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Class 11 Hindi Antra Chapter 7

NCERT Solutions for Class 11 Hindi Antra Chapter 7: उसकी माँ

Class

Subject

Book

Chapter

Session

Questions covered

XI

Hindi

Antra (NCERT)

7 – उसकी माँ

2026-27

13 of 13

बिंदु

विवरण

लेखक

पांडेय बेचन शर्मा ‘उग्र’ (1900–1967)

विधा

कहानी

पात्र

कथावाचक ‘चाचा’ (राजभक्त ज़मींदार), लाल (क्रांतिकारी कॉलेज-छात्र), जानकी (लाल की भोली, स्नेहमयी बूढ़ी माँ), बंगड़ (लाल का हँसोड़, तगड़ा साथी), पुलिस सुपरिंटेंडेंट

कथा

पुलिस की पूछताछ के बाद चाचा लाल को समझाते हैं; लाल स्वयं को ‘कट्टर राजविद्रोही’ बताता है; लाल और साथी पकड़े जाते हैं; जानकी गहने-बर्तन बेचकर उनकी पैरवी करती और भोजन पहुँचाती है; लाल-बंगड़ समेत चार को फाँसी; लाल का अंतिम पत्र पाकर जानकी अपने दरवाज़े पर प्राण त्याग देती है

प्रतीक

जानकी – भारत माता; चाचा का रबर से लाल का नाम मिटाना – भयग्रस्त, स्वार्थी राजभक्ति

संदेश

स्वतंत्रता के लिए युवाओं का बलिदान, माँ का निस्वार्थ प्रेम, और औपनिवेशिक दमन से उपजा डर

Q1

क्या लाल का व्यवहार सरकार के विरुद्ध षड्यंत्रकारी था?

Answer

उत्तर

अंग्रेज़ी सरकार की दृष्टि से हाँ, पर देशभक्ति की दृष्टि से वह स्वतंत्रता-संग्राम था।

  1. लाल स्वयं कहता है कि वह ‘कट्टर राजविद्रोही’ है; उसकी कल्पना है कि जो व्यक्ति या राष्ट्र दूसरों के नाश पर जीता है, उसका सर्वनाश हो और उसमें उसका भी हाथ हो।
  2. चाचा के पूछने पर वह स्पष्ट कहता है – ज़रूरत पड़ी तो षड्यंत्र, विद्रोह, यहाँ तक कि हत्या भी करेगा।
  3. तलाशी में उसके घर से दो पिस्तौल, कारतूस और पत्र मिले; सरकार ने गुप्त समितियाँ बनाने, डाके डालने, शस्त्र इकट्ठा करने और पुलिस अधिकारियों की हत्या के आरोप प्रमाणित किए।
  4. पर उसका उद्देश्य निजी स्वार्थ नहीं था; वह ‘देश की दुरवस्था’ और ‘पशु-हृदय परतंत्रता’ से व्याकुल था। अत्याचारी विदेशी शासन के विरुद्ध संघर्ष को ‘षड्यंत्र’ कहना शासकों की भाषा है; देशवासियों के लिए वह देशभक्ति और बलिदान है।

अंग्रेज़ी सरकार की दृष्टि में लाल का व्यवहार षड्यंत्रकारी था (वह स्वयं को राजविद्रोही कहता था, उसके घर से हथियार मिले), पर उसका उद्देश्य परतंत्रता से देश को मुक्त करना था – देशवासियों की दृष्टि में यह देशभक्तिपूर्ण स्वतंत्रता-संघर्ष था।

Q2

पूरी कहानी में जानकी न तो शासन-तंत्र के समर्थन में है न विरोध में, किंतु लेखक ने उसे केंद्र में ही नहीं रखा बल्कि कहानी का शीर्षक बना दिया। क्यों?

Answer

उत्तर

  1. माँ की ममता का केंद्र: जानकी की पहचान राजनीति से नहीं, मातृत्व से है। वह लाल ही नहीं, उसके सभी साथियों को अपना बेटा मानती है; वे उसे ‘माँ’ कहते हैं तो उसकी छाती फूल उठती है।
  2. भारत माता का प्रतीक: बंगड़ उसे ‘भारत माता’ कहता है – बूढ़ी, उजले केश (हिमालय), माथे की रेखाएँ (गंगा-यमुना)। जानकी उस भारत माता का प्रतीक है, जिसके बेटे उसकी मुक्ति के लिए बलिदान देते हैं और जो उनकी पीड़ा को अपनी पीड़ा मानती है।
  3. सबसे बड़ा त्याग और पीड़ा: संघर्ष भले लाल ने किया, पर सबसे अधिक दुख, अपमान और त्याग जानकी ने झेला – गहने-बर्तन बेचकर भोजन पहुँचाना, वकीलों के आगे गिड़गिड़ाना, पुलिस की झिड़कियाँ सहना और अंत में प्राण त्याग देना।
  4. निस्वार्थ प्रेम की शक्ति: समाज (चाचा सहित) डर के मारे उससे दूर हो गया, पर उसका प्रेम न डरा, न झुका।
  5. करुण प्रभाव: उसकी भोली, अनजान, निष्कलंक माँ की छवि पाठक के मन में सबसे गहरी करुणा जगाती है।

इसलिए ‘उसकी माँ’ शीर्षक कहानी की आत्मा है – यह बलिदानी युवाओं के पीछे खड़ी माँ (और भारत माता) की कहानी है।

क्योंकि जानकी की पहचान राजनीति से नहीं, निस्वार्थ मातृत्व से है – वह लाल और उसके सभी साथियों की माँ और भारत माता की प्रतीक है; संघर्ष की सबसे बड़ी पीड़ा और त्याग उसी ने सहा और अंत में प्राण दे दिए – इसलिए वह कहानी का केंद्र और शीर्षक है।

Q3

चाचा जानकी तथा लाल के प्रति सहानुभूति तो रखता है किंतु वह डरता है। यह डर किस प्रकार का है और क्यों है?

Answer

उत्तर

डर का स्वरूप: यह शासन और पुलिस का भय है, जो स्वार्थ और आत्मरक्षा से उपजा है।

  1. चाचा ज़मींदार और ‘सात पुश्त से सरकार के फ़रमाबरदार’ हैं; उनकी ज़मींदारी, धन-संपत्ति और सुखी जीवन सरकार की कृपा पर टिका है।
  2. पुलिस सुपरिंटेंडेंट ने उन्हें ‘मित्रता से’ चेताया था कि इस परिवार से दूर रहें। उसकी ‘भूरी, डरावनी, अमानवी आँखें’ और ‘रूखे फ़ौलादी हाथ’ उनकी स्मृति में बार-बार कौंधते हैं।
  3. उन्हें डर है कि विद्रोही से संबंध रखने पर सरकार उन पर भी शक करेगी और उनकी संपत्ति, सम्मान और सुरक्षा ख़तरे में पड़ जाएगी – “कौन अपनी गरदन मुसीबत में डालता, विद्रोही की माँ से संबंध रखकर?”
  4. इसीलिए वे जानकी से दूर रहे और मेज़िनी की पुस्तक पर लिखा लाल का नाम भी रबर से मिटाना चाहते हैं।

यह डर उनकी ‘आप सुखी तो जग सुखी’ वाली मानसिकता और औपनिवेशिक दमन के आतंक का परिणाम है।

चाचा का डर सरकार और पुलिस के दमन का है, जो स्वार्थ से उपजा है – राजभक्त ज़मींदार होने के कारण उन्हें डर था कि विद्रोही के परिवार से संबंध रखने पर उनकी संपत्ति, सम्मान और सुरक्षा ख़तरे में पड़ जाएगी; पुलिस सुपरिंटेंडेंट की चेतावनी और उसकी डरावनी आँखें उन्हें आतंकित करती रहीं।

Q4

इस कहानी में दो तरह की मानसिकताओं का संघर्ष है, एक का प्रतिनिधित्व लाल करता है और दूसरे का उसका चाचा। आपकी नज़र में कौन सही है? तर्कसंगत उत्तर दीजिए।

Answer

उत्तर

लाल की मानसिकता

चाचा की मानसिकता

कट्टर राजविद्रोही, स्वतंत्र विचार

कट्टर राजभक्त

देश की दुर्दशा और परतंत्रता पर उबल उठना

“तुम्हारी बक-बक से न देश की दुर्दशा दूर होगी, न पराधीनता”

राष्ट्र-हित के लिए निजी सुख और प्राण का त्याग

पहले अपने घर का उद्धार, फिर सरकार के सुधार की बात

दुर्बलता के डर से कर्म न रोकना

“तुम्हारे हाथ दुर्बल हैं, चर्र-मर्र हो उठेंगे”

आत्मसम्मान और स्वाधीनता सर्वोपरि

‘आप सुखी तो जग सुखी’, सुरक्षा और स्वार्थ सर्वोपरि

मेरी दृष्टि में लाल सही है, क्योंकि:

  1. पराधीनता में आत्मसम्मान, न्याय और विकास संभव नहीं; अत्याचारी शासन को स्वीकार करना ‘अपने धर्म, कर्म, आत्मा को भुलाना’ है।
  2. यदि सब चाचा की तरह केवल अपने सुख की सोचते, तो देश कभी स्वतंत्र न होता; भगतसिंह, चंद्रशेखर आज़ाद जैसे युवाओं के बलिदान से ही आज़ादी मिली।
  3. लाल का उद्देश्य निस्वार्थ था; चाचा का दृष्टिकोण भय और स्वार्थ पर आधारित है – अंत में वे स्वयं भी अपने निर्णय से अशांत हैं।

चाचा के पक्ष में भी कुछ बातें: उनकी चिंता में लाल और जानकी के प्रति वास्तविक स्नेह था; वे हिंसा के परिणामों से बचाना चाहते थे। पर स्वतंत्रता के प्रश्न पर उनकी राजभक्ति और कायरता उचित नहीं ठहराई जा सकती। (हिंसा के मार्ग पर मतभेद हो सकता है, पर स्वाधीनता के लक्ष्य पर लाल सही है।)

लाल सही है – पराधीनता में आत्मसम्मान और न्याय संभव नहीं, और ऐसे निस्वार्थ युवाओं के बलिदान से ही देश स्वतंत्र हुआ; चाचा का स्नेह सच्चा था, पर उनकी राजभक्ति भय और ‘आप सुखी तो जग सुखी’ वाले स्वार्थ पर आधारित थी।

Q5

उन लड़कों ने कैसे सिद्ध किया कि जानकी सिर्फ़ माँ नहीं भारतमाता है? कहानी के आधार पर उसका चरित्र-चित्रण कीजिए।

Answer

उत्तर

भारत माता सिद्ध करना: एक दिन जानकी लड़कों को हलवा परोस रही थी, तब हँसोड़, तगड़े बंगड़ ने नक़्शे की तरह उसका वर्णन करके कहा – “माँ! तू तो ठीक भारत माता-सी लगती है। तू बूढ़ी, वह बूढ़ी। उसका उजला हिमालय है, तेरे केश; माथे की दो गहरी रेखाएँ गंगा-यमुना; नाक विंध्याचल; ठोढ़ी कन्याकुमारी; छोटी-बड़ी झुर्रियाँ भिन्न-भिन्न पहाड़ और नदियाँ।” फिर उसने उसके केश बाएँ कंधे पर लहराकर बर्मा बना दिया – “बिना उसके भारत माता का शृंगार शुद्ध न होगा।”

जानकी का चरित्र-चित्रण

  1. स्नेहमयी माँ: लाल को खिलौने और आराध्य की तरह दुलराती है; उसके सभी साथियों को अपने बच्चों जैसा प्यार करती है।
  2. सरल और भोली: राजनीति नहीं समझती; लड़कों की क्रांतिकारी बातों को ‘बातूनी छोकरों की बक-बक’ मानती है; अंत तक विश्वास रखती है कि सब पुलिस की चालबाज़ी है।
  3. त्यागमयी: गिरफ़्तारी के बाद लोटा, थाली, ज़ेवर बेचकर रोज़ लड़कों को भोजन पहुँचाती है; वकीलों के आगे गिड़गिड़ाती है; पुलिस की झिड़कियाँ और धक्के सहती है – शरीर सूखकर काँटा हो जाता है।
  4. निडर: पूरे मोहल्ले के डर के बावजूद लड़कों के लिए दौड़-धूप बंद नहीं करती – “मेरे जीते-जी यह नहीं होने का।”
  5. धैर्यवान और गंभीर: पति की मृत्यु पर भी साधारण स्त्रियों की तरह नहीं घिघियाई; लाल का अंतिम पत्र पाकर भी स्तब्ध रहती है।
  6. अनन्य प्रेम: बेटे के बलिदान के साथ ही उसके दरवाज़े पर, हाथ में उसकी चिट्ठी लिए, प्राण त्याग देती है – ‘हम मिले थे, मिले हैं, मिलेंगे’।

बंगड़ ने उसके केशों को हिमालय, माथे की रेखाओं को गंगा-यमुना, नाक को विंध्याचल, ठोढ़ी को कन्याकुमारी बताकर और केश कंधे पर लहराकर बर्मा बनाकर उसे भारत माता सिद्ध किया; जानकी स्नेहमयी, भोली, त्यागमयी, निडर, धैर्यवान और अनन्य प्रेम वाली माँ है, जो बेटों के लिए सब कुछ बेचकर अंत में बेटे के बलिदान के साथ प्राण त्याग देती है।

Q6

‘विद्रोही की माँ से संबंध रखकर कौन अपनी गरदन मुसीबत में डालता?’ इस कथन के आधार पर उस शासन-तंत्र और समाज-व्यवस्था पर प्रकाश डालिए।

Answer

उत्तर

शासन-तंत्र

  1. दमनकारी और आतंक पर आधारित: अंग्रेज़ी सरकार केवल संदेह पर भले घरों के बच्चों को सताती, मारती थी; पुलिस का इतना भय था कि लोग विद्रोही के परिवार से मिलने तक से डरते थे।
  2. अन्यायपूर्ण न्याय-व्यवस्था: सरकार के डर से लड़कों को वकील तक नहीं मिल रहे थे; सी.आई.डी. और सरकारी वकील ने बड़े-बड़े आरोप ‘प्रमाणित’ कर दिए; चार को फाँसी और दस को कड़ी सज़ा हुई।
  3. निगरानी और धमकी: पुलिस सुपरिंटेंडेंट ‘मित्रता से’ चेतावनी देकर लोगों को दूर रहने को कहते थे।
  4. लड़कों के शब्दों में – सरकार ने शिक्षा को अज्ञान से भर रखा था, अपमानजनक कानून गढ़े थे और जोंक की तरह देश का धर्म, प्राण और धन चूस रही थी।

समाज-व्यवस्था

  1. भयग्रस्त और स्वार्थी समाज: लाल के पकड़े जाने के बाद मोहल्ले का कोई भी व्यक्ति जानकी से मिलने से डरता था; जान-पहचान वाले रास्ते में देखकर बगलें झाँकने लगते।
  2. सुविधाभोगी वर्ग की राजभक्ति: चाचा जैसे ज़मींदार अपनी संपत्ति और सुख बचाने के लिए अंग्रेज़ों के फ़रमाबरदार बने रहे; उनकी संवेदना भी डर के आगे हार गई।
  3. ‘आप सुखी तो जग सुखी’ की मानसिकता: लोग अपने शरीर की रक्षा के लिए ‘आत्मा की चिता सँवारते’ थे – अन्याय देखकर भी चुप रहते थे।
  4. ऐसे समाज में अकेली, असहाय माँ अपने बेटों के लिए संघर्ष करती रही और अंत में अकेली ही मर गई।

यह कथन दमनकारी अंग्रेज़ी शासन (संदेह पर उत्पीड़न, पुलिस का आतंक, अन्यायपूर्ण न्याय-व्यवस्था) और उससे डरे हुए, स्वार्थी समाज को दिखाता है, जिसमें चाचा जैसे सुविधाभोगी राजभक्त और मोहल्ले के लोग भय के कारण निर्दोष, असहाय माँ से भी दूर हो गए।

Q7

चाचा ने लाल का पेंसिल-खचित नाम पुस्तक की छाती पर से क्यों मिटा डालना चाहा?

Answer

उत्तर

तीन वर्ष पहले लाल ने चाचा से मेज़िनी (इटली के स्वतंत्रता-सेनानी) की पुस्तक माँगकर पढ़ी थी और उसके पहले पन्ने पर पेंसिल से अपना नाम लिख दिया था। चाचा ने उसे मिटाना चाहा, क्योंकि:

  1. पुलिस का भय: उन्हें डर था कि यदि कभी पुलिस को उनके पुस्तकालय में एक फाँसी-प्राप्त विद्रोही के हस्ताक्षर वाली क्रांतिकारी पुस्तक मिली, तो उन पर भी विद्रोहियों से संबंध रखने का संदेह होगा। पुलिस सुपरिंटेंडेंट की डरावनी आँखें और ‘फ़ौलादी हाथ’ मानो उनकी गरदन दबाने लगे।
  2. स्वार्थ और सुख-सुरक्षा: अपनी ज़मींदारी, धनिक जीवन और सुखों को बचाने की चिंता।
  3. संबंध मिटाने का प्रयास: लाल से किसी भी प्रकार का संबंध-चिह्न वे मिटा देना चाहते थे।

पर साथ ही उनके मन में लाल और रामनाथ के लिए मोह भी था; लाल के हस्ताक्षर देखकर उन्हें ठेस लगी – यह उनके भय और स्नेह के द्वंद्व को दिखाता है। अंत तक वे रबर हाथ में लिए खड़े रहते हैं।

पुलिस के भय और अपने सुख-संपत्ति की रक्षा के स्वार्थ से – उन्हें डर था कि फाँसी पाए विद्रोही के हस्ताक्षर वाली मेज़िनी की पुस्तक मिलने पर उन पर भी विद्रोहियों से संबंध का संदेह होगा; यह उनके भय और भीतर छिपे स्नेह के द्वंद्व को भी दिखाता है।

Q8

भारत माता की छवि या धारणा आपके मन में किस प्रकार की है?

Answer

उत्तर

मेरे मन में भारत माता की छवि एक ममतामयी, गरिमामयी और शक्तिशाली माँ की है –

  1. उसके मस्तक पर हिमालय का मुकुट, चरणों को धोता हिंद महासागर, आँचल में गंगा-यमुना जैसी नदियाँ, हरे-भरे खेत और वन।
  2. वह अनेक भाषाओं, धर्मों, संस्कृतियों वाले करोड़ों बच्चों की माँ है – विविधता में एकता उसकी पहचान है।
  3. उसके एक हाथ में ज्ञान (प्राचीन संस्कृति, वेद-उपनिषद, विज्ञान) और दूसरे में शक्ति और समृद्धि का प्रतीक है।
  4. वह जानकी की तरह सरल, स्नेहमयी और त्यागमयी है, जिसने अपने बेटों का बलिदान सहा।
  5. नेहरू के शब्दों में – भारत माता यहाँ के करोड़ों लोग ही हैं; उसकी सेवा का अर्थ है हर भारतवासी की उन्नति, शिक्षा, स्वास्थ्य और सम्मान के लिए काम करना।

भारत माता एक ममतामयी, गरिमामयी माँ है – हिमालय का मुकुट, नदियों का आँचल, विविध भाषाओं-धर्मों वाले करोड़ों बच्चे, ज्ञान और शक्ति का प्रतीक, जानकी जैसी त्यागमयी; उसकी सच्ची सेवा हर भारतवासी की उन्नति और सम्मान के लिए काम करना है।

Q9

जानकी जैसी भारत माता हमारे बीच बनी रहे, इसके लिए ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ के संदर्भ में विचार कीजिए।

Answer

उत्तर

जानकी स्नेह, त्याग, धैर्य और साहस की प्रतीक है – ऐसी माताएँ ही राष्ट्र की नींव होती हैं। ऐसी माँएँ समाज में बनी रहें, इसके लिए बेटियों का जन्म, सुरक्षा और शिक्षा ज़रूरी है:

  1. बेटी बचाओ: कन्या भ्रूण-हत्या और लिंग-भेद समाप्त करना; बेटियों को जन्म से ही पोषण, स्वास्थ्य और सुरक्षा देना। जब बेटियाँ ही नहीं बचेंगी, तो भविष्य की ‘जानकी’ कहाँ से आएँगी?
  2. बेटी पढ़ाओ: जानकी भोली और अनपढ़ थी, इसलिए राजनीति और कानून नहीं समझती थी; वकीलों के आगे गिड़गिड़ाती रही। शिक्षित माँ अपने बच्चों और देश के लिए अधिक सशक्त ढंग से खड़ी हो सकती है, अपने अधिकार जान सकती है और आत्मनिर्भर बन सकती है।
  3. सशक्तीकरण: शिक्षा से बेटियाँ आर्थिक रूप से स्वावलंबी होंगी; उन्हें ज़ेवर-बर्तन बेचकर जीना नहीं पड़ेगा।
  4. संस्कार और मूल्य: शिक्षित माँ बच्चों में देशप्रेम, नैतिकता और साहस के संस्कार अधिक प्रभावी ढंग से डाल सकती है।
  5. समाज की भूमिका: परिवार, विद्यालय और सरकार – सबको मिलकर बेटियों को समान अवसर और सम्मान देना होगा।

इस प्रकार ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ भविष्य की सशक्त, शिक्षित ‘भारत माताओं’ को गढ़ने का अभियान है।

जानकी जैसी स्नेहमयी, त्यागमयी माताएँ तभी बनी रहेंगी जब बेटियों को जन्म, पोषण और सुरक्षा मिले (बेटी बचाओ) और शिक्षा से वे अपने अधिकार जानने वाली, आत्मनिर्भर और सशक्त बनें (बेटी पढ़ाओ) – ताकि वे परिवार और देश के लिए अधिक प्रभावी ढंग से खड़ी हो सकें।

Q10

निम्नलिखित का आशय स्पष्ट कीजिए –
(क) पुलिसवाले केवल … धीरे-धीरे घुलाना-मिटाना है।
(ख) चाचा जी, नष्ट हो जाना … सहस्र भुजाओं की सखियाँ हैं।

Answer

उत्तर

(क) “पुलिसवाले केवल संदेह पर भले आदमियों के बच्चों को त्रास देते हैं, मारते हैं, सताते हैं। यह अत्याचारी पुलिस की नीचता है। ऐसी नीच शासन-प्रणाली को स्वीकार करना अपने धर्म को, कर्म को, आत्मा को, परमात्मा को भुलाना है। धीरे-धीरे घुलाना-मिटाना है।”

प्रसंग: जानकी चाचा को बताती है कि एक दिन लाल के साथी लड़कों की गिरफ़्तारियों की ख़बर से उत्तेजित होकर ऐसी बातें कर रहे थे।

आशय: अंग्रेज़ी पुलिस बिना किसी प्रमाण के, केवल शक के आधार पर शरीफ़ घरों के युवकों को पीड़ा देती, मारती और सताती थी – यह उसकी नीचता थी। लड़के मानते थे कि ऐसी अत्याचारी शासन-व्यवस्था को चुपचाप स्वीकार कर लेना अपने धर्म, कर्तव्य, आत्मसम्मान और ईश्वर को भुला देना है; ऐसा करने से मनुष्य धीरे-धीरे अपने अस्तित्व और आत्मा को ही नष्ट कर देता है। इसमें अन्याय के विरुद्ध खड़े होने की प्रेरणा है।

(ख) “चाचा जी, नष्ट हो जाना तो यहाँ का नियम है। जो सँवारा गया है, वह बिगड़ेगा ही। हमें दुर्बलता के डर से अपना काम नहीं रोकना चाहिए। कर्म के समय हमारी भुजाएँ दुर्बल नहीं, भगवान की सहस्र भुजाओं की सखियाँ हैं।”

प्रसंग: चाचा ने लाल को चेताया कि तुम्हारे हाथ दुर्बल हैं; जिनसे तुम पंजा लड़ाने जा रहे हो, उनके सामने ये चर्र-मर्र होकर नष्ट हो जाएँगे। तब लाल ने यह उत्तर दिया।

आशय: लाल कहता है कि संसार में नष्ट होना तो प्रकृति का नियम है – जो बना है, वह एक दिन मिटेगा ही। इसलिए मृत्यु या कमज़ोरी के डर से अपना कर्तव्य नहीं छोड़ना चाहिए। जब मनुष्य सच्चे और न्यायपूर्ण कर्म में लगता है, तब उसकी भुजाएँ कमज़ोर नहीं रहतीं, बल्कि वे ईश्वर की हज़ारों भुजाओं की साथी बन जाती हैं – यानी ईश्वर की शक्ति उसके साथ होती है। यह गीता के निष्काम कर्म-दर्शन, निर्भीकता और आत्मविश्वास का भाव है।

(क) अंग्रेज़ी पुलिस केवल संदेह पर निर्दोष युवकों को सताती है; ऐसी अत्याचारी व्यवस्था को स्वीकारना अपने धर्म, कर्तव्य और आत्मा को धीरे-धीरे नष्ट करना है। (ख) नष्ट होना संसार का नियम है, इसलिए दुर्बलता या मृत्यु के डर से कर्तव्य नहीं छोड़ना चाहिए; सच्चे कर्म में लगी भुजाएँ ईश्वर की सहस्र भुजाओं की सखियाँ बन जाती हैं – निर्भीक कर्मयोग का भाव।

योग्यता-विस्तार

Q11

पुलिस के साथ दोस्ती की जानी चाहिए या नहीं? अपनी राय लिखिए।

Answer

उत्तर

मेरी राय में आज के लोकतांत्रिक भारत में पुलिस के साथ विश्वास और सहयोग का संबंध होना चाहिए।

  1. कहानी का संदर्भ अलग है: कहानी की पुलिस विदेशी, दमनकारी शासन का औज़ार थी, जो संदेह पर निर्दोषों को सताती थी; उससे डर स्वाभाविक था।
  2. आज की पुलिस जनता की सेवक है: स्वतंत्र भारत में पुलिस का कर्तव्य नागरिकों की सुरक्षा, कानून-व्यवस्था और अपराध-नियंत्रण है – ‘सेवा, सुरक्षा, सहयोग’।
  3. सहयोग से लाभ: अपराध, दुर्घटना, साइबर-ठगी या किसी संकट में पुलिस को सूचना और सहयोग देने से समाज सुरक्षित रहता है; सामुदायिक पुलिसिंग, जन-सहयोग समितियाँ, ‘मित्र पुलिस’ जैसे प्रयास इसी के लिए हैं।
  4. सावधानी भी: दोस्ती का अर्थ अनुचित लाभ लेना या पुलिस के गलत काम का समर्थन करना नहीं है। यदि कहीं पुलिस अत्याचार या भ्रष्टाचार करे, तो कानूनी उपायों (शिकायत, मानवाधिकार आयोग, न्यायालय) से विरोध करना भी नागरिक का कर्तव्य है।

अतः पुलिस से ईमानदार, सम्मानजनक और सहयोगपूर्ण संबंध होना चाहिए – भय या चापलूसी का नहीं।

हाँ – आज की लोकतांत्रिक पुलिस जनता की सेवक है, इसलिए उससे विश्वास, सम्मान और सहयोग का संबंध होना चाहिए (अपराध की सूचना, सामुदायिक पुलिसिंग); पर दोस्ती का अर्थ अनुचित लाभ या उसके गलत काम का समर्थन नहीं – अन्याय पर कानूनी विरोध भी कर्तव्य है।

Q12

लाल और उसके साथियों से आपको क्या प्रेरणा मिलती है?

Answer

उत्तर

  1. देशप्रेम: देश की पराधीनता और दुर्दशा पर व्याकुल होना और उसके लिए सब कुछ न्योछावर करने की तत्परता।
  2. निर्भीकता: फाँसी की सज़ा सुनकर भी बेड़ियाँ बजाते, मस्ती से झूमते बाहर आना – मृत्यु से न डरना।
  3. अन्याय के विरुद्ध आवाज़: अत्याचार को चुपचाप स्वीकार न करना; “दुर्बलता के डर से अपना काम नहीं रोकना चाहिए।”
  4. निस्वार्थ त्याग: अपने भविष्य, करियर और सुख का त्याग करके राष्ट्र-हित को सर्वोपरि रखना।
  5. मित्रता और एकता: सभी साथियों का एक-दूसरे के लिए खड़ा रहना; जानकी को सबका ‘माँ’ कहना।
  6. ज़िंदादिली: कठिनतम समय में भी हँसी-मज़ाक – बंगड़ का “फाँसी की रस्सी टूट जाए” कहना।
  7. माँ के प्रति प्रेम: लाल का अंतिम पत्र – “हम मिले थे, मिले हैं, मिलेंगे।”

(आज के संदर्भ में यह प्रेरणा हिंसा की नहीं, बल्कि देशहित के लिए साहस, ईमानदारी और त्याग से काम करने की है।)

देशप्रेम, मृत्यु से भी न डरने वाली निर्भीकता, अन्याय के विरुद्ध आवाज़, निस्वार्थ त्याग, मित्रता-एकता, कठिन समय में ज़िंदादिली और माँ के प्रति प्रेम – आज के संदर्भ में देशहित के लिए साहस और ईमानदारी से काम करने की प्रेरणा।

Q13

‘उसकी माँ’ के आधार पर अपनी माँ के बारे में एक कहानी लिखिए।

Answer

उत्तर

माँ की लालटेन

सर्दियों की वह रात मुझे आज भी याद है। दसवीं की बोर्ड परीक्षा से एक दिन पहले बिजली चली गई थी। मैं घबराकर किताबें बंद करने लगा तो माँ चुपचाप उठीं, अलमारी से पुरानी लालटेन निकाली, उसका शीशा साफ़ किया और मेरे पास रख दी। “पढ़ ले बेटा, मैं जाग रही हूँ।”

मैं पढ़ता रहा और माँ पास बैठी स्वेटर बुनती रहीं। बीच-बीच में वे उठकर अदरक वाली चाय बना लातीं और कहतीं, “थोड़ा ही बचा है, घबरा मत।” रात के दो बजे जब मेरी आँखें झपकने लगीं, तो उन्होंने मेरे सिर पर हाथ फेरा – उस स्पर्श में ऐसी ताक़त थी कि मैं फिर पढ़ने लगा।

सुबह जब मैं परीक्षा देने निकला, तो माँ दरवाज़े पर दही-चीनी लेकर खड़ी थीं। उनकी आँखें लाल थीं – पूरी रात वे सोई नहीं थीं। मैंने पूछा, “माँ, आप थकती नहीं?” वे हँस दीं, “माँ की थकान बच्चे की मुसकान से उतर जाती है।”

परिणाम आया तो मैं अच्छे अंकों से पास हुआ। सबने मुझे बधाई दी, पर मैं जानता था कि वह सफलता उस लालटेन की रोशनी और माँ की जागी हुई रातों की थी। आज भी जब किसी कठिनाई में होता हूँ, तो लगता है माँ वही लालटेन लिए पास बैठी हैं।

जानकी की तरह मेरी माँ भी बहुत कुछ नहीं कहतीं, बस चुपचाप देती रहती हैं – अपना समय, नींद, सुख, सब कुछ। शायद इसीलिए हर माँ एक छोटी-सी भारत माता होती है।

‘माँ की लालटेन’ शीर्षक कहानी ऊपर दी गई है – परीक्षा की रात बिजली जाने पर माँ का लालटेन जलाकर पूरी रात साथ जागना, और जानकी की तरह चुपचाप त्याग करने वाली माँ का चित्रण।

विषय-सूची की जाँच

  • ☒ लाल, चाचा और दो मानसिकताएँ (प्रश्न 1, 3, 4, 7)
  • ☒ जानकी – माँ और भारत माता (प्रश्न 2, 5, 8, 9)
  • ☒ शासन-तंत्र, समाज और आशय (प्रश्न 6, 10)
  • ☒ पुलिस, प्रेरणा और अपनी माँ (प्रश्न 11, 12, 13)

Total questions answered: 13 of 13

Frequently Asked Questions

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