Class | Subject | Book | Chapter | Session | Questions covered |
|---|---|---|---|---|---|
XI | Hindi | Aroh (NCERT) | 8 – भारत माता | 2026-27 | 13 of 13 |
बिंदु | विवरण |
|---|---|
लेखक | जवाहरलाल नेहरू (1889–1964), अनुवाद – हरिभाऊ उपाध्याय |
स्रोत | हिंदुस्तान की कहानी (द डिस्कवरी ऑफ़ इंडिया) का पाँचवाँ अध्याय |
विधा | निबंध/वैचारिक गद्य |
विषय | जलसों में किसानों से भारत की एकता और ‘भारत माता’ के अर्थ की चर्चा |
निष्कर्ष | भारत माता यहाँ के करोड़ों लोग हैं; ‘भारत माता की जय’ का अर्थ है इन लोगों की जय |
भाषा | हिंदुस्तानी – उर्दू शब्दों (यक-साँ, जुज़, महदूद, गिज़ा) से युक्त सहज भाषा |
अभ्यास – पाठ के साथ
भारत की चर्चा नेहरू जी कब और किससे करते थे?
Answer
उत्तर
स्वतंत्रता-आंदोलन के दिनों में जब नेहरू जी एक जलसे (सभा) से दूसरे जलसे में चक्कर काटते रहते थे, तब वे अपने सुनने वालों से, विशेषकर गाँवों के किसानों से, भारत की चर्चा करते थे। शहरों में वे ऐसा कम करते थे, क्योंकि वहाँ के श्रोता अधिक सयाने थे और उन्हें दूसरी तरह की ‘गिज़ा’ (विचार-सामग्री) चाहिए थी; जबकि किसानों का नज़रिया सीमित (महदूद) था।
जलसों में जाते समय नेहरू जी वहाँ के श्रोताओं, विशेषकर सीमित दृष्टि वाले किसानों से भारत की चर्चा करते थे।
नेहरू जी भारत के सभी किसानों से कौन-सा प्रश्न बार-बार करते थे?
Answer
उत्तर
जलसों में जब उनका स्वागत “भारत माता की जय!” के नारे से होता, तो वे किसानों से बार-बार पूछते – “इस नारे से आपका क्या मतलब है? यह भारत माता कौन है, जिसकी आप जय चाहते हैं?” जवाब मिलने पर (जैसे ‘धरती’) वे आगे पूछते – कौन-सी धरती? अपने गाँव की, ज़िले की, सूबे की या सारे हिंदुस्तान की?
“भारत माता की जय का क्या मतलब है? यह भारत माता कौन है, जिसकी आप जय चाहते हैं?”
उत्तर
दुनिया के बारे में किसानों को बताना नेहरू जी के लिए क्यों आसान था?
Answer
उत्तर
- महाकाव्य और पुराण: किसान रामायण, महाभारत और पुराणों की कथाएँ अच्छी तरह जानते थे, जिनसे उन्हें इस बड़े देश की कल्पना पहले से थी।
- तीर्थयात्री: हर सभा में कुछ लोग मिल जाते थे जिन्होंने देश के चारों कोनों पर स्थित बड़े तीर्थों की यात्रा की थी।
- पुराने सिपाही: कुछ पूर्व सैनिक मिल जाते जिन्होंने पिछले विश्वयुद्ध या अन्य अभियानों में विदेशों में नौकरी की थी।
- आर्थिक मंदी: सन् 1930 के बाद आई विश्वव्यापी आर्थिक मंदी का असर किसानों ने स्वयं झेला था, इसलिए दूसरे देशों के बारे में दिए हवाले उनकी समझ में आ जाते थे।
महाकाव्यों-पुराणों की कथाओं, तीर्थयात्रियों और विदेश में लड़ चुके पुराने सिपाहियों के अनुभव तथा 1930 की आर्थिक मंदी के प्रत्यक्ष अनुभव के कारण किसान दुनिया की बातें समझ लेते थे।
किसान सामान्यतः भारत माता का क्या अर्थ लेते थे?
Answer
उत्तर
किसान सामान्यतः ‘भारत माता’ का अर्थ धरती से लेते थे। एक हट्टे-कट्टे जाट किसान ने, जो पीढ़ियों से खेती करता आया था, यही उत्तर दिया। पर यह धरती उनके लिए प्रायः अपने गाँव, ज़िले या सूबे की ज़मीन तक सीमित थी; पूरे देश की स्पष्ट कल्पना उनके मन में नहीं थी।
किसान भारत माता का अर्थ ‘धरती’ लेते थे – प्रायः अपने गाँव या क्षेत्र की ज़मीन।
भारत माता के प्रति नेहरू जी की क्या अवधारणा थी?
Answer
उत्तर
नेहरू जी के अनुसार हिंदुस्तान वह सब कुछ है जो किसानों ने समझ रखा है – नदी, पहाड़, जंगल और अन्न देने वाले खेत – और ये सब हमें प्रिय (अज़ीज़) हैं। पर अंततः जिनकी गिनती है, वे हैं हिंदुस्तान के लोग – पूरे देश में फैले करोड़ों लोग। भारत माता दरअसल यही करोड़ों लोग हैं, और “भारत माता की जय” का अर्थ है इन लोगों की जय। वे किसानों से कहते – “तुम इस भारत माता के अंश हो, एक तरह से तुम ही भारत माता हो।”
भारत माता देश की धरती के साथ-साथ मुख्य रूप से यहाँ के करोड़ों लोग हैं; ‘भारत माता की जय’ का अर्थ है इन लोगों की जय – हर भारतवासी भारत माता का अंश है।
आज़ादी से पूर्व किसानों को किन समस्याओं का सामना करना पड़ता था?
Answer
उत्तर
उत्तर से दक्षिण और पूरब से पश्चिम तक सभी किसानों की तकलीफ़ें एक-सी थीं:
- गरीबी और कर्ज़ का बोझ।
- पूँजीपतियों का शिकंजा।
- ज़मींदारों और महाजनों का शोषण।
- कड़े लगान और भारी सूद (ब्याज)।
- पुलिस के ज़ुल्म।
- ये सभी समस्याएँ उस ढाँचे (ढप्पे) से गुँथी थीं जो विदेशी सरकार ने भारत पर लाद रखा था।
गरीबी, कर्ज़, पूँजीपतियों का शिकंजा, ज़मींदार-महाजन, कड़ा लगान व सूद, पुलिस के ज़ुल्म – और इन सबके पीछे विदेशी शासन का ढाँचा।
अभ्यास – पाठ के आस-पास
आज़ादी से पहले भारत-निर्माण को लेकर नेहरू के क्या सपने थे? क्या आज़ादी के बाद वे साकार हुए? चर्चा कीजिए।
Answer
उत्तर
नेहरू के सपने
- ऐसा स्वराज्य जो थोड़े लोगों के लिए नहीं, सबके फ़ायदे के लिए हो।
- किसानों को ज़मींदारी, महाजनी शोषण, कर्ज़ और गरीबी से मुक्ति।
- विविधता में एकता – पूरा देश एक राष्ट्र के रूप में सोचे।
- आधुनिक, वैज्ञानिक, औद्योगिक और आत्मनिर्भर भारत; शिक्षा का प्रसार।
- लोकतांत्रिक, धर्मनिरपेक्ष और समाजवादी समाज; विश्व-शांति।
क्या साकार हुए?
- हाँ, काफ़ी हद तक: ज़मींदारी उन्मूलन, पंचवर्षीय योजनाएँ, हरित क्रांति, बड़े बाँध, आई.आई.टी., इसरो, परमाणु ऊर्जा; मज़बूत लोकतंत्र और संविधान; देश की एकता बनी रही; शिक्षा और स्वास्थ्य में प्रगति।
- पूरी तरह नहीं: आज भी गरीबी, बेरोज़गारी, किसानों का कर्ज़ और आत्महत्याएँ, आर्थिक असमानता, भ्रष्टाचार और क्षेत्रीय असंतुलन जैसी समस्याएँ बनी हुई हैं।
नेहरू सबके लिए स्वराज्य, किसानों की मुक्ति, राष्ट्रीय एकता और आधुनिक, वैज्ञानिक, लोकतांत्रिक भारत का सपना देखते थे; लोकतंत्र, योजनाएँ, ज़मींदारी उन्मूलन और विज्ञान-उद्योग में ये काफ़ी हद तक साकार हुए, पर गरीबी, असमानता और किसानों की समस्याएँ अब भी बाकी हैं।
भारत के विकास को लेकर आप क्या सपने देखते हैं?
Answer
उत्तर
- हर बच्चे को अच्छी और मुफ़्त शिक्षा; हर युवा को कौशल और रोज़गार।
- कोई भूखा या बेघर न हो; गरीबी और असमानता का अंत।
- किसान समृद्ध हों – फ़सल का उचित मूल्य, सिंचाई, आधुनिक तकनीक।
- सबके लिए सुलभ स्वास्थ्य-सेवाएँ।
- भ्रष्टाचार-मुक्त, पारदर्शी शासन; त्वरित न्याय।
- महिलाओं की सुरक्षा और समान अवसर; जाति-धर्म के भेदभाव का अंत।
- स्वच्छ पर्यावरण, हरित ऊर्जा और साफ़ नदियाँ।
- विज्ञान, तकनीक और नवाचार में अग्रणी, आत्मनिर्भर भारत जो विश्व-शांति में योगदान दे।
शिक्षित, रोज़गार-युक्त, गरीबी-मुक्त, समृद्ध किसानों वाला, भ्रष्टाचार-मुक्त, समानता और सुरक्षा वाला, स्वच्छ और तकनीकी रूप से आत्मनिर्भर भारत।
आपकी दृष्टि में भारत माता और हिंदुस्तान की क्या संकल्पना है? बताइए।
Answer
उत्तर
मेरी दृष्टि में भारत माता केवल एक भू-भाग या मूर्ति नहीं है। वह हिमालय से कन्याकुमारी तक फैली धरती, नदियाँ, पर्वत, वन और खेत तो है ही, पर सबसे बढ़कर वह यहाँ के करोड़ों लोग हैं – हर किसान, मज़दूर, सैनिक, विद्यार्थी, स्त्री-पुरुष। हिंदुस्तान अनेक भाषाओं, धर्मों, संस्कृतियों और परंपराओं का संगम है, जहाँ विविधता में एकता है। इसकी प्राचीन संस्कृति, संविधान के मूल्य – लोकतंत्र, समानता, धर्मनिरपेक्षता और भाईचारा – इसकी आत्मा हैं। ‘भारत माता की जय’ कहने का अर्थ है हर भारतवासी के सम्मान, सुख और उन्नति की कामना करना और उसके लिए काम करना।
भारत माता धरती, प्रकृति और सबसे बढ़कर करोड़ों भारतवासी हैं; हिंदुस्तान विविधता में एकता वाला, लोकतंत्र, समानता और भाईचारे पर आधारित राष्ट्र है – भारत माता की जय यानी हर भारतवासी की उन्नति।
वर्तमान समय में किसानों की स्थिति किस सीमा तक बदली है? चर्चा कर लिखिए।
Answer
उत्तर
सुधार
- ज़मींदारी प्रथा समाप्त हुई; किसान अपनी ज़मीन का मालिक बना।
- हरित क्रांति से उत्पादन बढ़ा; उन्नत बीज, खाद, ट्रैक्टर और सिंचाई साधन आए।
- न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP), किसान क्रेडिट कार्ड, फ़सल बीमा, पीएम-किसान सम्मान निधि जैसी योजनाएँ।
- मोबाइल और इंटरनेट से मौसम व मंडी-भाव की जानकारी; सहकारी समितियाँ।
अभी भी समस्याएँ
- छोटी और बँटी हुई जोतें; मानसून पर निर्भरता।
- कर्ज़ का बोझ और कुछ क्षेत्रों में किसानों की आत्महत्याएँ।
- फ़सल का उचित मूल्य न मिलना, बिचौलियों का शोषण।
- बढ़ती लागत, जलवायु परिवर्तन, भूजल का गिरना।
- युवा पीढ़ी का खेती से विमुख होना।
निष्कर्ष: स्थिति आज़ादी से पहले की तुलना में बहुत बदली है, पर किसान अब भी पूरी तरह समृद्ध और सुरक्षित नहीं है।
ज़मींदारी उन्मूलन, हरित क्रांति, MSP, ऋण-बीमा योजनाओं और तकनीक से किसानों की स्थिति काफ़ी सुधरी है, पर छोटी जोतें, कर्ज़, उचित मूल्य का अभाव और मौसम पर निर्भरता अब भी बड़ी समस्याएँ हैं।
आज़ादी से पूर्व अनेक नारे प्रचलित थे। किन्हीं दस नारों का संकलन करें और संदर्भ भी लिखें।
Answer
उत्तर
नारा | संदर्भ |
|---|---|
1. स्वराज मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है और मैं इसे लेकर रहूँगा। | बाल गंगाधर तिलक |
2. करो या मरो। | महात्मा गांधी, भारत छोड़ो आंदोलन (1942) |
3. अंग्रेज़ो, भारत छोड़ो। | भारत छोड़ो आंदोलन, 1942 |
4. तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आज़ादी दूँगा। | सुभाषचंद्र बोस, आज़ाद हिंद फ़ौज |
5. दिल्ली चलो। | सुभाषचंद्र बोस, आज़ाद हिंद फ़ौज |
6. जय हिंद। | सुभाषचंद्र बोस/आज़ाद हिंद फ़ौज का अभिवादन |
7. इंक़लाब ज़िंदाबाद। | मौलाना हसरत मोहानी; भगतसिंह और साथियों ने लोकप्रिय बनाया |
8. सरफ़रोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है। | बिस्मिल अज़ीमाबादी की ग़ज़ल, रामप्रसाद बिस्मिल ने लोकप्रिय बनाई |
9. वंदे मातरम्। | बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय, ‘आनंदमठ’; बंग-भंग आंदोलन में प्रमुख नारा |
10. साइमन, वापस जाओ (साइमन गो बैक)। | साइमन कमीशन का विरोध, 1928 (लाला लाजपत राय) |
11. पूर्ण स्वराज। | कांग्रेस का लाहौर अधिवेशन, 1929 (नेहरू) |
12. भारत माता की जय। | स्वतंत्रता आंदोलन का लोकप्रिय नारा |
दस से अधिक नारे संदर्भ सहित ऊपर दिए गए हैं – जैसे ‘स्वराज मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है’ (तिलक), ‘करो या मरो’ (गांधी), ‘तुम मुझे खून दो…’ (सुभाष), ‘इंक़लाब ज़िंदाबाद’ (भगतसिंह), ‘वंदे मातरम्’ (बंकिमचंद्र)।
अभ्यास – भाषा की बात
नीचे दिए गए शब्दों का पाठ के संदर्भ में अर्थ लिखिए – दक्खिन, पच्छिम, यक-साँ, एक जुज़, ढप्पे
Answer
उत्तर
शब्द | पाठ के संदर्भ में अर्थ |
|---|---|
दक्खिन | दक्षिण दिशा |
पच्छिम | पश्चिम दिशा |
यक-साँ | एक समान, एक जैसे (किसानों की समस्याएँ सब जगह एक-सी थीं) |
एक जुज़ | एक अंश/हिस्सा (हम इस बड़ी दुनिया का एक हिस्सा हैं) |
ढप्पे | ढाँचा, तरीका/व्यवस्था (विदेशी सरकार द्वारा लादा गया शासन का ढाँचा) |
दक्खिन – दक्षिण; पच्छिम – पश्चिम; यक-साँ – एक समान; एक जुज़ – एक हिस्सा; ढप्पे – ढाँचा/व्यवस्था।
नीचे दिए गए संज्ञा शब्दों के विशेषण रूप लिखिए – आज़ादी, चमक, हिंदुस्तान, विदेश, सरकार, यात्रा, पुराण, भारत
Answer
उत्तर
संज्ञा | विशेषण |
|---|---|
आज़ादी | आज़ाद |
चमक | चमकीला / चमकदार |
हिंदुस्तान | हिंदुस्तानी |
विदेश | विदेशी |
सरकार | सरकारी |
यात्रा | यात्री (यात्रा-संबंधी) |
पुराण | पौराणिक |
भारत | भारतीय |
आज़ाद, चमकीला/चमकदार, हिंदुस्तानी, विदेशी, सरकारी, यात्री, पौराणिक, भारतीय।
विषय-सूची की जाँच
- ☒ जलसे, किसान और भारत की चर्चा (प्रश्न 1, 2, 3, 6)
- ☒ भारत माता की अवधारणा (प्रश्न 4, 5, 9)
- ☒ नेहरू के सपने, आज का भारत और किसान (प्रश्न 7, 8, 10)
- ☒ स्वतंत्रता-आंदोलन के नारे (प्रश्न 11)
- ☒ भाषा की बात (प्रश्न 12, 13)