Class | Subject | Book | Chapter | Session | Questions covered |
|---|---|---|---|---|---|
XI | Hindi | Aroh (NCERT) | 7 – जामुन का पेड़ | 2026-27 | 11 of 11 |
बिंदु | विवरण |
|---|---|
लेखक | कृश्न चंदर (1914–1977) |
विधा | हास्य-व्यंग्य कहानी |
घटना | आँधी में सेक्रेटेरियट के लॉन में जामुन का पेड़ गिरा, जिसके नीचे एक आदमी (कवि ‘ओस’) दब गया |
फ़ाइल की यात्रा | व्यापार-विभाग → कृषि-विभाग → हॉर्टीकल्चर विभाग → मेडिकल विभाग → कल्चरल विभाग (साहित्य अकादमी) → फ़ॉरेस्ट विभाग → विदेश विभाग → प्रधानमंत्री |
अंत | प्रधानमंत्री ने पेड़ काटने का आदेश दिया, पर तब तक कवि मर चुका था – “उसके जीवन की फ़ाइल भी मुकम्मल हो चुकी थी” |
संदेश | लालफ़ीताशाही, संवेदनहीन और अमानवीय सरकारी व्यवस्था पर तीखा व्यंग्य |
अभ्यास – पाठ के साथ
‘बेचारा जामुन का पेड़। कितना फलदार था। और इसकी जामुनें कितनी रसीली होती थीं।’ – क. ये संवाद कहानी के किस प्रसंग में आए हैं? ख. इससे लोगों की कैसी मानसिकता का पता चलता है?
Answer
उत्तर
क. रात की आँधी में सेक्रेटेरियट के लॉन में जामुन का पेड़ गिर गया और उसके नीचे एक आदमी दब गया। माली, चपरासी, क्लर्क और सुपरिंटेंडेंट दौड़कर वहाँ पहुँचे और भीड़ इकट्ठी हो गई। तब पेड़ के नीचे दबे आदमी की चिंता करने के बजाय क्लर्कों ने ये संवाद कहे – एक ने पेड़ के फलदार होने का, दूसरे ने रसीली जामुनों का और तीसरे ने बच्चों के लिए झोली भरकर जामुनें ले जाने का ज़िक्र किया।
ख. इससे लोगों की संवेदनहीन, स्वार्थी और अमानवीय मानसिकता का पता चलता है। उन्हें दबे हुए आदमी की जान से अधिक जामुनों के नुकसान की चिंता थी। माली के याद दिलाने पर ही उनका ध्यान आदमी की ओर गया। यह दफ़्तरी लोगों की मानवीय संवेदना के मर जाने पर व्यंग्य है।
क. पेड़ गिरने पर इकट्ठी भीड़ में क्लर्कों ने दबे आदमी के बजाय पेड़ के लिए अफ़सोस जताते हुए ये संवाद कहे। ख. इससे लोगों की स्वार्थी, संवेदनहीन मानसिकता का पता चलता है – उन्हें मनुष्य के जीवन से अधिक जामुनों की चिंता थी।
दबा हुआ आदमी एक कवि है, यह बात कैसे पता चली और इस जानकारी का फ़ाइल की यात्रा पर क्या असर पड़ा?
Answer
उत्तर
कैसे पता चला: एक रात माली दबे हुए आदमी के मुँह में खिचड़ी डालते हुए बोला कि अब मामला ऊपर चला गया है, कल सेक्रेटरियों की मीटिंग में उसका केस रखा जाएगा। तब दबे हुए आदमी ने आह भरकर ग़ालिब का शेर कहा – “ये तो माना कि तग़ाफ़ुल न करोगे लेकिन / ख़ाक हो जाएँगे हम तुमको ख़बर होने तक।” माली ने चकित होकर पूछा – “क्या तुम शायर हो?” उसने सिर हिला दिया। फिर यह बात माली से चपरासी, चपरासी से क्लर्क, क्लर्क से हैड-क्लर्क और पूरे सेक्रेटेरियट व शहर में फैल गई।
फ़ाइल पर असर
- सेक्रेटेरियट की सब-कमेटी ने फ़ैसला किया कि दबा आदमी कवि है, इसलिए फ़ाइल का संबंध एग्रीकल्चर या हॉर्टीकल्चर से नहीं, कल्चरल डिपार्टमेंट से है।
- फ़ाइल कल्चरल डिपार्टमेंट के अनेक विभागों से होती हुई साहित्य अकादमी के सेक्रेटरी तक पहुँची; उसने कवि को अकादमी की केंद्रीय शाखा का मेंबर चुन लिया, पर पेड़ हटाने में असमर्थता जताई।
- फिर फ़ाइल फ़ॉरेस्ट डिपार्टमेंट को भेजी गई। इस तरह फ़ाइल और भटकी, समय नष्ट हुआ और कवि की हालत बिगड़ती गई।
माली से बात करते समय उसने ग़ालिब का शेर कहा, तब पता चला कि वह कवि है; इसके बाद फ़ाइल कल्चरल विभाग और साहित्य अकादमी पहुँची, जिसने उसे सदस्य तो बना दिया पर पेड़ हटाने के लिए फ़ाइल फ़ॉरेस्ट विभाग भेज दी – फ़ाइल और भटकी और देर हुई।
कृषि-विभाग वालों ने मामले को हॉर्टीकल्चर विभाग को सौंपने के पीछे क्या तर्क दिया?
Answer
उत्तर
कृषि-विभाग ने तर्क दिया कि एग्रीकल्चर डिपार्टमेंट केवल अनाज और खेती-बाड़ी के मामलों में फ़ैसला करने का हकदार है। जामुन का पेड़ एक फलदार पेड़ है, और फलदार पेड़ों का मामला हॉर्टीकल्चर (उद्यान-कृषि) डिपार्टमेंट के अंतर्गत आता है। इसलिए उन्होंने मामला हॉर्टीकल्चर विभाग को सौंप दिया।
कृषि-विभाग केवल अनाज और खेती-बाड़ी के मामले देखता है; जामुन फलदार पेड़ है, इसलिए यह हॉर्टीकल्चर विभाग का मामला है।
इस पाठ में सरकार के किन-किन विभागों की चर्चा की गई है और पाठ से उनके कार्य के बारे में क्या अंदाज़ा मिलता है?
Answer
उत्तर
विभाग | पाठ में भूमिका / कार्य का अंदाज़ा |
|---|---|
व्यापार-विभाग | पेड़ उसी के लॉन में गिरा; ज़िम्मेदारी कृषि-विभाग पर डाल दी |
कृषि-विभाग | ज़िम्मेदारी व्यापार-विभाग पर डाली, फिर हॉर्टीकल्चर को सौंप दी |
हॉर्टीकल्चर विभाग | ‘पेड़ लगाओ’ योजना के नाम पर फलदार पेड़ काटने की इजाज़त नहीं दी |
मेडिकल विभाग | प्लास्टिक सर्जन भेजा – रिपोर्ट दी कि ऑपरेशन सफल होगा पर आदमी मर जाएगा |
कल्चरल विभाग / साहित्य अकादमी | कवि को अकादमी का मेंबर बना दिया, मरने पर बीवी को वज़ीफ़ा देने की पेशकश की, पेड़ हटाना अपना काम नहीं माना |
फ़ॉरेस्ट विभाग | आरी-कुल्हाड़ी लेकर पेड़ काटने आया, पर रोक दिया गया |
विदेश विभाग | पीटोनिया के प्रधानमंत्री द्वारा लगाए पेड़ के कारण अंतर्राष्ट्रीय संबंध बिगड़ने का डर दिखाकर पेड़ कटने से रोका |
प्रधानमंत्री (सर्वोच्च स्तर) | अंत में पेड़ काटने का आदेश दिया, पर तब तक कवि मर चुका था |
अंदाज़ा: सभी विभाग अपनी ज़िम्मेदारी दूसरे पर टालते हैं; नियम-कायदों और अधिकार-क्षेत्र को मनुष्य की जान से ऊपर रखते हैं; काम में अनावश्यक देरी, संवेदनहीनता और लालफ़ीताशाही है। व्यवस्था में तालमेल और विवेक का अभाव है।
व्यापार, कृषि, हॉर्टीकल्चर, मेडिकल, कल्चरल (साहित्य अकादमी), फ़ॉरेस्ट, विदेश विभाग और प्रधानमंत्री कार्यालय – सभी ज़िम्मेदारी टालते हैं; इनसे लालफ़ीताशाही, देरी, संवेदनहीनता और विवेकहीन कार्यप्रणाली का पता चलता है।
अभ्यास – पाठ के आस-पास
कहानी में दो प्रसंग ऐसे हैं, जहाँ लोग पेड़ के नीचे दबे आदमी को निकालने के लिए कटिबद्ध होते हैं। ऐसा कब-कब होता है और लोगों का यह संकल्प दोनों बार किस-किस वजह से भंग होता है?
Answer
उत्तर
पहला प्रसंग: सुबह जब पता चला कि आदमी ज़िंदा है, तो माली ने कहा कि सुपरिंटेंडेंट हुक्म दें तो पंद्रह-बीस माली, चपरासी और क्लर्क मिलकर पेड़ हटाकर उसे निकाल सकते हैं। बहुत-से क्लर्क बोले – “लगाओ ज़ोर, हम तैयार हैं।” संकल्प भंग: सुपरिंटेंडेंट ने “ठहरो! मैं अंडर-सेक्रेटरी से पूछ लूँ” कहकर रोक दिया और मामला अफ़सरों की सीढ़ी (अंडर सेक्रेटरी से मिनिस्टर तक) पर चढ़ गया।
दूसरा प्रसंग: दोपहर के खाने के समय कुछ मनचले क्लर्कों ने हुकूमत के फ़ैसले का इंतज़ार किए बिना पेड़ को खुद हटा देने का निश्चय किया। संकल्प भंग: सुपरिंटेंडेंट फ़ाइल लेकर भागा आया और बोला कि हम व्यापार-विभाग के हैं, पेड़ की समस्या कृषि-विभाग के अधीन है, इसलिए हम खुद पेड़ नहीं हटा सकते; उसने फ़ाइल ‘अर्जेंट’ लिखकर कृषि-विभाग भेज दी। बाद में पुलिस का पहरा भी लगा दिया गया ताकि लोग कानून हाथ में न लें।
- सुबह माली और क्लर्क पेड़ उठाने को तैयार हुए, पर सुपरिंटेंडेंट ने अंडर-सेक्रेटरी से पूछने के नाम पर रोक दिया; (2) दोपहर में मनचले क्लर्कों ने खुद पेड़ हटाने का निश्चय किया, पर सुपरिंटेंडेंट ने विभागीय अधिकार-क्षेत्र (कृषि-विभाग का मामला) का हवाला देकर रोक दिया।
यह कहना कहाँ तक युक्तिसंगत है कि इस कहानी में हास्य के साथ-साथ करुणा की भी अंतर्धारा है। अपने उत्तर के पक्ष में तर्क दें।
Answer
उत्तर
यह कथन पूरी तरह युक्तिसंगत है।
हास्य के प्रसंग
- अफ़सरों की सीढ़ी पर फ़ाइल का ऊपर-नीचे दौड़ना।
- ‘आदमी को बीच से काटकर निकालो, प्लास्टिक सर्जरी से जोड़ देंगे’ जैसा बेतुका सुझाव; सर्जन की रिपोर्ट – “ऑपरेशन सफल होगा, मगर आदमी मर जाएगा।”
- साहित्य अकादमी का कवि को मेंबर बना देना – “गुमनामी में नहीं, पेड़ के नीचे दबा हूँ।”
- पीटोनिया से संबंध बिगड़ने का डर।
करुणा की अंतर्धारा
- एक जीवित मनुष्य कई दिनों तक भारी तने के नीचे दबा कराहता रहता है; वह लावारिस है।
- उसकी साँस मुश्किल से चलती है, आँखों में घोर पीड़ा है; वह गिड़गिड़ाता है – “मैं अभी जीवित हूँ, मुझे ज़िंदा रखो।”
- केवल माली ही मानवीय संवेदना दिखाता है – खाना खिलाता है, हिम्मत बँधाता है।
- अंत में जब आदेश आता है, तब तक कवि मर चुका होता है – “उसके जीवन की फ़ाइल भी मुकम्मल हो चुकी थी।”
हास्य पाठक को हँसाता है, पर उसके नीचे छिपी करुणा उसे झकझोर देती है। यही व्यंग्य की ताक़त है – हँसी के माध्यम से व्यवस्था की क्रूरता का बोध।
पूरी तरह युक्तिसंगत है – फ़ाइल की भागदौड़, बीच से काटने और साहित्य अकादमी की सदस्यता जैसे प्रसंग हँसाते हैं, पर लावारिस कवि की पीड़ा, जीने की गुहार और अंत में उसकी मृत्यु गहरी करुणा जगाती है।
यदि आप माली की जगह पर होते, तो हुकूमत के फ़ैसले का इंतज़ार करते या नहीं? अगर हाँ, तो क्यों? और नहीं, तो क्यों?
Answer
उत्तर
नहीं, मैं हुकूमत के फ़ैसले का इंतज़ार नहीं करता।
- किसी की जान बचाना सबसे बड़ा कर्तव्य है; मनुष्य का जीवन किसी भी नियम या फ़ाइल से अधिक मूल्यवान है।
- मैं तुरंत साथी मालियों, चपरासियों और मौजूद लोगों को इकट्ठा करता और पेड़ हटाकर या आरी से तना काटकर आदमी को निकालता।
- ज़रूरत होती तो एंबुलेंस, अस्पताल, अग्निशमन दल या मीडिया को बुलाता, ताकि दबाव बने।
- बाद में यदि कोई कार्यवाही होती तो मैं उसका सामना करता – क्योंकि मानवता के लिए उठाया गया कदम गलत नहीं हो सकता।
(माली ने अपनी सीमित स्थिति में भी मानवीयता दिखाई – पर वह नौकरी के डर और पुलिस के पहरे से बँधा था। फिर भी, कवि की मृत्यु बताती है कि केवल इंतज़ार करना घातक सिद्ध हुआ।)
नहीं – मनुष्य का जीवन किसी भी नियम-फ़ाइल से बढ़कर है; मैं लोगों को इकट्ठा करके तुरंत पेड़ हटवाता या कटवाता और आदमी को अस्पताल पहुँचाता, परिणाम चाहे जो हो।
शीर्षक सुझाइए – कहानी के वैकल्पिक शीर्षक सुझाएँ। (बिंदु: बार-बार फ़ाइल का ज़िक्र और अंत में जीवन की फ़ाइल पूर्ण होना; सरकारी दफ़्तरों की लंबी, विवेकहीन कार्यप्रणाली; मुख्य पात्र का उस विवेकहीनता का शिकार होना।)
Answer
उत्तर
आधार | सुझाए गए शीर्षक |
|---|---|
फ़ाइल का बार-बार ज़िक्र / जीवन की फ़ाइल पूर्ण होना | ‘फ़ाइल मुकम्मल हो गई’, ‘जीवन की फ़ाइल’, ‘फ़ाइल चलती रही’ |
सरकारी दफ़्तरों की विवेकहीन कार्यप्रणाली | ‘लालफ़ीताशाही’, ‘दफ़्तर-दर-दफ़्तर’, ‘विभागों का चक्रव्यूह’ |
मुख्य पात्र का शिकार होना | ‘व्यवस्था का शिकार’, ‘ख़ाक हो जाएँगे हम’, ‘दबा हुआ आदमी’ |
‘फ़ाइल मुकम्मल हो गई’, ‘लालफ़ीताशाही’, ‘दफ़्तर-दर-दफ़्तर’, ‘व्यवस्था का शिकार’, ‘ख़ाक हो जाएँगे हम’, ‘दबा हुआ आदमी’।
अभ्यास – भाषा की बात
नीचे दिए गए अंग्रेज़ी शब्दों के हिंदी प्रयोग लिखिए – अर्जेंट, फ़ॉरेस्ट डिपार्टमेंट, मेंबर, डिप्टी सेक्रेटरी, चीफ़ सेक्रेटरी, मिनिस्टर, अंडर सेक्रेटरी, हॉर्टीकल्चर डिपार्टमेंट, एग्रीकल्चर डिपार्टमेंट
Answer
उत्तर
अंग्रेज़ी शब्द | हिंदी प्रयोग |
|---|---|
अर्जेंट | अत्यावश्यक / तत्काल |
फ़ॉरेस्ट डिपार्टमेंट | वन-विभाग |
मेंबर | सदस्य |
डिप्टी सेक्रेटरी | उप-सचिव |
चीफ़ सेक्रेटरी | मुख्य सचिव |
मिनिस्टर | मंत्री |
अंडर सेक्रेटरी | अवर सचिव |
हॉर्टीकल्चर डिपार्टमेंट | उद्यान-विभाग (उद्यान-कृषि विभाग) |
एग्रीकल्चर डिपार्टमेंट | कृषि-विभाग |
अत्यावश्यक, वन-विभाग, सदस्य, उप-सचिव, मुख्य सचिव, मंत्री, अवर सचिव, उद्यान-विभाग, कृषि-विभाग।
‘इसकी चर्चा शहर में भी फैल गई और शाम तक गली-गली से शायर जमा होने शुरू हो गए’ – यह एक संयुक्त वाक्य है… इसे सरल वाक्य में बदला जा सकता है – ‘इसकी चर्चा शहर में फैलते ही शाम तक गली-गली से शायर जमा होने शुरू हो गए।’ पाठ में से पाँच संयुक्त वाक्यों को चुनिए और उन्हें सरल वाक्य में रूपांतरित कीजिए।
Answer
उत्तर
संयुक्त वाक्य (पाठ से) | सरल वाक्य |
|---|---|
1. रात को बड़े ज़ोर का झक्कड़ चला और सेक्रेटेरियट के लॉन में जामुन का एक पेड़ गिर पड़ा। | रात को बड़े ज़ोर के झक्कड़ से सेक्रेटेरियट के लॉन में जामुन का एक पेड़ गिर पड़ा। |
2. माली ने अचंभे से मुँह में उँगली दबा ली और चकित भाव से बोला। | माली अचंभे से मुँह में उँगली दबाकर चकित भाव से बोला। |
3. सेक्रेटरी उसी समय अपनी गाड़ी में सवार हुआ और सेक्रेटेरियट पहुँचा। | सेक्रेटरी उसी समय अपनी गाड़ी में सवार होकर सेक्रेटेरियट पहुँचा। |
4. दबे हुए आदमी का स्वास्थ्य जवाब दे रहा था, मगर वह किसी न किसी तरह अपने जीवन के लिए लड़े जा रहा था। | स्वास्थ्य जवाब देने पर भी दबा हुआ आदमी किसी न किसी तरह अपने जीवन के लिए लड़े जा रहा था। |
5. माली खेद प्रकट करता हुआ वहाँ से हटा और चला गया। / सर्जन ने दबे हुए आदमी को टटोला और रिपोर्ट भेज दी। | सर्जन ने दबे हुए आदमी को टटोलकर रिपोर्ट भेज दी। |
पाँच संयुक्त वाक्यों को ‘कर/होकर’, ‘से’, ‘पर भी’ आदि के प्रयोग से सरल वाक्यों में बदला गया है (तालिका देखें)।
साक्षात्कार अपने-आप में एक विधा है। जामुन के पेड़ के नीचे दबे आदमी के फ़ाइल बंद होने (मृत्यु) के लिए ज़िम्मेदार किसी एक व्यक्ति का काल्पनिक साक्षात्कार करें और लिखें।
Answer
उत्तर
सुपरिंटेंडेंट से काल्पनिक साक्षात्कार
संवाददाता: नमस्कार सुपरिंटेंडेंट साहब। सेक्रेटेरियट के लॉन में कवि ‘ओस’ की मृत्यु हो गई। आप इस घटना को कैसे देखते हैं?
सुपरिंटेंडेंट: बहुत दुखद घटना है। पर हमने तो पूरी कोशिश की। फ़ाइल पर ‘अर्जेंट’ लिखकर भेजा था।
संवाददाता: पहले ही दिन माली और क्लर्क पेड़ उठाने को तैयार थे। आपने उन्हें क्यों रोका?
सुपरिंटेंडेंट: देखिए, सरकारी दफ़्तर में बिना ऊपर के आदेश के कोई काम नहीं होता। अगर पेड़ हटाते समय उस आदमी को और चोट लग जाती, तो ज़िम्मेदारी किसकी होती? नियम तो मानने ही पड़ते हैं।
संवाददाता: क्या नियम एक इंसान की जान से बड़े हैं?
सुपरिंटेंडेंट: (कुछ रुककर) …आप ठीक कहते हैं। पर हम व्यापार-विभाग के लोग हैं, पेड़ का मामला दूसरे विभाग का था। मेरे हाथ बँधे हुए थे।
संवाददाता: फ़ाइल आठ विभागों में घूमी। क्या आपको नहीं लगता कि इस बीच आदमी मर सकता था?
सुपरिंटेंडेंट: (नज़रें झुकाकर) लगता था… पर हर विभाग अपनी प्रक्रिया पूरी करता है। आख़िर प्रधानमंत्री जी ने आदेश दे भी दिया था।
संवाददाता: पर तब तक बहुत देर हो चुकी थी। आज आप क्या सोचते हैं?
सुपरिंटेंडेंट: (धीमे स्वर में) शायद हमें फ़ाइल नहीं, इंसान को देखना चाहिए था। यह घटना हम सबके लिए सबक है।
संवाददाता: धन्यवाद।
सुपरिंटेंडेंट से काल्पनिक साक्षात्कार ऊपर दिया गया है, जिसमें वह नियमों का हवाला देता है और अंत में स्वीकार करता है कि फ़ाइल नहीं, इंसान को देखना चाहिए था।
विषय-सूची की जाँच
- ☒ संवेदनहीन मानसिकता और व्यंग्य (प्रश्न 1, 6)
- ☒ फ़ाइल की यात्रा और विभाग (प्रश्न 2, 3, 4, 5)
- ☒ मानवीय निर्णय और शीर्षक (प्रश्न 7, 8)
- ☒ भाषा, वाक्य-रूपांतरण और साक्षात्कार (प्रश्न 9, 10, 11)