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Class 11 Hindi Aroh Chapter 11

NCERT Solutions for Class 11 Hindi Aroh Chapter 11: घर की याद

Class

Subject

Book

Chapter

Session

Questions covered

XI

Hindi

Aroh (NCERT)

11 – घर की याद

2026-27

7 of 7

बिंदु

विवरण

कवि

भवानी प्रसाद मिश्र (1913–1985)

संदर्भ

1942 के भारत छोड़ो आंदोलन में जेल-प्रवास के दौरान सावन की एक बरसाती रात

विषय

घर से दूर होने की पीड़ा; माता-पिता, भाई-बहनों की स्मृति; पिता का व्यक्तित्व; माँ का स्नेह

विशेष

सावन को संदेशवाहक बनाकर परिजनों तक झूठी कुशलता का संदेश भेजना ताकि वे दुखी न हों

शिल्प

सरल, बोलचाल की भाषा; तुकांत, गेय; पुनरावृत्ति (“घर नज़र में तिर रहा है”); ‘बस’ शब्द का चमत्कारी प्रयोग

अभ्यास – कविता के साथ

Q1

पानी के रात भर गिरने और प्राण-मन के घिरने में परस्पर क्या संबंध है?

Answer

उत्तर

जेल में बंद कवि सावन की रात में लगातार बरसते पानी को देख रहा है। जैसे-जैसे रात भर पानी गिरता रहा, वैसे-वैसे कवि का प्राण-मन घर की यादों से घिरता चला गया। बरसात का मौसम घर-परिवार के साथ बिताए सुखद पलों की याद दिलाता है; अकेलेपन में बारिश की झड़ी मन में उदासी और भावुकता भर देती है। इस प्रकार बाहर बादलों का बरसना और भीतर मन का यादों और दुख से भर जाना – दोनों साथ-साथ चलते हैं। बादलों की तरह कवि का मन भी भीग जाता है।

रात भर बरसते पानी ने जेल में बंद कवि के मन को घर की यादों और उदासी से घेर लिया – बाहर बादल बरसते रहे और भीतर मन स्मृतियों व दुख से भरता गया।

Q2

मायके आई बहन के लिए कवि ने घर को परिताप का घर क्यों कहा है?

Answer

उत्तर

सावन में बहन ससुराल से मायके (पिता के घर) आई है। उसे उम्मीद रही होगी कि सब भाई-बहन एक साथ मिलेंगे, खुशियाँ मनाएँगे। पर उसका एक भाई (कवि) जेल में बंद है और घर में नहीं है। भाई की अनुपस्थिति से बहन और पूरा परिवार दुखी है। इसलिए जो घर खुशियों का घर होना चाहिए था, वह बहन के लिए परिताप (अत्यधिक दुख) का घर बन गया है।

बहन सावन में मायके आई, पर उसका भाई (कवि) जेल में होने के कारण घर में नहीं था; भाई की अनुपस्थिति से खुशी का घर उसके लिए दुख (परिताप) का घर बन गया।

Q3

पिता के व्यक्तित्व की किन विशेषताओं को उकेरा गया है?

Answer

उत्तर

  1. चिर-युवा और स्फूर्तिवान: बुढ़ापा उन्हें एक क्षण भी नहीं व्यापा; वे अब भी दौड़ सकते हैं और खिलखिलाते हैं।
  2. निडर और साहसी: मौत के आगे नहीं हिचकते, शेर के आगे नहीं बिचकते।
  3. ओजस्वी और कर्मठ: उनकी वाणी में बादल-सी गर्जना और काम में आँधी-सी तेज़ी है।
  4. धार्मिक और व्यायामप्रिय: रोज़ गीता-पाठ, दो सौ साठ दंड और मुगदर घुमाना।
  5. भावुक और स्नेही: इतने कठोर दिखने वाले पिता भी पाँचवें बेटे (कवि) को याद कर रो पड़े होंगे; वे कवि को ‘सोने पर सुहागा’ कहते थे और प्यार में बहते रहते थे।
  6. धैर्यवान: “कहाँ, मैं रोता कहाँ हूँ, धीर मैं खोता कहाँ हूँ” – दुख छिपाकर दूसरों को धीरज बँधाते हैं।

पिता चिर-युवा, स्फूर्तिवान, निडर, ओजस्वी वाणी व कर्मठ, गीता-पाठी व व्यायामप्रिय हैं, पर भीतर से अत्यंत भावुक और स्नेही भी हैं, जो दुख छिपाकर धैर्य रखते हैं।

Q4

निम्नलिखित पंक्तियों में ‘बस’ शब्द के प्रयोग की विशेषता बताइए –
मैं मज़े में हूँ सही है / घर नहीं हूँ बस यही है / किंतु यह बस बड़ा बस है / इसी बस से सब विरस है

Answer

उत्तर

यहाँ ‘बस’ शब्द का तीन अर्थों में चमत्कारी प्रयोग हुआ है (यमक/श्लेष का सौंदर्य):

  1. “घर नहीं हूँ बस यही है” – यहाँ ‘बस’ का अर्थ है केवल/सिर्फ़। कवि कहता है कि मैं मज़े में हूँ, केवल घर पर नहीं हूँ।
  2. “किंतु यह बस बड़ा बस है” – पहला ‘बस’ = केवल यही बात; दूसरा ‘बस’ = विवशता/लाचारी (वश न चलना) या बहुत बड़ी बात। यानी यह ‘केवल’ इतनी छोटी बात नहीं, बहुत बड़ी विवशता है।
  3. “इसी बस से सब विरस है” – इसी कमी (घर से दूर होने की विवशता) के कारण जीवन का सारा रस (आनंद) खत्म हो गया है।

इस प्रकार एक साधारण-से शब्द के बार-बार प्रयोग से कवि ने घर से दूर होने की गहरी पीड़ा को व्यक्त किया है – जो बात छोटी दिखती है, वही सबसे बड़ी है।

‘बस’ का प्रयोग ‘केवल’ और ‘विवशता/वश न होना’ दोनों अर्थों में हुआ है (यमक-श्लेष का चमत्कार); ‘केवल घर पर न होना’ छोटी बात लगती है, पर यही बड़ी विवशता है जिसके कारण जीवन नीरस हो गया है।

Q5

कविता की अंतिम 12 पंक्तियों को पढ़कर कल्पना कीजिए कि कवि अपनी किस स्थिति व मनःस्थिति को अपने परिजनों से छिपाना चाहता है?

Answer

उत्तर

कवि सावन से कहता है कि परिजनों को यह न बताना कि –

  1. “कह न देना जागता हूँ” – वह रात भर जागता रहता है, उसे नींद नहीं आती (घर की चिंता और अकेलेपन से)।
  2. “आदमी से भागता हूँ” – वह उदास और अकेला रहता है, लोगों से मिलना-जुलना नहीं चाहता।
  3. “कह न देना मौन हूँ मैं” – वह चुप-चुप रहता है, बोलना छोड़ चुका है।
  4. “खुद न समझूँ कौन हूँ मैं” – वह इतना दुखी और खोया हुआ है कि उसे अपनी पहचान भी याद नहीं रहती; मानसिक रूप से टूट रहा है।
  5. “यों न कहना अस्त हूँ मैं” – उसका उत्साह बुझ चुका है।

कवि जेल में बहुत दुखी, अकेला, अनिद्रा और निराशा से ग्रस्त है, पर वह यह सब परिजनों से छिपाना चाहता है ताकि वे और दुखी न हों। इसलिए वह सावन से झूठी कुशलता का संदेश भिजवाता है – “देखना कुछ बक न देना, उन्हें कोई शक न देना।”

कवि छिपाना चाहता है कि वह जेल में रातों को जागता है, लोगों से दूर भागता है, मौन और उदास रहता है, यहाँ तक कि अपनी पहचान भी भूलने लगा है – ताकि परिजन उसकी दुखी, टूटी मनःस्थिति जानकर और दुखी न हों।

अभ्यास – कविता के आस-पास

Q6

ऐसी पाँच रचनाओं का संकलन कीजिए जिसमें प्रकृति के उपादानों की कल्पना संदेशवाहक के रूप में की गई है।

Answer

उत्तर

रचना

रचनाकार

संदेशवाहक

1. मेघदूत

कालिदास

मेघ (बादल) – यक्ष अपनी पत्नी को संदेश भेजता है

2. पवनदूत / पवन-दूतिका

धोयी (संस्कृत) तथा अन्य कवि

पवन (हवा)

3. पद्मावत (नागमती वियोग खंड)

मलिक मुहम्मद जायसी

पक्षी (भौंरा, कौआ) – नागमती रत्नसेन को संदेश भेजती है

4. भ्रमरगीत

सूरदास

भ्रमर (भौंरा) – गोपियों का उद्धव और कृष्ण के प्रति उपालंभ

5. प्रियप्रवास

अयोध्यासिंह उपाध्याय ‘हरिऔध’

पवन – राधा पवन को दूत बनाकर कृष्ण के पास भेजती हैं

6. हंसदूत / कोकिल-संदेश

संस्कृत संदेश-काव्य परंपरा

हंस, कोयल

7. घर की याद

भवानी प्रसाद मिश्र

सावन

मेघदूत (कालिदास – मेघ), पवनदूत (धोयी – पवन), पद्मावत (जायसी – पक्षी), भ्रमरगीत (सूरदास – भौंरा), प्रियप्रवास (हरिऔध – पवन) आदि।

Q7

घर से अलग होकर आप घर को किस तरह से याद करते हैं? लिखें।

Answer

उत्तर

पिछली गर्मियों में मुझे पंद्रह दिनों के लिए छात्रावास वाले एक शिविर में रहना पड़ा। पहले दिन तो नई जगह और नए दोस्तों के उत्साह में समय बीत गया, पर रात होते ही घर की याद आने लगी।

  1. खाने के समय माँ के हाथ का बना खाना – दाल-चावल, आलू के पराँठे – बहुत याद आता था।
  2. रात को सोते समय दादी की कहानियाँ और छोटे भाई के साथ होने वाली नोकझोंक याद आती थी।
  3. सुबह पिताजी की आवाज़ – “उठो, स्कूल की देर हो जाएगी” – कानों में गूँजती थी।
  4. घर का अपना कमरा, बालकनी में लगे पौधे और शाम को मोहल्ले के दोस्तों के साथ खेलना भी याद आता था।

मैं रोज़ फ़ोन पर बात करता, पर माँ से यह नहीं कहता कि मुझे घर की बहुत याद आ रही है, ताकि वे परेशान न हों – ठीक वैसे ही जैसे कवि सावन से कहता है, “उन्हें कोई शक न देना।” उन दिनों समझ आया कि घर केवल ईंट-पत्थर का मकान नहीं, बल्कि परिवार के प्रेम, अपनेपन और सुरक्षा का नाम है।

घर से दूर रहने पर माँ का खाना, दादी की कहानियाँ, पिता की आवाज़, भाई-बहनों की नोकझोंक और अपना कमरा याद आते हैं; हम परिजनों को चिंता से बचाने के लिए अपनी उदासी छिपा लेते हैं – तब समझ आता है कि घर प्रेम और अपनेपन का नाम है।

विषय-सूची की जाँच

  • ☒ बरसात और घर की याद (प्रश्न 1, 2)
  • ☒ पिता का व्यक्तित्व (प्रश्न 3)
  • ☒ ‘बस’ का प्रयोग और छिपाई गई मनःस्थिति (प्रश्न 4, 5)
  • ☒ संदेश-काव्य और व्यक्तिगत अनुभव (प्रश्न 6, 7)

Total questions answered: 7 of 7

Frequently Asked Questions

What do these NCERT solutions for Class 11 Hindi Aroh Chapter 11 (घर की याद) cover?

All 7 questions from the latest NCERT textbook for this chapter are answered step by step, organised as अभ्यास – कविता के साथ and अभ्यास – कविता के आस-पास.

Are these solutions based on the new NCERT syllabus?

Yes. The answers follow the current NCERT textbook for Class 11 Hindi Aroh and the latest CBSE syllabus, so the question numbers and wording match the book you use in class.

How should I use these solutions to prepare for exams?

Attempt each question on your own first, then compare your working with the answer here. Note the steps or keywords you missed, and revise the chapter notes before taking a chapter-wise MCQ test to check your understanding.

Are the NCERT solutions for Class 11 Hindi Aroh Chapter 11 (घर की याद) free?

Yes. All Circle of Learning NCERT solutions and chapter notes are free to read online, with no sign-up needed.