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Class 11 Hindi Aroh Chapter 10

NCERT Solutions for Class 11 Hindi Aroh Chapter 10: मीरा के पद

Class

Subject

Book

Chapter

Session

Questions covered

XI

Hindi

Aroh (NCERT)

10 – मीरा के पद

2026-27

5 of 5

बिंदु

विवरण

कवयित्री

मीराबाई (लगभग 1498–1546), कृष्ण-भक्त

रचना

पद – “मेरे तो गिरधर गोपाल, दूसरो न कोई” (मीराँ मुक्तावली, सं. नरोत्तम दास स्वामी)

भाव

कृष्ण के प्रति अनन्य प्रेम और समर्पण; कुल-मर्यादा और लोक-लाज का त्याग; सांसारिक मोह में फँसे लोगों पर दुख

शिल्प

राजस्थानी (ब्रज-प्रभावित) भाषा, गेयता, रूपक (प्रेम-बेलि, आणंद-फल), अनुप्रास, पुनरुक्ति प्रकाश

मेरे तो गिरधर गोपाल, दूसरो न कोई
जा के सिर मोर-मुकुट, मेरो पति सोई
छांड़ि दयी कुल की कानि, कहा करिहै कोई?
संतन ढिग बैठि-बैठि, लोक-लाज खोयी
अंसुवन जल सींचि-सींचि, प्रेम-बेलि बोयी
अब त बेलि फैलि गयी, आणंद-फल होयी
दूध की मथनियाँ बड़े प्रेम से विलोयी
दधि मथि घृत काढ़ि लियो, डारि दयी छोयी
भगत देखि राजी हुयी, जगत देखि रोयी
दासि मीरां लाल गिरधर! तारो अब मोही

भावार्थ: मीरा कहती हैं कि मेरे तो केवल गिरधर गोपाल (कृष्ण) हैं, दूसरा कोई नहीं। जिनके सिर पर मोर-मुकुट है, वही मेरे पति हैं। मैंने कुल की मर्यादा छोड़ दी है, अब कोई मेरा क्या करेगा? संतों के पास बैठ-बैठकर मैंने लोक-लाज खो दी है। आँसुओं के जल से सींच-सींचकर मैंने प्रेम की बेल बोई है; अब वह बेल फैल गई है और उस पर आनंद के फल लगने लगे हैं। मैंने दूध की मथानी से बड़े प्रेम से दही बिलोया, उसमें से घी (भक्ति/सार) निकाल लिया और छाछ (सांसारिक असार वस्तुएँ) छोड़ दी। भक्तों को देखकर मैं प्रसन्न होती हूँ और संसार (माया में डूबे लोगों) को देखकर रोती हूँ। दासी मीरा प्रार्थना करती है – हे गिरधर लाल! अब मेरा उद्धार करो।

अभ्यास – पद के साथ

Q1

मीरा कृष्ण की उपासना किस रूप में करती हैं? वह रूप कैसा है?

Answer

उत्तर

मीरा कृष्ण की उपासना पति (प्रियतम) रूप में – माधुर्य भाव से करती हैं। वे कहती हैं – “जा के सिर मोर-मुकुट, मेरो पति सोई।” वे स्वयं को कृष्ण की दासी भी कहती हैं।

वह रूप: कृष्ण का गिरधर गोपाल रूप है – गोवर्धन पर्वत धारण करने वाले, गायों के पालक। उनके सिर पर मोर-पंखों का मुकुट सुशोभित है। यह मनमोहक, सगुण और लीलामय रूप है, जो भक्तों की रक्षा करता है।

मीरा कृष्ण की उपासना पति रूप में (माधुर्य भाव से, स्वयं को दासी मानकर) करती हैं; वह रूप गिरधर गोपाल का है, जिनके सिर पर मोर-मुकुट सुशोभित है।

Q2

भाव व शिल्प सौंदर्य स्पष्ट कीजिए –
(क) अंसुवन जल सींचि-सींचि, प्रेम-बेलि बोयी / अब त बेलि फैलि गई, आणंद-फल होयी
(ख) दूध की मथनियाँ बड़े प्रेम से विलोयी / दधि मथि घृत काढ़ि लियो, डारि दयी छोयी

Answer

उत्तर

(क) भाव-सौंदर्य: मीरा ने कृष्ण-प्रेम की बेल को विरह के आँसुओं से सींच-सींचकर बड़ा किया है। लंबी साधना और पीड़ा के बाद अब यह प्रेम-बेल फैल गई है और उस पर आनंद रूपी फल लगने लगे हैं – अर्थात् भक्ति से उन्हें परम आनंद की प्राप्ति हो रही है।

शिल्प-सौंदर्य

  • सांगरूपक – प्रेम-बेलि, अंसुवन जल, आणंद-फल (प्रेम पर बेल का पूरा रूपक)।
  • पुनरुक्ति प्रकाश – “सींचि-सींचि”।
  • अनुप्रास – “बेलि बोयी”, “फैलि… फल”।
  • राजस्थानी-ब्रज मिश्रित भाषा, गेयता, माधुर्य गुण।

(ख) भाव-सौंदर्य: जैसे दही को मथकर घी निकाल लिया जाता है और छाछ छोड़ दी जाती है, वैसे ही मीरा ने संसार का प्रेमपूर्वक मंथन (चिंतन) करके उसका सार – कृष्ण-भक्ति (घी) – ग्रहण कर लिया है और सांसारिक मोह-माया रूपी असार (छाछ) को त्याग दिया है।

शिल्प-सौंदर्य

  • रूपक/अन्योक्ति – दूध-दही = संसार/जीवन, घी = भक्ति (सार), छाछ = सांसारिक असार वस्तुएँ।
  • अनुप्रास – “दधि… दयी”, “मथि… मथनियाँ”।
  • दैनिक जीवन (दही बिलोना) से लिया गया सहज, ग्राम्य बिंब।
  • सरल, गेय, राजस्थानी भाषा।

(क) विरह के आँसुओं से सींची प्रेम-बेल पर अब आनंद के फल लगे हैं – सांगरूपक, पुनरुक्ति प्रकाश, अनुप्रास, गेयता। (ख) संसार को मथकर भक्ति रूपी घी ग्रहण किया और मोह-माया रूपी छाछ त्याग दी – रूपक, अनुप्रास, ग्राम्य बिंब, सरल राजस्थानी भाषा।

Q3

मीरा जगत को देखकर रोती क्यों हैं?

Answer

उत्तर

मीरा देखती हैं कि संसार के लोग मोह-माया, धन, विषय-भोग और व्यर्थ के कामों में डूबे हुए हैं। वे सार (ईश्वर-भक्ति) को छोड़कर असार (छाछ जैसी सांसारिक वस्तुओं) के पीछे भाग रहे हैं और अपना अमूल्य मानव-जीवन व्यर्थ गँवा रहे हैं। उनकी इस अज्ञानता और दुर्दशा पर करुणा के कारण मीरा रोती हैं। इसके विपरीत, भक्तों को ईश्वर-भक्ति में लीन देखकर वे प्रसन्न होती हैं।

संसार के लोग मोह-माया और व्यर्थ के कार्यों में डूबकर ईश्वर-भक्ति रूपी सार को भूल गए हैं और जीवन व्यर्थ गँवा रहे हैं – उनकी इस दुर्दशा पर करुणावश मीरा रोती हैं।

अभ्यास – पद के आस-पास

Q4

कल्पना करें, प्रेम प्राप्ति के लिए मीरा को किन-किन कठिनाइयों का सामना करना पड़ा होगा।

Answer

उत्तर

  1. परिवार का विरोध: राजघराने की बहू होकर साधु-संतों के बीच बैठना, मंदिर में नाचना-गाना ससुराल वालों (राणा परिवार) को कुल की मर्यादा के विरुद्ध लगा; उन्हें ताने और अपमान सहने पड़े।
  2. प्राणघातक षड्यंत्र: कहा जाता है कि उन्हें विष का प्याला भेजा गया और पिटारे में साँप भेजा गया; पर कृष्ण-कृपा से वे बच गईं।
  3. सामाजिक निंदा: उस समय स्त्रियों के लिए पर्दा प्रथा और कठोर बंधन थे; मीरा द्वारा उनका पालन न करने पर समाज ने उन्हें ‘कुलनाशी’ कहकर उनकी निंदा की।
  4. वैधव्य और अकेलापन: कम उम्र में पति की मृत्यु के बाद सती होने का दबाव भी झेलना पड़ा होगा।
  5. घर-त्याग और भटकन: उन्हें महल छोड़कर वृंदावन और द्वारका में साधु-जीवन बिताना पड़ा।
  6. विरह-वेदना: कृष्ण से मिलन की तीव्र चाह और विरह की पीड़ा – “अंसुवन जल सींचि-सींचि”।

फिर भी मीरा अपने प्रेम-पथ से विचलित नहीं हुईं – “कहा करिहै कोई?”

परिवार और राजघराने का विरोध, विष और साँप भेजे जाने जैसे षड्यंत्र, समाज की निंदा, पर्दा प्रथा व सती जैसे बंधनों का दबाव, घर-त्याग और विरह-वेदना – इन सब कठिनाइयों को मीरा ने दृढ़ता से सहा।

Q5

लोक लाज खोने का अभिप्राय क्या है?

Answer

उत्तर

लोक-लाज खोने का अभिप्राय है – समाज की परवाह न करना, समाज द्वारा बनाई गई मर्यादाओं और बंधनों को तोड़ देना और दूसरों की निंदा-प्रशंसा से ऊपर उठ जाना।

मीरा राजघराने की बहू थीं। उस युग में स्त्रियों का पर्दे में रहना और घर की चारदीवारी में सीमित रहना ‘मर्यादा’ माना जाता था। पर मीरा ने संतों के साथ बैठकर सत्संग किया, मंदिरों में सार्वजनिक रूप से नाचीं-गाईं, पर्दा नहीं किया। समाज ने इसे निर्लज्जता कहा, पर मीरा के लिए कृष्ण-प्रेम सबसे ऊपर था। इसलिए उन्होंने कहा – “संतन ढिग बैठि-बैठि, लोक-लाज खोयी।” यह स्त्री-मुक्ति और व्यक्तिगत आस्था की स्वतंत्रता की घोषणा भी है।

लोक-लाज खोने का अर्थ है समाज की निंदा-प्रशंसा और उसकी बनाई मर्यादाओं की परवाह छोड़ देना – मीरा ने राजघराने की बहू होकर भी संतों के साथ सत्संग किया और सार्वजनिक रूप से कृष्ण-भक्ति में नाचीं-गाईं।

विषय-सूची की जाँच

  • ☒ कृष्ण की उपासना का रूप (प्रश्न 1)
  • ☒ भाव और शिल्प सौंदर्य (प्रश्न 2)
  • ☒ जगत के प्रति करुणा (प्रश्न 3)
  • ☒ मीरा का संघर्ष और लोक-लाज (प्रश्न 4, 5)

Total questions answered: 5 of 5

Frequently Asked Questions

What do these NCERT solutions for Class 11 Hindi Aroh Chapter 10 (मीरा के पद) cover?

All 5 questions from the latest NCERT textbook for this chapter are answered step by step, organised as अभ्यास – पद के साथ and अभ्यास – पद के आस-पास.

Are these solutions based on the new NCERT syllabus?

Yes. The answers follow the current NCERT textbook for Class 11 Hindi Aroh and the latest CBSE syllabus, so the question numbers and wording match the book you use in class.

How should I use these solutions to prepare for exams?

Attempt each question on your own first, then compare your working with the answer here. Note the steps or keywords you missed, and revise the chapter notes before taking a chapter-wise MCQ test to check your understanding.

Are the NCERT solutions for Class 11 Hindi Aroh Chapter 10 (मीरा के पद) free?

Yes. All Circle of Learning NCERT solutions and chapter notes are free to read online, with no sign-up needed.