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Class 12 Hindi Antra Chapter 9

NCERT Solutions for Class 12 Hindi Antra Chapter 9: कवित्त (घनानंद)

Class

Subject

Book

Chapter

Session

Questions covered

XII

Hindi

Antra (NCERT)

9 – कवित्त (घनानंद)

2026-27

9 of 9

बिंदु

विवरण

कवि

घनानंद (1673–1760), रीतिकाल की रीतिमुक्त (स्वच्छंद) काव्यधारा के प्रतिनिधि कवि; मुहम्मद शाह के मीर मुंशी; दरबार की नर्तकी ‘सुजान’ से प्रेम

रचनाएँ

सुजानसागर, विरहलीला, कृपाकंद, रसकेलि वल्ली

कवित्त (1)

प्रिय (सुजान) के आने की आशा में लंबी प्रतीक्षा; झूठे वादों से निराश प्राण होठों तक आ गए हैं, सुजान का संदेश लेकर ही जाना चाहते हैं

कवित्त (2)

प्रिय की उपेक्षा (आनाकानी) से व्यथित कवि चुनौती देता है — कब तक कानों में रुई डाले रहोगे? कभी तो मेरी पुकार तुम्हारे कान खोलेगी

भाषा

परिष्कृत, लाक्षणिक ब्रजभाषा; ‘घन आनंद’ में श्लेष; कवित्त छंद

Q1

कवि ने ‘चाहत चलन ये संदेसो ले सुजान को’ क्यों कहा है?

Answer

उत्तर

कवि (घनानंद) बहुत दिनों से अपनी प्रिया सुजान के आने की प्रतीक्षा कर रहा है। सुजान के आने की अवधि (दिन) पास आ गई है, पर वह नहीं आई। उसके झूठे वादों से कवि निराश और उदास है; आनंद के बादल (घन आनंद) भी अब नहीं घिरते। विरह-वेदना इतनी बढ़ गई है कि उसके प्राण होठों तक आ गए हैं और शरीर छोड़कर जाना चाहते हैं।

फिर भी प्राण अभी इसलिए रुके हुए हैं कि वे सुजान का संदेश लेकर ही जाना चाहते हैं— अर्थात मरने से पहले एक बार प्रिया का संदेश (या दर्शन) पाने की अंतिम आशा है। इससे कवि के प्रेम की गहनता, प्रतीक्षा की पीड़ा और अंतिम क्षण तक बनी आशा प्रकट होती है।

लंबी प्रतीक्षा और सुजान के झूठे वादों से निराश कवि के प्राण विरह में होठों तक आ गए हैं, पर वे अभी इसलिए रुके हैं कि मरने से पहले एक बार सुजान का संदेश पाना चाहते हैं — यह प्रेम की गहनता और अंतिम क्षण तक बनी आशा का भाव है।

Q2

कवि मौन होकर प्रेमिका के कौन से प्रण पालन को देखना चाहता है?

Answer

उत्तर

कवि कहता है— “मौन हू सौं देखिहौं कितेक पन पालिहौ जू, / कूकभरी मूकता बुलाय आप बोलिहै।”

प्रेमिका (सुजान) ने मानो कवि से न बोलने, उसकी उपेक्षा करने (आनाकानी करने) का प्रण ले रखा है। कवि कहता है कि मैं भी मौन रहकर देखूँगा कि तुम अपने इस प्रण (न बोलने, उपेक्षा करने की ज़िद) का कब तक पालन करती हो। मेरी कूक (पुकार) भरी चुप्पी (मौन वेदना) ही तुम्हें बोलने के लिए विवश कर देगी। अर्थात कवि को विश्वास है कि उसकी मौन पीड़ा अंततः प्रिया को पिघला देगी।

प्रेमिका ने कवि से न बोलने और उसकी उपेक्षा करने (आनाकानी) का प्रण ले रखा है; कवि भी मौन रहकर देखना चाहता है कि वह इस प्रण को कब तक निभाती है — उसे विश्वास है कि उसकी पुकार-भरी मौन वेदना अंततः प्रिया को बोलने पर विवश कर देगी।

Q3

कवि ने किस प्रकार की पुकार से ‘कान खोलि है’ की बात कही है?

Answer

उत्तर

कवि कहता है— “रुई दिए रहौगे कहाँ लौ बहरायबे की? / कबहूँ तौ मेरियै पुकार कान खोलिहै।”

कवि की विरह-वेदना से भरी, हृदय की गहराई से निकली, निरंतर और मार्मिक पुकार से प्रिया के कान खुल जाएँगे। प्रिया जानबूझकर बहरी बनी है, मानो कानों में रुई डाल रखी हो, ताकि कवि की पुकार न सुने। कवि चुनौती देता है कि कब तक बहरे बने रहोगे? मेरी सच्चे प्रेम से भरी, कूक-भरी (कोयल-सी व्याकुल) पुकार कभी न कभी तो तुम्हारे कानों तक पहुँचकर उन्हें खोल ही देगी— तुम्हें सुनना ही पड़ेगा। इसमें कवि का प्रेम पर अटूट विश्वास और प्रिया को उलाहना है।

विरह-वेदना से भरी, हृदय की गहराई से निकली, निरंतर और मार्मिक (कूक-भरी) पुकार से — प्रिया जानबूझकर कानों में रुई डालकर बहरी बनी है, पर कवि को विश्वास है कि उसकी सच्चे प्रेम की पुकार कभी न कभी उसके कान खोल ही देगी।

Q4

घनानंद की रचनाओं की भाषिक विशेषताओं को अपने शब्दों में लिखिए।

Answer

उत्तर

  1. परिष्कृत ब्रजभाषा: घनानंद ब्रजभाषा के मर्मज्ञ कवि थे; उनकी भाषा शुद्ध, साहित्यिक, प्रवाहपूर्ण और व्याकरण-सम्मत है।
  2. लाक्षणिकता: लक्षणा और व्यंजना शक्ति का सुंदर प्रयोग— “कूकभरी मूकता”, “रुई दिए रहौगे… बहरायबे की”।
  3. विरोधाभास: “कूकभरी मूकता” (पुकार-भरी चुप्पी)।
  4. श्लेष: ‘घन आनंद’/‘घनआनंद’— कवि का नाम और ‘आनंद के बादल’, दोनों अर्थ।
  5. अनुप्रास और पुनरुक्ति: “कहि कहि”, “गहि गहि”, “दै दै”; “आवन छबीले मनभावन”।
  6. मुहावरों का प्रयोग: “प्राण अधर पर आना”, “कान खोलना”, “कानों में रुई डालना”, “पैज परना”।
  7. भावानुकूलता और मार्मिकता: प्रेम और विरह की अनुभूतियों को अत्यंत सजीव और मार्मिक ढंग से व्यक्त करना।
  8. उपालंभ और प्रश्न शैली: “आनाकानी आरसी निहारिबो करौगे कौलौं?”
  9. कवित्त छंद में लय और संगीतात्मकता।

घनानंद की भाषा परिष्कृत, प्रवाहपूर्ण ब्रजभाषा है; उसमें लाक्षणिकता और व्यंजना (“कूकभरी मूकता”), विरोधाभास, श्लेष (‘घन आनंद’), अनुप्रास-पुनरुक्ति (“कहि कहि”, “गहि गहि”), मुहावरे (“प्राण अधर पर आना”, “कान खोलना”), उपालंभ-प्रश्न शैली, भावानुकूल मार्मिकता और कवित्त छंद की संगीतात्मकता है।

Q5

निम्नलिखित पंक्तियों में प्रयुक्त अलंकारों की पहचान कीजिए। (क) कहि कहि आवन छबीले मनभावन को, गहि गहि राखति ही दैं दैं सनमान को। (ख) कूक भरी मूकता बुलाय आप बोलि है। (ग) अब न घिरत घन आनंद निदान को।

Answer

उत्तर

पंक्ति

अलंकार

(क) कहि कहि आवन छबीले मनभावन को, गहि गहि राखति ही दैं दैं सनमान को

पुनरुक्ति प्रकाश (‘कहि कहि’, ‘गहि गहि’, ‘दैं दैं’) और अनुप्रास

(ख) कूक भरी मूकता बुलाय आप बोलि है

विरोधाभास (‘कूक’ और ‘मूकता’ एक साथ), अनुप्रास (‘ब’ की आवृत्ति — बुलाय, बोलि), मानवीकरण (मूकता का बोलना)

(ग) अब न घिरत घन आनंद निदान को

श्लेष (‘घन आनंद’ — आनंद के बादल और कवि का नाम घनानंद), अनुप्रास (‘घ’ की आवृत्ति), रूपक (आनंद रूपी घन)

(क) पुनरुक्ति प्रकाश (‘कहि कहि’, ‘गहि गहि’, ‘दैं दैं’) और अनुप्रास; (ख) विरोधाभास (‘कूक भरी मूकता’), अनुप्रास, मानवीकरण; (ग) श्लेष (‘घन आनंद’ — आनंद के बादल/कवि का नाम), अनुप्रास, रूपक।

Q6

निम्नलिखित का आशय स्पष्ट कीजिए- (क) बहुत दिनान को अवधि आसपास परे / खरे अरबरनि भरे हैं उठि जान को (ख) मौन हू सौं देखिहौं कितेक पन पालिहौ जू / कूकभरी मूकता बुलाय आप बोलिहै।

Answer

उत्तर

(क) कवि कहता है कि प्रिया (सुजान) के आने की बहुत दिनों की अवधि अब पास आ गई है (प्रतीक्षा की अवधि पूरी होने को है), पर वह नहीं आई। इसलिए मेरे प्राण अत्यंत व्याकुलता (अरबरनि) से भरे हुए शरीर से उठकर (निकलकर) जाने को तैयार हैं। आशय— लंबी प्रतीक्षा से विरही की व्याकुलता चरम पर है; वह मरणासन्न है।

(ख) कवि प्रिया से कहता है— मैं भी मौन रहकर देखूँगा कि तुम (उपेक्षा करने, न बोलने का) अपना प्रण कितना निभाती हो। मेरी पुकार-भरी चुप्पी (मौन वेदना) ही तुम्हें बुलाकर बोलने पर विवश कर देगी। आशय— कवि को अपने प्रेम की शक्ति पर विश्वास है; उसकी मौन पीड़ा प्रिया की उपेक्षा को तोड़ देगी।

(क) प्रिया के आने की बहुत दिनों की अवधि पास आ गई पर वह नहीं आई, इसलिए कवि के प्राण अत्यंत व्याकुल होकर शरीर छोड़कर जाने को तैयार हैं — विरह की चरम व्याकुलता। (ख) कवि मौन रहकर देखेगा कि प्रिया उपेक्षा का प्रण कब तक निभाती है; उसकी पुकार-भरी चुप्पी ही प्रिया को बोलने पर विवश कर देगी — प्रेम की शक्ति पर विश्वास।

Q7

संदर्भ सहित व्याख्या कीजिए- (क) झूठी बतियानि की पत्यानि तें उदास है, कै …… चाहत चलन ये संदेसो लै सुजान को। (ख) जान घनआनंद यों मोहिं तुम्है पैज परी …… कबहूँ तौ मेरियै पुकार कान खोलि है।

Answer

उत्तर

(क) संदर्भ: प्रस्तुत पंक्तियाँ रीतिमुक्त कवि घनानंद के कवित्त (1) से ली गई हैं। इसमें कवि ने प्रिया सुजान के वियोग में अपनी मरणासन्न दशा का वर्णन किया है।

व्याख्या: “झूठी बतियानि की पत्यानि तें उदास ह्वै कै, / अब ना घिरत घन आनंद निदान को। / अधर लगे हैं आनि करि कै पयान प्रान, / चाहत चलन ये सँदेसो लै सुजान को॥”— कवि कहता है कि प्रिया की झूठी बातों (आने के वादों) पर विश्वास करते-करते मेरा मन उदास हो गया है; अब अंततः आनंद के बादल नहीं घिरते (प्रसन्नता का कोई अवसर नहीं रहा)। मेरे प्राण प्रस्थान करने के लिए होठों पर आ गए हैं, पर वे सुजान का संदेश लेकर ही जाना चाहते हैं।

विशेष: (1) ‘घन आनंद’ में श्लेष; (2) ‘प्राण अधर पर आना’ मुहावरा; (3) विप्रलंभ श्रृंगार; (4) ब्रजभाषा, कवित्त छंद; (5) अनुप्रास— ‘पयान प्रान’।

(ख) संदर्भ: घनानंद के कवित्त (2) से; कवि प्रिया की उपेक्षा पर उलाहना देता है।

व्याख्या: “जान घनआनंद यों मोहिं तुम्हैं पैज परी, / जानियैगो टेक टरें कौन धौ मलोलिहै॥ / रुई दिए रहौगे कहाँ लौ बहरायबे की? / कबहूँ तौ मेरियै पुकार कान खोलिहै।”— घनानंद कहते हैं कि हे सुजान! हम दोनों के बीच मानो होड़ (पैज) लग गई है— देखें किसकी टेक (ज़िद) टलती है और कौन पछताता है (मलोलना)। तुम कब तक कानों में रुई डालकर बहरी बनी रहोगी? कभी तो मेरी पुकार तुम्हारे कान खोल ही देगी।

विशेष: (1) ‘घनआनंद’ में श्लेष; (2) मुहावरे— ‘पैज परना’, ‘टेक टरना’, ‘कानों में रुई देना’, ‘कान खोलना’; (3) उपालंभ और चुनौती का भाव; (4) प्रश्न शैली; (5) ब्रजभाषा, कवित्त।

(क) संदर्भ: घनानंद का कवित्त (1), सुजान-वियोग में मरणासन्न दशा। व्याख्या: झूठे वादों पर विश्वास करते-करते मन उदास हो गया, आनंद के बादल अब नहीं घिरते; प्राण जाने के लिए होठों पर आ गए हैं, पर सुजान का संदेश लेकर ही जाना चाहते हैं। (श्लेष, मुहावरा, विप्रलंभ, ब्रज, कवित्त) (ख) संदर्भ: कवित्त (2), उपेक्षा पर उलाहना। व्याख्या: हम दोनों में होड़ लगी है, देखें किसकी ज़िद टलती है और कौन पछताता है; कब तक कानों में रुई डाले बहरी बनी रहोगी, कभी तो मेरी पुकार तुम्हारे कान खोलेगी। (श्लेष, मुहावरे, उपालंभ, प्रश्न शैली)

अभ्यास – योग्यता-विस्तार

Q8

निम्नलिखित कवियों के तीन-तीन कवित्त एकत्रित कर याद कीजिए— तुलसीदास, रसखान, पद्माकर, सेनापति

Answer

उत्तर

(संकलन-गतिविधि; प्रत्येक कवि का एक-एक उदाहरण)

  1. तुलसीदास (कवितावली): “किसबी, किसान-कुल, बनिक, भिखारी, भाट, / चाकर, चपल नट, चोर, चार, चेटकी।… आगि बड़वागितें बड़ी है आगि पेटकी॥” (आरोह में पठित); अन्य— “खेती न किसान को, भिखारी को न भीख…”।
  2. रसखान: “मानुष हौं तो वही रसखानि बसौं ब्रज गोकुल गाँव के ग्वारन…” (सवैया); कवित्त— “गावैं गुनी गनिका गंधरब्ब औ सारद सेस सबै गुन गावत…”।
  3. पद्माकर: “कूलन में केलि में कछारन में कुंजन में / क्यारिन में कलिन में कलीन किलकंत है।… बीथिन में ब्रज में नवेलिन में बेलिन में / बनन में बागन में बगरो बसंत है॥”
  4. सेनापति: “बरन बरन तरु फूले उपवन वन, / सोई चतुरंग संग दल लहियत है।…” (वसंत); “वृष को तरनि तेज सहसौ किरन करि / ज्वालन के जाल बिकराल बरसत है…” (ग्रीष्म)।

विद्यार्थी पुस्तकालय/कविता कोश से प्रत्येक कवि के तीन-तीन कवित्त एकत्र कर कंठस्थ करें और कक्षा में सुनाएँ।

संकलन-गतिविधि: तुलसीदास (कवितावली — “किसबी, किसान-कुल…”, “खेती न किसान को…”), रसखान, पद्माकर (“कूलन में केलि में… बगरो बसंत है”), सेनापति (वसंत-ग्रीष्म वर्णन, “वृष को तरनि तेज…”) के तीन-तीन कवित्त एकत्र कर याद करें और कक्षा में सुनाएँ।

Q9

पठित अंश में से अनुप्रास अलंकार की पहचान कर एक सूची तैयार कीजिए।

Answer

उत्तर

पंक्ति / अंश

आवृत्त वर्ण

“बहुत दिनान को अवधि आसपास परे”

‘आ’, ‘स’

“खरे अरबरनि भरे हैं”

‘र’

“कहि कहि आवन छबीले मनभावन को”

‘क’, ‘न’

“गहि गहि राखति ही दै दै सनमान को”

‘ग’, ‘ह’, ‘द’

“अब ना घिरत घन आनंद निदान को”

‘घ’, ‘न’

“करि कै पयान प्रान”

‘क’, ‘प’

“चाहत चलन ये सँदेसो लै सुजान को”

‘च’, ‘स’

“आनाकानी आरसी निहारिबो करौगे कौलौं”

‘आ’, ‘क’

“कहा मो चकित दसा त्यों न दीठि डोलिहै”

‘द’, ‘ड’

“कूकभरी मूकता बुलाय आप बोलिहै”

‘क’, ‘ब’

“टेक टरें”

‘ट’

“कबहूँ तौ मेरियै पुकार कान खोलिहै”

‘क’

अनुप्रास: “अवधि आसपास परे”, “खरे अरबरनि भरे”, “कहि कहि आवन छबीले मनभावन”, “गहि गहि… दै दै सनमान”, “घिरत घन आनंद निदान”, “पयान प्रान”, “चाहत चलन… सँदेसो… सुजान”, “आनाकानी आरसी… करौगे कौलौं”, “दसा… दीठि डोलिहै”, “कूकभरी मूकता बुलाय आप बोलिहै”, “टेक टरें”, “पुकार कान खोलिहै”।

विषय-सूची की जाँच

  • ☒ सुजान का संदेश, मौन प्रण, पुकार (प्रश्न 1–3)
  • ☒ भाषिक विशेषताएँ, अलंकार (प्रश्न 4–5)
  • ☒ आशय, व्याख्या (प्रश्न 6–7)
  • ☒ योग्यता-विस्तार (प्रश्न 8–9)

Total questions answered: 9 of 9

Frequently Asked Questions

What do these NCERT solutions for Class 12 Hindi Antra Chapter 9 (कवित्त (घनानंद)) cover?

All 9 questions from the latest NCERT textbook for this chapter are answered step by step, organised as अभ्यास – योग्यता-विस्तार.

Are these solutions based on the new NCERT syllabus?

Yes. The answers follow the current NCERT textbook for Class 12 Hindi Antra and the latest CBSE syllabus, so the question numbers and wording match the book you use in class.

How should I use these solutions to prepare for exams?

Attempt each question on your own first, then compare your working with the answer here. Note the steps or keywords you missed, and revise the chapter notes before taking a chapter-wise MCQ test to check your understanding.

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Yes. All Circle of Learning NCERT solutions and chapter notes are free to read online, with no sign-up needed.