीले बंधन – देखने में सुंदर, पर कमज़ोर; परिवार, प्रियजनों और सुख-सुविधाओं का मोह।
  2. तितलियों के रंगीले पर – सौंदर्य और रंगीनी का आकर्षण।
  3. भौंरों (मधुप) की मधुर गुनगुन – मनोरंजन और विलास, जो विश्व के दुख (क्रंदन) को भुला देते हैं।
  4. ओस से भीगे फूलों की पंखुड़ियाँ – कोमल सुख, प्रेम और भोग।
  5. अपनी छाँह – अपना ही स्वार्थ, आलस्य, अहं; “तू न अपनी छाँह को अपने लिए कारा बनाना” – अपने मोह को अपने लिए कैद मत बनाओ।
  6. मदिरा और नींद – क्षणिक सुख और आलस्य।

इन बंधनों को त्यागकर ही मनुष्य अपने महान लक्ष्य (स्वाधीनता) तक पहुँच सकता है।

मोम के सजीले बंधन (परिवार-सुविधाओं का मोह), तितलियों के रंगीले पर (सौंदर्य-आकर्षण), भौंरों की गुनगुन (विलास-मनोरंजन), ओस-गीले फूल (कोमल सुख), अपनी ही छाँह (स्वार्थ-आलस्य) और मदिरा-नींद – इन मोहपूर्ण बंधनों से मुक्त होकर लक्ष्य की ओर बढ़ने का संदेश।

Q3

‘जाग तुझको दूर जाना’ स्वाधीनता आंदोलन की प्रेरणा से रचित एक जागरण गीत है। इस कथन के आधार पर कविता की मूल संवेदना को लिखिए।

Answer

उत्तर

कविता की मूल संवेदना है – कर्तव्य-बोध, संघर्ष और बलिदान के लिए जागरण।

  1. आलस्य और निद्रा से जागना: “चिर सजग आँखें उनींदी” – सदा जागरूक रहने वाली आँखें आज नींद से भरी हैं; कवयित्री देशवासियों को उठने का आह्वान करती है – लक्ष्य (स्वाधीनता) बहुत दूर है।
  2. संकटों से न डरना: हिमालय काँपे, तूफ़ान गरजे, अँधेरा छाए – स्वतंत्रता-सेनानी को इन बाधाओं की चिंता नहीं करनी।
  3. मोह-त्याग: परिवार, सुख-सुविधा, प्रेम-आकर्षण के ‘मोम के बंधन’ देश-सेवा के मार्ग की बाधा न बनें।
  4. अमरता का बोध: “अमरता-सुत चाहता क्यों मृत्यु को उर में बसाना?” – मनुष्य अमर आत्मा का पुत्र है, उसे निराशा और मृत्यु-भय को हृदय में नहीं बसाना चाहिए।
  5. हृदय में आग: “आग हो उर में तभी दृग में सजेगा आज पानी” – हृदय में देशप्रेम और क्रांति की आग हो, तभी आँखों में करुणा और संकल्प का पानी शोभा देगा।
  6. बलिदान का गौरव: “हार भी तेरी बनेगी मानिनी जय की पताका” – संघर्ष में हार भी गौरव है; “राख क्षणिक पतंग की है अमर दीपक की निशानी” – पतंगे की तरह जलकर मिटने वाला भी अमर दीपक की निशानी छोड़ जाता है।
  7. कठिनाइयों को कोमल बनाना: “है तुझे अंगार-शय्या पर मृदुल कलियाँ बिछाना” – कष्टों को हँसते हुए सहना।

यह गीत स्वतंत्रता-संग्राम के सेनानियों में उत्साह, त्याग और निर्भीकता भरने वाला प्रेरणा-गीत है।

मूल संवेदना है देशवासियों को आलस्य और मोह की नींद से जगाकर स्वाधीनता रूपी दूर के लक्ष्य के लिए संकटों से न डरने, मोह-बंधन त्यागने, हृदय में संघर्ष की आग रखने और बलिदान को गौरव मानने (‘हार भी… जय की पताका’) की प्रेरणा देना।

Q4

निम्नलिखित पंक्तियों का काव्य-सौंदर्य स्पष्ट कीजिए –
(क) विश्व का क्रंदन … अपने लिए कारा बनाना!
(ख) कह न ठंडी साँस … सजेगा आज पानी।
(ग) है तुझे अंगार-शय्या … कलियाँ बिछाना!

Answer

उत्तर

प्रश्न 1

(क) “विश्व का क्रंदन भुला देगी मधुप की मधुर गुनगुन, क्या डुबा देंगे तुझे यह फूल के दल ओस-गीले? तू न अपनी छाँह को अपने लिए कारा बनाना!”

उत्तर

भाव-सौंदर्य: कवयित्री पूछती है – क्या भौंरों की मधुर गुनगुन (सुख-विलास) तुझे संसार के दुख-रुदन को भुला देगी? क्या ओस से भीगी फूलों की पंखुड़ियाँ (कोमल सुख-आकर्षण) तुझे अपने में डुबो देंगी? तू अपनी ही छाया (मोह, स्वार्थ, आलस्य) को अपने लिए कैद मत बना।

शिल्प-सौंदर्य: प्रश्न-अलंकार (प्रश्नवाचक शैली); प्रतीक – मधुप की गुनगुन (विलास), ओस-गीले फूल (कोमल सुख), छाँह (मोह/अहं); रूपक (‘छाँह को कारा’); अनुप्रास (‘मधुप की मधुर’); विरोध (‘क्रंदन’ – ‘गुनगुन’); तत्सम खड़ी बोली।

(ख) “कह न ठंडी साँस में अब भूल वह जलती कहानी, आग हो उर में तभी दृग में सजेगा आज पानी;”

भाव-सौंदर्य: हे मानव, अब निराशा की ठंडी साँसें भरते हुए अपने पुराने अनुभवों और संघर्ष की जलती कहानी को मत भूल। जब हृदय में (देशप्रेम और संघर्ष की) आग होगी, तभी आँखों में आए आँसू (करुणा) शोभा देंगे – अर्थात् केवल रोना व्यर्थ है, हृदय में कुछ कर गुज़रने की आग चाहिए।

शिल्प-सौंदर्य: विरोधाभास (‘ठंडी साँस’ – ‘जलती कहानी’; ‘आग’ – ‘पानी’); लाक्षणिकता (‘जलती कहानी’ – संघर्ष की स्मृति; ‘आग’ – उत्साह); अनुप्रास; संबोधन शैली; प्रेरक भाव।

(ग) “है तुझे अंगार-शय्या पर मृदुल कलियाँ बिछाना!”

भाव-सौंदर्य: तुझे कष्टों और संघर्ष से भरे मार्ग (अंगारों की सेज) को भी अपने साहस, धैर्य और हँसी से कोमल कलियों जैसा सुखद बनाना है – अर्थात् कठिनाइयों को प्रसन्नता से सहना और दूसरों के लिए सुखद भविष्य रचना है।

शिल्प-सौंदर्य: रूपक (‘अंगार-शय्या’ – कष्टमय जीवन; ‘मृदुल कलियाँ’ – सुख, कोमलता); विरोधाभास (अंगार – कलियाँ); दृश्य-बिंब; तत्सम शब्दावली; टेक से पहले आने वाली संकल्पात्मक पंक्ति।

(क) भाव – विलास और कोमल सुख विश्व के दुख को न भुला दें, अपनी ही छाया (मोह) को कैद न बनाओ; शिल्प – प्रश्न-शैली, प्रतीक, रूपक (‘छाँह को कारा’), अनुप्रास। (ख) भाव – निराशा छोड़ संघर्ष की स्मृति याद रखो, हृदय में आग हो तभी आँसू शोभित हैं; शिल्प – विरोधाभास (आग-पानी, ठंडी-जलती), लाक्षणिकता। (ग) भाव – कष्टमय मार्ग को साहस से सुखद बनाना; शिल्प – रूपक (अंगार-शय्या, मृदुल कलियाँ), विरोधाभास, दृश्य-बिंब।

Q5

कवयित्री ने स्वाधीनता के मार्ग में आनेवाली कठिनाइयों को इंगित कर मनुष्य के भीतर किन गुणों का विस्तार करना चाहा है? कविता के आधार पर स्पष्ट कीजिए।

Answer

उत्तर

  1. जागरूकता और सजगता: “जाग तुझको दूर जाना” – आलस्य और नींद छोड़कर सदा सतर्क रहना।
  2. साहस और निर्भीकता: हिमालय काँपे, तूफ़ान गरजे, अँधेरा छाए – फिर भी न डरना; नाश-पथ पर भी पदचिह्न छोड़ना।
  3. दृढ़ संकल्प और लक्ष्य के प्रति एकाग्रता: दूर के लक्ष्य की ओर निरंतर बढ़ते रहना।
  4. त्याग और मोह-मुक्ति: मोम के बंधन, तितलियों के पर, फूलों और गुनगुन के आकर्षण को छोड़ना; अपनी छाँह (स्वार्थ) को कैद न बनाना।
  5. संवेदनशीलता: विश्व के क्रंदन (दुख) को न भूलना।
  6. आत्मविश्वास और अमरता-बोध: “अमरता-सुत” होने के कारण मृत्यु-भय और निराशा को हृदय में न बसाना।
  7. उत्साह और जोश: “आग हो उर में” – हृदय में संघर्ष की आग।
  8. बलिदान की भावना: पतंगे की तरह जलकर भी अमर दीपक की निशानी बनना; हार को भी जय की पताका मानना।
  9. धैर्य और सहनशीलता: अंगार-शय्या पर भी कोमल कलियाँ बिछाना – कष्टों को मुसकराकर सहना।

जागरूकता, साहस-निर्भीकता, दृढ़ संकल्प, मोह-त्याग, दूसरों के दुख के प्रति संवेदनशीलता, आत्मविश्वास (अमरता-बोध), हृदय में संघर्ष की आग, बलिदान की भावना और कष्टों को मुसकराकर सहने का धैर्य।

योग्यता-विस्तार

Q6

स्वाधीनता आंदोलन के कुछ जागरण गीतों का एक संकलन तैयार कीजिए।

Answer

उत्तर

गीत/कविता

रचनाकार

पंक्तियाँ

वंदे मातरम्

बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय

“वंदे मातरम्, सुजलां सुफलां मलयजशीतलाम्…”

पुष्प की अभिलाषा

माखनलाल चतुर्वेदी

“मुझे तोड़ लेना वनमाली, उस पथ पर देना तुम फेंक, मातृभूमि पर शीश चढ़ाने, जिस पथ जावें वीर अनेक।”

झाँसी की रानी

सुभद्राकुमारी चौहान

“बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी, खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी।”

सरफ़रोशी की तमन्ना

बिस्मिल अज़ीमाबादी (रामप्रसाद बिस्मिल ने लोकप्रिय बनाया)

“सरफ़रोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है, देखना है ज़ोर कितना बाज़ू-ए-क़ातिल में है।”

हिमाद्रि तुंग शृंग से

जयशंकर प्रसाद

“हिमाद्रि तुंग शृंग से प्रबुद्ध शुद्ध भारती, स्वयंप्रभा समुज्ज्वला स्वतंत्रता पुकारती।”

विजयी विश्व तिरंगा प्यारा

श्यामलाल गुप्त ‘पार्षद’

“विजयी विश्व तिरंगा प्यारा, झंडा ऊँचा रहे हमारा।”

सारे जहाँ से अच्छा

मुहम्मद इक़बाल

“सारे जहाँ से अच्छा हिंदोस्ताँ हमारा, हम बुलबुलें हैं इसकी यह गुलसिताँ हमारा।”

एकला चलो रे

रवींद्रनाथ ठाकुर

“यदि तोर डाक शुने केउ ना आसे, तबे एकला चलो रे।”

जाग तुझको दूर जाना

महादेवी वर्मा

“अचल हिमगिरि के हृदय में आज चाहे कंप हो ले…”

‘वंदे मातरम्’ (बंकिम), ‘पुष्प की अभिलाषा’ (माखनलाल चतुर्वेदी), ‘झाँसी की रानी’ (सुभद्राकुमारी चौहान), ‘सरफ़रोशी की तमन्ना’, ‘हिमाद्रि तुंग शृंग से’ (प्रसाद), ‘झंडा ऊँचा रहे हमारा’ (पार्षद), ‘सारे जहाँ से अच्छा’ (इक़बाल), ‘एकला चलो रे’ (टैगोर) – पंक्तियों सहित संकलन ऊपर दिया गया है।

विषय-सूची की जाँच

  • ☒ विपरीत परिस्थितियाँ और मोह-बंधन (प्रश्न 1, 2)
  • ☒ मूल संवेदना – स्वाधीनता का जागरण (प्रश्न 3, 5)
  • ☒ काव्य-सौंदर्य (प्रश्न 4)
  • ☒ जागरण गीतों का संकलन (प्रश्न 6)

Total questions answered: 6 of 6

Frequently Asked Questions

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All 7 questions from the latest NCERT textbook for this chapter are answered step by step.

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How should I use these solutions to prepare for exams?

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