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Class 12 Hindi Aroh Chapter 3

NCERT Solutions for Class 12 Hindi Aroh Chapter 3: कविता के बहाने, बात सीधी थी पर

Class

Subject

Book

Chapter

Session

Questions covered

XII

Hindi

Aroh (NCERT)

3 – कविता के बहाने, बात सीधी थी पर

2026-27

13 of 13

बिंदु

विवरण

कवि

कुँवर नारायण (1927–2017), उत्तर प्रदेश; ज्ञानपीठ पुरस्कार

प्रमुख रचनाएँ

चक्रव्यूह, परिवेश : हम तुम, अपने सामने, कोई दूसरा नहीं, इन दिनों; आत्मजयी (प्रबंध काव्य)

कविता के बहाने

कविता की यात्रा चिड़िया, फूल से बच्चे तक; चिड़िया की उड़ान और फूल के खिलने की सीमा है, पर कविता और बच्चे के सपने असीम हैं — “सब घर एक कर देने के माने / बच्चा ही जाने”

बात सीधी थी पर

कथ्य और भाषा का द्वंद्व; भाषा के चक्कर में सीधी बात टेढ़ी फँस जाती है; “क्या तुमने भाषा को / सहूलियत से बरतना कभी नहीं सीखा?”

बिंब

पेंच, चूड़ी, कील — मूर्त उपमानों से अमूर्त कथ्य को साकार किया

अभ्यास – कविता के साथ

Q1

इस कविता के बहाने बताएँ कि ‘सब घर एक कर देने के माने’ क्या है?

Answer

उत्तर

बच्चे खेलते समय अपने-पराए, ऊँच-नीच, धर्म-जाति या घर की सीमाओं का भेद नहीं करते। वे “यह घर, वह घर” सभी में समान भाव से खेलते हैं और सबको एक कर देते हैं। इसी प्रकार कविता भी शब्दों का खेल है, जो घर, भाषा, समय, देश और काल की सीमाओं को तोड़ देती है। कविता सभी मनुष्यों को एक भावनात्मक सूत्र में बाँधती है। अतः ‘सब घर एक कर देना’ का अर्थ है— सारे भेद-भाव और सीमाएँ मिटाकर सबको एकता के सूत्र में बाँधना।

बच्चे खेलते समय अपने-पराए का भेद नहीं करते, सब घरों को एक मानते हैं; कविता भी भाषा, घर, समय और देश की सीमाएँ तोड़कर सबको एकता और भावनात्मक संबंध में बाँध देती है।

Q2

‘उड़ने’ और ‘खिलने’ का कविता से क्या संबंध बनता है?

Answer

उत्तर

  1. उड़ना: चिड़िया उड़ती है, पर उसकी उड़ान सीमित है। कविता भी कल्पना की उड़ान है, पर वह असीम है— “बाहर भीतर, इस घर, उस घर” कहीं भी पहुँच सकती है। “कविता की उड़ान भला चिड़िया क्या जाने”।
  2. खिलना: फूल खिलता है और महकता है, पर कुछ समय बाद मुरझा जाता है। कविता भी भावों का खिलना है, जो सदा महकती रहती है, कभी मुरझाती नहीं— “बिना मुरझाए महकने के माने / फूल क्या जाने?”

इस प्रकार उड़ना और खिलना कविता के विकास और प्रभाव के प्रतीक हैं, पर कविता इनसे कहीं अधिक व्यापक और शाश्वत है।

कविता चिड़िया की तरह कल्पना की उड़ान भरती है और फूल की तरह खिलकर महकती है; पर चिड़िया की उड़ान सीमित है और फूल मुरझा जाता है, जबकि कविता की उड़ान असीम है और उसकी महक शाश्वत है।

Q3

कविता और बच्चे को समानांतर रखने के क्या कारण हो सकते हैं?

Answer

उत्तर

  1. खेल: बच्चे खेलते हैं, कविता भी शब्दों का खेल है।
  2. असीम कल्पना: बच्चों के सपनों और कविता की कल्पना, दोनों की कोई सीमा नहीं होती।
  3. भेदभाव-रहित: बच्चे घरों, जातियों, भाषाओं का भेद नहीं करते; कविता भी सबकी होती है— “सब घर एक कर देने के माने / बच्चा ही जाने”।
  4. रचनात्मक ऊर्जा और निश्छलता: दोनों में सहजता, नवीनता और जिज्ञासा होती है।
  5. भविष्य: बच्चा भविष्य की ओर बढ़ता है, कविता भी कालजयी होती है।

इसलिए कवि ने चिड़िया और फूल की तुलना में बच्चे को कविता के अधिक निकट माना है।

दोनों खेल-भाव, असीम कल्पना, निश्छलता और रचनात्मक ऊर्जा से भरे होते हैं; दोनों सीमाओं और भेदभाव को नहीं मानते और सबको एक कर देते हैं।

Q4

कविता के संदर्भ में ‘बिना मुरझाए महकने के माने’ क्या होते हैं?

Answer

उत्तर

फूल खिलता है, कुछ समय तक महकता है और फिर मुरझाकर नष्ट हो जाता है। परंतु कविता एक बार रची जाने पर युगों-युगों तक अपनी भावनाओं और विचारों की सुगंध फैलाती रहती है; वह कभी पुरानी या नष्ट नहीं होती। तुलसी, कबीर, सूर की कविताएँ आज भी उतनी ही प्रभावशाली हैं। अतः ‘बिना मुरझाए महकना’ कविता की शाश्वतता और अमरता का सूचक है।

कविता फूल की तरह मुरझाती नहीं, बल्कि युगों-युगों तक अपने भाव और विचारों की सुगंध फैलाती रहती है — यह कविता की शाश्वतता और अमरता है।

Q5

‘भाषा को सहूलियत’ से बरतने से क्या अभिप्राय है?

Answer

उत्तर

भाषा को सहूलियत से बरतने का अर्थ है— बात को सरल, सहज और स्वाभाविक भाषा में कहना, ताकि वह आसानी से समझ में आ जाए। व्यक्ति को अपनी बात के अनुरूप सही और उपयुक्त शब्दों का चयन करना चाहिए; भाषा को अनावश्यक रूप से तोड़-मरोड़कर, घुमा-फिराकर या चमत्कार दिखाने के लिए जटिल नहीं बनाना चाहिए। जैसे हर पेंच के लिए एक निश्चित खाँचा होता है, वैसे ही हर बात के लिए सही शब्द होते हैं; सही बात का सही शब्द से जुड़ना ही भाषा को सहूलियत से बरतना है।

बात को सरल, सहज और उपयुक्त शब्दों में कहना, भाषा को अनावश्यक रूप से तोड़-मरोड़कर या चमत्कारपूर्ण बनाकर जटिल न करना, ताकि कथ्य और भाषा में सही तालमेल रहे।

Q6

बात और भाषा परस्पर जुड़े होते हैं, किंतु कभी-कभी भाषा के चक्कर में ‘सीधी बात भी टेढ़ी हो जाती है’ कैसे?

Answer

उत्तर

जब कोई व्यक्ति अपनी बात को प्रभावशाली या चमत्कारपूर्ण बनाने के लिए कठिन, अलंकृत और आडंबरपूर्ण भाषा का प्रयोग करता है, तो सीधी-सी बात उलझ जाती है। कवि कहता है कि उसने बात को पाने की कोशिश में भाषा को “उलटा पलटा / तोड़ा मरोड़ा / घुमाया फिराया”, जिससे “भाषा के साथ साथ / बात और भी पेचीदा होती चली गई”। तमाशबीनों की “शाबाशी और वाह वाह” के लालच में वह पेंच को खोलने के बजाय उसे कसता गया। परिणाम यह हुआ कि “बात की चूड़ी मर गई” और बात प्रभावहीन हो गई। अतः भाषा के प्रति अत्यधिक मोह और दिखावा सीधी बात को भी टेढ़ा बना देता है।

जब बात को प्रभावशाली बनाने या प्रशंसा पाने के लिए भाषा को तोड़ा-मरोड़ा और जटिल बनाया जाता है, तो कथ्य और भाषा का तालमेल बिगड़ जाता है; बात पेचीदा और प्रभावहीन हो जाती है (“बात की चूड़ी मर गई”)।

Q7

बात (कथ्य) के लिए नीचे दी गई विशेषताओं का उचित बिंबों/मुहावरों से मिलान करें। (क) बात की चूड़ी मर जाना (ख) बात की पेंच खोलना (ग) बात का शरारती बच्चे की तरह खेलना (घ) पेंच को कील की तरह ठोंक देना (ङ) बात का बन जाना

Answer

उत्तर

बिंब/मुहावरा

विशेषता

(क) बात की चूड़ी मर जाना

बात का प्रभावहीन हो जाना

(ख) बात की पेंच खोलना

बात को सहज और स्पष्ट करना

(ग) बात का शरारती बच्चे की तरह खेलना

बात का पकड़ में न आना

(घ) पेंच को कील की तरह ठोंक देना

बात में कसावट का न होना

(ङ) बात का बन जाना

कथ्य और भाषा का सही सामंजस्य बनना

(क) बात का प्रभावहीन हो जाना; (ख) बात को सहज और स्पष्ट करना; (ग) बात का पकड़ में न आना; (घ) बात में कसावट का न होना; (ङ) कथ्य और भाषा का सही सामंजस्य बनना।

अभ्यास – कविता के आसपास

Q8

बात से जुड़े कई मुहावरे प्रचलित हैं। कुछ मुहावरों का प्रयोग करते हुए लिखें।

Answer

उत्तर

  1. बात का बतंगड़ बनाना (छोटी बात को बढ़ा-चढ़ाकर कहना)— छोटी-सी गलती पर उसने बात का बतंगड़ बना दिया।
  2. बात बनाना (बहाने बनाना)— देर से आने पर राहुल बातें बनाने लगा।
  3. बात का धनी होना (वचन का पक्का होना)— राजा हरिश्चंद्र बात के धनी थे।
  4. बात टालना (ध्यान न देना)— पिताजी की बात टालना ठीक नहीं।
  5. बात बिगड़ना (काम खराब होना)— ज़रा-सी लापरवाही से सारी बात बिगड़ गई।
  6. बातों में आना (बहकावे में आना)— ठगों की बातों में आकर उसने पैसे गँवा दिए।
  7. बात की बात में (तुरंत)— बात की बात में वह वहाँ पहुँच गया।
  8. बात पी जाना (अपमान सह लेना)— अपमानजनक टिप्पणी सुनकर भी वह बात पी गया।

उदाहरण: बात का बतंगड़ बनाना, बातें बनाना, बात का धनी होना, बात टालना, बात बिगड़ना, बातों में आना, बात की बात में, बात पी जाना — इनका वाक्यों में प्रयोग।

Q9

व्याख्या करें— ज़ोर ज़बरदस्ती से / बात की चूड़ी मर गई / और वह भाषा में बेकार घूमने लगी।

Answer

उत्तर

प्रसंग: ये पंक्तियाँ कुँवर नारायण की कविता ‘बात सीधी थी पर’ से ली गई हैं। कवि बताता है कि भाषा के प्रति अनावश्यक मोह से बात का प्रभाव कैसे नष्ट हो जाता है।

व्याख्या: जैसे किसी पेंच को उसके खाँचे में ज़बरदस्ती कसने से उसकी चूड़ी (धागे) घिस जाती है और वह पेंच कसता नहीं, बेकार घूमता रहता है, वैसे ही जब कवि ने अपनी सीधी बात को कहने के लिए भाषा के साथ ज़ोर-ज़बरदस्ती की— उसे तोड़ा-मरोड़ा, घुमाया-फिराया— तो बात का मूल भाव और प्रभाव नष्ट हो गया। अब बात भाषा में तो थी, पर उसमें कोई अर्थ, कसाव या प्रभाव नहीं रहा; वह शब्दों के जाल में व्यर्थ घूमती रही।

विशेष: (1) ‘चूड़ी मर जाना’ नया मुहावरा/बिंब है। (2) पेंच का मूर्त उपमान अमूर्त कथ्य के लिए। (3) सरल खड़ी बोली, मुक्त छंद।

जिस प्रकार ज़बरदस्ती कसने से पेंच की चूड़ी घिस जाती है और वह बेकार घूमने लगता है, उसी प्रकार भाषा से ज़बरदस्ती करने पर बात का प्रभाव और अर्थ नष्ट हो जाता है; वह शब्दों में व्यर्थ घूमती रहती है।

अभ्यास – चर्चा कीजिए

Q10

आधुनिक युग में कविता की संभावनाओं पर चर्चा कीजिए?

Answer

उत्तर

  1. नए माध्यम: इंटरनेट, सोशल मीडिया, ब्लॉग, यूट्यूब और पॉडकास्ट ने कविता को करोड़ों लोगों तक पहुँचाया है; ऑनलाइन कवि-सम्मेलन और ‘स्लैम पोएट्री’ लोकप्रिय हो रहे हैं।
  2. विषयों का विस्तार: पर्यावरण, स्त्री-विमर्श, दलित-विमर्श, तकनीक, शहरी जीवन, अकेलापन— नए विषय कविता में आ रहे हैं।
  3. गीत और फ़िल्म: फ़िल्मी गीत, विज्ञापन और संगीत में कविता का उपयोग।
  4. मानसिक संतुलन: भागदौड़ और तनाव भरे जीवन में कविता संवेदनशीलता और सुकून देती है।
  5. चुनौतियाँ: उपभोक्तावाद, पढ़ने की आदत में कमी, सतही रचनाओं की भरमार।

फिर भी कविता मनुष्य की संवेदना से जुड़ी है, इसलिए उसकी संभावनाएँ हमेशा बनी रहेंगी— जैसा कवि कहता है, कविता की उड़ान और महक असीम है।

नए माध्यमों (सोशल मीडिया, इंटरनेट, ऑनलाइन मंच), नए विषयों और संगीत-फ़िल्मों के कारण कविता की पहुँच बढ़ी है; तनावपूर्ण जीवन में वह संवेदना और सुकून देती है। उपभोक्तावाद और सतही रचनाएँ चुनौती हैं, पर मानवीय संवेदना से जुड़ी होने के कारण कविता की संभावनाएँ असीम हैं।

Q11

चूड़ी, कील, पेंच आदि मूर्त्त उपमानों के माध्यम से कवि ने कथ्य की अमूर्त्तता को साकार किया है। भाषा को समृद्ध एवं संप्रेषणीय बनाने में, बिंबों और उपमानों के महत्व पर परिसंवाद आयोजित करें।

Answer

उत्तर

परिसंवाद के मुख्य बिंदु

  1. अमूर्त को मूर्त बनाना: भाव और विचार अमूर्त होते हैं; बिंब और उपमान उन्हें आँखों के सामने साकार कर देते हैं। जैसे ‘बात की चूड़ी मर जाना’ से बात के प्रभावहीन होने का स्पष्ट चित्र बनता है।
  2. संप्रेषणीयता: परिचित वस्तुओं (पेंच, कील, चूड़ी) के माध्यम से कठिन बात भी आसानी से समझ में आती है।
  3. सौंदर्य और प्रभाव: बिंब कविता को सजीव, चित्रात्मक और रोचक बनाते हैं; पाठक के मन पर गहरी छाप छोड़ते हैं।
  4. संक्षिप्तता: एक बिंब कई वाक्यों का काम कर देता है।
  5. नवीनता: नए उपमान भाषा को ताज़गी देते हैं; घिसे-पिटे उपमान प्रभाव खो देते हैं।
  6. सावधानी: अत्यधिक या कृत्रिम बिंब भाषा को बोझिल बना सकते हैं— जैसा कवि ने स्वयं चेताया है।

निष्कर्ष: उपयुक्त बिंब और उपमान भाषा को समृद्ध, सजीव और संप्रेषणीय बनाते हैं।

बिंब और उपमान अमूर्त भावों को मूर्त बनाते हैं, कठिन बात को परिचित वस्तुओं के माध्यम से सरल करते हैं, भाषा को चित्रात्मक, संक्षिप्त, सुंदर और प्रभावशाली बनाते हैं; पर वे सहज और उपयुक्त हों, कृत्रिम या अत्यधिक नहीं।

अभ्यास – आपसदारी

Q12

सुंदर है सुमन, विहग सुंदर / मानव तुम सबसे सुंदरतम। पंत की इस कविता में प्रकृति की तुलना में मनुष्य को अधिक सुंदर और समर्थ बताया गया है। ‘कविता के बहाने’ कविता में से इस आशय को अभिव्यक्त करने वाले बिंदुओं की तलाश करें।

Answer

उत्तर

‘कविता के बहाने’ में भी प्रकृति (चिड़िया, फूल) की तुलना में मनुष्य (बच्चा और कवि) को अधिक समर्थ बताया गया है—

  1. “कविता की उड़ान भला चिड़िया क्या जाने” — चिड़िया की उड़ान सीमित है, पर मनुष्य की कल्पना (कविता) असीम है।
  2. “बिना मुरझाए महकने के माने / फूल क्या जाने?” — फूल मुरझा जाता है, पर मनुष्य द्वारा रची कविता सदा महकती है।
  3. “सब घर एक कर देने के माने / बच्चा ही जाने” — केवल मनुष्य (बच्चा) ही सारी सीमाएँ तोड़कर सबको एक कर सकता है।

इस प्रकार दोनों कविताओं में मनुष्य को प्रकृति से अधिक सुंदर, रचनाशील और समर्थ माना गया है।

प्रश्न 1

“कविता की उड़ान भला चिड़िया क्या जाने”, “बिना मुरझाए महकने के माने फूल क्या जाने?” और “सब घर एक कर देने के माने बच्चा ही जाने” — ये पंक्तियाँ बताती हैं कि मनुष्य की रचनाशीलता चिड़िया और फूल की सीमाओं से परे, अधिक समर्थ है।

उत्तर

Q13

प्रतापनारायण मिश्र का निबंध ‘बात’ और नागार्जुन की कविता ‘बातें’ ढूँढ़ कर पढ़ें।

Answer

उत्तर

(पठन-गतिविधि)

  • प्रतापनारायण मिश्र — ‘बात’: भारतेंदु युग के इस ललित निबंध में ‘बात’ शब्द के अनेक अर्थों और मुहावरों (बात बनाना, बात का धनी, बात बिगड़ना आदि) के प्रयोग से हास्य-व्यंग्य के साथ बताया गया है कि मनुष्य के जीवन में बात (वाणी) का कितना महत्व है— बात से ही मनुष्य की प्रतिष्ठा बनती और बिगड़ती है।
  • नागार्जुन — ‘बातें’: इस कविता में तरह-तरह की बातों— हँसी-मज़ाक, मीठी, कड़वी, झूठी, सच्ची, गपशप— के माध्यम से मनुष्य के आपसी संबंधों और व्यवहार का चित्र है।

दोनों रचनाएँ ‘बात सीधी थी पर’ की तरह बात (कथ्य) और भाषा के महत्व पर प्रकाश डालती हैं। विद्यार्थी इन्हें पुस्तकालय या इंटरनेट (जैसे हिंदी समय, कविता कोश) पर ढूँढ़कर पढ़ें और कक्षा में चर्चा करें।

पठन-गतिविधि: प्रतापनारायण मिश्र का निबंध ‘बात’ मुहावरों के माध्यम से वाणी के महत्व को हास्य-व्यंग्य के साथ बताता है और नागार्जुन की ‘बातें’ कविता तरह-तरह की बातों से मानव व्यवहार दर्शाती है; इन्हें पढ़कर ‘बात सीधी थी पर’ से तुलना करें।

विषय-सूची की जाँच

  • ☒ कविता के बहाने — उड़ान, खिलना, बच्चा (प्रश्न 1–4)
  • ☒ बात सीधी थी पर — भाषा और कथ्य (प्रश्न 5–7)
  • ☒ मुहावरे, व्याख्या (प्रश्न 8–9)
  • ☒ कविता की संभावनाएँ, बिंब-उपमान (प्रश्न 10–11)
  • ☒ पंत से तुलना; पठन (प्रश्न 12–13)

Total questions answered: 13 of 13

Frequently Asked Questions

What do these NCERT solutions for Class 12 Hindi Aroh Chapter 3 (कविता के बहाने, बात सीधी थी पर) cover?

All 14 questions from the latest NCERT textbook for this chapter are answered step by step, organised as अभ्यास – कविता के साथ, अभ्यास – कविता के आसपास, अभ्यास – चर्चा कीजिए and अभ्यास – आपसदारी.

Are these solutions based on the new NCERT syllabus?

Yes. The answers follow the current NCERT textbook for Class 12 Hindi Aroh and the latest CBSE syllabus, so the question numbers and wording match the book you use in class.

How should I use these solutions to prepare for exams?

Attempt each question on your own first, then compare your working with the answer here. Note the steps or keywords you missed, and revise the chapter notes before taking a chapter-wise MCQ test to check your understanding.

Are the NCERT solutions for Class 12 Hindi Aroh Chapter 3 (कविता के बहाने, बात सीधी थी पर) free?

Yes. All Circle of Learning NCERT solutions and chapter notes are free to read online, with no sign-up needed.