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Class 12 Hindi Aroh Chapter 6

NCERT Solutions for Class 12 Hindi Aroh Chapter 6: बादल राग

Class

Subject

Book

Chapter

Session

Questions covered

XII

Hindi

Aroh (NCERT)

6 – बादल राग

2026-27

11 of 11

बिंदु

विवरण

कवि

सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’ (1899–1961), महिषादल (बंगाल); छायावाद के प्रमुख स्तंभ, मुक्त छंद के प्रवर्तक

स्रोत

‘अनामिका’ संग्रह की छह खंडों वाली लंबी कविता ‘बादल राग’ का छठा खंड

विषय

बादल = क्रांति (विप्लव) का प्रतीक; शोषित किसान-मज़दूर क्रांति का आह्वान करते हैं, जबकि पूँजीपति (धनी) भयभीत हैं

प्रमुख प्रतीक

छोटे पौधे = शोषित जन; उन्नत शत-शत वीर (ऊँचे पेड़-पर्वत) = पूँजीपति/शोषक; अट्टालिका = आतंक-भवन; पंक = गरीब जनता

शिल्प

मुक्त छंद, तत्सम-प्रधान भाषा, मानवीकरण, रूपक, ओज गुण

अभ्यास – कविता के साथ

Q1

अस्थिर सुख पर दुख की छाया पंक्ति में दुख की छाया किसे कहा गया है और क्यों?

Answer

उत्तर

यहाँ बादल (क्रांति) को ‘दुख की छाया’ कहा गया है। संसार में पूँजीपतियों का सुख अस्थिर (क्षणिक) है, क्योंकि वह शोषण पर टिका है। जब क्रांति का बादल आता है तो वह उनके सुख पर दुख की छाया बनकर छा जाता है— उनके धन-वैभव, सत्ता और ऐश्वर्य के नष्ट होने का भय उत्पन्न होता है। वर्षा के बादल भी आकाश पर छाकर धूप को ढक लेते हैं और विनाशकारी बाढ़ ला सकते हैं।

क्रांति के प्रतीक बादल को; क्योंकि पूँजीपतियों का शोषण पर टिका सुख अस्थिर है और क्रांति उनके धन-वैभव और सत्ता के विनाश का भय पैदा करके उनके सुख पर दुख की छाया डाल देती है।

Q2

अशनि-पात से शापित उन्नत शत-शत वीर पंक्ति में किसकी ओर संकेत किया गया है?

Answer

उत्तर

यहाँ पूँजीपतियों, शोषकों और अभिमानी शक्तिशाली वर्ग की ओर संकेत है। बादलों के गर्जन और बिजली गिरने (अशनि-पात) से ऊँचे-ऊँचे पेड़ और पर्वत-शिखर क्षत-विक्षत होकर गिर पड़ते हैं, जो “गगन-स्पर्शी स्पर्द्धा” रखते थे। इसी प्रकार क्रांति की चोट से अहंकारी, शोषक, धनी वर्ग पराजित और नष्ट हो जाता है।

ऊँचे पेड़ों-पर्वतों के माध्यम से अहंकारी पूँजीपति और शोषक वर्ग की ओर, जो क्रांति (वज्रपात) से क्षत-विक्षत होकर नष्ट हो जाते हैं।

Q3

विप्लव-रव से छोटे ही हैं शोभा पाते पंक्ति में विप्लव-रव से क्या तात्पर्य है? छोटे ही हैं शोभा पाते ऐसा क्यों कहा गया है?

Answer

उत्तर

विप्लव-रव का अर्थ है— क्रांति का शोर, बादलों का गर्जन।

छोटे ही हैं शोभा पाते: बादलों के गरजने-बरसने से ऊँचे पेड़ टूट जाते हैं, पर छोटे पौधे हरे-भरे होकर लहलहा उठते हैं, “हिल-हिल / खिल-खिल” हाथ हिलाकर बादल को बुलाते हैं। इसी प्रकार क्रांति से शोषक और धनी वर्ग का विनाश होता है, जबकि शोषित, गरीब, किसान-मज़दूर (छोटे लोग) को लाभ होता है; उनके जीवन में खुशहाली आती है। क्रांति उन्हीं के अधिकारों के लिए होती है, अतः वही उससे शोभा पाते हैं।

विप्लव-रव = क्रांति का शोर/बादलों का गर्जन। क्रांति से शोषक वर्ग नष्ट होता है पर शोषित-गरीब (छोटे पौधों की तरह) लाभान्वित और प्रसन्न होते हैं, इसलिए छोटे ही शोभा पाते हैं।

Q4

बादलों के आगमन से प्रकृति में होने वाले किन-किन परिवर्तनों को कविता रेखांकित करती है?

Answer

उत्तर

  1. बादल हवा के सागर पर तैरते हुए छा जाते हैं; धूप पर छाया पड़ जाती है।
  2. बादलों के भेरी-गर्जन से धरती के भीतर सोए हुए अंकुर जाग उठते हैं और नवजीवन की आशा में सिर उठाकर ताकने लगते हैं।
  3. बार-बार गर्जन होता है, मूसलधार वर्षा होती है; घोर वज्र-हुंकार सुनकर संसार हृदय थाम लेता है।
  4. बिजली गिरने से ऊँचे पेड़ और पर्वत क्षत-विक्षत हो जाते हैं।
  5. छोटे पौधे हरे-भरे होकर हिलते-खिलते हैं और मानो हाथ हिलाकर बादल को बुलाते हैं।
  6. कीचड़ (पंक) में जल-प्लावन होता है, कमल खिलते हैं और उनसे जल छलकता है।
  7. तपती धरती की प्यास बुझती है; किसान को राहत की आशा मिलती है।

बादल छा जाते हैं, गर्जन और मूसलधार वर्षा होती है, सोए अंकुर जाग उठते हैं, बिजली गिरने से ऊँचे पेड़ टूटते हैं, छोटे पौधे लहलहाते हैं, कीचड़ में कमल खिलते हैं और तपती धरती तृप्त होती है।

अभ्यास – व्याख्या कीजिए

Q5

व्याख्या कीजिए— तिरती है समीर-सागर पर / अस्थिर सुख पर दुख की छाया— / जग के दग्ध हृदय पर / निर्दय विप्लव की प्लावित माया—

Answer

उत्तर

प्रसंग: ये पंक्तियाँ निराला की ‘बादल राग’ कविता से हैं। कवि बादल को क्रांति का प्रतीक मानकर उसका आह्वान करता है।

व्याख्या: कवि कहता है कि हे बादल! तुम हवा रूपी सागर पर नाव की तरह तैर रहे हो। संसार में पूँजीपतियों का सुख अस्थिर है; तुम उस सुख पर दुख की छाया बनकर छा जाते हो। दुखों से तपे हुए संसार के हृदय पर तुम निर्दय क्रांति (विप्लव) की माया की तरह छाए हुए हो, जो बाढ़ लाकर सब कुछ बहा ले जाती है। अर्थात क्रांति शोषकों के लिए विनाशकारी और दुखदायी है, पर दुखी, तपते संसार के लिए राहत लाने वाली है।

विशेष: (1) ‘समीर-सागर’ में रूपक अलंकार। (2) ‘दुख की छाया’ में मानवीकरण। (3) तत्सम-प्रधान भाषा, ओज गुण, मुक्त छंद। (4) बादल क्रांति का प्रतीक।

हे बादल, तुम हवा-रूपी सागर पर तैरते हुए शोषकों के अस्थिर सुख पर दुख की छाया की तरह और दुखों से तपे संसार के हृदय पर निर्दय क्रांति की बाढ़ की तरह छाए हो — क्रांति शोषकों के लिए विनाशक और दुखी जनता के लिए राहत है। (रूपक: समीर-सागर; तत्सम भाषा, ओज गुण।)

Q6

व्याख्या कीजिए— अट्टालिका नहीं है रे / आतंक-भवन / सदा पंक पर ही होता / जल-विप्लव-प्लावन

Answer

उत्तर

प्रसंग: ‘बादल राग’ (निराला) से। कवि पूँजीपतियों के भवनों और गरीबों की स्थिति की तुलना करता है।

व्याख्या: कवि कहता है कि धनियों की ऊँची-ऊँची अट्टालिकाएँ (महल) वास्तव में महल नहीं, बल्कि आतंक के भवन हैं, जहाँ से गरीबों का शोषण होता है और जिनमें रहने वाले क्रांति के भय से आतंकित रहते हैं। बाढ़ का पानी सदा कीचड़ (पंक) में ही फैलता है, ऊँचे भवनों पर नहीं; अर्थात हर विपत्ति की मार गरीबों पर ही पड़ती है। परंतु उसी कीचड़ में कमल खिलता है— क्रांति से गरीब वर्ग ही लाभान्वित और प्रफुल्लित होता है।

विशेष: (1) ‘आतंक-भवन’ में रूपक। (2) ‘पंक’ गरीब जनता का प्रतीक। (3) शोषक-शोषित वर्ग का विरोध; प्रगतिवादी चेतना। (4) तत्सम शब्दावली।

धनियों के ऊँचे महल वास्तव में शोषण और भय के ‘आतंक-भवन’ हैं; बाढ़ (विपत्ति और क्रांति) सदा कीचड़ (गरीब जनता) पर ही आती है, और वही उससे कमल की तरह खिलती भी है। (रूपक, प्रतीक; प्रगतिवादी स्वर।)

अभ्यास – कला की बात

Q7

पूरी कविता में प्रकृति का मानवीकरण किया गया है। आपको प्रकृति का कौन-सा मानवीय रूप पसंद आया और क्यों?

Answer

उत्तर

मुझे छोटे पौधों का मानवीय रूप सबसे अधिक पसंद आया— “हँसते हैं छोटे पौधे लघुभार— / शस्य अपार, / हिल-हिल / खिल-खिल, / हाथ हिलाते, / तुझे बुलाते”।

यहाँ छोटे पौधे मनुष्य की तरह हँसते, हाथ हिलाते और बादल को बुलाते हैं। यह चित्र बहुत सजीव और आनंदपूर्ण है; ‘हिल-हिल, खिल-खिल’ की ध्वनि से उसमें संगीतात्मकता आ गई है। साथ ही यह प्रतीक है कि शोषित, साधारण जनता क्रांति का स्वागत करती है क्योंकि उससे उसे ही लाभ मिलता है।

(अन्य उदाहरण: धरती के हृदय में सोए अंकुरों का सिर उठाकर ताकना; बादल का “विप्लव के वीर” के रूप में रण-तरी पर सवार होना।)

छोटे पौधों का हँसना, हाथ हिलाकर बादल को बुलाना (“हिल-हिल, खिल-खिल”) — यह सजीव, संगीतात्मक चित्र है और शोषित जनता द्वारा क्रांति के स्वागत का सुंदर प्रतीक है।

Q8

कविता में रूपक अलंकार का प्रयोग कहाँ-कहाँ हुआ है? संबंधित वाक्यांश को छाँटकर लिखिए।

Answer

उत्तर

  1. समीर-सागर — हवा रूपी सागर
  2. रण-तरी — बादल रूपी युद्ध की नौका
  3. भेरी-गर्जन — गर्जन रूपी भेरी (नगाड़ा)
  4. वज्र-हुंकार — वज्र रूपी हुंकार
  5. आतंक-भवन — अट्टालिका रूपी आतंक-भवन
  6. जल-विप्लव-प्लावन — जल रूपी विप्लव
  7. ऐ जीवन के पारावार — बादल रूपी जीवन का सागर
  8. विप्लव के वीर — बादल रूपी क्रांति का वीर

समीर-सागर, रण-तरी, भेरी-गर्जन, वज्र-हुंकार, आतंक-भवन, जल-विप्लव-प्लावन, ऐ विप्लव के वीर, ऐ जीवन के पारावार।

Q9

इस कविता में बादल के लिए ऐ विप्लव के वीर!, ऐ जीवन के पारावार! जैसे संबोधनों का इस्तेमाल किया गया है। बादल राग कविता के शेष पाँच खंडों में भी कई संबोधनों का इस्तेमाल किया गया है। जैसे— अरे वर्ष के हर्ष!, मेरे पागल बादल!, ऐ निर्बंध!, ऐ स्वच्छंद!, ऐ उद्दाम!, ऐ सम्राट!, ऐ विप्लव के प्लावन!, ऐ अनंत के चंचल शिशु सुकुमार! उपर्युक्त संबोधनों की व्याख्या करें तथा बताएँ कि बादल के लिए इन संबोधनों का क्या औचित्य है?

Answer

उत्तर

संबोधन

व्याख्या / औचित्य

ऐ विप्लव के वीर!

बादल क्रांति लाने वाला वीर है, जो शोषण के विरुद्ध लड़ता है

ऐ जीवन के पारावार!

बादल जल का अथाह सागर है, जो धरती को जीवन देता है

अरे वर्ष के हर्ष!

वर्षा ऋतु वर्ष भर की खुशी लाती है; किसानों के लिए आनंद का स्रोत

मेरे पागल बादल!

बादल मस्त, बेपरवाह होकर इधर-उधर घूमता है; कवि का आत्मीय भाव

ऐ निर्बंध!

बादल किसी बंधन में नहीं बँधता, स्वतंत्र है

ऐ स्वच्छंद!

अपनी इच्छा से जहाँ चाहे जाता है

ऐ उद्दाम!

प्रचंड, अदम्य वेग वाला; कोई उसे रोक नहीं सकता

ऐ सम्राट!

आकाश पर राजा की तरह शासन करता है; सर्वशक्तिमान

ऐ विप्लव के प्लावन!

क्रांति की बाढ़ लाने वाला, पुरानी व्यवस्था को बहा देने वाला

ऐ अनंत के चंचल शिशु सुकुमार!

अनंत आकाश का चंचल, कोमल बालक

औचित्य: ये संबोधन बादल के विविध रूपों— शक्ति, स्वतंत्रता, विनाश और सृजन, कोमलता और चंचलता— को प्रकट करते हैं। ये बादल को क्रांति के प्रतीक के रूप में प्रतिष्ठित करते हैं, जो पुरानी शोषक व्यवस्था को नष्ट कर नवजीवन लाता है। साथ ही इनसे कवि की बादल के प्रति आत्मीयता और श्रद्धा भी झलकती है।

ये संबोधन बादल की शक्ति (वीर, सम्राट, उद्दाम), स्वतंत्रता (निर्बंध, स्वच्छंद), जीवनदायिनी शक्ति (जीवन के पारावार, वर्ष के हर्ष), विनाशकारी-क्रांतिकारी रूप (विप्लव के प्लावन) और कोमलता-चंचलता (अनंत के चंचल शिशु) को प्रकट करते हैं; अतः क्रांति के प्रतीक बादल के लिए पूर्णतः उपयुक्त हैं।

Q10

कवि बादलों को किस रूप में देखता है? कालिदास ने मेघदूत काव्य में मेघों को दूत के रूप में देखा। आप अपना कोई काल्पनिक बिंब दीजिए।

Answer

उत्तर

निराला बादलों को क्रांति के अग्रदूत / विप्लव के वीर के रूप में देखते हैं, जो शोषकों का विनाश कर शोषित किसानों-मज़दूरों को नवजीवन देते हैं।

कालिदास ने ‘मेघदूत’ में मेघ को यक्ष का संदेशवाहक (दूत) बनाया, जो अलकापुरी में उसकी प्रिया तक संदेश ले जाता है।

मेरा काल्पनिक बिंब: बादल मुझे आकाश के डाकिए लगते हैं, जो अपनी भूरी-काली झोली में पानी की चिट्ठियाँ भरकर लाते हैं और प्यासे खेतों, सूखी नदियों और तपते शहरों के घर-घर उन्हें बाँट जाते हैं— बिजली की चमक उनकी टॉर्च है और गर्जन उनकी साइकिल की घंटी।

(या: बादल रुई के गोलों से भरे कपास के खेत हैं, जिन्हें हवा रूपी किसान आकाश में बिखेरता है।)

निराला बादल को क्रांति का वीर/अग्रदूत मानते हैं; कालिदास ने उसे विरही यक्ष का दूत बनाया। मेरा बिंब: बादल आकाश के डाकिए हैं जो पानी की चिट्ठियाँ झोली में भरकर प्यासे खेतों और शहरों को बाँटते हैं — बिजली उनकी टॉर्च और गर्जन उनकी घंटी है।

Q11

कविता को प्रभावी बनाने के लिए कवि विशेषणों का सायास प्रयोग करता है जैसे- अस्थिर सुख। सुख के साथ अस्थिर विशेषण के प्रयोग ने सुख के अर्थ में विशेष प्रभाव पैदा कर दिया है। ऐसे अन्य विशेषणों को कविता से छाँटकर लिखें तथा बताएँ कि ऐसे शब्द-पदों के प्रयोग से कविता के अर्थ में क्या विशेष प्रभाव पैदा हुआ है?

Answer

उत्तर

विशेषण-पद

प्रभाव

दग्ध हृदय

दुखों से तपे, पीड़ित संसार का भाव

निर्दय विप्लव

क्रांति की कठोरता और विनाशकारी रूप

प्लावित माया

बाढ़ की तरह सब कुछ बहा ले जाने वाली

सुप्त अंकुर

धरती में सोई हुई संभावनाएँ, दबी हुई जनता

घोर वज्र-हुंकार

गर्जन की भयंकरता

उन्नत शत-शत वीर

ऊँचे, अहंकारी शोषक

क्षत-विक्षत हत अचल-शरीर

पूरी तरह घायल, पराजित

गगन-स्पर्शी स्पर्द्धा

आकाश छूने वाली होड़, अहंकार

छोटे पौधे, लघुभार

साधारण, शोषित, हल्के लोग

क्षुद्र प्रफुल्ल जलज

छोटा पर प्रसन्न कमल

सुकुमार शरीर

शिशु की कोमलता

रुद्ध कोष, क्षुब्ध तोष

धनियों का रुका खज़ाना, अशांत संतोष

जीर्ण बाहु, शीर्ण शरीर

किसान की दुर्बलता और शोषण

कृषक अधीर

किसान की व्याकुलता

प्रभाव: इन विशेषणों से भाव अधिक तीव्र, सजीव और स्पष्ट हो गए हैं। शोषक और शोषित के बीच का अंतर गहराई से उभरता है; क्रांति की भयंकरता और किसान की दयनीय दशा का मार्मिक चित्र बनता है। कविता में चित्रात्मकता और ओज आ गया है।

दग्ध हृदय, निर्दय विप्लव, सुप्त अंकुर, घोर वज्र-हुंकार, उन्नत वीर, गगन-स्पर्शी स्पर्द्धा, लघुभार पौधे, क्षुद्र प्रफुल्ल जलज, रुद्ध कोष, क्षुब्ध तोष, जीर्ण बाहु, शीर्ण शरीर, अधीर कृषक आदि; इनसे भाव तीव्र और चित्रात्मक हुए हैं, शोषक-शोषित का अंतर स्पष्ट हुआ है और क्रांति की भयंकरता व किसान की दयनीय दशा मार्मिक बनी है।

विषय-सूची की जाँच

  • ☒ दुख की छाया, उन्नत वीर, विप्लव-रव, प्रकृति में परिवर्तन (प्रश्न 1–4)
  • ☒ व्याख्या (प्रश्न 5–6)
  • ☒ मानवीकरण, रूपक, संबोधन, बिंब, विशेषण (प्रश्न 7–11)

Total questions answered: 11 of 11

Frequently Asked Questions

What do these NCERT solutions for Class 12 Hindi Aroh Chapter 6 (बादल राग) cover?

All 11 questions from the latest NCERT textbook for this chapter are answered step by step, organised as अभ्यास – कविता के साथ, अभ्यास – व्याख्या कीजिए and अभ्यास – कला की बात.

Are these solutions based on the new NCERT syllabus?

Yes. The answers follow the current NCERT textbook for Class 12 Hindi Aroh and the latest CBSE syllabus, so the question numbers and wording match the book you use in class.

How should I use these solutions to prepare for exams?

Attempt each question on your own first, then compare your working with the answer here. Note the steps or keywords you missed, and revise the chapter notes before taking a chapter-wise MCQ test to check your understanding.

Are the NCERT solutions for Class 12 Hindi Aroh Chapter 6 (बादल राग) free?

Yes. All Circle of Learning NCERT solutions and chapter notes are free to read online, with no sign-up needed.