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Class 11 Hindi Aroh Chapter 2

NCERT Solutions for Class 11 Hindi Aroh Chapter 2: मियाँ नसीरुद्दीन

Class

Subject

Book

Chapter

Session

Questions covered

XI

Hindi

Aroh (NCERT)

2 – मियाँ नसीरुद्दीन

2026-27

13 of 13

बिंदु

विवरण

लेखिका

कृष्णा सोबती (1925–2019)

विधा

शब्दचित्र (संग्रह हम-हशमत से)

मुख्य पात्र

मियाँ नसीरुद्दीन – मटियामहल (दिल्ली) के गढ़ैया मुहल्ले के खानदानी नानबाई

विषय-वस्तु

छप्पन किस्म की रोटियाँ बनाने वाले मियाँ का व्यक्तित्व, पेशे पर गर्व, बातचीत का अंदाज़ और खानदानी हुनर

संदेश

अपने पेशे को कला का दर्जा देना; काम करके सीखना ही असली हुनर है; श्रम का सम्मान

भाषा

उर्दू-मिश्रित बोलचाल की हिंदी, चुटीली और चित्रात्मक

अभ्यास – पाठ के साथ

Q1

मियाँ नसीरुद्दीन को नानबाइयों का मसीहा क्यों कहा गया है?

Answer

उत्तर

  1. मियाँ नसीरुद्दीन खानदानी नानबाई हैं; उनके दादा मियाँ कल्लन और पिता मियाँ बरकत शाही नानबाई थे।
  2. वे छप्पन किस्म की रोटियाँ बनाने के लिए मशहूर हैं – बाकरखानी, शीरमाल, ताफ़तान, बेसनी, खमीरी, रूमाली, गाव, दीदा, गाज़ेबान, तुनकी आदि।
  3. वे अपने काम को साधारण धंधा नहीं, कला मानते हैं और उसके बारे में किसी उस्ताद या दार्शनिक की तरह (मसीहाई अंदाज़ में) बोलते हैं।
  4. उनके पास नानबाई के काम का गहरा अनुभव और ज्ञान है, जो दूसरे नानबाइयों में नहीं है।

इसीलिए लेखिका ने उन्हें नानबाइयों का मसीहा (सबसे बड़ा जानकार, पथ-प्रदर्शक) कहा है।

खानदानी हुनर, छप्पन किस्म की रोटियाँ बनाने की कला और काम को कला मानने वाले मसीहाई अंदाज़ के कारण वे नानबाइयों के मसीहा कहे गए हैं।

Q2

लेखिका मियाँ नसीरुद्दीन के पास क्यों गई थीं?

Answer

उत्तर

लेखिका एक दोपहर जामा मस्जिद के पास मटियामहल के गढ़ैया मुहल्ले से गुज़र रही थीं। एक मामूली अँधेरी दुकान पर आटे का ढेर सनते देख वे ठिठक गईं। पता चला कि यह खानदानी नानबाई मियाँ नसीरुद्दीन की दुकान है, जो छप्पन किस्म की रोटियों के लिए मशहूर हैं। लेखिका उनके हुनर, खानदानी पेशे और रोटियाँ बनाने की कला के बारे में जानकारी लेने (उनसे बातचीत कर उनका शब्दचित्र लिखने) के लिए उनके पास गईं।

छप्पन किस्म की रोटियाँ बनाने वाले खानदानी नानबाई के हुनर और जीवन के बारे में जानकारी लेने के लिए।

Q3

बादशाह के नाम का प्रसंग आते ही लेखिका की बातों में मियाँ नसीरुद्दीन की दिलचस्पी क्यों खत्म होने लगी?

Answer

उत्तर

मियाँ ने बड़े गर्व से बताया था कि उनके बुज़ुर्ग बादशाह सलामत के लिए ऐसी चीज़ बनाते थे जो न आग से पके, न पानी से बने। जब लेखिका ने पूछा कि वे किस बादशाह के यहाँ काम करते थे, तो मियाँ उलझ गए। संभवतः यह बात सुनी-सुनाई थी और उनके पास इसका कोई ठोस प्रमाण या जानकारी नहीं थी। अपनी डींग की पोल खुलने के डर से वे बात टालने लगे, खीझ गए और बोले कि “आपको कौन-सा उनके नाम चिट्ठी-पत्री भेजनी है!” इसलिए उनकी दिलचस्पी खत्म होने लगी।

बादशाह वाली बात सुनी-सुनाई थी; बादशाह का नाम पूछे जाने पर पोल खुलने के डर से वे खीझकर बात टालने लगे।

Q4

‘मियाँ नसीरुद्दीन के चेहरे पर किसी दबे हुए अंधड़ के आसार देख यह मज़मून न छेड़ने का फ़ैसला किया’ – इस कथन के पहले और बाद के प्रसंग का उल्लेख करते हुए इसे स्पष्ट कीजिए।

Answer

उत्तर

पहले का प्रसंग: मियाँ ने बताया कि उन्होंने कारीगर रखे हैं, जो उनके काम में हाथ बँटाते हैं। लेखिका यह जानना चाहती थीं कि कारीगर कौन हैं; मन में आया कि पूछ लें – आपके बेटे-बेटियाँ हैं? (यानी क्या बेटे-पोते यह खानदानी काम नहीं करते)।

कथन का अर्थ: यह सोचते ही मियाँ के चेहरे पर किसी दबे हुए दुख या तूफ़ान (अंधड़) के निशान दिखाई दिए – शायद संतान से कोई पीड़ा या शिकायत जुड़ी थी। इसलिए लेखिका ने यह विषय (मज़मून) न छेड़ने का फ़ैसला किया।

बाद का प्रसंग: लेखिका ने केवल इतना पूछा कि क्या कारीगर लोग आपकी शागिर्दी करते हैं। मियाँ ने कहा – “खाली शागिर्दी ही नहीं साहिब, गिन के मज़ूरी देता हूँ। दो रुपये मन आटे की मज़ूरी, चार रुपये मन मैदे की मज़ूरी!” इससे पता चलता है कि उन्हें काम में परिवार का साथ नहीं मिला और मज़दूरी पर कारीगर रखने पड़े।

कारीगरों की बात पर बेटे-बेटियों के बारे में पूछने का मन हुआ, पर मियाँ के चेहरे पर छिपे दुख के भाव देख लेखिका ने वह प्रश्न टाल दिया और केवल कारीगरों की मज़दूरी के बारे में पूछा।

Q5

पाठ में मियाँ नसीरुद्दीन का शब्दचित्र लेखिका ने कैसे खींचा है?

Answer

उत्तर

लेखिका ने मियाँ का शब्दचित्र बड़ी जीवंतता से खींचा है:

  1. रूप-रंग: “मौसमों की मार से पका चेहरा, आँखों में काइयाँ भोलापन और पेशानी पर मँजे हुए कारीगर के तेवर।” वे चारपाई पर बैठे बीड़ी का मज़ा ले रहे थे; बचे-खुचे दाँतों से खिलखिलाकर हँसते थे।
  2. बोलने का अंदाज़: पंचहज़ारी अंदाज़ से सिर हिलाना, आँखों के कंचे फेरना, तरेरकर बोलना, सुकरात की तरह सिर हिलाना।
  3. स्वभाव: अपने खानदानी पेशे पर गर्व, बातों में डींग, अखबारवालों को निठल्ला मानना, काम से सीखने में विश्वास, ज़रा-सी बात पर तुनक जाना।
  4. भाषा: उर्दू-मिश्रित बोलचाल – “बजा फ़रमाया”, “तालीम की तालीम”, “रोटी जनाब पकती है आँच से” – जिससे पात्र साकार हो उठता है।

इस प्रकार रूप, हाव-भाव, संवाद और स्वभाव के सूक्ष्म चित्रण से मियाँ आँखों के सामने जीवित हो उठते हैं।

रूप-रंग, हाव-भाव, बोलचाल की उर्दू-मिश्रित भाषा, संवादों और स्वभाव (गर्व, डींग, तुनकमिज़ाजी) के सजीव चित्रण द्वारा लेखिका ने मियाँ का शब्दचित्र खींचा है।

अभ्यास – पाठ के आस-पास

Q6

मियाँ नसीरुद्दीन की कौन-सी बातें आपको अच्छी लगीं?

Answer

उत्तर

  1. पेशे के प्रति सम्मान और गर्व: वे अपने खानदानी काम को छोटा नहीं, कला मानते हैं।
  2. करके सीखने में विश्वास: “काम करने से आता है, नसीहतों से नहीं।”
  3. तालीम की तालीम: उन्होंने बर्तन धोने, भट्टी बनाने और आँच देने से शुरुआत की – हर काम की बुनियादी सीख ज़रूरी है।
  4. ईमानदारी: “रोटी पकाने में झूठ का क्या काम!”
  5. मेहनत और आत्मसम्मान: वे कारीगरों को गिनकर मज़दूरी देते हैं और कामकाजी जीवन को महत्त्व देते हैं।
  6. उनकी ज़िंदादिली और बात करने का चुटीला अंदाज़।

पेशे पर गर्व, करके सीखने का विश्वास, बुनियादी तालीम का महत्त्व, ईमानदारी, मेहनत और उनकी ज़िंदादिली।

Q7

‘तालीम की तालीम ही बड़ी चीज़ होती है’ – यहाँ लेखक ने तालीम शब्द का दो बार प्रयोग क्यों किया है? क्या आप दूसरी बार आए तालीम शब्द की जगह कोई अन्य शब्द रख सकते हैं? लिखिए।

Answer

उत्तर

यहाँ पहली बार ‘तालीम’ का अर्थ शिक्षा/सीख है और दूसरी बार उसका अर्थ है शिक्षा पाने का सही ढंग, अनुशासन या क्रम। मियाँ कहना चाहते हैं कि किसी हुनर को सीखने के लिए उसकी शुरुआती, बुनियादी बातें क्रम से सीखना (बर्तन धोना, भट्टी बनाना, आँच देना) भी उतना ही ज़रूरी है – सीधे ऊँची कक्षा में बैठ जाने से हुनर नहीं आता। दोहराव से बात पर बल पड़ता है।

दूसरी बार आए ‘तालीम’ की जगह ये शब्द रखे जा सकते हैं: तरीका, अनुशासन, अभ्यास, सलीका – जैसे “तालीम का तरीका ही बड़ी चीज़ होता है” या “शिक्षा का अनुशासन ही बड़ी चीज़ होती है।”

दोहराव से यह बल दिया गया है कि शिक्षा को क्रम और अनुशासन से पाना ज़रूरी है; दूसरी ‘तालीम’ की जगह ‘तरीका’, ‘अनुशासन’ या ‘अभ्यास’ रखा जा सकता है।

Q8

मियाँ नसीरुद्दीन तीसरी पीढ़ी के हैं जिसने अपने खानदानी व्यवसाय को अपनाया। वर्तमान समय में प्रायः लोग अपने पारंपरिक व्यवसाय को नहीं अपना रहे हैं। ऐसा क्यों?

Answer

उत्तर

  1. कम आमदनी: अनेक पारंपरिक धंधों (कुम्हारी, बुनकरी, लोहारी, नानबाई) में मेहनत अधिक और कमाई कम है।
  2. शिक्षा और नए अवसर: पढ़-लिखकर युवा नौकरी, इंजीनियरिंग, चिकित्सा, आईटी जैसे क्षेत्रों में बेहतर भविष्य देखते हैं।
  3. मशीनीकरण और बाज़ार: कारख़ानों के सस्ते, तैयार माल ने हाथ के काम की माँग घटा दी है।
  4. सामाजिक प्रतिष्ठा: कुछ पारंपरिक कामों को समाज छोटा मानता है, इसलिए नई पीढ़ी उनसे बचती है।
  5. शहरीकरण और रुचि में बदलाव: लोग गाँव छोड़ शहरों में जा रहे हैं और अपनी रुचि का काम चुनना चाहते हैं।

कम कमाई, शिक्षा से मिले नए अवसर, मशीनी उत्पादन की होड़, सामाजिक प्रतिष्ठा की कमी और बदलती रुचियों के कारण लोग पारंपरिक व्यवसाय नहीं अपना रहे।

Q9

‘मियाँ, कहीं अखबारनवीस तो नहीं हो? यह तो खोजियों की खुराफ़ात है’ – अखबार की भूमिका को देखते हुए इस पर टिप्पणी करें।

Answer

उत्तर

मियाँ अखबार बनाने वालों और पढ़ने वालों को निठल्ला मानते हैं और पत्रकारों की खोजबीन को ‘खुराफ़ात’ (शरारत) कहते हैं। यह उनकी व्यक्तिगत, सीमित सोच है।

अखबार की वास्तविक भूमिका

  1. अखबार समाज को देश-दुनिया की सूचना देते हैं।
  2. वे जनमत बनाते हैं और सरकार की नीतियों पर नज़र रखते हुए लोकतंत्र के ‘चौथे स्तंभ’ का काम करते हैं।
  3. भ्रष्टाचार, अन्याय और समस्याओं को उजागर करते हैं।
  4. मियाँ जैसे गुमनाम हुनरमंदों को पहचान दिलाते हैं – स्वयं यह शब्दचित्र इसका उदाहरण है।

हाँ, कभी-कभी अखबार बात का बतंगड़ बनाते हैं या निजी जीवन में अनावश्यक दखल देते हैं; शायद इसी कारण मियाँ ऐसा कहते हैं। पर कुल मिलाकर अखबार की भूमिका उपयोगी और आवश्यक है।

मियाँ की यह धारणा एकांगी है; अखबार सूचना देने, जनमत बनाने, अन्याय उजागर करने और गुमनाम प्रतिभाओं को पहचान दिलाने वाला लोकतंत्र का चौथा स्तंभ है, यद्यपि कभी-कभी वह निजी मामलों में अनावश्यक दखल देता है।

Q10

पकवानों को जानें – पाठ में आए रोटियों के अलग-अलग नामों की सूची बनाएँ और इनके बारे में जानकारी प्राप्त करें।

Answer

उत्तर

रोटी

संक्षिप्त जानकारी

बाकरखानी

मैदे, घी, दूध और चीनी से बनी परतदार, मोटी, खस्ता रोटी

शीरमाल

दूध और केसर मिले मैदे की हल्की मीठी रोटी, तंदूर में पकती है

ताफ़तान

मैदा, दूध, घी, अंडे/दही से बनी खमीरी, नरम रोटी

बेसनी

बेसन मिलाकर बनाई गई रोटी

खमीरी

खमीर (यीस्ट) उठाकर बनाई गई फूली रोटी

रूमाली

रूमाल की तरह बड़ी और बहुत पतली रोटी, उल्टी कड़ाही पर पकती है

गाव (गावदीदा)

मोटी, गोल, बीच से उभरी हुई रोटी

गाज़ेबान

एक प्रकार की मोटी, खस्ता रोटी

तुनकी

बहुत पतली, कुरकुरी रोटी (पापड़ से भी महीन)

बाकरखानी, शीरमाल, ताफ़तान, बेसनी, खमीरी, रूमाली, गाव, दीदा, गाज़ेबान और तुनकी – ये तंदूर/भट्टी में बनने वाली अलग-अलग स्वाद और बनावट की रोटियाँ हैं।

अभ्यास – भाषा की बात

Q11

तीन-चार वाक्यों में अनुकूल प्रसंग तैयार कर नीचे दिए गए वाक्यों का इस्तेमाल करें।
क. पंचहज़ारी अंदाज़ से सिर हिलाया। ख. आँखों के कंचे हम पर फेर दिए। ग. आ बैठे उन्हीं के ठीये पर।

Answer

उत्तर

क. गाँव के मुखिया जी चौपाल पर बैठे थे। एक युवक ने आकर विनती की कि उसकी फ़रियाद सुन ली जाए। मुखिया जी ने पंचहज़ारी अंदाज़ से सिर हिलाया, मानो कोई बड़ा अहसान कर रहे हों, और बोले – “कहो, क्या बात है?”

ख. मैंने दादाजी से पूछा कि क्या उन्होंने आज़ादी की लड़ाई देखी थी। दादाजी ने चश्मा उतारा और आँखों के कंचे हम पर फेर दिए, जैसे पूछ रहे हों कि इतनी बड़ी बात इतनी आसानी से कैसे पूछ ली। फिर वे धीरे-धीरे पुराने दिनों की कहानी सुनाने लगे।

ग. रामू के पिता बरसों तक गली के नुक्कड़ पर जूते गाँठते रहे। उनके गुज़रने के बाद रामू ने पढ़ाई छोड़ी और आ बैठा उन्हीं के ठीये पर। आज वह उसी जगह पिता का हुनर आगे बढ़ा रहा है।

तीनों वाक्यों का प्रयोग ऊपर दिए प्रसंगों (मुखिया की अकड़, दादाजी की तीखी दृष्टि, पिता के स्थान पर बेटे का बैठना) में किया गया है।

Q12

बिटर-बिटर देखना – यहाँ देखने के एक खास तरीके को प्रकट किया गया है। देखने संबंधी इस प्रकार के चार क्रिया-विशेषणों का प्रयोग कर वाक्य बनाइए।

Answer

उत्तर

  1. टुकुर-टुकुर – भूखा बच्चा मिठाई की दुकान की ओर टुकुर-टुकुर देख रहा था।
  2. घूर-घूरकर – अजनबी को देखकर कुत्ता उसे घूर-घूरकर देखने लगा।
  3. एकटक – माँ दरवाज़े पर खड़ी बेटे की राह एकटक देख रही थी।
  4. कनखियों से – कक्षा में राधा कनखियों से अपनी सहेली को देखकर मुसकरा रही थी।
  5. (अतिरिक्त) आँखें फाड़-फाड़कर – जादू का खेल बच्चे आँखें फाड़-फाड़कर देख रहे थे।

टुकुर-टुकुर, घूर-घूरकर, एकटक, कनखियों से (आँखें फाड़-फाड़कर) – इनसे वाक्य ऊपर बनाए गए हैं।

Q13

नीचे दिए वाक्यों में अर्थ पर बल देने के लिए शब्द-क्रम परिवर्तित किया गया है। सामान्यतः इन वाक्यों को किस क्रम में लिखा जाता है? लिखें।
क. मियाँ मशहूर हैं छप्पन किस्म की रोटियाँ बनाने के लिए। ख. निकाल लेंगे वक्त थोड़ा। ग. दिमाग में चक्कर काट गई है बात। घ. रोटी जनाब पकती है आँच से।

Answer

उत्तर

हिंदी का सामान्य क्रम है – कर्ता + कर्म/पूरक + क्रिया।

परिवर्तित क्रम

सामान्य क्रम

क. मियाँ मशहूर हैं छप्पन किस्म की रोटियाँ बनाने के लिए।

मियाँ छप्पन किस्म की रोटियाँ बनाने के लिए मशहूर हैं।

ख. निकाल लेंगे वक्त थोड़ा।

थोड़ा वक्त निकाल लेंगे।

ग. दिमाग में चक्कर काट गई है बात।

बात दिमाग में चक्कर काट गई है।

घ. रोटी जनाब पकती है आँच से।

जनाब, रोटी आँच से पकती है।

क. मियाँ छप्पन किस्म की रोटियाँ बनाने के लिए मशहूर हैं। ख. थोड़ा वक्त निकाल लेंगे। ग. बात दिमाग में चक्कर काट गई है। घ. जनाब, रोटी आँच से पकती है।

विषय-सूची की जाँच

  • ☒ मियाँ का व्यक्तित्व और शब्दचित्र (प्रश्न 1, 5, 6)
  • ☒ लेखिका की भेंट और प्रसंग (प्रश्न 2, 3, 4)
  • ☒ पेशा, तालीम और अखबार (प्रश्न 7, 8, 9)
  • ☒ रोटियों के नाम (प्रश्न 10)
  • ☒ भाषा की बात (प्रश्न 11, 12, 13)

Total questions answered: 13 of 13

Frequently Asked Questions

What do these NCERT solutions for Class 11 Hindi Aroh Chapter 2 (मियाँ नसीरुद्दीन) cover?

All 13 questions from the latest NCERT textbook for this chapter are answered step by step, organised as अभ्यास – पाठ के साथ, अभ्यास – पाठ के आस-पास and अभ्यास – भाषा की बात.

Are these solutions based on the new NCERT syllabus?

Yes. The answers follow the current NCERT textbook for Class 11 Hindi Aroh and the latest CBSE syllabus, so the question numbers and wording match the book you use in class.

How should I use these solutions to prepare for exams?

Attempt each question on your own first, then compare your working with the answer here. Note the steps or keywords you missed, and revise the chapter notes before taking a chapter-wise MCQ test to check your understanding.

Are the NCERT solutions for Class 11 Hindi Aroh Chapter 2 (मियाँ नसीरुद्दीन) free?

Yes. All Circle of Learning NCERT solutions and chapter notes are free to read online, with no sign-up needed.