Circle of Learning Logo CIRCLE OF LEARNING Excellence in Education
Class 12 Hindi Aroh Chapter 5

NCERT Solutions for Class 12 Hindi Aroh Chapter 5: उषा

Class

Subject

Book

Chapter

Session

Questions covered

XII

Hindi

Aroh (NCERT)

5 – उषा

2026-27

4 of 4

बिंदु

विवरण

कवि

शमशेर बहादुर सिंह (1911–1993), देहरादून; साहित्य अकादेमी और कबीर सम्मान

प्रमुख रचनाएँ

कुछ कविताएँ, कुछ और कविताएँ, चुका भी हूँ नहीं मैं, इतने पास अपने, बात बोलेगी, काल तुझसे होड़ है मेरी

विषय

सूर्योदय से ठीक पहले के आकाश का गतिशील शब्दचित्र

उपमान

नीला शंख, राख से लीपा हुआ गीला चौका, लाल केसर से धुली काली सिल, लाल खड़िया चाक मली स्लेट, नील जल में हिलती गौर झिलमिल देह

अंत

“जादू टूटता है इस उषा का अब / सूर्योदय हो रहा है।”

अभ्यास – कविता के साथ

Q1

कविता के किन उपमानों को देखकर यह कहा जा सकता है कि उषा कविता गाँव की सुबह का गतिशील शब्दचित्र है?

Answer

उत्तर

कवि ने गाँव के दैनिक जीवन से जुड़े उपमानों का प्रयोग किया है—

  1. “राख से लीपा हुआ चौका / (अभी गीला पड़ा है)” — गाँवों में सुबह-सुबह चूल्हे-चौके को राख से लीपा जाता है; भोर का धूसर, नम आकाश वैसा ही लगता है।
  2. “बहुत काली सिल ज़रा से लाल केसर से / कि जैसे धुल गई हो” — गाँव के घरों में मसाला पीसने की काली सिल; अँधेरे आकाश पर हलकी लालिमा।
  3. “स्लेट पर या लाल खड़िया चाक / मल दी हो किसी ने” — गाँव के बच्चों की स्लेट और खड़िया।
  4. “नील जल में… गौर झिलमिल देह / जैसे हिल रही हो” — गाँव के तालाब या नदी में स्नान करती गोरी देह।

ये उपमान गाँव के परिवेश से लिए गए हैं। साथ ही आकाश के रंग पल-पल बदलते हैं— नीला शंख → राख-सा धूसर → काली सिल पर लाली → स्लेट पर लाल खड़िया → नील जल में झिलमिलाती देह → सूर्योदय। यह परिवर्तन चित्र को गतिशील बनाता है।

राख से लीपा गीला चौका, लाल केसर से धुली काली सिल, लाल खड़िया चाक मली स्लेट और नील जल में हिलती गौर देह — ये गाँव के घरेलू जीवन के उपमान हैं; आकाश के पल-पल बदलते रंग इन्हें गतिशील शब्दचित्र बनाते हैं।

Q2

भोर का नभ / राख से लीपा हुआ चौका / (अभी गीला पड़ा है) — नयी कविता में कोष्ठक, विराम चिह्नों और पंक्तियों के बीच का स्थान भी कविता को अर्थ देता है। उपर्युक्त पंक्तियों में कोष्ठक से कविता में क्या विशेष अर्थ पैदा हुआ है? समझाइए।

Answer

उत्तर

कोष्ठक में लिखा “(अभी गीला पड़ा है)” एक अतिरिक्त अर्थ और ताज़गी जोड़ता है—

  1. राख से लीपा चौका जब गीला होता है तो उसका रंग गहरा धूसर-नीला और नम दिखता है; भोर का आकाश भी ओस और नमी से भरा, धुँधला और ताज़ा होता है।
  2. यह बताता है कि चौका अभी-अभी लीपा गया है— अर्थात भोर अभी-अभी हुई है, दिन की शुरुआत ताज़ा है।
  3. गीलापन पवित्रता और स्वच्छता का भी भाव देता है।
  4. कोष्ठक पाठक को रुककर उस सूक्ष्म विवरण पर ध्यान देने को विवश करता है, जिससे बिंब और सजीव हो जाता है।

“(अभी गीला पड़ा है)” से पता चलता है कि भोर अभी-अभी हुई है; आकाश ओस-नमी से भरा, धुँधला-नीला और ताज़ा है, जैसे अभी-अभी लीपा गया गीला चौका। कोष्ठक इस सूक्ष्म विवरण पर ध्यान दिलाकर बिंब को सजीव बनाता है।

अभ्यास – अपनी रचना

Q3

अपने परिवेश के उपमानों का प्रयोग करते हुए सूर्योदय और सूर्यास्त का शब्दचित्र खींचिए।

Answer

उत्तर

सूर्योदय (शहर का परिवेश): भोर का आकाश जैसे स्कूल की धुली हुई नीली यूनिफ़ॉर्म। धीरे-धीरे पूरब में हलकी गुलाबी आभा फैलती है, मानो किसी ने सफ़ेद दूध में ज़रा-सी रूह-अफ़ज़ा घोल दी हो। ऊँची इमारतों की खिड़कियाँ सुनहरी होकर चमकने लगती हैं, जैसे किसी ने एक-एक बत्ती जला दी हो। दूधवाले की साइकिल की घंटी, मंदिर की आरती और चिड़ियों की चहचहाहट के बीच लाल गेंद-सा सूरज छतों पर टँकी पानी की टंकियों के पीछे से झाँकता है— और शहर जाग उठता है।

सूर्यास्त: शाम को सूरज थके हुए मज़दूर की तरह धीरे-धीरे पश्चिम की ओर उतरता है। आकाश जलेबी के शीरे-सा नारंगी हो जाता है। बादलों के किनारे सुनहरी गोटे से सजे लगते हैं। बिजली के तारों पर बैठे पक्षी काली मोतियों की माला-से दिखते हैं। धीरे-धीरे नारंगी रंग बैंगनी, फिर स्लेटी होता है, और सड़क की बत्तियाँ एक-एक कर जल उठती हैं— मानो रात ने अपने दीये सजा दिए हों।

अपने परिवेश (घर, स्कूल, शहर/गाँव) से उपमान लेकर — जैसे धुली नीली यूनिफ़ॉर्म-सा आकाश, दूध में घुली गुलाबी आभा, लाल गेंद-सा सूरज; शाम को शीरे-सा नारंगी आकाश, तारों पर मोतियों-से पक्षी — सूर्योदय और सूर्यास्त का गतिशील शब्दचित्र।

अभ्यास – आपसदारी

Q4

सूर्योदय का वर्णन लगभग सभी बड़े कवियों ने किया है। प्रसाद की कविता ‘बीती विभावरी जाग री’ और अज्ञेय की ‘बावरा अहेरी’ की पंक्तियाँ दी जा रही हैं। ‘उषा’ कविता के समानांतर इन कविताओं को पढ़ते हुए उपमान, शब्दचयन, परिवेश बिंदुओं पर तीनों कविताओं का विश्लेषण कीजिए और यह भी बताइए कि कौन-सी कविता आपको ज़्यादा अच्छी लगी और क्यों?

Answer

उत्तर

बिंदु

उषा (शमशेर)

बीती विभावरी जाग री (प्रसाद)

बावरा अहेरी (अज्ञेय)

उपमान

नीला शंख, राख से लीपा गीला चौका, केसर से धुली काली सिल, लाल खड़िया मली स्लेट, नील जल में गौर देह

अंबर-पनघट, तारा-घट डुबोती ऊषा-नागरी, खग-कुल का कुल-कुल, किसलय का अंचल, लतिका की मधु-गागरी

भोर का ‘बावरा अहेरी’ (शिकारी) जो आलोक की लाल कनियाँ बिछाकर सबको जाल में बाँध लेता है

शब्दचयन

सरल, बोलचाल के देशज-तद्भव शब्द

तत्सम-प्रधान, कोमल, संगीतात्मक (विभावरी, अंबर, किसलय, मलयज)

तत्सम-तद्भव-अंग्रेज़ी मिश्रित (उड़ने जहाज़, तारघर, मोटरों के धुएँ, चिमनियाँ)

परिवेश

ग्रामीण, घरेलू

प्राकृतिक, सौंदर्यपूर्ण (पनघट, पक्षी, लताएँ); सखी को जगाने का श्रृंगारिक प्रसंग

आधुनिक, शहरी-औद्योगिक (मंदिर-शिखर, तारघर, मोटर, चिमनियाँ)

मुझे अधिक अच्छी लगी: ‘उषा’, क्योंकि इसके उपमान हमारे दैनिक जीवन से जुड़े, सरल और ताज़े हैं; आकाश के बदलते रंगों का गतिशील चित्र आँखों के सामने साकार हो जाता है, और छोटी-सी कविता में सूर्योदय के जादू की पूरी अनुभूति हो जाती है।

(विद्यार्थी अपनी रुचि के अनुसार प्रसाद की संगीतात्मकता या अज्ञेय की आधुनिक दृष्टि को भी चुन सकते हैं।)

‘उषा’ में ग्रामीण-घरेलू उपमान और सरल शब्द; ‘बीती विभावरी’ में प्रकृति-सौंदर्य के कोमल, तत्सम-प्रधान, संगीतात्मक उपमान (ऊषा-नागरी, तारा-घट); ‘बावरा अहेरी’ में आधुनिक शहरी परिवेश और मिश्रित शब्दावली (सूर्य = शिकारी)। मुझे ‘उषा’ सबसे अच्छी लगी क्योंकि उसके उपमान दैनिक जीवन से जुड़े, सरल और गतिशील हैं।

विषय-सूची की जाँच

  • ☒ गाँव की सुबह का गतिशील शब्दचित्र (प्रश्न 1)
  • ☒ कोष्ठक का अर्थ (प्रश्न 2)
  • ☒ सूर्योदय-सूर्यास्त का शब्दचित्र (प्रश्न 3)
  • ☒ तीन कविताओं की तुलना (प्रश्न 4)

Total questions answered: 4 of 4

Frequently Asked Questions

What do these NCERT solutions for Class 12 Hindi Aroh Chapter 5 (उषा) cover?

All 4 questions from the latest NCERT textbook for this chapter are answered step by step, organised as अभ्यास – कविता के साथ, अभ्यास – अपनी रचना and अभ्यास – आपसदारी.

Are these solutions based on the new NCERT syllabus?

Yes. The answers follow the current NCERT textbook for Class 12 Hindi Aroh and the latest CBSE syllabus, so the question numbers and wording match the book you use in class.

How should I use these solutions to prepare for exams?

Attempt each question on your own first, then compare your working with the answer here. Note the steps or keywords you missed, and revise the chapter notes before taking a chapter-wise MCQ test to check your understanding.

Are the NCERT solutions for Class 12 Hindi Aroh Chapter 5 (उषा) free?

Yes. All Circle of Learning NCERT solutions and chapter notes are free to read online, with no sign-up needed.