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Class 11 Hindi Aroh Chapter 3

NCERT Solutions for Class 11 Hindi Aroh Chapter 3: अपू के साथ ढाई साल

Class

Subject

Book

Chapter

Session

Questions covered

XI

Hindi

Aroh (NCERT)

3 – अपू के साथ ढाई साल

2026-27

14 of 14

बिंदु

विवरण

लेखक

सत्यजित राय (1921–1992), बांग्ला मूल से अनुवाद – विलास गिते

विधा

संस्मरण

विषय

पहली फ़िल्म पथेर पांचाली (1955) की ढाई साल चली शूटिंग के अनुभव

मुख्य प्रसंग

अपू (सुबीर बनर्जी) की खोज; काशफूल और रेलगाड़ी का दृश्य; भूलो कुत्ता; श्रीनिवास मिठाईवाला; शरद में बारिश का दृश्य; बोडाल गाँव, सुबोध दा, धोबी, वास्तुसर्प

संदेश

साधनहीनता के बीच धैर्य, सूझ-बूझ और कलात्मक निष्ठा से फ़िल्म-निर्माण; अच्छी तकनीक वह है जो दिखाई न दे

अभ्यास – पाठ के साथ

Q1

पथेर पांचाली फ़िल्म की शूटिंग का काम ढाई साल तक क्यों चला?

Answer

उत्तर

  1. पैसों की कमी: राय के पास पर्याप्त धन नहीं था; पैसे खत्म होते ही शूटिंग रोकनी पड़ती और फिर पैसे जमा होने तक इंतज़ार करना पड़ता।
  2. नौकरी: राय उस समय एक विज्ञापन कंपनी में नौकरी करते थे; केवल फ़ुर्सत मिलने पर ही शूटिंग कर पाते थे।
  3. कलाकारों की खोज: अपू की भूमिका के लिए उपयुक्त लड़का बहुत दिनों तक नहीं मिला।
  4. प्राकृतिक और अन्य बाधाएँ: काशफूल जानवरों द्वारा खा लिए जाने पर अगले साल शरद ऋतु तक रुकना पड़ा; बारिश के दृश्य के लिए इंतज़ार; भूलो कुत्ते और श्रीनिवास की भूमिका करने वाले सज्जन की मृत्यु से नए विकल्प खोजने पड़े।
  5. नई टीम, नवागत निर्देशक और तकनीकी साधनों का अभाव।

मुख्यतः आर्थिक अभाव (पैसे जुटने पर ही शूटिंग), राय की नौकरी, कलाकारों की खोज और प्राकृतिक व अन्य अप्रत्याशित बाधाओं के कारण शूटिंग ढाई साल चली।

Q2

‘अब अगर हम उस जगह बाकी आधे सीन की शूटिंग करते, तो पहले आधे सीन के साथ उसका मेल कैसे बैठता? उसमें से ’कंटिन्युइटी’ नदारद हो जाती’ – इस कथन के पीछे क्या भाव है?

Answer

उत्तर

पालसिट गाँव में काशफूलों से भरे मैदान में अपू-दुर्गा के रेलगाड़ी देखने का आधा दृश्य पहले दिन फ़िल्माया गया। सात दिन बाद लौटे तो जानवर सारे काशफूल खा चुके थे। अब वही दृश्य बिना काशफूलों के फ़िल्माया जाता तो पहले हिस्से में मैदान फूलों से भरा और दूसरे में खाली दिखता – दृश्य में निरंतरता (कंटिन्युइटी) टूट जाती और दर्शक तुरंत गड़बड़ी पकड़ लेते।

इस कथन के पीछे राय की कलात्मक ईमानदारी और पूर्णता का आग्रह है – वे दृश्य की स्वाभाविकता से समझौता नहीं करना चाहते थे। इसलिए उन्होंने बाकी हिस्सा अगले साल शरद ऋतु में फ़िल्माया, जब मैदान फिर काशफूलों से भर गया।

फ़िल्म के दृश्य में निरंतरता बनाए रखने की चिंता और कलात्मक पूर्णता का आग्रह – इसलिए राय ने एक साल इंतज़ार कर काशफूल खिलने पर बाकी दृश्य फ़िल्माया।

Q3

किन दो दृश्यों में दर्शक यह पहचान नहीं पाते कि उनकी शूटिंग में कोई तरकीब अपनाई गई है?

Answer

उत्तर

  1. भूलो कुत्ते का दृश्य: सर्वजया थाली का बचा भात गमले में डालती है और भूलो उसे खाता है – इस एक ही दृश्य में भूलो की भूमिका दो अलग-अलग कुत्तों ने निभाई, क्योंकि छह महीने बाद लौटने पर पहला कुत्ता मर चुका था।
  2. श्रीनिवास मिठाईवाले का दृश्य: पहले श्रीनिवास (एक नंबर) बाँसबन से बाहर आता है और अगले शॉट में दूसरा व्यक्ति (दो नंबर), जिसकी कद-काठी मिलती-जुलती थी, कैमरे की ओर पीठ करके मुखर्जी के घर में जाता है – क्योंकि पहले अभिनेता का देहांत हो गया था।

(इसके अतिरिक्त रेलगाड़ी वाले दृश्य में भी तीन अलग-अलग रेलगाड़ियों का प्रयोग हुआ, जिसे दर्शक नहीं पहचान पाते।)

  1. भूलो कुत्ते का भात खाने वाला दृश्य – दो अलग कुत्ते; (2) श्रीनिवास मिठाईवाले का दृश्य – दो अलग व्यक्ति (दूसरा पीठ करके)।
Q4

‘भूलो’ की जगह दूसरा कुत्ता क्यों लाया गया? उसने फ़िल्म के किस दृश्य को पूरा किया?

Answer

उत्तर

अपू को भात खिलाने वाले दृश्य का अंतिम शॉट – सर्वजया द्वारा बचा भात गमले में डालना और भूलो का उसे खाना – उस दिन नहीं लिया जा सका, क्योंकि सूरज की रोशनी और पैसे दोनों खत्म हो गए थे। छह महीने बाद पैसे जुटाकर बोडाल गाँव लौटे तो पता चला कि भूलो मर चुका है। इसलिए गाँव से भूलो जैसा दिखने वाला दूसरा कुत्ता लाया गया – उसका रंग भी बादामी था और दुम का छोर भी सफ़ेद।

उस कुत्ते ने सर्वजया द्वारा गमले में फेंका भात खाने वाला दृश्य पूरा किया।

असली भूलो की मृत्यु हो जाने के कारण उसके जैसा दिखने वाला कुत्ता लाया गया; उसने सर्वजया द्वारा गमले में डाला गया बचा भात खाने का दृश्य पूरा किया।

Q5

फ़िल्म में श्रीनिवास की क्या भूमिका थी और उनसे जुड़े बाकी दृश्यों को उनके गुज़र जाने के बाद किस प्रकार फ़िल्माया गया?

Answer

उत्तर

भूमिका: श्रीनिवास एक घूमता मिठाईवाला था। अपू और दुर्गा के पास मिठाई खरीदने के पैसे नहीं थे, इसलिए वे उसके पीछे-पीछे अमीर मुखर्जी के घर तक जाते हैं ताकि उन्हें मिठाई खरीदते देखकर ही खुश हो सकें।

बाद में फ़िल्मांकन: दृश्य का कुछ अंश फ़िल्माने के बाद शूटिंग कुछ महीने रुकी। लौटने पर पता चला कि श्रीनिवास की भूमिका करने वाले सज्जन का देहांत हो गया है। फिर ऐसे सज्जन लिए गए जिनका चेहरा तो नहीं, पर शरीर पहले श्रीनिवास जैसा था। फ़िल्म में पहला श्रीनिवास बाँसबन से बाहर आता दिखता है और अगले शॉट में दूसरा श्रीनिवास कैमरे की ओर पीठ करके मुखर्जी के घर के गेट में जाता है। इस तरकीब पर किसी दर्शक का ध्यान नहीं गया।

श्रीनिवास घूमते मिठाईवाले थे; उनके निधन के बाद मिलती-जुलती कद-काठी वाले व्यक्ति से कैमरे की ओर पीठ करवाकर बाकी दृश्य फ़िल्माया गया।

Q6

बारिश का दृश्य चित्रित करने में क्या मुश्किल आई और उसका समाधान किस प्रकार हुआ?

Answer

उत्तर

मुश्किल: बरसात के मौसम में राय के पास पैसे नहीं थे, इसलिए शूटिंग बंद रही। जब पैसे आए तब अक्टूबर (शरद ऋतु) आ चुका था, जब आसमान साफ़ रहता है और बारिश की संभावना बहुत कम होती है।

समाधान: राय धैर्य से हर रोज़ बच्चों, कैमरे और तकनीशियनों को लेकर देहात में बैठे रहते और बादल का इंतज़ार करते। आखिर एक दिन शरद में भी बादल घिरे और धुआँधार बारिश हुई। उसी बारिश में भीगती दुर्गा भागकर पेड़ के नीचे भाई के पास आई; दोनों चिपककर बैठे और दुर्गा बोली – ‘नेबूर-पाता करमचा, हे वृष्टि घरे जा!’ ठंड से काँपते अपू को शॉट के बाद दूध में थोड़ी ब्रांडी देकर गरम किया गया। यह दृश्य बहुत अच्छा फ़िल्माया गया।

पैसे न होने से बरसात में शूटिंग नहीं हो सकी और शरद में बारिश दुर्लभ थी; राय रोज़ टीम के साथ देहात में बारिश की प्रतीक्षा करते रहे और एक दिन अचानक हुई धुआँधार बारिश में दृश्य फ़िल्मा लिया।

Q7

किसी फ़िल्म की शूटिंग करते समय फ़िल्मकार को जिन समस्याओं का सामना करना पड़ता है, उन्हें सूचीबद्ध कीजिए।

Answer

उत्तर

  1. आर्थिक समस्या – पूँजी और बजट की कमी।
  2. उपयुक्त कलाकारों का चयन – पात्र के अनुरूप अभिनेता (जैसे अपू) ढूँढ़ना।
  3. कलाकारों की उम्र, स्वास्थ्य या मृत्यु – लंबी शूटिंग में बच्चों का बड़ा होना, अभिनेता का गुज़र जाना।
  4. उपयुक्त लोकेशन – गाँव, घर, मैदान ढूँढ़ना और उनकी मरम्मत करवाना।
  5. मौसम और प्रकृति – बारिश, धूप, फूलों का मौसम; रोशनी का समय से खत्म होना।
  6. दृश्यों की निरंतरता (कंटिन्युइटी) बनाए रखना।
  7. जानवरों से काम लेना – कुत्ते का निर्देश न मानना।
  8. स्थानीय लोगों का व्यवधान – शोर, विरोध (धोबी, सुबोध दा), ध्वनि-रिकॉर्डिंग में बाधा।
  9. तकनीकी साधन – कैमरा, साउंड, फ़िल्म-रील की कीमत; रेलगाड़ी जैसे दृश्यों का समन्वय।
  10. अप्रत्याशित घटनाएँ – जैसे साँप का निकल आना।

धन की कमी, कलाकार-चयन व उनकी उम्र/मृत्यु, लोकेशन, मौसम व रोशनी, कंटिन्युइटी, जानवरों से काम लेना, स्थानीय व्यवधान, तकनीकी साधन और अप्रत्याशित घटनाएँ।

अभ्यास – पाठ के आस-पास

Q8

तीन प्रसंगों में राय ने कुछ इस तरह की टिप्पणियाँ की हैं कि दर्शक पहचान नहीं पाते कि… या फ़िल्म देखते हुए इस ओर किसी का ध्यान नहीं गया कि… इत्यादि। ये प्रसंग कौन से हैं, चर्चा करें और इसपर भी विचार करें कि शूटिंग के समय की असलियत फ़िल्म को देखते समय कैसे छिप जाती है।

Answer

उत्तर

तीन प्रसंग

  1. रेलगाड़ी का दृश्य – काशफूलों के बीच अपू-दुर्गा रेलगाड़ी देखते हैं; इसमें तीन अलग-अलग रेलगाड़ियाँ प्रयोग हुईं। अनिल बाबू हर गाड़ी के इंजन में बैठकर बॉयलर में कोयला डलवाते थे, ताकि सफ़ेद काशफूलों की पृष्ठभूमि पर काला धुआँ दिखे।
  2. भूलो कुत्ता – एक ही दृश्य में दो कुत्ते।
  3. श्रीनिवास मिठाईवाला – एक ही दृश्य में दो व्यक्ति, दूसरा पीठ किए हुए।

असलियत कैसे छिप जाती है: फ़िल्म अलग-अलग शॉट्स में, अलग-अलग समय पर फ़िल्माई जाती है और फिर संपादन (एडिटिंग) द्वारा जोड़ी जाती है। कैमरे का कोण (जैसे पीठ दिखाना), मिलते-जुलते कलाकार या जानवर, एक जैसी रोशनी और पृष्ठभूमि, तथा दृश्य की गति के कारण दर्शक कहानी में डूबे रहते हैं और इन बारीकियों पर ध्यान नहीं देते। राय के शब्दों में – अच्छी तकनीक वह है जिसका इस्तेमाल दिखाई न पड़े।

रेलगाड़ी (तीन गाड़ियाँ), भूलो (दो कुत्ते) और श्रीनिवास (दो व्यक्ति) के प्रसंग; कैमरा-कोण, मिलते-जुलते कलाकार, संपादन और कहानी में दर्शक की तल्लीनता के कारण शूटिंग की असलियत छिप जाती है।

Q9

मान लीजिए कि आपको अपने विद्यालय पर एक डॉक्यूमेंट्री फ़िल्म बनानी है। इस तरह की फ़िल्म में आप किस तरह के दृश्यों को चित्रित करेंगे? फ़िल्म बनाने से पहले और बनाते समय किन बातों पर ध्यान देंगे?

Answer

उत्तर

चित्रित किए जाने वाले दृश्य

  1. विद्यालय का मुख्य द्वार, भवन, परिसर और हरियाली।
  2. प्रातःकालीन सभा, प्रार्थना और राष्ट्रगान।
  3. कक्षाओं में पढ़ाई, प्रयोगशाला, पुस्तकालय, कंप्यूटर कक्ष।
  4. खेल का मैदान, खेलकूद, योग और एन.सी.सी./स्काउट।
  5. सांस्कृतिक कार्यक्रम, वार्षिकोत्सव, विज्ञान-प्रदर्शनी।
  6. प्रधानाचार्य, शिक्षकों, विद्यार्थियों और पूर्व छात्रों के साक्षात्कार; उपलब्धियाँ और पुरस्कार।

बनाने से पहले: विषय और उद्देश्य तय करना, पटकथा लिखना, दृश्यों की सूची और समय-सारणी बनाना, प्रधानाचार्य की अनुमति लेना, बजट और उपकरण (कैमरा, माइक, लाइट) की व्यवस्था, टीम को काम बाँटना।

बनाते समय: उचित रोशनी और साफ़ ध्वनि, कैमरे के अलग-अलग कोण, दृश्यों की निरंतरता, कक्षाओं में कम-से-कम व्यवधान, विद्यार्थियों की निजता और अनुमति, स्वाभाविकता बनाए रखना, और अंत में अच्छा संपादन, पृष्ठभूमि-संगीत और वर्णन (वॉयस-ओवर)।

विद्यालय-परिसर, सभा, कक्षा-प्रयोगशाला-पुस्तकालय, खेल, सांस्कृतिक कार्यक्रम और साक्षात्कार दिखाऊँगा; पहले पटकथा, अनुमति, बजट और उपकरण तय करूँगा, और बनाते समय रोशनी, ध्वनि, कैमरा-कोण, निरंतरता, स्वाभाविकता व संपादन पर ध्यान दूँगा।

Q10

पथेर पांचाली फ़िल्म में इंदिरा ठाकरून की भूमिका निभाने वाली अस्सी साल की चुन्नीबाला देवी ढाई साल तक काम कर सकीं। यदि आधी फ़िल्म बनने के बाद चुन्नीबाला देवी की अचानक मृत्यु हो जाती तो सत्यजित राय क्या करते? चर्चा करें।

Answer

उत्तर

राय ने भूलो और श्रीनिवास के मामलों में जैसी सूझ-बूझ दिखाई, वैसी ही वे यहाँ भी अपनाते:

  1. चुन्नीबाला देवी जैसी कद-काठी, उम्र और चाल-ढाल वाली दूसरी वृद्धा की खोज करते।
  2. बचे दृश्यों में नई अभिनेत्री को दूर से, पीठ की ओर से, धुंधली रोशनी या आंशिक रूप से दिखाते, ताकि चेहरा स्पष्ट न हो।
  3. मेकअप और वेशभूषा (सफ़ेद साड़ी, झुकी कमर) से समानता लाते।
  4. ज़रूरत होने पर पटकथा में बदलाव करते – इंदिरा ठाकरून के कुछ दृश्य कम कर देते या उनकी उपस्थिति को संवादों/ध्वनि से दिखाते। (उपन्यास में भी इंदिरा ठाकरून की मृत्यु होती है, इसलिए उस घटना को आगे लाया जा सकता था।)
  5. यदि यह संभव न होता तो उनके पूरे दृश्य दोबारा नई अभिनेत्री के साथ फ़िल्माते, भले ही खर्च और समय बढ़ जाता।

राय मिलती-जुलती वृद्धा को लेकर कैमरा-कोण, दूरी, मेकअप और पटकथा में बदलाव की तरकीबों से बचे दृश्य पूरे करते, या आवश्यक होने पर दृश्य दोबारा फ़िल्माते।

Q11

पठित पाठ के आधार पर यह कह पाना कहाँ तक उचित है कि फ़िल्म को सत्यजित राय एक कला-माध्यम के रूप में देखते हैं, व्यावसायिक-माध्यम के रूप में नहीं?

Answer

उत्तर

यह कथन पूरी तरह उचित है:

  1. राय ने नौकरी करते हुए, अपने सीमित पैसों से, बिना किसी व्यावसायिक लाभ की चिंता के फ़िल्म बनाई।
  2. उन्होंने दृश्य की स्वाभाविकता और निरंतरता के लिए एक साल तक काशफूलों के खिलने का इंतज़ार किया।
  3. बारिश के दृश्य के लिए कृत्रिम बारिश के बजाय रोज़ असली बादलों की प्रतीक्षा की।
  4. सफ़ेद काशफूलों पर काले धुएँ जैसी सौंदर्यपरक बारीकी पर ध्यान दिया।
  5. अपू के लिए किसी नामी बाल-कलाकार के बजाय पात्र के अनुरूप साधारण बालक चुना; असली गाँव और घर में शूटिंग की।
  6. वे कहानी (विभूतिभूषण के उपन्यास) के प्रति सच्चे रहे; उन्होंने मसाला, गीत-नृत्य या चमक-दमक नहीं डाली।

इस प्रकार राय के लिए फ़िल्म कमाई का साधन नहीं, बल्कि कलात्मक अभिव्यक्ति थी।

पूरी तरह उचित है – सीमित साधनों में भी राय ने लाभ की चिंता छोड़कर स्वाभाविकता, निरंतरता, सौंदर्य और कथा की सच्चाई के लिए धैर्यपूर्वक काम किया, जो फ़िल्म को कला मानने का प्रमाण है।

अभ्यास – भाषा की बात

Q12

पाठ में कई स्थानों पर तत्सम, तद्भव, क्षेत्रीय सभी प्रकार के शब्द एक साथ सहज भाव से आए हैं। ऐसी भाषा का प्रयोग करते हुए अपनी प्रिय फ़िल्म पर एक अनुच्छेद लिखें।

Answer

उत्तर

मेरी प्रिय फ़िल्म – ‘तारे ज़मीन पर’

‘तारे ज़मीन पर’ मेरी सबसे प्रिय फ़िल्म है। इसमें आठ साल के ईशान की कहानी है, जिसे पढ़ाई में बड़ी दिक्कत होती है – अक्षर उसकी आँखों के सामने नाचने लगते हैं। घरवाले और मास्टरजी उसे आलसी और नालायक समझते हैं, और उसे बोर्डिंग स्कूल भेज दिया जाता है। वहाँ कला-शिक्षक निकुंभ सर समझ जाते हैं कि बच्चा डिस्लेक्सिया से जूझ रहा है। वे बड़े धीरज और स्नेह से उसकी प्रतिभा को निखारते हैं। फ़िल्म के अंत में चित्रकला प्रतियोगिता में ईशान की जीत देखकर आँखें भर आती हैं। फ़िल्म का संगीत मन को छू लेता है और यह सीख देती है कि हर बच्चा अनोखा है, बस उसे समझने वाली नज़र चाहिए।

(इस अनुच्छेद में तत्सम – प्रतिभा, स्नेह, प्रतियोगिता; तद्भव – आँख, आठ, घर; देशज/क्षेत्रीय – दिक्कत, नालायक, मास्टरजी; विदेशी – स्कूल, डिस्लेक्सिया जैसे शब्द सहज रूप से मिले-जुले हैं।)

प्रिय फ़िल्म ‘तारे ज़मीन पर’ पर तत्सम, तद्भव, देशज और विदेशी शब्दों के सहज मेल से अनुच्छेद ऊपर लिखा गया है।

Q13

हर क्षेत्र में कार्य करने या व्यवहार करने की अपनी निजी या विशिष्ट प्रकार की शब्दावली होती है। जैसे अपू के साथ ढाई साल पाठ में फ़िल्म से जुड़े शब्द शूटिंग, शॉट, सीन आदि। फ़िल्म से जुड़ी शब्दावली में से किन्हीं दस की सूची बनाइए।

Answer

उत्तर

  1. पटकथा (स्क्रिप्ट)
  2. निर्देशक (डायरेक्टर)
  3. छायाकार (कैमरामैन/सिनेमैटोग्राफ़र)
  4. कट
  5. टेक / रीटेक
  6. संपादन (एडिटिंग)
  7. कंटिन्युइटी
  8. लोकेशन
  9. साउंड-रिकॉर्डिंग
  10. डबिंग
  11. क्लोज़-अप / लॉन्ग शॉट
  12. एक्शन / पैक-अप

पटकथा, निर्देशक, छायाकार, कट, टेक-रीटेक, संपादन, कंटिन्युइटी, लोकेशन, साउंड-रिकॉर्डिंग, डबिंग (क्लोज़-अप, पैक-अप)।

Q14

नीचे दिए गए शब्दों के पर्याय इस पाठ में ढूँढ़िए और उनका वाक्यों में प्रयोग कीजिए – इश्तहार, खुशकिस्मती, सीन, वृष्टि, जमा

Answer

उत्तर

शब्द

पाठ में पर्याय

वाक्य-प्रयोग

इश्तहार

विज्ञापन

नौकरी के लिए अखबार में विज्ञापन छपा है।

खुशकिस्मती

सौभाग्य

आपसे मिलना मेरे लिए सौभाग्य की बात है।

सीन

दृश्य

पहाड़ों पर सूर्योदय का दृश्य बहुत मनोहारी था।

वृष्टि

बारिश (बरसात)

आज सुबह से लगातार बारिश हो रही है।

जमा

इकट्ठा

बच्चे मैदान में इकट्ठा हो गए।

इश्तहार – विज्ञापन, खुशकिस्मती – सौभाग्य, सीन – दृश्य, वृष्टि – बारिश/बरसात, जमा – इकट्ठा (वाक्य ऊपर दिए गए हैं)।

विषय-सूची की जाँच

  • ☒ शूटिंग में देरी और आर्थिक अभाव (प्रश्न 1, 6, 7)
  • ☒ कंटिन्युइटी और तरकीबें (प्रश्न 2, 3, 4, 5, 8)
  • ☒ फ़िल्म-निर्माण पर विचार (प्रश्न 9, 10, 11)
  • ☒ भाषा और शब्दावली (प्रश्न 12, 13, 14)

Total questions answered: 14 of 14

Frequently Asked Questions

What do these NCERT solutions for Class 11 Hindi Aroh Chapter 3 (अपू के साथ ढाई साल) cover?

All 14 questions from the latest NCERT textbook for this chapter are answered step by step, organised as अभ्यास – पाठ के साथ, अभ्यास – पाठ के आस-पास and अभ्यास – भाषा की बात.

Are these solutions based on the new NCERT syllabus?

Yes. The answers follow the current NCERT textbook for Class 11 Hindi Aroh and the latest CBSE syllabus, so the question numbers and wording match the book you use in class.

How should I use these solutions to prepare for exams?

Attempt each question on your own first, then compare your working with the answer here. Note the steps or keywords you missed, and revise the chapter notes before taking a chapter-wise MCQ test to check your understanding.

Are the NCERT solutions for Class 11 Hindi Aroh Chapter 3 (अपू के साथ ढाई साल) free?

Yes. All Circle of Learning NCERT solutions and chapter notes are free to read online, with no sign-up needed.