Class | Subject | Book | Chapter | Session | Questions covered |
|---|---|---|---|---|---|
XII | Hindi | Aroh (NCERT) | 2 – पतंग | 2026-27 | 11 of 11 |
बिंदु | विवरण |
|---|---|
कवि | आलोक धन्वा (जन्म 1948, मुंगेर, बिहार); एकमात्र संग्रह — ‘दुनिया रोज़ बनती है’ |
कविता | ‘पतंग’ — एक लंबी कविता का तीसरा भाग |
विषय | पतंग के बहाने बालसुलभ इच्छाओं, उमंगों और निडरता का चित्रण; भादो के बाद शरद ऋतु का आगमन |
प्रमुख बिंब | “खरगोश की आँखों जैसा लाल सवेरा”, शरद का चमकीली साइकिल पर आना, “दिशाओं को मृदंग की तरह बजाते हुए”, “रोमांचित शरीर का संगीत” |
शिल्प | मुक्त छंद, नए बिंब, मानवीकरण, उपमा |
अभ्यास – कविता के साथ
‘सबसे तेज़ बौछारें गयीं, भादो गया’ के बाद प्रकृति में जो परिवर्तन कवि ने दिखाया है, उसका वर्णन अपने शब्दों में करें।
Answer
उत्तर
भादो (भाद्रपद) मास की तेज़ बारिश और अँधेरे दिनों के बाद शरद ऋतु आ जाती है। प्रकृति में ये परिवर्तन होते हैं—
- आसमान साफ़ हो जाता है; सवेरा “खरगोश की आँखों जैसा लाल” और चमकीला होता है।
- धूप चमकीली हो जाती है; वातावरण में ताज़गी और उल्लास भर जाता है।
- हवा मंद और सुहावनी हो जाती है, जिससे आकाश “मुलायम” लगता है और पतंगें उड़ सकती हैं।
- तितलियाँ उड़ने लगती हैं; बच्चे सीटियाँ और किलकारियाँ भरते हुए पतंग उड़ाने निकल पड़ते हैं।
कवि ने शरद का मानवीकरण किया है— वह पुलों को पार करते हुए, नयी चमकीली साइकिल तेज़ चलाते हुए, घंटी बजाते हुए बच्चों को चमकीले इशारों से बुलाता है।
भादो की तेज़ बारिश के बाद शरद ऋतु आती है: आकाश साफ़ होता है, सवेरा लाल और चमकीला होता है, धूप उजली और हवा सुहावनी हो जाती है, तितलियाँ उड़ती हैं और बच्चे उल्लास के साथ पतंग उड़ाने निकल पड़ते हैं।
सोचकर बताएँ कि पतंग के लिए सबसे हलकी और रंगीन चीज़, सबसे पतला कागज़, सबसे पतली कमानी जैसे विशेषणों का प्रयोग क्यों किया है?
Answer
उत्तर
- पतंग वास्तव में बहुत हलकी होती है; वह पतले कागज़ और बाँस की पतली कमानी से बनती है, तभी हवा में उड़ पाती है।
- ये विशेषण पतंग की कोमलता, नाज़ुकता और सुंदरता को प्रकट करते हैं।
- पतंग बच्चों के कोमल मन और रंग-बिरंगे सपनों का प्रतीक है— बच्चों का मन भी उतना ही हलका, निर्मल और रंगीन होता है।
- ‘सबसे’ शब्द से भाव में तीव्रता आती है और पाठक का ध्यान आकृष्ट होता है।
क्योंकि पतंग हलकी, रंगीन और नाज़ुक होती है, तभी उड़ती है; ये विशेषण उसकी कोमलता-सुंदरता बताते हैं और बच्चों के हलके, निर्मल, रंगीन मन और सपनों के प्रतीक हैं।
बिंब स्पष्ट करें— सबसे तेज़ बौछारें गयीं भादो गया / सवेरा हुआ / खरगोश की आँखों जैसा लाल सवेरा / शरद आया पुलों को पार करते हुए / अपनी नयी चमकीली साइकिल तेज़ चलाते हुए / घंटी बजाते हुए ज़ोर-ज़ोर से / चमकीले इशारों से बुलाते हुए और / आकाश को इतना मुलायम बनाते हुए / कि पतंग ऊपर उठ सके।
Answer
उत्तर
इन पंक्तियों में अनेक बिंब हैं—
- दृश्य बिंब: “सबसे तेज़ बौछारें”, “खरगोश की आँखों जैसा लाल सवेरा”— बारिश के बाद लालिमा-भरे सुंदर सवेरे का चित्र।
- गतिशील बिंब: “शरद आया पुलों को पार करते हुए”, “नयी चमकीली साइकिल तेज़ चलाते हुए”— शरद ऋतु एक उत्साही बालक की तरह तेज़ी से आती है।
- श्रव्य बिंब: “घंटी बजाते हुए ज़ोर-ज़ोर से”।
- दृश्य बिंब: “चमकीले इशारों से बुलाते हुए”— शरद की चमकीली धूप मानो बच्चों को पतंग उड़ाने के लिए बुला रही है।
- स्पर्श बिंब: “आकाश को इतना मुलायम बनाते हुए”— शरद की मंद हवा से आकाश कोमल हो जाता है, ताकि पतंग उठ सके।
यहाँ शरद ऋतु का मानवीकरण है; “खरगोश की आँखों जैसा” में उपमा अलंकार है।
दृश्य बिंब (तेज़ बौछारें, खरगोश की आँखों जैसा लाल सवेरा, चमकीले इशारे), गतिशील बिंब (पुल पार करते, साइकिल तेज़ चलाते शरद), श्रव्य बिंब (घंटी बजाना) और स्पर्श बिंब (मुलायम आकाश)। शरद का मानवीकरण एक उत्साही बालक के रूप में हुआ है।
जन्म से ही वे अपने साथ लाते हैं कपास— कपास के बारे में सोचें कि कपास से बच्चों का क्या संबंध बन सकता है।
Answer
उत्तर
कपास कोमल, हलकी, मुलायम और श्वेत (निर्मल) होती है। बच्चे भी जन्म से ही— 1. शरीर से कोमल और लचीले होते हैं— गिरने पर भी उन्हें कम चोट लगती है। 2. मन से निर्मल, पवित्र और निश्छल होते हैं। 3. हलके-फुलके और उमंग-भरे होते हैं— वे दौड़ते हैं तो मानो छतें भी नरम हो जाती हैं।
इस प्रकार कपास बच्चों की कोमलता, निर्मलता और सहज ऊर्जा का प्रतीक है।
कपास की तरह बच्चे जन्म से ही कोमल, हलके, मुलायम और निर्मल होते हैं; उनकी कोमलता और लचीलापन उन्हें गिरने से बचाते हैं और छतों को भी नरम बना देते हैं।
पतंगों के साथ-साथ वे भी उड़ रहे हैं— बच्चों का उड़ान से कैसा संबंध बनता है?
Answer
उत्तर
बच्चे पतंग उड़ाते हुए उसमें इतने तन्मय हो जाते हैं कि पतंग की ऊँचाई के साथ उनका मन भी उड़ने लगता है। पतंग उनकी कल्पनाओं, इच्छाओं और सपनों का प्रतीक है। जैसे-जैसे पतंग ऊँची उठती है, बच्चों की उमंग और उत्साह भी बढ़ता है; वे “अपने रंध्रों के सहारे” (रोम-रोम से) उड़ते हैं। यह उड़ान बच्चों की असीम आकांक्षाओं और ऊँचाइयों को छूने की इच्छा को दर्शाती है।
पतंग उड़ाते समय बच्चों का मन भी कल्पना में पतंग के साथ उड़ता है; पतंग उनकी उमंगों और सपनों का प्रतीक है, जिसकी ऊँचाई के साथ उनका उत्साह और आकांक्षाएँ भी ऊँची उड़ान भरती हैं।
निम्नलिखित पंक्तियों को पढ़ कर प्रश्नों का उत्तर दीजिए। (क) छतों को भी नरम बनाते हुए / दिशाओं को मृदंग की तरह बजाते हुए (ख) अगर वे कभी गिरते हैं छतों के खतरनाक किनारों से / और बच जाते हैं तब तो / और भी निडर होकर सुनहले सूरज के सामने आते हैं। — दिशाओं को मृदंग की तरह बजाने का क्या तात्पर्य है? — जब पतंग सामने हो तो छतों पर दौड़ते हुए क्या आपको छत कठोर लगती है? — खतरनाक परिस्थितियों का सामना करने के बाद आप दुनिया की चुनौतियों के सामने स्वयं को कैसा महसूस करते हैं?
Answer
उत्तर
(i) दिशाओं को मृदंग की तरह बजाना: पतंग उड़ाते समय बच्चे छतों पर उछलते-दौड़ते हैं, किलकारियाँ और सीटियाँ भरते हैं। उनके पैरों की थाप और शोर से चारों दिशाएँ गूँज उठती हैं, मानो मृदंग बज रहा हो। इससे वातावरण संगीतमय और उल्लासपूर्ण हो जाता है।
(ii) नहीं। जब पतंग सामने हो तो मन पूरी तरह पतंग में लगा रहता है; उत्साह और आनंद में छत की कठोरता का पता ही नहीं चलता। छत नरम लगती है।
(iii) खतरनाक परिस्थितियों का सामना करने के बाद मन में आत्मविश्वास और साहस बढ़ जाता है; डर कम हो जाता है। हम और भी निडर होकर दुनिया की चुनौतियों का सामना करने के लिए तैयार हो जाते हैं— जैसे गिरकर बचे बच्चे “और भी निडर होकर सुनहले सूरज के सामने आते हैं”।
- बच्चों के उछलने-दौड़ने और किलकारियों से दिशाएँ मृदंग की तरह गूँज उठती हैं। (ii) नहीं, पतंग के उत्साह में छत की कठोरता महसूस नहीं होती। (iii) खतरों का सामना करने के बाद आत्मविश्वास और निडरता बढ़ती है, हम चुनौतियों के लिए और तैयार महसूस करते हैं।
अभ्यास – कविता के आसपास
आसमान में रंग-बिरंगी पतंगों को देखकर आपके मन में कैसे खयाल आते हैं? लिखिए
Answer
उत्तर
आसमान में रंग-बिरंगी पतंगों को देखकर मन प्रसन्न और उल्लसित हो जाता है। लगता है जैसे नीले आकाश में रंग-बिरंगे फूल खिल गए हों या पक्षी उड़ रहे हों। मन करता है कि मैं भी छत पर जाकर पतंग उड़ाऊँ और पेंच लड़ाऊँ। बचपन की यादें ताज़ा हो जाती हैं— मकर संक्रांति, स्वतंत्रता दिवस जैसे पर्व याद आते हैं। पतंगें हमें ऊँचे सपने देखने और जीवन में ऊँचाइयों को छूने की प्रेरणा देती हैं; यह भी सिखाती हैं कि एक पतली डोर के सहारे— यानी अनुशासन और संतुलन से— हम ऊँचे उड़ सकते हैं।
मन प्रसन्न हो जाता है; आकाश रंग-बिरंगे फूलों-सा लगता है, स्वयं पतंग उड़ाने की इच्छा होती है, बचपन और त्योहार याद आते हैं, और ऊँचे सपने देखने तथा संतुलन से ऊँचाइयाँ छूने की प्रेरणा मिलती है।
‘रोमांचित शरीर का संगीत’ का जीवन के लय से क्या संबंध है?
Answer
उत्तर
पतंग उड़ाते समय बच्चों का शरीर उत्साह और रोमांच से भर जाता है; उनकी हर गति में एक लय, एक संगीत होता है। यही संगीत उन्हें छतों के खतरनाक किनारों से गिरने से बचाता है। जीवन में भी जब मनुष्य उत्साह, उमंग और तन्मयता से कार्य करता है, तो उसके तन-मन में एक संतुलन और लय बनी रहती है। यह लय उसे कठिनाइयों से बचाती है और लक्ष्य की ओर बढ़ाती है। अतः रोमांचित शरीर का संगीत जीवन की उमंग, संतुलन और ऊर्जा का प्रतीक है।
उत्साह से रोमांचित शरीर की गति में एक लय और संतुलन होता है जो बच्चों को गिरने से बचाता है; जीवन में भी उमंग और तन्मयता से उत्पन्न लय-संतुलन ही हमें कठिनाइयों से बचाकर आगे बढ़ाता है।
‘महज़ एक धागे के सहारे, पतंगों की धड़कती ऊँचाइयाँ’ उन्हें (बच्चों को) कैसे थाम लेती हैं? चर्चा करें।
Answer
उत्तर
पतंग एक पतले धागे के सहारे आकाश की ऊँचाइयों में उड़ती है। बच्चे उस धागे को पकड़कर पतंग के साथ भावनात्मक रूप से जुड़ जाते हैं; उनका पूरा ध्यान पतंग पर रहता है। पतंग की “धड़कती ऊँचाइयाँ”— यानी ऊपर-नीचे होती, हिलती-डुलती पतंग— बच्चों के मन की धड़कनों से जुड़ जाती हैं। इसी तन्मयता के कारण वे छत के किनारों पर दौड़ते हुए भी संतुलन बनाए रखते हैं और गिरते नहीं। इस प्रकार एक धागा बच्चों और पतंग को जोड़ता है और बच्चों को सहारा देता है। यह इस बात का भी प्रतीक है कि छोटी-सी आशा या सपना भी मनुष्य को थामे रहता है।
धागे के सहारे बच्चे पतंग से भावनात्मक रूप से जुड़ जाते हैं; उनका ध्यान और धड़कनें पतंग की ऊँचाई से बँध जाती हैं, इस तन्मयता से उनका संतुलन बना रहता है और वे गिरने से बच जाते हैं।
अभ्यास – आपकी कविता
हिंदी साहित्य के विभिन्न कालों में तुलसी, जायसी, मतिराम, द्विजदेव, मैथिलीशरण गुप्त आदि कवियों ने भी शरद ऋतु का सुंदर वर्णन किया है। आप उन्हें तलाश कर कक्षा में सुनाएँ और चर्चा करें कि पतंग कविता में शरद ऋतु वर्णन उनसे किस प्रकार भिन्न है?
Answer
उत्तर
उदाहरण: - तुलसीदास (रामचरितमानस, किष्किंधा कांड): “बरषा बिगत सरद रितु आई। लछिमन देखहु परम सुहाई॥ फूलें कास सकल महि छाई। जनु बरषाँ कृत प्रगट बुढ़ाई॥” — वर्षा बीतने पर शरद आई, काँस के फूल पृथ्वी पर छा गए, मानो वर्षा ऋतु का बुढ़ापा प्रकट हो गया हो। - मैथिलीशरण गुप्त (पंचवटी): “चारु चंद्र की चंचल किरणें, खेल रही हैं जल-थल में, स्वच्छ चाँदनी बिछी हुई है अवनि और अंबर तल में।” - जायसी (पद्मावत के बारहमासा), मतिराम और द्विजदेव ने भी शरद की चाँदनी, स्वच्छ जल और पुष्पों का श्रृंगारिक-अलंकारिक वर्णन किया है।
भिन्नता: 1. पारंपरिक कवियों ने शरद का वर्णन प्रकृति-सौंदर्य (काँस, चाँदनी, निर्मल जल, कमल), भक्ति, श्रृंगार या उपदेश के संदर्भ में किया है। 2. आलोक धन्वा ने शरद को बच्चों की उमंग और पतंगबाज़ी से जोड़ा है। 3. उन्होंने आधुनिक, नए बिंब दिए हैं— शरद का “नयी चमकीली साइकिल” चलाते, घंटी बजाते आना; “खरगोश की आँखों जैसा लाल सवेरा”। 4. भाषा सरल, मुक्त छंद में है, जबकि पारंपरिक कवियों में छंदबद्धता और अलंकारिकता है।
तुलसी, गुप्त आदि ने शरद का पारंपरिक, अलंकृत, छंदबद्ध वर्णन किया है (काँस के फूल, चाँदनी, निर्मल जल) — भक्ति या श्रृंगार के संदर्भ में; आलोक धन्वा ने मुक्त छंद में नए आधुनिक बिंबों (चमकीली साइकिल, लाल सवेरा) के साथ शरद को बच्चों की उमंग और पतंगबाज़ी से जोड़ा है।
आपके जीवन में शरद ऋतु क्या मायने रखती है?
Answer
उत्तर
शरद ऋतु मेरे लिए उल्लास, ताज़गी और उत्सवों का समय है। 1. बरसात की उमस और कीचड़ के बाद मौसम साफ़, सुहावना और ठंडा हो जाता है; पढ़ाई और खेल में मन लगता है। 2. आकाश नीला और स्वच्छ होता है; रातों में चाँदनी विशेष रूप से सुंदर होती है (शरद पूर्णिमा)। 3. इसी समय दशहरा, दीपावली, नवरात्र जैसे प्रमुख त्योहार आते हैं— घर की सफ़ाई, सजावट, मिठाइयाँ, मेले। 4. खेतों में फसलें पकती हैं; किसानों के लिए यह समृद्धि का समय है। 5. कई स्थानों पर पतंगबाज़ी और खेल-कूद होते हैं।
शरद मुझे नई ऊर्जा और उत्साह से भर देती है।
शरद मेरे लिए सुहावने मौसम, स्वच्छ आकाश, चाँदनी रातों और दशहरा-दीपावली जैसे त्योहारों का समय है, जो जीवन में ताज़गी, उल्लास और नई ऊर्जा भर देता है।
विषय-सूची की जाँच
- ☒ शरद ऋतु का आगमन और बिंब (प्रश्न 1–3)
- ☒ बच्चे — कपास, उड़ान, निडरता (प्रश्न 4–6)
- ☒ पतंग, रोमांचित शरीर का संगीत, धागे का सहारा (प्रश्न 7–9)
- ☒ शरद ऋतु — अन्य कवि और अपना अनुभव (प्रश्न 10–11)