Class | Subject | Book | Chapter | Session | Questions covered |
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XI | Hindi | Aroh (NCERT) | 12 – चंपा काले काले अच्छर नहीं चीन्हती | 2026-27 | 8 of 8 |
बिंदु | विवरण |
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कवि | त्रिलोचन (1917–2007), प्रगतिशील कवि |
स्रोत | काव्य-संग्रह धरती |
पात्र | चंपा – सुंदर ग्वाले की चंचल, नटखट, अनपढ़ बेटी, जो पशु चराती है; कवि (कथावाचक) |
विषय | निरक्षरता, पलायन (गाँव के पुरुषों का रोज़गार के लिए कलकत्ता जाना) और उससे टूटते परिवार; शिक्षा-व्यवस्था का अंतर्विरोध |
केंद्रीय पंक्ति | “कलकत्ते पर बजर गिरे” – शोषक व्यवस्था और पलायन के प्रति आक्रोश |
शिल्प | ग्रामीण बोलचाल (अच्छर, कागद, बजर, बालम), संवाद शैली, सहज मुक्त छंद |
अभ्यास – कविता के साथ
चंपा ने ऐसा क्यों कहा कि कलकत्ता पर बजर गिरे?
Answer
उत्तर
कवि ने चंपा को पढ़ने के लिए समझाते हुए कहा कि ब्याह के बाद तुम्हारा पति कुछ दिन साथ रहकर कमाने के लिए दूर कलकत्ता चला जाएगा; तब उसे संदेश कैसे भेजोगी और उसके पत्र कैसे पढ़ोगी?
चंपा जानती है कि गाँव के पुरुष रोज़गार के लिए कलकत्ता चले जाते हैं और पत्नियाँ बरसों अकेली विरह में तड़पती हैं। कलकत्ता उसके लिए उस पलायन और परिवार तोड़ने वाली व्यवस्था का प्रतीक है। वह अपने पति को कभी खुद से दूर नहीं जाने देना चाहती। इसलिए वह आक्रोश में कहती है – “कलकत्ते पर बजर गिरे”, यानी कलकत्ता नष्ट हो जाए, जो पतियों को पत्नियों से छीन लेता है।
कलकत्ता गाँव के पुरुषों को रोज़गार के लिए पत्नियों से दूर कर देता है; अपने भावी पति के बिछुड़ने की आशंका से आक्रोशित होकर चंपा ने कलकत्ते पर वज्र गिरने की कामना की।
चंपा को इस पर क्यों विश्वास नहीं होता कि गांधी बाबा ने पढ़ने-लिखने की बात कही होगी?
Answer
उत्तर
चंपा ने कवि से सुना था कि गांधी बाबा बहुत अच्छे हैं। उसकी नज़र में पढ़ाई-लिखाई अच्छा काम नहीं है – कवि दिन भर ‘कागद गोदता’ रहता है; पढ़े-लिखे लोग झूठ बोलते हैं और पढ़ाई-लिखाई ही पतियों को कलकत्ता जैसे शहरों में ले जाकर परिवारों को तोड़ती है। इसलिए उसे लगता है कि जो व्यक्ति अच्छा है, वह ऐसी बुरी चीज़ (पढ़ाई) की सलाह कैसे दे सकता है। वह कहती है – “तुम तो कहते थे गांधी बाबा अच्छे हैं, वे पढ़ने-लिखने की कैसे बात कहेंगे।”
चंपा पढ़ाई-लिखाई को अच्छा काम नहीं मानती; उसके अनुसार अच्छे गांधी बाबा ऐसी बुरी बात की सलाह नहीं दे सकते।
कवि ने चंपा की किन विशेषताओं का उल्लेख किया है?
Answer
उत्तर
- परिचय: चंपा सुंदर ग्वाले की बेटी है; गाय-भैंसों को लेकर चरवाही करने जाती है – मेहनती है।
- अच्छी और चंचल: वह अच्छी है, चंचल है।
- नटखट: कभी-कभी ऊधम करती है, कवि की कलम चुरा लेती है, फिर कागज़ गायब कर देती है।
- जिज्ञासु: कवि के पढ़ते समय चुपचाप खड़ी होकर सुनती है और अचरज करती है कि काले चिह्नों से स्वर कैसे निकलते हैं।
- स्पष्टवादी और तर्कशील: वह बेझिझक कहती है – “तुम कागद ही गोदा करते हो”, “तुम पढ़-लिखकर इतने झूठे हो।”
- दृढ़ निश्चयी और भावुक: पढ़ने से साफ़ इनकार करती है; पति को कभी कलकत्ता न जाने देने का संकल्प लेती है।
- निरक्षर – काले अक्षर नहीं पहचानती।
चंपा ग्वाले की मेहनती बेटी है जो पशु चराती है; वह अच्छी, चंचल, नटखट (कलम-कागज़ छिपाने वाली), जिज्ञासु, स्पष्टवादी, दृढ़ निश्चयी और भावुक है, पर निरक्षर है।
आपके विचार में चंपा ने ऐसा क्यों कहा होगा कि मैं तो नहीं पढ़ूँगी?
Answer
उत्तर
- पढ़ाई के प्रति ग़लत धारणा: उसे लगता है कि पढ़ाई का काम केवल ‘कागद गोदना’ है, जिसका कोई उपयोग नहीं।
- पढ़े-लिखों पर अविश्वास: उसके अनुभव में पढ़े-लिखे लोग झूठे और चालाक होते हैं।
- पलायन से जोड़ना: उसे लगता है कि पढ़ाई-लिखाई ही लोगों को शहर (कलकत्ता) ले जाती है और परिवार टूटते हैं; पढ़-लिखकर पत्र लिखना मानो पति के दूर जाने को स्वीकार करना है।
- परिवेश और ज़रूरत का अभाव: ग्वाले की बेटी होने से उसका जीवन पशु चराने में बीतता है; घर-समाज में लड़कियों की शिक्षा को महत्त्व नहीं दिया जाता।
- बाल-सुलभ ज़िद और भोलापन भी इसका कारण है।
पढ़ाई को बेकार ‘कागद गोदना’ मानने, पढ़े-लिखों को झूठा समझने, पढ़ाई को पति के दूर जाने (पलायन) से जोड़ने, लड़कियों की शिक्षा के प्रति उपेक्षा वाले परिवेश और बाल-सुलभ ज़िद के कारण।
अभ्यास – कविता के आस-पास
यदि चंपा पढ़ी-लिखी होती, तो कवि से कैसे बातें करती?
Answer
उत्तर
यदि चंपा पढ़ी-लिखी होती, तो उसकी बातचीत में समझदारी, आत्मविश्वास और तर्क होता। वह शायद ऐसे कहती:
“भैया, तुम क्या पढ़ रहे हो? मुझे भी दिखाओ, मैं भी यह कविता पढ़ूँगी। मैंने कल अखबार में पढ़ा कि गाँव में नया दुग्ध-केंद्र खुलेगा – बापू की गायों का दूध वहाँ अच्छे दाम में बिकेगा। और सुनो, अगर ब्याह के बाद मेरे पति कलकत्ता गए, तो मैं उन्हें चिट्ठी लिखूँगी, फ़ोन पर संदेश भेजूँगी। पर मैं तो चाहूँगी कि वे गाँव में ही कोई काम करें – पढ़-लिखकर हम दोनों यहीं डेयरी चला सकते हैं। मैं गाँव की दूसरी लड़कियों को भी पढ़ाऊँगी।”
अर्थात् वह पढ़ाई को झूठ और ‘कागद गोदना’ नहीं, बल्कि जीवन सुधारने, अधिकार जानने और आत्मनिर्भर बनने का साधन समझती।
पढ़ी-लिखी चंपा जिज्ञासा और आत्मविश्वास के साथ किताब-अखबार की बातें करती, पति को पत्र/संदेश लिखने की बात कहती, गाँव में ही रोज़गार और आत्मनिर्भरता के उपाय सुझाती और दूसरी लड़कियों को पढ़ाने की इच्छा रखती।
इस कविता में पूर्वी प्रदेशों की स्त्रियों की किस विडंबनात्मक स्थिति का वर्णन हुआ है?
Answer
उत्तर
पूर्वी प्रदेशों (पूर्वी उत्तर प्रदेश, बिहार) में रोज़गार के अभाव में पुरुष विवाह के कुछ दिन बाद ही कमाने के लिए कलकत्ता जैसे दूर के शहरों में चले जाते थे। विडंबना यह थी कि:
- स्त्रियाँ बरसों पति से दूर, विरह और अकेलेपन में जीवन बिताती थीं।
- वे अनपढ़ होने के कारण पति को न पत्र लिख सकती थीं, न उनके पत्र पढ़ सकती थीं; दूसरों से पत्र पढ़वाने पर उनकी निजता भी नहीं रहती थी।
- घर-परिवार, खेती और पशुओं की पूरी ज़िम्मेदारी उन पर आ जाती थी।
- आर्थिक मजबूरी के कारण परिवार टूटते थे; पति शहर में दूसरी दुनिया में खो जाते।
इसी पीड़ा से इन क्षेत्रों में ‘बिदेसिया’ जैसे लोकगीत उपजे। चंपा का “कलकत्ते पर बजर गिरे” कहना इसी विडंबना के प्रति स्त्री का आक्रोश है।
पति रोज़गार के लिए कलकत्ता चले जाते थे और अनपढ़ स्त्रियाँ बरसों विरह, अकेलेपन और घर की ज़िम्मेदारियों में जीती थीं – वे पति से पत्र-व्यवहार भी नहीं कर पाती थीं; आर्थिक मजबूरी से परिवार टूटते थे।
संदेश ग्रहण करने और भेजने में असमर्थ होने पर एक अनपढ़ लड़की को किस वेदना और विपत्ति को भोगना पड़ता है, अपनी कल्पना से लिखिए।
Answer
उत्तर
एक अनपढ़ लड़की, जिसका पति परदेस में है, कई कष्ट भोगती है:
- अपने मन की बात न कह पाना: पति के लिए प्रेम, चिंता, घर का हाल – वह किसी से पत्र लिखवाती है, तो संकोच के कारण अपने मन की असली बात नहीं लिखवा पाती।
- निजता का हनन: पति का पत्र पढ़वाने के लिए दूसरों पर निर्भर रहना पड़ता है; उसकी निजी बातें दूसरे जान जाते हैं, कभी-कभी लोग उसका मज़ाक भी उड़ाते हैं।
- धोखे का डर: पढ़ने वाला व्यक्ति पत्र की बात बदलकर बता सकता है; मनीऑर्डर, बैंक, सरकारी कागज़ों में ठगी हो सकती है।
- अनिश्चितता और चिंता: पति बीमार है या सकुशल – समय पर ख़बर न मिलने से वह रातों जागती है।
- आपात स्थिति में असहायता: घर में कोई बीमार हो या संकट आए, तो वह तुरंत पति को सूचना नहीं दे पाती।
- हीनता की भावना: स्वयं को असहाय और दूसरों पर निर्भर महसूस करती है।
इस प्रकार निरक्षरता उसके जीवन को विरह के साथ-साथ अपमान, असुरक्षा और लाचारी से भर देती है।
उसे मन की बात न कह पाने, पत्र पढ़वाने में निजता खोने, धोखे के डर, पति की कुशलता की अनिश्चितता, संकट में सूचना न दे पाने की असहायता और हीनता की वेदना भोगनी पड़ती है।
त्रिलोचन पर एन.सी.ई.आर.टी. द्वारा बनाई गई फ़िल्म देखिए।
Answer
उत्तर
(यह गतिविधि है; फ़िल्म एन.सी.ई.आर.टी. के सी.आई.ई.टी. द्वारा बनाई गई है, जो NCERT के यूट्यूब चैनल / ई-पाठशाला / दीक्षा पर उपलब्ध है।)
फ़िल्म देखकर नोट करने योग्य बिंदु
- जीवन: त्रिलोचन शास्त्री (मूल नाम वासुदेव सिंह) का जन्म 1917 में चिरानीपट्टी, ज़िला सुल्तानपुर (उ.प्र.) में हुआ; 2007 में निधन।
- रचनाएँ: धरती, गुलाब और बुलबुल, दिगंत, ताप के ताए हुए दिन, उस जनपद का कवि हूँ, अरधान, तुम्हें सौंपता हूँ आदि।
- विशेषताएँ: प्रगतिशील काव्यधारा के प्रमुख कवि; हिंदी में सॉनेट (चतुर्दशपदी) के सफल प्रयोक्ता; ग्रामीण जीवन, किसान-मज़दूर और आम आदमी के संघर्ष के कवि; सरल, बोलचाल की भाषा।
- सम्मान: ‘ताप के ताए हुए दिन’ पर साहित्य अकादमी पुरस्कार।
फ़िल्म देखने के बाद कक्षा में त्रिलोचन के व्यक्तित्व और ‘चंपा’ कविता के यथार्थ पर चर्चा की जा सकती है।
NCERT/CIET की फ़िल्म (यूट्यूब, ई-पाठशाला, दीक्षा पर उपलब्ध) देखकर त्रिलोचन के जीवन, प्रमुख रचनाओं (धरती, ताप के ताए हुए दिन), सॉनेट-प्रयोग और ग्रामीण यथार्थ की कविता पर नोट्स बनाएँ और कक्षा में चर्चा करें।
विषय-सूची की जाँच
- ☒ चंपा का आक्रोश और पलायन (प्रश्न 1, 6)
- ☒ पढ़ाई के प्रति चंपा का दृष्टिकोण (प्रश्न 2, 4, 5)
- ☒ चंपा का चरित्र (प्रश्न 3)
- ☒ निरक्षरता की वेदना; कवि-परिचय (प्रश्न 7, 8)